सबका सहारा लंड ही तो है


antarvasna kahani, desi chudai ki kahani

दोस्तों मैं एक सामान्य परिवार का रहने वाला व्यक्ति हूं। मेरे पिता किसानी करते हैं हम एक बहुत ही सामान्य जीवन यापन कर रहे है। यह मेरे कॉलेज के दिनों की बात है। जब मैं कॉलेज में पढ़ा करता था। किंतु आज मैं अपने पिता के साथ खेती का कार्य करता हूं। मैं भी एक किसान बन गया हूं। खेती करते-करते मेरा शरीर बहुत ही तगड़ा हो गया है। मेरा लंड बहुत सख्त और कड़क हो चुका है। कुछ समय मैंने नौकरी करी परंतु नौकरी में कुछ मजा सा नहीं आया तो मैं वापस खेती के कार्यों में लग गया। आज मैं एक अच्छा किसान हूं। जिंदगी में बहुत तनाव के चलते मैंने यह फैसला लिया किंतु मैं एक पढ़ा-लिखा युवक था। तो यह फैसला लेने में मुझे बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मेरे माता पिता भी नहीं चाहते थे। कि मैं खेती का काम करूं किंतु आज मैं नौकरी से ज्यादा खेती में कमाता हूं। अब मैं एक अच्छा जीवन व्यतीत कर रहा हूं। किंतु मैंने शादी आज भी नहीं की है।

आज मेरी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है मेरे घरवाले मेरे पीछे पड़े रहते हैं शादी कर ले किंतु मैं शादी नहीं करना चाहता। मेरे दिल में आज भी मेरी वह पुरानी गर्लफ्रेंड है जिसका नाम चंचल था। वह बहुत शरारती और चंचल ही थी। अपने नाम के अनुसार वह हमारे कॉलेज की जान थी। दिखने में भी चंचल एक गदराए बदन की लड़की थी। किंतु मैं एक सामान्य परिवार से था तो मुझे डर लगता था उससे बात करने में इस वजह से मैं चंचल से बात नहीं करता था। बस मैं उससे दूर से ही देख कर खुश होता था क्योंकि मैं उससे प्यार करता था। हमारे कॉलेज बहुत ही अच्छे से चल रहे थे। दोस्तों के साथ बहुत मस्ती किया करता था मैं और पता नहीं कहां-कहां घूमने जाते थे।

एक बार हमारे कॉलेज का टूर शिमला घूमने गया। सब लोग बड़ी ही मस्ती कर रहे थे। सब लोग गाने गा रहे थे नाच रहे थे झूम रहे थे क्योंकि यह पहला अनुभव था। हम सब लोगों का घर से बाहर जाने का तो इसी वजह से सब लोग बहुत ही खुश थे चंचल मेरी आगे वाली सीट पर बैठी हुई थी मैं उसके बालों को अपने हाथों से धीरे से छूटा और अपना हाथ एकदम से हटा लेता। मुझे भी बहुत ही मजा आ रहा था मैं थोड़ा बहुत गाना गा लेता था तो मैं भी गाने लगा। शीतल पेय जोर-जोर से तालियां बजा रही थी और मेरे दोस्त चिट्टियां मार रहे थे साले थे सब एक नंबर के भोसड़ी के उनको तो यह सब करने में मजा आता था। एक दो दोस्तों मेरे ऐसे थे जो पीछे की सीट पर बैठे हुए थे और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कुछ ना कुछ कर रहे थे। कोई किसी के स्तन का रसपान कर रहा था कोई किस कर रहा था। और एक तो इतना बड़ा भोसड़ी वाला था उसने तो अपनी गर्लफ्रेंड को नंगी करके उसको अपने लंड पर बैठा रखा था और उसकी चुदाई कर रहा था। कसम से मजा आ रहा था अब हम लोग शिमला में 3 दिन रुकने वाले थे। तो सारे के सारे टीचर हमारे साथ ही रुके हुए थे। उन्होंने सब बच्चों के लिए रुकने की व्यवस्था अच्छे से कर रखी थी। वह भी शायद कोई हॉस्टल ही था।

पहले दिन तो सब लोगों ने आराम किया। क्योंकि सब लोग थके हुए थे इस वजह से हमारे टीचरों ने हमें कहा आज सब लोग आराम करेंगे कल से हम लोग घूमने जाएंगे। हम लोग भी अपने बैग में दारू का जुगाड़ लेकर आए हुए थे क्योंकि हमें पता था 3 दिन के लिए कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। नहीं तो हमारे 3 दिन पूरे खराब हो जाते हैं और हम अच्छे से एंजॉय भी नहीं कर पाते। पहले दिन हम लोगों ने दारू और सुट्टा पिया और आराम से सो गए। वही जो हमारे साथ के दोस्त हैं उनमें से 24 की गर्लफ्रेंड थी तो उन्होंने उस दिन उनकी चूत मारी मेरा हिसाब तो बस रंडवे जैसा ही था। लेकिन मुझे दारू का नशा हो गया था तो इसलिए मैंने इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया और चुपचाप सो गया। अगले दिन हम सब लोग शिमला घूमने निकल पड़े मज़ा आने लगा था सभी टीचरों ने हमें कुछ कहा नाटक करो। मैं और चंचल उस नाटक में पति-पत्नी की भूमिका में थे। हम दोनों ने बहुत ही अच्छे से नाटक किया और सब लोगों ने हमारी तारीफ की और जब नाटक में हम दोनों पति-पत्नी की भूमिका में थे ही तो चंचल ने मुझे पूछा तुम काफी अच्छी एक्टिंग कर लेते हो।

मैं भी उस को धन्यवाद कहा और उसकी भी तारीफ की और वह अपनी तारीफ से खुश हो गई। उसी दौरान हम दोनों में प्यार होने लगा। मैंने रात को उसको मिलने अपने कमरे में बुलाया। वह अपनी सहेली के साथ आई उसकी सहेली मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड थी वह दोनों कोने में जाकर सेक्स करने लगे। क्यों देख कर चंचल को भी शायद कुछ होने लगा था मैं उसकी नजरों को भाग चुका था और मैंने उसको किस करना शुरु कर दिया। और किस करते-करते ना जाने कब हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और मैंने उसकी चूत मैं अपना लंड डाल दिया। उसका वह गोरा सा बदन देखकर तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे इसकी हुस्न में जिंदगी भर डूबा रहूं। और मैंने जोर-जोर से धक्के मारने लगा और अंदर बाहर करने लगा उसके बड़े बड़े स्तन हिल रहे थे। और काफी समय तक ऐसा करने के बाद मैंने उसको कहा तुम सही में बहुत ही सेक्सी हो। वह बोलने लगी क्या बस में सेक्सी हूं और इस से ज्यादा कुछ नहीं मैंने कहा नहीं नहीं मैं तुमसे वाकई में प्यार करता हूं। जो कहते कहते मैंने उसको घोड़ी बना दिया और उसकी गांड में  अपना लंड डाल दिया। पहले तो वह गया ही नहीं मुझे लगा शायद यह मुझसे होगा नहीं इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया और फिर उसकी चूत मैं अपना लंड डाला। उस दिन मैंने उसकी योनि में ही अपना वीर्य डाल दिया जिससे वह प्रेग्नेंट भी हो गई थी। उसकी चूत बहुत टाइट थी। जब जब मैं  उसकी स्तनों को देखता तो मुझे उसको चोदने का मन होता। लेकिन मैं यह सबके सामने नहीं कर सकता था।

आज हमारा शिमला में आखरी दिन था। और हम सब चाहते थे कुछ यादें हम यहां से लेकर जाएं सब कुछ नया-नया कर रहे थे। मैंने भी सोचा मैं क्या नया करूंगा। आज क्योंकि मेरे पास पैसे तो थे नहीं मैं जितने पैसे लाया था वह सब खर्च हो चुके थे। सब लोग कुछ ना कुछ शॉपिंग कर रहे थे। कोई अपने लिए टी शर्ट खरीदना तो कोई अपने लिए कमीज लड़कियां तो दुनियाभर का सामान ले रही थी। कोई पर्स ले रहा था कोई कुछ ले रहा था। मैं बस सब को देखता जा रहा था। और सुबह से ही और सोच रहा था आज मैं क्या करूंगा कुछ नया तभी मेरे पास चंचल आई और खड़ी हो गई। बोलने लगी तुम यहां अकेले क्यों खड़े हो चलो सब लोग एंजॉय कर रहे हैं तुम भी इंजॉय करो। मैंने उसको बोला मेरा मन नहीं है तुम जाओ बहुत बोलने लगी क्यों परेशान हो मुझे अपनी परेशानी बताओ फिर मैंने चंचल को बोला मुझे तुम्हारी गांड मारनी है। मैंने यही फैसला किया है आज मैं शिमला से यही यादें लेकर जाऊंगा। पहले वह सोचने लगी और मेरा लटका मुंह देखकर उसने कहा ठीक है मैं रात को आ जाऊंगी। और जैसा कि उसने कहा था वह रात को आ जाएगी तो वह रात के समय मेरे कमरे में आ गई।

अपनी उस सहेली को लेकर जो पिछली बार भी उसके साथ आई थी। मेरे दोस्त ने भी उसको कोने में ले जाकर चोदना शुरू कर दिया। जैसे कि हमारी बात हुई थी तो चंचल ने भी आज अपना पूरा मन बना रखा था कि मुझे अपनी गांड से रस पान कराएगी। वह अपने साथ एक तेल की शीशी लाई थी उसने वह मुझे दी और बोलने लगी इसको अपने लंड पर लगा लो और मेरी गांड फाड दो। उसके बाद उसने अपने सलवार को उतार दिया। उसकी बहुत बड़ी सी गांड देखकर मेरा एकदम खड़ा हो गया। जो की बहुत सख्त हो चुका था।  चंचल ने उसको पहले तो अपने मुंह से अंदर बाहर किया और उसके बाद उसने उस पर तेल लगा दिया। जिससे उसमें चिकना ही पैदा हो गई। हां मैंने भी अपने हाथों में थोड़ा सा तेल लेकर चंचल की गांड के छेद के अगल-बगल लगा दिया। अब मैंने अपने लंड को उसकी गांड के छेद से सटा दिया और धीरे-धीरे अंदर की तरफ धक्का मारना शुरू किया। आज थोड़ा आसान लग रहा था। और धीरे-धीरे मेरे लंड उसकी गांड मे चला गया। जैसे ही मेरा लंड गया वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी। जितना वह चिल्लाती उतना ही मुझे मज़ा आता और मैं उसकी टाइट गांड मे और तेज तेज अंदर बाहर करता। आधा घंटा ऐसा करते-करते हो गया था। और मेरा लंड भी छिल चुका था। उसके बाद मैंने अपने माल को अंदर ही गिरा दिया। जब मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला तो मेरा तरल पदार्थ उसकी गांड मैं से टपक रहा था। के 1 हफ्ते बाद तक मेरे लंड मैं दर्द रहा। यह मेरा शिमला का सबसे यादगार लम्हा रहा उसके कुछ समय बाद उसकी शादी किसी और लड़के से हो गई। और आज भी मैं उससे प्यार करता हूं।

 


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