ठंड मे चूत चुदाई


Antarvasna, kamukta: मैं अपने काम पर जा रहा था उस दिन मैंने देखा कि मेरी बहन किसी लड़के के साथ बात कर रही है मेरी बहन का नाम सुचित्रा है। वह किसी लड़के के साथ बात कर रही थी लेकिन वह आपस में इतना हंस कर बात कर रहे थे कि मुझे उन पर शक होने लगा। जब सुचित्रा शाम के वक्त घर आई और मैं भी काम से लौटा तो मैंने उस दिन सुचित्रा से पूछा कि सुचित्रा क्या तुम्हारा किसी लड़के के साथ कोई अफेयर चल रहा है या तुम किसी के साथ रिलेशन में हो। उसने मुझसे कुछ नहीं कहा और वह कहने लगी नहीं भैया ऐसा तो कुछ भी नहीं है। मैंने उसे कहा देखो तुम मुझे सच सच बता दो लेकिन उसने मुझे कुछ नहीं बताया परंतु कुछ दिनों के बाद उसने मुझे इस बारे में बताया कि वह अजय से प्यार करती है और अजय के साथ ही वह अपना जीवन बिताना चाहती है। मैं अजय से मिलना चाहता था सुचित्रा ने एक दिन मुझे अजय से मिलाया अजय एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता है।

मुझे अजय से किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि वह एक पारिवारिक लड़का है और वह बहुत ही नेक और अच्छा लड़का भी था इसलिए मैंने इस बारे में अपने पापा और मम्मी से बात की। जब मैंने उन्हें इस बारे में बताया तो वह लोग पहले तो चौक गये और फिर मुझे कहने लगे कि लेकिन अजीत तुम्हें यह सब कैसे पता चला। मैंने पापा को पूरी बात बताई और उसके बाद पापा और मम्मी भी अजय से मिलना चाहते थे, वह लोग जब अजय से मिले तो उन्हें अजय काफी पसंद आया उन्हें अजय के अंदर कोई भी कमी नजर नहीं आई और उन्होंने तुरंत ही अजय के साथ सुचित्रा का रिश्ता करवाने की बात कही। अजय के परिवार वाली भी इसके लिए मान चुके थे उन्हें भी सुचित्रा बहुत पसंद थी और वह लोग पहले से ही इस बारे में जानते थे। अब सुचित्रा और अजय की शादी का दिन तय हो गया और जल्दी उन दोनों की शादी होने वाली थी। मैंने शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होने दी हमने अपने सारे रिश्तेदारों को शादी में बुलाया था और उनके लिए हम लोगों ने बड़े ही अच्छे से रहने का प्रबंध भी किया था। शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी ना रह जाए उसके लिए मैं ही सारी व्यवस्था देख रहा था।

अब शादी हो चुकी थी और सुचित्रा शादी के काफी समय बाद घर आई तो वह काफी खुश थी और अजय भी उस दिन सुचित्रा के साथ घर आया था। वह लोग ज्यादा समय तक तो हमारे साथ नहीं रुके और फिर अगले दिन सुचित्रा और अजय चले गए। पापा और मम्मी मेरे लिए भी अब लड़की देखना शुरू कर चुके थे जब उन्होंने मुझे आकांक्षा से मिलवाया तो मुझे आकांक्षा पहली ही नजर में भा गई। आकांक्षा के बड़े सपने थे और वह चाहती थी कि वह मुंबई में जॉब करे लेकिन उसके पापा ने उसे मना कर दिया था इसी वजह से वह लखनऊ में ही रह रही थी। मुझे आकांक्षा से बात कर के बहुत अच्छा लगा और आकांक्षा का साथ पाकर मुझे ऐसा लगा कि जैसे आकांक्षा मेरे लिए बिल्कुल सही लड़की है और फिर मैंने भी आकांक्षा से शादी करने के लिए राजी हो चुका था। मैं अब आकांक्षा के साथ शादी करना चाहता था और आकांक्षा के परिवार वाले भी हम दोनों के रिश्ते के लिए मान चुके थे जल्द ही हम दोनों की सगाई हो गई। सगाई होने के बाद एक दिन आकांक्षा ने मुझे फोन किया और कहा कि अजीत मैं तुमसे मिलना चाहती हूं तो मैंने आकांक्षा को कहा ठीक है हम लोग आज मिलते हैं और शाम के वक्त हम लोग एक दूसरे को मिले।

जब हम लोग मिले तो उस वक्त हम दोनों मेरी कार में ही बैठे हुए थे आकांक्षा मुझे कहने लगी की अजीत मैं चाहती हूं कि मैं मुंबई में जॉब करूं। मैंने उसे कहा लेकिन तुम मुंबई क्यों जाना चाहती हो यहां किसी भी चीज की तुम्हें कभी कोई कमी नहीं होगी। अब मेरे सामने यह दिक्कत थी कि मैं आकांक्षा को कैसे मनाऊं, उसे मनाने में मुझे समय लगा लेकिन मैं आकांक्षा को माना चुका था और अब वह लखनऊ में ही रहना चाहती थी। मैंने आकांशा को कहा कि शादी हो जाने के बाद मैं तुम्हारे लिए एक बुटीक खोल दूंगा और तुम बुटीक में पूरी मेहनत करना। मैंने उसे यह कहा तो आकांक्षा भी मान चुकी थी और जल्द ही हम दोनों एक दूसरे से शादी करने वाले थे। हम दोनों की शादी का दिन नजदीक आ चुका था और हमारे सारे रिश्तेदार हमारी शादी में आने वाले थे, शादी बड़े ही धूमधाम से हुई शादी हो जाने के बाद आकांक्षा मेरी पत्नी बन चुकी थी। कुछ दिनों तक तो आकांक्षा और मुझे एक दूसरे से बात करने का समय ही नहीं मिल पाया क्योंकि घर पूरे रिश्तेदारो से भरा हुआ था रिश्तेदार अभी तक हमारे घर पर ही थे और आकांक्षा और मैं एक दूसरे से बात कर ही नहीं पा रहे थे।

मैं बहुत ज्यादा खुश था कि आकांक्षा के साथ मेरी शादी हो गई है और आकांक्षा भी बहुत ज्यादा खुश थी। आकांक्षा और मै एक दूसरे के साथ अच्छे से समय बिताना चाहते थे इसलिए मैंने और आकांक्षा ने तय किया कि हम लोग मनाली घूमने के लिए जाएंगे और हम दोनों मनाली चले गए। शादी के बाद हम दोनों पहली बार एक दूसरे के साथ कहीं घूमने गए थे यह हम दोनो के लिए बड़ा ही अच्छा था हम दोनों एक दूसरे के साथ हनीमून मनाने के लिए मनाली आए थे। अभी तक मैंने आकांक्षा के बदन को छुआ भी नहीं था क्योंकि घर में मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाया था और आकांक्षा भी शायद मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन मनाली का मौसम इतना सुहाना था कि आकांक्षा भी अपने आपको रोक नहीं पाई उस दिन काफी ज्यादा बारिश हो रही थी मौसम भी बहुत ही ज्यादा ठंडा हो चुका था। हम दोनों कंबल के अंदर लेटे हुए थे मैंने अपने हाथ को आकांक्षा के स्तनों पर रख दिया और जैसे ही मेरा हाथ उसके बूब्स पर पड़ा तो मुझे मजा आने लगा कुछ देर तक मैं अपने हाथों से उसके स्तनों को सहलात मैंने उसके हाथ को पकड़ते ही पजामी के अंदर घुसाया।

जैसे ही मैंने उसके हाथ को अपने पजामे में घुसाया तो उसके मुंह से एक हल्की से आवाज आई और वह मुझे कहने लगी आपका तो बहुत ही मोटा है। मैंने उसे कहा लेकिन मेरा क्या मोटा है? वह कुछ बोलना नहीं चाहती थी मैंने उसे कहा क्या तुम लंड की बात कर रही हो तो वह शर्माने लगी लेकिन अब वह मेरे पूरी तरीके से काबू में आ चुकी थी और मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया था। मैंने उसके कपड़े उतार दिए और ना जाने कब मैंने उसकी पैंटी और ब्रा उतारी मुझे पता ही नहीं चला क्योंकि मैं इतना ज्यादा गर्म हो चुका था और इतना ज्यादा जोश में आ चुका था कि मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मैंने जब आकांक्षा के स्तनों को चूसना शुरु किया तो उसके स्तन चूसकर मुझे अच्छा लगने लगा उसके निप्पल भी अब खड़े होने लगे थे और मेरा लंड भी पूरी तरीके से तन कर खड़ा हो चुका था। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए थे और उसकी योनि से टकराने लगा था जिस कारण उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा। मैंने आकांक्षा को कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो आकांक्षा ने भी उसे अपने मुंह के अंदर समा लिया और बड़े ही अच्छे से वह मेरे लंड को चूसने लगी जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आने लगा और उसने काफी देर तक मेरे लंड का रसपान किया और अब मेरी गर्मी को वह पूरी तरीके से बढा चुकी थी। मेरी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने उसे कहा शायद मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगी और ऐसा ही हुआ मैंने जब उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो वह कहने लगी तुम मेरी चूत को और भी अच्छे से चाटते रहो मैंने उसकी योनि को काफी देर तक चाटा।

मैंने उसकी चूत को चाटा तो उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकलने लगा था मैंने उससे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना चाहता हूं और मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो मुझे मजा आने लगा और उसकी योनि से खून निकलने लगा था। मैंने उसके पैरों को खोल लिया था जिससे कि मेरा लंड आसानी से उसकी योनि के अंदर बाहर हो सके और वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी उसकी उत्तेजना पूरी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी मैं समझ चुका था कि वह झडने वाली है इसलिए उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया और कहा अजीत मुझे मजा आ रहा है उसकी सिसकारियां बढ़ती ही जा रही थी और उसकी योनि से जो गरम लावा बाहर की तरफ को निकाल रहा था वह कुछ अधिक मात्रा में ही बढ़ने लगा था मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है अब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराकर उसकी गर्मी को शांत कर दिया था लेकिन मेरा उसे दोबारा से चोदने का मन होने लगा था।

कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे के साथ ऐसे ही लेटे रहे लेकिन जब मुझे एहसास होने लगा के मुझे बहुत ही ज्यादा गर्मी महसूस होने लगी है तो मैंने दोबारा से उसकी चूत पर अपने लंड को सटाया और एक ही झटके में उसकी चूत के अंदर लंड को डाला तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है। उसे भी मजा आने लगा था वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और अपने पैरों को खोलने लगी वह अपने पैरों को खोलती तो उसकी चूत के अंदर से आग निकल रही थी वह बहुत ही गरम करने वाली थी और उसकी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। उसने मुझे कहा मैं ज्यादा देर तक तुम्हारा साथ दे नहीं पाऊंगी मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया उसकी चूत से निकलता हुआ खून बढता ही जा रहा था लेकिन उसकी चूत से कुछ अधिक मात्रा में गर्म पानी निकलने लगा था तो मुझे बहुत ही मजा आता। अब मुझे लगने लगा कि मेरा वीर्य गिरने वाला है तो मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर ही गिरा दिया और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मुझे मजा आ गया और वह भी पूरी तरीके से खुश हो गई।


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