रात भर मुझे चोदते रहना जानू


Antarvasna, kamukta: भैया की शादी के दौरान मैं आकांक्षा से मिला आकांक्षा मेरी बहन की सहेली है उससे मेरी ज्यादा बात तो नहीं हुई लेकिन उस वक्त हम लोगों की मुलाकात पहली बार ही हुई थी। भैया की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और सब लोग शादी से बहुत खुश थे, हमारे घर पर जो मेहमान थे वह भी अब जाने लगे थे। भैया भाभी के साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत ही खुश थे और साथ साथ उनका प्रमोशन भी हो चुका था। एक दिन मैं अपने  दोस्त को मिलने के लिए उसके घर गया था और जब उस दिन मैं अपने दोस्त से मिलके घर आ रहा था तो रास्ते में मुझे आकांक्षा एक लड़की के साथ दिखी मैंने उसे देखा नहीं था लेकिन आकांक्षा ने मुझे देख लिया और वह कहने लगी कि आप यहां कहां जा रहे थे। मैंने उसे बताया कि बस मैं किसी जरूरी काम से यहां आया हुआ था।

आकांक्षा से मेरी कुछ देर तक बात हुई और फिर वह चली गई मैं उससे ज्यादा देर तक बात नहीं कर पाया। जब मैं और आकांक्षा एक दूसरे से बात कर रहे थे तो मुझे उससे बात करके अच्छा लग रहा था उसके बाद आकांक्षा वहां से चली गई और मैं भी वापस लौट आया। मैं जब वापस अपने घर लौटा तो उस दिन मैंने अपनी बहन मीनाक्षी को बताया कि मुझे आज आकांक्षा मिली थी। वह मुझे कहने लगी कि आकांक्षा का मुझे फोन आया था और वह कह रही थी कि आज मुझे तुम्हारे भैया मिले थे। मैं और मेरी बहन मीनाक्षी साथ में बैठे हुए थे और हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैंने उससे कहा कि मीनाक्षी मैं यह जानना चाहता हूं कि तुम्हारी मुलाकात आकांक्षा से कब हुई थी। मीनाक्षी ने मुझे बताया कि आकांक्षा को तो मैं पिछले 4 सालों से जानती हूं और हम दोनों की मुलाकात हमारे कॉलेज में ही हुई थी। मैंने मीनाक्षी से कहा ठीक है वह मुझे कहने लगी कि लेकिन भैया आज आप मुझसे आकांक्षा के बारे में क्यों पूछ रहे हैं तो मैंने उसे कहा कि मुझे यह जानना था कि आखिर तुम आकांक्षा को कब से जानती हो।

मैं और मीनाक्षी एक साथ बैठे हुए थे तो मां हमारे कमरे में आई और कहने लगी कि आज तुम दोनों आपस में क्या बातें कर रहे हो। मैंने मां से कहा कि मां कुछ नहीं बस ऐसे ही आज मैं मीनाक्षी के साथ बैठा हुआ था तो मां कहने लगी कि चलो बेटा तुम लोग अब खाना खा लो रोहित भी बस आता ही होगा। हम लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और भाभी और मां खाना लगा रही थी जब उन्होंने खाना लगा दिया तो उसके बाद हम सब लोग साथ में खाना खाने लगे। रोहित भैया कहने लगे कि सुभाष मुझे तुमसे कोई जरूरी बात करनी थी मैंने भैया से कहा हां भैया कहिए, क्या आपको कुछ जरूरी बात करनी है। भैया ने कहा कि मैं तुमसे थोड़ी देर में बात करता हूं। हम लोगों ने खाना खा खाया और खाना खाने के बाद मैंने और भैया ने आपस में बात की तो भैया ने मुझे बताया कि वह चाहते हैं कि हमारी पुश्तैनी जमीन जो कि हमारे अब किसी काम की नहीं थी पापा और भैया चाहते थे कि हम लोग उसे बेच दे। मैंने भैया को कहा भैया आप देख लीजिए जैसा आपको ठीक लगता है तो भैया कहने लगे कि मुझे लगा कि मुझे तुमसे भी पूछ लेना चाहिए आखिर तुम क्या सोचते हो। मैंने भैया से कहा भैया यह तो आपने ठीक किया लेकिन अभी मेरा यहां पर बोलना ठीक नहीं होगा क्योंकि यह फैसला आप दोनों को ही लेना चाहिए आप दोनों ही घर में बड़े हैं। भैया कहने लगे कि लेकिन फिर भी सुभाष मुझे तुमसे पूछना ही था कि आखिर तुम भी इस बारे में क्या सोचते हो। मैं और भैया बात कर रहे थे तभी थोड़ी देर बाद भाभी आई और कहने लगी कि अब काफी देर हो चुकी है मैंने भी घड़ी में समय देखा तो उस वक्त करीब 12:00 बज रहे थे। भैया ने मुझे कहा कि चलो सुभाष अभी सो जाते हैं क्योंकि सुबह मुझे अपने ऑफिस जल्दी जाना है। मैंने भैया से कहा ठीक है भैया और अगले दिन सुबह मैं भी अपने काम से जल्दी चला गया था और भैया भी उस दिन सुबह जल्दी चले गए थे। मैं भैया का बहुत ही आदर और सम्मान करता हूं क्योंकि भैया बहुत ही अच्छे हैं और उन्हें जब भी कोई काम होता है तो वह मुझसे जरूर बात कर लिया करते हैं। हालांकि उम्र में वह मुझसे 5 वर्ष बड़े हैं लेकिन उसके बाद भी वह मुझसे हमेशा ही हर एक बात को पूछते हैं। एक दिन मैं अपने घर जल्दी लौट आया था उस दिन मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। जब मैं अपने घर लौटा तो मां मुझे कहने लगी कि सुभाष बेटा सब कुछ ठीक तो है आज तुम घर जल्दी लौट आए तो मैंने मां से कहा मां बस ऐसे ही आज मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था।

मैंने जब मां से यह बात कही तो मां कहने लगी कि बेटा सब कुछ ठीक तो है ना, मां मेरा हाथ पकड़ कर कहने लगी कहीं तुम्हें बुखार तो नहीं है। मां बस छोटी छोटी चीजों को लेकर घबरा जाती हैं मैंने उन्हें कहा नहीं मां सब कुछ ठीक है आप घबराइए मत। मैं घर पर आराम कर रहा था मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था तो मां मुझे कहने लगी कि सुभाष बेटा तुम डॉक्टर के पास चले जाओ। मैंने मां से कहा नहीं मां मैं ठीक हूं आप चिंता मत कीजिए उसके बाद मां भी चली गई और मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था। मुझे लगने लगा था कि मुझे बुखार आने लगा है इसलिए मुझे डॉक्टर के पास जाना पड़ा जब मैं डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने मुझे दवाई दे दी। कुछ दिन के बेड रेस्ट के बाद मैं ठीक हो चुका था और फिर मैं रोज की तरह अपने ऑफिस जाने लगा था।

मैं अपने ऑफिस जाने लगा था हमारे ऑफिस में एक नई लड़की आई थी जिसने कुछ दिन पहले ही ऑफिस ज्वाइन किया था उस वक्त मैं घर पर ही था इसलिए मैं उससे मिल नहीं पाया था लेकिन अब हम दोनों का परिचय हो गया था उसका नाम महिमा है। महिमा और मैं एक दूसरे से बाते करने लगे थे हम दोनों की बातें अब कुछ ज्यादा ही होने लगी थी हम दोनों के बीच नजदीकिया बढ़ने लगी थी शायद इसी नजदीकियों के चलते एक दिन हम दोनों के बीच ऑफिस में ही किस हो गया। उस दिन हम दोनों के बीच किस हुआ तो हम दोनों एक दूसरे के और भी करीब आने लगे। महिमा के साथ मुझे बहुत ही अच्छा लगता मै महिमा से जब भी बातें करता तो मेरे अंदर उसको लेकर फीलिंग पैदा हो जाती मैं और महिमा एक दूसरे से बहुत ही ज्यादा बातें करने लगे थे। एक दिन मैंने महिमा को अपने साथ चलने के लिए कहा लेकिन वह मेरे साथ नहीं आई अगले दिन उसने मुझे कहा मुझे आज तुम्हारे साथ समय बिताना है। मैं उसे उस दिन होटल में लेकर चला गया पहले तो वह घबरा रही थी लेकिन उसके बाद मैं उसे होटल में लेकर गया मैं उसे कमरे में ले आया। अब वह अपने आपको अच्छा महसूस कर रही थी मैंने उसके बदन को अपनी बाहों में लेना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी। मैने उसकी जांघो को सहलाकर उसको गरम करना शुरु किया फिर मैंने जब उसके स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया तो उसने कोई आपत्ति नहीं जताई। मैं उसके स्तनों को अपने हाथों से बड़े अच्छे तरीके से दबाने लगा था उसे बहुत मजा आने लगा था मैंने उसको बिस्तर पर लेटा दिया था उसका बदन मेरे सामने था वह मेरे लंड को लेने के लिए बेताब थी। मैंने उसके कपडो को उतारकर उसकी ब्रा के हुक को खोलकर उसकी चूचियो को चूसना शुरू किया। जब मै उसके स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था तो उसके निप्पल खडे होने लगे और मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था। मैंने अपने कपड़े खोलकर अब अपने लंड को उसके पहाड जैसे स्तनों के बीच में रगडना शुरु किया उसे भी मजा आने लगा था। वह पूरे तरीके से उत्तेजित होने लगी अब उसने मेरी गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा दी था। मैं रह नही पा रहा था और ना ही वह रह पा रही थी।

मैंने उसकी चूत पर उंगली लगाई तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ आने लगा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जब मैं उसकी चूत को चाटता तो मुझे उसकी चूत को चाटने में बड़ा मजा आ रहा था। मैंने उसकी चूत को चाटकर उसकी चूत का पानी निकाल दिया था वह पूरी तरीके से मचलने लगी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैं अब गर्म हो चुका था। मैंने अपने मोटे लंड को उसकी योनि पर सटाकर अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया अब मेरा मोटा लंड उसकी चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ गया तो मुझे बहुत ही मजा आना लगा। मेरे अंदर आग पैदा हो गई थी मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा।

मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक दबाया वह पूरे तरीके से गर्म होने लगी थी मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर तेजी से किया। मेरा माल जब बाहर आ गया तो मैंने उसे घोड़ी बनाया  अब वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़े ही अच्छे से करने लगा। वह अब मेरे लिए तड़प रही थी उसने मुझसे अपनी चूतड़ों को बड़े अच्छे से टकराया तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। मेरे अंदर की आग उसने बहुत ज्यादा बढ़ा दी थी वह बोलने लगी और चोदो मुझे। उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा था मेरे लंड से भी बहुत पानी बाहर की तरफ को निकल आया था। मै उसे तेजी से धक्के देने लगा मैं उसको जिस तरह से धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत ज्यादा मजा आता। वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मुझको भी बड़ा मजा आने लगा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मेरा माल उसकी चूत के अंदर गिरा तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला। वह बोली मुझे अब रात भर चोदते रहो और रात भर हम लोग चुदाई करते रहे।


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