टाइट चूत मारने का एक्स्ट्रा मजा


Antarvasna, hindi sex kahani: मेरी नौकरी लग जाने के बाद घर में सब लोग बहुत ज्यादा खुश थे क्योंकि सब लोगों को मुझसे बहुत उम्मीद है इसलिए मैं अब अपनी जॉब पर पूरी तरीके से ध्यान देना रहा था। जिस तरीके से मेरी जॉब चल रही है उससे मैं कहीं ना कहीं बहुत खुश हूं। 6 महीने के भीतर ही मेरा प्रमोशन हो गया इस बात से पापा और मम्मी बड़े ही खुश हैं कि मेरा प्रमोशन जल्द ही हो गया। हम लोग जिस कॉलोनी में रहते हैं उसमें  हमारे सामने वाले घर में गुप्ता जी रहते हैं गुप्ता जी का परिवार एक साल पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए आया था। जब वह हमारे पड़ोस में रहने के लिए आए तो कहीं ना कहीं उन लोगों से हमारा काफी अच्छे संबंध बनने लगे। वह लोग अक्सर हमारे घर पर आ जाया करते हैं हम लोगों का भी उनके घर पर आना जाना लगा रहता है। एक दिन मैंने देखा कि गुप्ता जी के घर पर एक लड़की थी जो की छत पर टहल रही थी।

उस वक्त मैं भी छत पर ही था तो मैं भी उसे देखे जा रहा था और वह भी मेरी तरफ देख रही थी लेकिन उससे पहले मैंने उसे कभी देखा नहीं था। अब मैं उस लड़की से बात करने लगा था उसका नाम कविता है। कविता से बात करके मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब भी मेरी उससे बात होती तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगता है। हम दोनों एक दूसरे से मिलने भी लगे थे। कविता अपनी पढ़ाई के सिलसिले में गुप्ता जी के घर पर रहती है और वह उनकी दूर की रिश्तेदार है लेकिन मेरी कविता से बहुत अच्छी बातचीत होने लगी थी। हम लोग एक दूसरे से जब भी बातें करते तो हम लोगों को अच्छा लगता। मैं और कविता एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं। मुझे नहीं मालूम था कि हम दोनों के बीच प्यार भी होने लगेगा और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे।

कविता को कॉलेज छोड़ने के लिए मैं ही कई बार चले जाया करता था। जब मैं कविता को कॉलेज छोड़ने जाता तो कविता को बहुत अच्छा लगता मैं और कविता एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। जिस तरीके से कविता और मेरे बीच प्रेम संबंध चल रहा है उससे हम दोनों की जिंदगी बड़े ही अच्छे से चल रही है। मैं कविता को बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और कविता भी मुझे बहुत ज्यादा प्यार करती है। एक दिन कविता ने मुझे कहा कि वह कुछ दिनों के लिए अपने घर जा रही है मैंने कविता से कहा कि लेकिन तुम वहां से वापस कब लौटोगी। कविता ने मुझे बताया कि वह वहां से एक हफ्ते बाद लौट आएगी। कविता कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ चली गई थी कविता जब चंडीगढ़ गई तो उसके बाद  मेरी कविता से करीब एक हफ्ते तक फोन पर भी बात नहीं हो पाई लेकिन जब कविता से मेरी बात हुई तो कविता ने मुझे बताया कि वह दिल्ली आ रही है। मैंने कविता से कहा कि ठीक है मैं तुम्हे लेने के लिए कल रेलवे स्टेशन पर आ जाऊंगा और अगले दिन मैं कविता को लेने के लिए रेलवे स्टेशन पर चला गया।

उस दिन मेरी छुट्टी थी और हम दोनों ने उस दिन साथ में समय बिताया फिर हम लोग घर लौट आए। जब हम लोग घर लौटे तो मैं और कविता एक दूसरे के साथ फोन पर बातें करने लगे। जब हम लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो हम लोगों की फोन पर काफी देर तक बातें हुई। अगले दिन मैं कविता को मिला जब मैं कविता को मिला तो कविता की तबीयत ठीक नहीं थी वह मुझे कहने लगी कि आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मैंने कविता को कहा कि चलो मैं तुम्हें डॉक्टर के पास ले चलता हूं और मैं कविता को डॉक्टर के पास लेकर गया तो डॉक्टर ने कविता को कुछ दवाइयां दी। कविता को बुखार था और कविता से मैं दो तीन दिन तक नहीं मिल पाया था। जब कविता का बुखार ठीक हो गया तो तब मैं उससे मिला और हम दोनों उस दिन साथ में ही थे। मेरे ऑफिस की भी छुट्टी थी और कविता भी उस दिन घर पर ही थी इसलिए हम एक दूसरे से मिले और हमने साथ में समय बिताया तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगा।

हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैं और कविता एक दूसरे से जिस तरीके से बातें कर रहे थे उससे हम दोनों को अच्छा लग रहा था और कविता को भी बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मुझसे बातें कर रही थी। मैं और कविता उस दिन घर लौट आए थे जब हम लोग घर लौटे तो उस दिन हमे गुप्ता जी ने देख लिया और गुप्ता जी ने यह बात पापा को बता दी तो मैंने भी पापा से कहा कि हां मैं कविता से प्यार करता हूं। कविता और मैं एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। गुप्ता जी ने कविता का मुझसे मिलना बंद करवा दिया था और इस वजह से वह लोग हमारे घर पर भी नहीं आते थे लेकिन कविता और मैं एक दूसरे से चोरी छुपे मिल लिया करते थे और एक दूसरे से हम लोग फोन पर भी बातें करते। जब भी हमारी फोन पर बातें होती तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। मुझे कुछ दिनों के लिए अपने काम के सिलसिले में बेंगलुरु जाना था और मैं कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु चला गया।

इस बीच मेरी सिर्फ कविता से फोन पर ही बात हो रही थी और जब मेरी उससे फोन पर बातें होती तो मुझे बहुत अच्छा लगता और उसे भी बड़ा अच्छा लगता है। मैं थोड़े दिन में बेंगलुरु से वापस लौट आया था। जब मैं बेंगलुरु से वापस लौटा तो कविता मैं और कविता एक दूसरे को मिले और बाते करने लगे। जब हम लोग बातें कर रहे थे तो उस दिन कविता ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें बहुत ज्यादा मिस कर रही थी। मैंने कविता को कहा कि मैं भी तुम्हें बहुत ज्यादा मिस कर रहा था। मैंने और कविता ने उस दिन साथ में बहुत ही अच्छा समय बिताया। कविता के साथ मैं बहुत खुश रहता हूं और वह भी मेरे साथ बहुत ज्यादा खुश रहती है। जब भी हम दोनों एक दूसरे से मिलते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। मेरे और कविता के बीच दिन-ब-दिन प्यार बढ़ता ही जा रहा था और अब हम दोनों ही एक दूसरे से फोन पर भी गर्म बातें करने लगे थे। हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया करते। जब भी हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता।

मुझे इस बात की बड़ी खुशी है जिस तरीके से मैं और कविता एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा दिया करते हैं। अब हम दोनों सेक्स करने के लिए तड़पने लगे थे। मैंने उसे घर पर बुलाया जब वह घर पर आई तो घर पर कोई भी नहीं था। मैंने कविता को घर पर बुला लिया था और हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए बेताब थे। मेरी गर्मी बढ़ रही थी। मैंने कविता को अपनी बाहों में ले लिया और मैं उसके होठों को चूमने लगा था। मैं उसके होठों की गर्मी को बढ़ाकर बहुत ही ज्यादा खुश था और जिस तरीके से मैं और कविता एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे उससे मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता और कविता को भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। अब मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया था और कविता ने उसे देखते ही अपने मुंह में समा लिया था। कविता जिस तरीके से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी उस से मुझे मजा आने लगा था। मुझे बहुत ज्यादा मन हो रहा था अब हम दोनों बिल्कुल भी नहीं पा रहे थे। मैंने कविता के कपड़ों को खोलते हुए उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो मुझे मज़ा आ रहा था और उसकी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी।

कविता की गर्मी बढ रही थी मैं उसकी गर्मी को बढा चुका था। मैंने कविता से कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा हूं। वह मुझे कहने लगी मुझसे रहा नहीं जा रहा है। उसकी गुलाबी चूत से पानी बाहर निकल रहा था वह गर्म हो रही थी। मैंने कविता की चूत को पूरी तरीके से गिला कर दिया था। जब मैंने उसकी योनि के अंदर लंड को घुसाना शुरू किया तो उसकी चूत के अंदर मेरा लंड चला गया था। उसकी चूत में मेरा लंड जाते ही वह जोर से चिल्लाने लगी और मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था जिस तरीके से हम दोनों सेक्स के मज़े ले रहे थे। हम दोनों की गर्मी बढने लगी थी। मैं बहुत ज्यादा गर्म हो चुका था और कविता भी बहुत ज्यादा गर्म होती जा रही थी। कविता भी मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मुझे धक्के देते जाओ। मैंने कविता को बहुत देर तक ऐसे ही धक्के दिए। वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड रही थी। मैं समझ चुका था कविता को भी मज़ा आने लगा है। जब उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड तेजी से हो रहा था तो मुझे मज़ा आ रहा था और मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था।

जब मैं उसे चोद रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आता। कविता की चूत से खून बाहर की तरफ को निकलने लगा था। जब मैंने देखा कविता की चूत से खून बहार निकल रहा है तो मुझे उसकी टाइट चूत मारने में और भी ज्यादा मजा आने लगा था। मैं उसकी चूत के मजे अच्छे से लिए जा रहा था जब मैं उसे चोद रहा था तो वह मेरी गर्मी को बढा रही थी। वह गर्म होती जा रही थी वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुम इस कदर ना बढ़ाओ। मैं जिस तरीके से उसे धक्के दे रहा था वह बहुत ज्यादा खुश हो चुकी थी। जैसे ही मेरा वीर्य कविता की चूत में गिरा तो मैं खुश हो गया था और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। कविता की चूत मारना मेरे लिए एक सुखद अहसास था और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी जब मैंने उसकी चूत के मजे लिए थे और उसकी गर्मी को मैंने शांत कर दिया था।