साहब लंड है या हथौड़ा


Antarvasna, sex stories in hindi: पारुल की तबियत कुछ दिनों से बिल्कुल भी ठीक नहीं थी और मां भी बूढ़ी हो चुकी हैं, पारुल मुझे कहने लगी कि मुझे लगता है कि आपको घर में परेशानी होने लगी है क्यों ना हम लोग किसी को घर के काम के लिए रख लेते हैं। मैंने पारुल से कहा ठीक है, पारुल मुझे कहने लगी कि पड़ोस में ही एक काम वाली बाई आती है तो यदि तुम कहो तो मैं उससे बात कर लूं मैंने पारुल से कहा हां पारुल तुम उससे बात कर लो। मैं चाहता था कि घर की साफ सफाई और खाना बनाने का काम वह कर देगी क्योंकि पारुल की तबीयत अब दिन ब दिन खराब होती जा रही थी और डॉक्टरों ने उसे आराम करने की सलाह दी थी लेकिन पारुल फिर भी आराम नहीं करती थी परंतु अब उसे भी लगने लगा था कि उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने लगी है जिसकी वजह से वह मुझे कहने लगी कि मैं चाहती हूं कि हम लोग किसी को घर पर रख ले। मैंने पारुल से कहा तुम शाम को मुझे उस महिला से मिलवा देना तो पारुल कहने लगी ठीक है मैं शाम के वक्त आपको उस महिला से मिलवा दूंगी।

मैंने पारुल से कहा मैं अभी अपनी एक मीटिंग के सिलसिले में जा रहा हूं और मुझे आने में टाइम हो जाएगा तो पारुल कहने लगी ठीक है आप आते वक्त मुझे फोन कर दीजिएगा। मैंने पारुल से कहा क्या कोई जरूरी काम था तो वह मुझे कहने लगी कि हां मुझे कुछ दवाइयां मंगवानी थी यदि आप कहे तो आपको मैं वह दवाइयां बता देती हूं। मैंने पारुल से कहा मैं तुम्हारी दवाइयां ले आऊंगा पारुल ने मेरे नंबर पर मैसेज कर दिया था और मैं अब अपने काम के सिलसिले में निकल चुका था। मैं जब अपने घर से गया तो उस वक्त मैंने अपनी गाड़ी स्टार्ट की लेकिन मैं अपना बटुआ अपने कमरे में ही भूल आया था मैंने गाड़ी बंद की और अपना बटवा लेने के लिए चला गया। मैं जब वापस लौटा तो मैंने कार की चाबी को घुमाया और गाड़ी स्टार्ट हो गई उसके बाद मैं अपनी मीटिंग के लिए निकल चुका था क्योंकि मुझे जल्दी ही घर लौटना था। मैं अपनी मीटिंग के लिए गया तो वहां पर मेरी डील फाइनल हो चुकी थी मेरी प्रॉपर्टी का काम भी अच्छा चल रहा है और पिछले 10 वर्षों से मैं यही काम कर रहा हूं।

मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मेरी यह डील फाइनल हो जाएगी परंतु अब यह डील फाइनल हो चुकी थी और मैं घर लौटा तो पारुल मेरा इंतजार कर रही थी। मैंने पारुल को कहा कि मैं तुम्हें दवाई दे देता हूं तो पारूल कहने लगी कि नहीं आप रहने दीजिए मैं ले लूंगी। मैंने पारुल से कहा की क्या वह महिला आई नहीं तो पारुल कहने लगी कि वह थोड़ी देर बाद आती ही होगी मैंने जब समय देखा तो उस वक्त 6:30 बज रहे थे और कुछ ही देर बाद वह महिला आ गई। जब वह महिला आई तो मैंने उसे अपनी सारी समस्या बता दी वह मुझे कहने लगी कि साहब मैं पड़ोस में भी काम करने के लिए आती हूं यदि आपको कुछ भी पूछना है तो आप उनसे पूछ लीजिएगा। मैंने उस महिला से कहा इसमें पूछने वाली बात नहीं है मेरी पत्नी की तबीयत खराब रहती है और मेरी मां भी अब बूढ़ी हो चुकी है तो घर की सारी जिम्मेदारियों को तुम्हे ही संभालना होगा। वह महिला कहने लगी कि साहब आप उसकी बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए, मैंने उससे कहा तुम पैसे की चिंता मत करना मैं तुम्हे समय पर मैं पगार दे दिया करूंगा और तुम घर का काम अच्छे से करना। वह कहने लगी कि साहब आप उसके बारे में बिल्कुल निश्चिंत रहिये उसके बाद वह घर से चली गयी मैं और पारुल आपस में बात करने लगे पारुल मुझे कहने लगी कि आपको क्या लगता है कि वह अच्छे से काम कर पाएगी। मैंने पारुल से कहा कुछ दिन तक उसे देख लेते हैं यदि उसने अच्छे से काम किया तो उसे रख लेंगे नहीं तो किसी और से बात कर लेंगे। पारुल कहने लगी हां आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं, पारुल भी अब इस बात से निश्चिंत हो चुकी थी क्योंकि उसे भी घर की चिंता सताती रहती थी। मेरे दोनों बच्चे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते हैं और वह सिर्फ छुट्टियों के लिए हमारे पास आते हैं उनसे सिर्फ मेरी फोन पर ही बात होती रहती है। अगले दिन सुबह से वही महिला हमारे घर पर काम करने के लिए आने लगी थी धीरे-धीरे उससे हमारा मेल मिलाप अच्छा होने लगा और वह हमारे घर के सदस्य की तरह ही हो गई थी उसका नाम शालू है।

शालू को भी दो बच्चे हैं उसकी उम्र 40 वर्ष के आसपास की है शालू घर का काम अच्छे से संभाल रही थी और मुझे भी घर की कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी। वह पारुल का ध्यान भी अच्छे से रखती थी और पारुल को समय पर वह दवाइयां दे दिया करती थी कुछ दिनों पहले ही मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने लगी तो हमें उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ा। जब मैं मां को अस्पताल लेकर गया तो डॉक्टर ने उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में ही एडमिट करने की बात कही मैंने मां को अस्पताल में ही एडमिट करवा दिया था और मां की देखभाल के लिए मुझे अस्पताल में ही रहना पड़ा घर की सारी जिम्मेदारियां शालू के ऊपर थी और शालू भी घर का काम अच्छे से कर रही थी। इसी बीच मेरी एक जरूरी मीटिंग होनी थी तो मैं उस दिन अपनी मीटिंग के लिए अस्पताल से सीधा ही अपनी मीटिंग के लिए चला गया और जब मैं वहां पर गया तो मेरे दिमाग में ना जाने क्या चल रहा था मैं शायद कुछ और ही सोच रहा था इस वजह से वह डील मेरी कैंसिल हो चुकी थी और उसके बाद मैं अस्पताल लौट गया। मुझे अपनी मां की स्वास्थ्य की बहुत चिंता थी और मैं सिर्फ उन्ही के स्वास्थ्य के बारे में सोच रहा था। डॉक्टरों की मेहनत से मेरी मां अब ठीक हो चुकी थी और कुछ समय बाद उन्हें मैं घर ले आया था।

मां अब घर पर ही थी और मैं भी थोड़ा निश्चिंत हो चुका था क्योंकि शालू मां का पूरा ध्यान रखती थी कुछ दिनों तक मैं अपने काम पर नहीं गया उस दौरान में घर पर ही था। शालू घर की सफाई कर रही थी और सुबह के वक्त में मॉर्निंग वॉक से घर लौटा था जब मैं घर लौटा तो शालू की बड़ी चूतड़ों को देखकर ना जाने उस दिन मेरे अंदर से क्यों एक अलग ही आग पैदा होने लगी। मैंने जब शालू को अपने कमरे में बुलाया तो वह कहने लगी हां साहब कहिए ना क्या हुआ तो मैंने उसे कहा मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ सेक्स संबंध बनाओ। वह मुझे कहने लगी लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती मैंने उसे समझाया तो वह मेरी बात मान गई मैंने उसे कहा मैं यह बात किसी को भी नहीं बताने वाला वह मुझे कहने लगी लेकिन मैं आपके साथ ऐसा नहीं कर सकती परंतु मैंने उसे अपनी बातों के लिए मना लिया था। वह मेरे साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए राजी हो गई तो मैंने उसे कहा क्यों ना हम दोनों ही एक दूसरे के साथ आज जमकर मजा ले। वह कहने लगी लेकिन यदि पारुल मेम साहब को पता चला तो मैंने उसे कहा उसे कुछ भी पता नहीं चलेगा तुम मेरे साथ आज मेरे फ्लैट पर चलना मैं तैयार हो चुका था शालू ने भी अपना काम निपटा लिया था। मैं उसे लेकर अपने फ्लैट पर चला गया जब मैं वहां पर गया तो मैंने शालू से कहा कई दिनों से मेरी इच्छा पूरी नहीं हो पाई है क्योंकि पारुल की तबीयत खराब रहती है और मैं अपने काम से भी समय नहीं निकाल पाता मेरे लिए अब सेक्स बहुत दूर की कौड़ी है लेकिन आज तुम्हारी बडी गांड को देखकर मैं अपने आपको रोक नहीं पाया। वह मुझे कहने लगी साहब लेकिन मुझे अच्छा नहीं लग रहा मैंने उसके होंठों को चूमा और उसे नीचे लेटा दिया। मैं उसके साथ चुम्मा चाटी कर रहा था वह मुझसे मुझे अपने होंठो का मजा दे रही थी काफी देर तक हम लोग ऐसा ही करते रहे।

हम दोनों ही अब पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए थे मैंने शालू से अपने लंड को चूसने की बात कही तो वह मेरी बात मान गई और मेरे लंड को चूसने लगी। उसने मेरे लंड को बड़े अच्छे तरीके से अपने मुंह में लेकर चूसा जब वह मेरे लंड को चूस रही थी तो मुझे बड़ा अच्छा लगा। काफी देर तक ऐसा करने के बाद शालू के अंदर की गर्मी बढ़ने लगी मैंने शालू से कहा मुझे तुम्हारे बदन के कपड़ों को खोलने दो। मैंने जब उसके बदन से उसकी ब्रा खोलते हुए अपने होंठो को उसके स्तनों पर लगाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा और मैं काफी देर तक उसक स्तनो को चूसता रहा वह पूरी तरीके से मचलने लगी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैंने अपने मोटे लंड को शालू की योनि पर लगाया तो कितने समय बाद किसी की चूत के अंदर मेरा लंड जा रहा था मुझे मजा आ रहा था। मैंने एक ही झटके में अपने पूरे लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया उसके मुंह से बड़ी तेज आवाज निकली और वह कहने लगी मेरी तो फट गई। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को चूत मे लेती रहो उसने अपने दोनों पैरों को खोल दिया मैंने उसे तेज गति से धक्के देना शुरू कर दिया था।

मै उसे धक्के मार रहा था उसके मुंह से आवाज निकल रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है मैंने उसे कहा कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा। मैने अपनी स्पिड पकड ल थी शालू के दोनों पैरों को मैंने अपने कंधों पर रख लिया था। जब मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि मे गिराया तो वह कहने लगी साहब आपका हो गया। मैंने उसे कहा अभी कहां हुआ है हम लोग यहां पूरा रोमांस करने आए हैं और तुम आधे में कह रही हो क्या हो गया। मैंने उसे शराब पिलाई और वह नशे में हो चुकी थी मैंने अपने लंड को उसकी गांड पर लगाते हुए अंदर की तरफ डाल दिया। मेरा लंड अंदर की तरफ जा चुका था शालू के मुंह से चीख निकल चुकी थी वह आपनी चूतडो को मेरी तरफ कर रही थी और उसने मेरे साथ काफी देर तक मजे लिए। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था और वह भी बहुत खुश नजर आ रही थी लेकिन जब उसकी गांड की गर्मी को मैं झेल ना सका तो मैंने अपने माल को अंदर गिरा दिया वह हमेशा मेरे साथ चलने के लिए तैयार रहती है।


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