सब चिंता चुदाई से दूर हो गई


Antarvasna, kamukta: बिजनेस में हुए नुकसान से मैं बहुत ज्यादा परेशान होने लगा था और मानसिक रूप से भी मैं काफी तनाव में आने लगा था वह तो मेरे मामा जी ने मेरा काफी सपोर्ट किया और उन्होंने ही मुझे कहा की बेटा हमे तुम पर पूरा यकीन है तुम जरूर दोबारा से अपने बिजनेस को अच्छे से शुरू कर पाओगे। मामा जी की ही मदद से मैंने अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू किया। यह मेरे लिए इतना आसान नहीं था मेरे लिए यह काफी मुश्किल भरा था लेकिन अब दोबारा से मैंने अपना बिजनेस शुरू कर लिया था और वह अच्छे से चलने लगा था। सब लोग काफी खुश थे कि मैं अब अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू कर पाया, मैंने तो हिम्मत ही छोड़ दी थी कि मैं अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू कर पाऊंगा। मेरे मन में ना जाने कितने ही सवाल थे लेकिन मामा जी की मदद से यह सब संभव हो पाया कि मैं अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू कर पाया हूँ।

अब सब कुछ अच्छे से चलने लगा तो मेरी जिंदगी भी अब सामान्य हो चुकी थी मेरी जिंदगी में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी पापा और मम्मी का सपोर्ट भी मुझे पूरा था। उन लोगों ने हमेशा ही मुझे सपोर्ट किया है मेरे पापा स्कूल में क्लर्क थे हालांकि वह कुछ वर्षों पहले रिटायर हो चुके हैं लेकिन उन्हें मेरी काबिलियत पर पूरा भरोसा था। पापा पहले चाहते थे कि मैं कहीं जॉब करूं लेकिन मैंने बिजनेस करना ठीक समझा और मैं बिजनेस करने लगा था तो पापा भी काफी खुश थे क्योंकि बिजनेस से मुझे काफी तरक्की मिली। मैंने कुछ समय पहले ही एक नया घर खरीदा और जब मैंने खरीदा तो पापा मुझे कहने लगे कि हर्षित बेटा क्या तुम अब वहीं रहोगे तो मैंने पापा से कहा नहीं पापा आप ऐसा क्यों कह रहे हैं। पापा मुझे कहने लगे कि बेटा मुझे लगा कि तुमने नया घर खरीद लिया है तो तुम शायद अब वहीं रहोगे मैंने पापा से कहा नहीं पापा वह तो मैंने सिर्फ इन्वेस्टमेंट के लिए लिया है और उसे कुछ समय बाद मैं बेच दूंगा, अगर मुझे उस घर के अच्छे पैसे मिलेंगे तो मैं उसको बेच दूंगा। पापा मुझे कहने लगे की बेटा आजकल का जमाना तो तुम्हें पता ही है मैंने पापा से कहा पापा भला मैं आपको और मां को छोड़कर कहां जाऊंगा।

पापा भी कहने लगे की बेटा हमें तुमसे बहुत उम्मीदें हैं और हम लोग चाहते हैं कि तुम अब शादी भी कर लो। मां भी उस वक्त वहीं बैठी हुई थी मैंने मां से कहा कि मां अभी मैं शादी नहीं करना चाहता हूं आप तो जानती हैं कि मैं अभी शादी करने के बिल्कुल भी मूड में नहीं हूं और मैं अभी शादी के लिए तैयार भी तो नहीं हूं। मां मुझे कहने लगी कि लेकिन बेटा फिर भी तुम एक बार सोच लो मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं इस बारे में सोच लूंगा कि मुझे शादी करनी चाहिए या नहीं। मैं शादी करने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं था मैं अकेले ही खुश था मैं अपनी जिंदगी से काफी खुश था। मेरे जितने भी दोस्त हैं उनकी अब तक शादी हो चुकी है और पापा मम्मी के कहने पर मैंने भी  लड़की देखनी शुरू कर दी थी लेकिन मुझे कहीं भी कोई अच्छा रिश्ता नहीं लगा। एक बार एक कॉमन फ्रेंड के माध्यम से जब मैं पहली बार सुहानी को मिला तो सुहानी से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा। सुहानी से मिलकर मुझे ऐसा लगा जैसे कि सुहानी मेरी जिंदगी में आ गई तो मेरी जिंदगी पूरी तरीके से सवर जाएगी सुहानी काफी समझदार भी है। हालांकि मुझे सुहानी के बारे में इतना भी मालूम नहीं था लेकिन मैं चाहता था कि किसी भी तरीके से मैं सुहानी से बात करूं। मैंने उसके बाद सुहानी से बात करनी शुरू कर दी शुरुआत में तो मैं सुहानी से फेसबुक चैट के माध्यम से ही बात करता था। जब मैंने सुहानी से उसका नंबर लिया तो उस वक्त मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या मुझे सुहानी का नंबर लेना चाहिए या नहीं। मेरे मन में दुविधा थी लेकिन फिर भी मैंने सुहानी का नंबर ले लिया, जब मैंने सुहानी का नंबर लिया तो उसके बाद सुहानी और मैं एक दूसरे से फोन पर भी बात करने लगे थे और हम दोनों की मुलाकात भी होने लगी।

सुहानी और मैं एक दूसरे को मिलने लगे थे लेकिन सुहानी ने मुझे बताया कि उसके परिवार वालों ने उसके लिए लड़का देखा है जिससे कि वह उसकी सगाई करवाना चाहते हैं। मैंने जब सुहानी से पूछा कि क्या तुम भी उस लड़के से शादी करना चाहती हो तो सुहानी मुझे कहने लगी कि तुम तो जानते ही हो कि मैं अपने परिवार वालों के खिलाफ नही जा सकती हूं वैसे मैं उस लड़के को एक बार मिल चुकी हूँ लेकिन मुझे वह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मैंने सुहानी को कहा कि क्या तुम उससे शादी कर लोगी तो सुहानी कहने लगी कि हां मुझे अब ऐसा ही लग रहा है कि मेरी फैमिली मेरी शादी उससे करवा ही देगी और मैं उन्हें मना भी नहीं कर सकती क्योकि मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करती हूं। मुझे भी लगा कि सुहानी और मैं एक दूसरे के कभी हो नहीं पाएंगे इसलिए मैंने भी सुहानी का ख्याल अपने मन से पूरी तरीके से निकाल दिया था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि सुहानी और मेरे बीच में प्यार पनपने लगेगा। हम दोनों के बीच में इतना प्यार पनपने लगा था कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाते थे। सुहानी मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी थी उसके बिना मैं एक पल भी रह नहीं पाता था और ना ही सुहानी मेरे बिना रह पाती थी।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हम दोनों के बीच में प्यार हो जाएगा और हम दोनों एक दूसरे से शादी करने के लिए तैयार हो जाएंगे। सुहानी मुझसे शादी करने के लिए मान चुकी थी वह मुझे कहने लगी कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि सुहानी की सगाई हो चुकी थी और सुहानी के परिवार वाले मेरे और सुहानी के रिश्ते को बिल्कुल भी मंजूरी नहीं देने वाले थे इस बात का मुझे अच्छे से मालूम था और मैंने सुहानी को भी इस बारे में कह दिया था। सुहानी मुझे कहने लगी कि तुम कुछ भी करो लेकिन मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ ही रहना है। मुझे ही अब कोई रास्ता निकालना था और मैं दिन रात यही सोचता रहता की मुझे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे सुहानी और मैं एक साथ रहे। सुहानी के परिवार वाले हम दोनों के रिश्ते के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। एक दिन सुहानी मुझसे मिलने के लिए घर पर आ गई उस दिन घर पर कोई भी नहीं था। सुहानी बहुत ज्यादा परेशान थी उसने मुझे कहा मुझे तुमसे शादी करनी है। मैंने सुहानी को कहा सुहानी तुम समझने की कोशिश करो यह बिल्कुल भी संभव नहीं है मैं कोशिश तो कर रहा हूं अभी तक हम दोनों के रिश्ते के लिए तुम्हारे पापा तैयार नहीं है। सुहानी ने मुझे किस कर लिया अब वह मुझे गले लगाने की कोशिश करने लगी मैंने सुहानी को गले लगाकर चूमना शुरु कर दिया हम दोनों एक दूसरे की बाहों में पूरी तरीके से आना चाहते थे। मै सुहानी के स्तनों को दबाने लगा वह रह नहीं पा रही थी। मै उसके होठों को चूसने लगा तो वह अपने आपको बिल्कुल नहीं रोक पा रही थी। मैने लंड को बाहर निकाला तो उसने मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाना शुरू किया मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब वह मेरे लंड को हिला रही थी मेरे अंदर की आग बढ रही थी।

सुहानी मुझे कहने लगी लगता है मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगी। मैंने सुहानी को कहा मैं अब तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं सुहानी इस बात के लिए तैयार थी वह बहुत तड़प रही थी। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया मेरे लंड से अब पानी निकालने लगा था। मैंने सुहानी से कहा मैं अब रह नहीं पाऊंगा मैंने सुहानी के कपडे खोलते हुए उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया था। मैं जिस तरह से सुहानी की योनि को चाट रहा था उस से सुहानी की चूत गरम हो रही थी। सुहानी की आग बहुत ज्यादा बढ रही थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। जब सुहानी पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने सुहानी से कहा मेरे अंदर की आग को तुम अब बढा चुकी हो। मैंने सुहानी की चूत पर लंड का लगाया उसकी चूत पानी छोड रही थी। मैंने एक जोरदार झटके में अपने लंड को सुहानी की चूत के अंदर डाला तो सुहानी की सील टूट गई, उसकी सील टूटते ही उसकी चूत से खून बाहर निकलने लगा था। वह तडपते हुए मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने सुहानी से कहा मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। वह कहने लगी रह तो मैं भी बिल्कुल नहीं पा रही हूं। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और उसे बड़ी तेज गति से मैं धक्के देने लगा।

मै जिस प्रकार से उसे धक्के दे रहा था वह मुझे कहती मुझे और तेजी से चोदते रहो मुझे मजा आ रहा है। मैंने उसके पैरों को आपस में मिला लिया था जब मैंने ऐसा किया तो उसके अंदर की आग बढ़ने लगी थी। मैंने उसे कहा मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगा मैंने सुहानी की चूत मे अपने माल को गिराया। उसके बाद वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे की बाहों में लेटे हुए थे कुछ देर बाद मैने उसे दोबारा चोदा मैंने सुहानी की चूत के अंदर की तरफ लंड को डाल दिया था। जब मैंने ऐसा किया तो वह बड़ी जोर से चिल्लाते हुए बोली मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैं उसको तीव्र गति से चोद रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था जब मैंने ऐसा किया तो वह बिल्कुल रह नहीं पा रही थी। हम दोनों ही पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे मैने अपने माल को उसकी चूत में गिरा दिया था। सुहानी और मै कुछ देर तक साथ बैठे रहे और फिर सुहानी मुझसे बोली क्या करना चाहिए? मैने सुहानी को कहा मै सब ठीक कर दूंगा।


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