साली जी मिटांऊ क्या खुजली?


Antarvasna, kamukta: मैं अपने कॉलेज से घर लौटी तो मैंने मां से कहा मां आज तो घर में खाने की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है मां मुझे कहने लगी कि बेटा तुम्हारी बहन सरिता आज घर पर आ रही है और साथ में तुम्हारे जीजा जी भी आ रहे हैं। मैंने मां से कहा मां तभी तो आप आज इतना अच्छा खाना बना रही हैं मां कहने लगी बेटा अब तुम्हारे जीजा जी घर पर आ रहे हैं तो उनके लिए कुछ अच्छा तो बनाना ही पड़ेगा। मैंने मां से कहा मां लेकिन वह लोग कब तक आ जाएंगे तो मां कहने लगी कि बेटा वह लोग तो एक या दो घंटे बाद आएंगे। मैंने मां को कहा मां लेकिन आपने अभी से खाने की तैयारी कर दी तो मां कहने लगी कि बेटा फिर समय हो जाता है इसलिए सोचा कि अभी खाना बना देती हूं। मैंने मां को कहा चलिये आपने यह तो अच्छा किया, क्या मुझे आपके साथ कुछ मदद करनी है मां कहने लगी कि बेटा अभी तो तुम्हारी मदद की जरूरत नहीं है लेकिन जब होगी तो मैं तुम्हें मैं बोल दूंगी।

मैंने मां को कहा मां क्या मैं डिंपल के घर चली जाऊं तो मां कहने लगी कि ठीक है बेटा तुम डिंपल के घर चली जाओ। डिंपल हमारे पड़ोस में ही रहती है डिंपल मेरी अच्छी सहेली है और बचपन से हम लोग साथ में पढ़ा करते थे लेकिन डिंपल ने किसी कारणों से कॉलेज छोड़ दिया था और वह अपनी मम्मी के साथ ही उनके ब्यूटी पार्लर को चलाती हैं मैंने सोचा कि डिंपल से उसके घर पर जाकर मिल लेती हूँ। जब मैं डिंपल से उसके घर पर मिलने गई तो वह घर पर ही थी मैंने डिंपल को कहा काफी दिनों बाद तुमसे मुलाकात हो रही है। डिंपल मुझे कहने लगी कि तुम तो अब घर पर मुझसे मिलने के लिए आती भी नहीं हो मैंने डिंपल को कहा डिंपल समय ही कहां मिल पाता है कॉलेज की पढ़ाई बस खत्म ही होने वाली है। डिंपल मुझे कहने लगी कि तुम्हारा यह कॉलेज का आखिरी वर्ष है मैंने डिंपल को कहा हां डिंपल मेरा यह कॉलेज का आखरी वर्ष है। डिंपल और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने डिंपल से कहा डिंपल तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो वह मुझे कहने लगी कि काम तो बहुत अच्छा चल रहा है।

डिंपल कहने लगी आज मैं घर पर ही थी तो मैंने सोचा कि तुम से मिल लेती हूं तुमसे मिले हुए भी तो काफी समय हो चुका है। मैंने डिंपल को कहा तुमने अच्छा किया जो मुझसे मुलाकात कर ली मैं भी तुमसे मिलने के लिए काफी दिनों से सोच ही रही थी। डिंपल मुझे कहने लगी कि कोमल मुझे तुमसे कुछ पूछना था मैंने डिंपल को कहा हां डिंपल पूछो ना तुम्हें क्या पूछना है डिंपल मुझे कहने लगी कि तुम्हें हमारे कॉलेज में पढ़ने वाला सुरेश तो याद है ना। मैंने डिंपल को कहा हां सुरेश हमसे दो क्लास सीनियर था मैंने डिंपल को कहा लेकिन तुम उसके बारे में मुझसे क्यों पूछ रही हो। डिंपल मुझे कहने लगी कि सुरेश कुछ दिनों पहले मुझे दिखा था और उसने मुझसे बात भी की सुरेश से बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने डिंपल को कहा लगता है तुम्हारे दिल में सुरेश को लेकर कुछ चल रहा है तुम मुझे बता नहीं रही हो। डिंपल कहने लगी कि कोमल अब तुम्हें क्या बताऊं जब उस दिन मेरी मुलाकात सुरेश से हुई तो हम लोगों की काफी देर तक बात हुई और मैंने सुरेश को अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया उसके बाद वह मुझे मैसेज करने लगा मैं भी उससे मैसेज के माध्यम से ही बात करती हूं मुझे सुरेश कॉलेज के समय से ही पसंद था लेकिन सुरेश ने उस दिन जब मुझसे बात की तो मुझे अच्छा लगा और मैं चाहती हूं कि सुरेश के साथ मैं रिलेशन में रहूं। मैंने डिंपल को कहा डिंपल यह तुम्हारा खुद का फैसला है तुम देख लो तुम्हें कैसा लगता है क्योंकि मैं इसमें कुछ कह नहीं सकती हूं सुरेश को मैं ज्यादा अच्छे से तो नहीं जानती हूं लेकिन कॉलेज में सब लोग उसकी बड़ी तारीफ किया करते थे। डिंपल कहने लगी कि हां कॉलेज में तो सुरेश की सब लोग तारीफ करते थे सुरेश चाहता है कि हम लोग एक दूसरे से मिले तो मैंने डिंपल को कहा डिंपल तुम मिल क्यों नहीं लेती तुम्हें सुरेश से मिल लेना चाहिए। डिंपल मुझे कहने लगी कि सुरेश मुझसे मिलने के लिए बहुत उत्सुक है और वह चाहता है कि हम दोनों की मुलाकात हो जाए लेकिन मैंने फिलहाल तो सुरेश से मिलने से इंकार कर दिया है। मैंने डिंपल को कहा लेकिन तुमने सुरेश को मिलने से क्यों इंकार किया तुम्हें एक बार तो सुरेश को मिलना ही चाहिए डिंपल कहने लगी कि मुझे डर लगता है यदि यह बात पापा मम्मी को पता चली तो वह मेरे बारे में क्या सोचेंगे।

मैंने डिंपल को कहा देखो डिंपल तुम्हें उन्हें कभी ना कभी तो बताना ही पड़ेगा इससे अच्छा तो यही होगा कि तुम अंकल और आंटी से बात कर लो और वैसे भी वह लोग बहुत अच्छे हैं तुम्हारी बात वह कभी टालेंगे नही वह हमेशा ही तुम्हारी खुशी चाहते हैं। जब मैंने डिंपल को यह बात कही तो डिंपल कहने लगी कोमल तुम ठीक कह रही हो मुझे सुरेश से मिल लेना चाहिए और इसी के चलते डिंपल ने सुरेश से मिलने का फैसला किया। डिंपल मुझसे कहने लगी कि तुम घर पर क्या कर रही थी तो मैंने डिंपल को बताया आज दीदी आने वाली है और साथ में जीजाजी भी आएंगे तो उन्हीं से आज काफी समय बाद मुलाकात होगी। डिंपल कहने लगी कि तभी आज तुम बड़ी खुश नजर आ रही हो मैंने डिंपल को कहा दीदी से इतने लंबे अरसे बाद जो मुलाकात होगी तो खुशी तो मेरे चेहरे पर अपने आप ही आ जाएगी। मैंने डिंपल को कहा डिंपल अभी मैं चलती हूं तुमसे बाद में मिलूंगी डिंपल मुझे कहने लगी कि ठीक है मैं तुम्हें फोन करूंगी। मैं डिंपल के घर से अपने घर चली गई मैं जब घर पर गई तो मां मुझे कहने लगी कि बेटा तुम धनिया काट देना, मां ने खाना तैयार कर दिया था और समय का कुछ पता ही नहीं चला मैं डिंपल के साथ काफी घंटों तक बैठी रही।

दीदी और जीजाजी भी आने ही वाले थे जब वह लोग आए तो पापा और मम्मी खुश हो गए काफी देर तक पापा और मम्मी उन लोगों के साथ बैठे रहे। मैंने दीदी को पूछा दीदी सब कुछ ठीक तो चल रहा है ना दीदी कहने लगी कि हां कोमल तुम्हारे जीजा जी मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं और उसके बाद तो हम लोग आपस में बात करने लगे। दीदी और मैं रूम में बैठकर बात कर रहे थे जीजा जी रूम में आए और कहने लगे कि दोनों बहनों के बीच में आज क्या बात चल रही है मैंने जीजा जी को कहा जीजा जी आपको हर एक बात बतानी जरूरी तो नहीं है ना। जीजा जी मेरी बात पर मुस्कुराने लगे और कहने लगे कि कोमल तुमसे तो बातों में जीत पाना मुश्किल ही है मैंने जीजा जी को कहा जीजा जी मुझसे बातों में जीत पाना मुश्किल है तो आप मुझसे मजाक क्यों करते हैं। जीजा जी और मेरे पास बीच में हंसी मजाक होता ही रहता है। हम लोग आपस में बात कर रहे थे तो मुझे अच्छा लग रहा था दीदी मुझे कहा तुम अपने जीजा के साथ कुछ देर बैठो। जब मैं जीजा के साथ बैठी हुई थी तो जीजा मुझसे कुछ ज्यादा ही मजाक करने लगे वह मुझे अपने हाथों से छूने की कोशिश करने लगे। जीजा ने भी मेरे स्तनों पर हाथ मार दिया तो मेरे अंदर एक अलग करंट दौड़ने लगा मैंने जीजा जी से कहा जीजा जी आप यह क्या कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और उसी रात जब मैंने दीदी और जीजा जी के बीच शारीरिक संबंध बनते हुए देखे तो मुझे अच्छा लगने लगा मेरे अंदर भी सेक्स के प्रति रुचि जागने लगी मैं चाहती थी कि जीजा जी के साथ ही में अपना पहला शारीरिक संबंध बनाऊं। जीजा जी को मैंने भी देखना शुरू कर दिया था अगले दिन जब वह मेरे साथ बैठे हुए थे तो उन्होंने मेरे स्तनों को बड़े अच्छे तरीके से मसल कर रख दिया वह मेरे होठों को चूमने लगे थे और मेरी गांड को भी दबाने लगे।

जब उन्होंने मेरे स्तनो को दबाना शुरू किया तो मैंने भी उनके लंड को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन उनकी पैंट से लंड बाहर नहीं आ रहा था तो जीजा जी ने अपनी बेल्ट को खोलते हुए अपने लंड को बाहर निकाला तो उनका सांप जैसा लंड देखकर मैंने उसे अपने हाथों में लिया और हिलाना शुरू किया। मैं उसे बड़े अच्छे से हिला रही थी जब मैं उनके लंड को चूसती तो मुझे और भी मजा आ जाता काफी देर तक मैंने उनके लंड को चूसा अब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे। मैंने जीजा जी से कहा  आप मेरी चूत का रसपान कीजिए तो उन्होंने भी मेरी चूत को चाटना शुरू किया उन्हें बहुत ही अच्छा लगा मेरी चूत ने पानी बाहर की तरफ को छोड़ना शुरू कर दिया था। उन्होंने जब अपने लंड को मेरी चूत पर लगाकर अंदर की तरफ को घुसाया तो मैं चिल्लाने लगी उनका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक प्रवेश हो चुका था और मेरी चूत से बड़ी तेज गति से पानी और खून बाहर की तरफ को निकाल रहा था।

उन्होंने जिस अंदाज में मुझे चोदा उससे मैंने उन्हें कस कर पकड़ लिया और उन्होंने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया। हम दोनों एक दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे और एक दूसरे के बदन कि जिस प्रकार से हम दोनों ने गर्मी को मिटाया मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और जीजाजी भी बहुत खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने मुझे कहा कि कोमल आज तुमने मुझे खुश कर दिया है यह कहते ही उन्होंने मेरी चूतड़ों को अपनी तरफ किया और मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया मेरी चूत से अभी भी उनका वीर्य बाहर की तरफ निकल रहा था। वह मुझे चोदने पर लगे हुए थे मुझे नहीं मालूम था कि चूत मरवाना इतना आसान भी नहीं है जितना कि मैं समझती थी उन्होंने मेरी चूत को पूरी तरीके से फाड कर रख दिया तो उन्होंने मेरी चूत से खून बाहर निकाल दिया था मेरी चूत से खून रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था और करीब 15 मिनट के संभोग के बाद उनका वीर्य गिरा तो मेरी चूत को थोड़ा आराम मिला। उसके बाद जब भी जीजा जी मुझे मिलते तो वह कहते कि तुम्हारी चूत की खुजली मिटाऊ क्या?


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