स्तनो पर माल गिरा दो


Antarvasna, hindi sex stories: मेरे दोस्त की शादी चंडीगढ़ में थी और मैं उसकी शादी के लिए चंडीगढ़ गया हुआ था मैं पहली बार ही उसके घर पर गया था उसने जब मुझे अपने परिवार से मिलाया तो मुझे उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मेरे दोस्त रजत के परिवार से जो प्यार मुझे मिला उससे मैं बहुत ज्यादा खुश था मैं और रजत एक दूसरे के बहुत करीब हैं और हम दोनों एक दूसरे से हर एक बात शेयर करते हैं। रजत की शादी जिस लड़की से हो रही थी उस लड़की से रजत पहले से ही प्यार करता था। हम दोनों साथ में बेंगलुरु में जॉब करते हैं मैं लखनऊ का रहने वाला हूं रजत जब मुझे पहली बार ऑफिस में मिला तो वह काफी शरमा रहा था। मैं उस ऑफिस में पहले से ही काम करता था लेकिन रजत का वह पहला दिन था सबसे पहले बात उसने मेरे साथ ही की और उसके बाद हम दोनों की अच्छी दोस्ती होने लगी।

हम दोनों बेंगलुरु में एक ही फ्लैट में रहते हैं रजत ने मुझे जब शिखा के बारे में बताया तो मैंने उससे कहा कि क्या तुम उससे शादी करना चाहते हो तो वह मुझे कहने लगा कि हां मैं शिखा से शादी करना चाहता हूं। आखिरकार उसने उससे शादी करने का फैसला कर ही लिया और कुछ ही दिनों बाद वह समय भी आ गया जब उन दोनों की शादी होने वाली थी और वह दोनों शादी के बंधन में बंधने वाले थे। मैं बैंगलुरु से रजत के साथ ही शादी से करीब 10 दिन पहले ही आ चुका था शादी की सारी तैयारियां हो चुकी थी और रिश्तेदार सब आने लगे थे। सब लोग आ चुके थे और जिस दिन शादी होने वाली थी उस दिन सब लोग बड़े खुश थे हम लोग बैंक्विट हॉल में थे उसी बैंक्विट हॉल में मेरे साथ रजत का छोटा भाई सुशील था। सुशील और मैं आपस में एक दूसरे से बात कर रहे थे जब हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे तो उस वक्त सुशील मुझे कहने लगा भैया मैं अभी आता हूं। सुशील उसके बाद मुझे मिला ही नहीं मैं काफी देर तक अकेला बैठा रहा लेकिन तभी मेरी सामने नजर पड़ी तो मैंने देखा कि सुशील किसी लड़की के साथ आ रहा था।

जब सुशील मेरे पास आया तो वह मुझे कहने लगा कि रोहित भैया यह मेरी दोस्त है और मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती है मैंने सुशील को कहा तुम्हारी दोस्त का नाम क्या है तो उसने मुझे उस लड़की का नाम बताया। उसके बाद रजत की शादी भी हो चुकी थी और रजत की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई रजत के परिवार में सब लोग बड़े ही खुश थे और मैं भी बहुत खुश था। अब मैं वापस बेंगलुरु लौटना चाहता था मैंने रजत को कहा कि मैं वापस बैंगलुरु जा रहा हूं तो रजत मुझे कहने लगा कि यदि तुम कुछ और दिन यहां रुक जाते तो मुझे भी अच्छा लगता। मैंने रजत को कहा रजत मुझे पहले ही यहां काफी दिन हो चुके हैं और मैं अब यहां आते ही रहूंगा रजत कहने लगा ठीक है। मैं भी कुछ दिनों बाद वापस बेंगलुरु लौट गया मैं अब बेंगलुरु लौट चुका था। मैं जब बेंगलुरु लौट रहा था तो मैं जिस ट्रेन से बेंगलुरु के लिए निकला था उसी ट्रेन में मेरे पास वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी हम लोगों ने आधे रास्ते पर तक तो कोई भी बात नहीं की मैं सिर्फ उस लड़की को देखता रहा। मुझे लगा था कि शायद मेरी प्रेम कहानी आगे बढ़ जाएगी क्योंकि मेरे जीवन में कोई भी लड़की नहीं थी और मैं अभी तक कुंवारा था लेकिन उस लड़की को देख कर मुझे ऐसा लगा कि शायद उस लड़की के साथ मेरा रिश्ता जरूर आगे बढ़ जाएगा। आधे रास्ते तक तो हम लोगों ने कोई भी बात नहीं की जब मैंने उस लड़की से बात की तो उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम सुजाता है। सुजाता ने मुझे बताया कि वह भी बेंगलुरु में जॉब करती है और वह चंडीगढ़ की रहने वाली है मेरे लिए भी यह बड़ा ही अजीब इत्तेफाक था कि सुजाता से जब मैं मिला तो मुझे उससे पहली नजर में ही देखकर अच्छा लगने लगा। मुझे नहीं मालूम था कि हम लोगों की दोस्ती अब इस कदर बढ़ जाएगी कि हम लोग एक दूसरे से बिना बात किए रह ही नहीं पाएंगे। अब हम लोग बेंगलुरु में अक्सर एक दूसरे से मिलते ही रहते थे अभी रजत अपने घर से वापस नहीं लौटा था जब वह वापस लौटा तो मैंने रजत को इस बारे में बताया। रजत मुझे कहने लगा कि रोहित यह तो बड़ी ही खुशी की बात है कि तुम भी अब शादी करने के बारे में सोच रहे हो। मैंने रजत को कहा मैं तुम्हें सुजाता से मिलाना चाहता हूं रजत ने कहा कि ठीक है और जब मैंने उसको सुजाता से मिलवाया तो वह दोनों एक दूसरों को पहले से ही जानते थे। रजत और सुजाता एक दूसरे के साथ ही पढ़ा करते थे वह दोनों एक दूसरे से मिलकर खुश हुए और मेरे लिए तो यह अच्छी बात थी कि रजत सुजाता को जानता है।

अब हम लोग अक्सर एक दूसरे को मिला करते थे कुछ समय के लिए रजत अपनी पत्नी को बेंगलुरु लेकर आना चाहता था और उसकी पत्नी कुछ समय के लिए बेंगलूर आई हुई थी उन दोनों को देखकर मैं बहुत ही खुश था। सुजाता एक दिन अपने ऑफिस से लौट रही थी तो उस वक्त उसने मुझे फोन किया मैं ऑफिस में ही था सुजाता ने मुझे कहा कि तुम कितनी देर में फ्री हो जाओगे तो मैंने उसे कहा बस थोड़ी देर बाद ही मैं ऑफिस से फ्री हो जाऊंगा और थोड़ी देर बाद मैं तुमसे मुलाकात करता हूं। मैंने जब सुजाता को यह बात कही तो सुजाता ने मुझे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारा इंतजार करती हूं वह उसी कॉफी शॉप में बैठी हुई थी जिसमें हम लोग अक्सर मिला करते थे। जब मैं अपने ऑफिस से फ्री हुआ तो मैं उसी कॉफी शॉप में पहुंचा सुजाता ने मुझे कहा कि क्या मैं तुम्हारे लिए कॉफी ऑर्डर करवा दूं तो मैंने उसे कहा हां। सुजाता ने कॉफी मंगवा ली थी और हम दोनों साथ में बैठकर कॉफी पी रहे थे हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तो सुजाता ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपने घर चंडीगढ़ जा रही हैं। मैंने उससे पूछा की तुम अपने घर क्यों जा रही हो तो उसने मुझे कहा कि मुझे कुछ जरूरी काम है।

हम दोनों उस दिन ज्यादा देर तक साथ में नहीं बैठे उसके बाद हम दोनों घर लौट गए। कुछ दिनों बाद वह चंडीगढ़ भी चली गई और हम दोनों की फोन पर ही बात हो रही थी मैंने सुजाता से कहा कि तुम बेंगलुरु कब लौट रही हो। उसने मुझे कहा कि बस कुछ दिनों बाद मैं बेंगलुरु लौट आऊंगी और थोड़े ही दिनों बाद वह बेंगलुरु लौट आई। मुझे उस वक्त एहसास हुआ कि मैं सुजाता के बिना एक पल भी नहीं रह सकता हूं और हम दोनों को अपनी शादी की बात अपने परिवार वालों को बता देनी चाहिए। मैंने इस बारे में सुजाता से बात की तो सुजाता ने मुझे कहा कि हां रोहित मुझे भी यही लगता है कि हम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए। हम दोनों अब शादी करने के लिए तैयार हो चुके थे और उसी दौरान एक दिन मैंने सुजाता को घर पर बुला लिया जब सुजाता मुझसे मिलने के लिए आई तो उस दिन वह बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी उसे देखकर मैं उसकी सुंदरता की तारीफ किए बिना रह ना सका मैंने सुजाता को कहा आज तो तुम बहुत ही अच्छी लग रही हो। मैंने सुजाता को कहा तं सुजाता भी कहने लगी लगता है रोहित आज तुम कुछ ज्यादा ही मूड मे हो। मैंने जब सुजाता को कहा मुझे तुम्हें किस करना है तो सुजाता ने मुझे कहा तुम मेरे होठों को चूम लो। मैंने सुजाता के नरम होंठों को चूमना शुरू किया और उसके बाद धीरे-धीरे मैंने अपने हाथ उसके स्तनों की तरफ बढ़ाए जब मैं उसके स्तनों को दबाने लगा तो मेरे अंदय एक अलग ही प्रकार की गर्मी पैदा होने लगी और मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा। मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था मैं अपने लंड को सुजाता की चूत में डालने के लिए तैयार था। सुजाता ने मुझे कहा तुम मेरी चूत मे अपने लंड को डाल दो जब उसने अपने पैरों को खोला तो मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया था। मैं उसकी चूत का रसपान कर रहा था तो उसे भी बड़ा आनंद आ रहा था और वह मुझे कहती तुम ऐसे ही मेरी चूत को चाटते रहो।

मैंने उसकी बिना बाल वाली चूत को बहुत देर तक चाटा और फिर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर जाते ही वह बहुत जोर से चिल्लाई और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम मुझे चोदते रहो। मैं अब उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और उसे चोदने में मुझे एक अलग प्रकार की फीलिंग आ रही थी मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था और सुजाता की चूत से भी खून बाहर की तरफ को निकल रहा था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था सुजाता अपने दोनों पैरों को खोलती और मुझे कहती तुम अब मुझे अपनी बाहों में ले लो। मैंने उसे अपने ऊपर से आने के लिए कहा, वह मेरे ऊपर से आ गई वह मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी तो मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था, वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी।

मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मारता उससे वह भी अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती जाती और मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वह जब अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी तो मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो गया था। मैं जिस प्रकार से उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था उससे मेरा वीर्य बाहर आने वाला था मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था। मुझे लग रहा था मेरा वीर्य बाहर की तरफ आने ही वाला है मैंने उसे अब अपने नीचे लेटाया और उसे तेजी से धक्के मारने लगा लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके स्तनों पर अपने वीर्य की वर्षा कर डाली। वह इतनी खुश हुई कि मुझे कहने लगी रोहित आज के बाद मैं तुम्हारे साथ ऐसे ही सेक्स करती रहूंगी। उस दिन के बाद हम दोनों के बीच ना जाने कितनी ही बार सेक्स संबंध बने और अब भी हम दोनों एक दूसरे को हमेशा खुश करने की कोशिश करते रहते।


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