पेलकर अंग-अंग हिला दिया


Antarvasna, hindi sex kahani: कुछ दिनों से अपने काम के चलते मैं ललिता को बिल्कुल भी समय नहीं दे पा रहा था मैं अपने ऑफिस के काम में कुछ ज्यादा ही बिजी हो गया था इसलिए शायद उसके लिए मेरे पास समय नहीं था। एक दिन ललिता ने मुझे कहा कि राकेश आप मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हो तो मैंने उसे कहा कि ललिता तुम तो जानती ही हो कि आजकल ऑफिस में कितना ज्यादा काम है और अपने काम से फ्री हो पाना मेरे लिए कितना मुश्किल है तुम तो देख ही रही हो कि मैं घर कितनी देर से आता हूं। ललिता मुझे कहने लगी कि हां राकेश आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं मुझे भी पता है कि आप घर देरी से आते हैं लेकिन आप मुझे यह भी तो बताइए कि आपकी घर को लेकर भी कोई जिम्मेदारियां हैं आप मुझे और बच्चों को बिल्कुल भी समय नहीं देते हैं।

ललिता को मुझसे काफी शिकायतें थी तो मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं कुछ दिनों में तुम लोगों को अपने साथ कहीं लेकर जाऊंगा और थोड़े दिनों बाद मैं जब अपने काम से फ्री हुआ तो मैंने ललिता को कहा कि चलो हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं। उस दिन मैं बच्चों को वाटर पार्क लेकर गया और मैंने ललिता को काफी शॉपिंग भी करवा दी थी जिससे कि वह बहुत खुश हो गई थी। वह मुझे कहने लगी कि मैं बहुत ही खुश हूं कि आपने हम लोगों के लिए कम से कम समय तो निकाला मुझे तो लगने लगा था कि आप हमारे लिए बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पाएंगे। मैं और ललिता एक दूसरे से बात कर रहे थे जब हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे तो मुझे काफी अच्छा लग रहा था इतने समय बाद मैं ललिता के साथ बैठा हुआ था उस दिन हम दोनों छत में साथ में बैठे हुए थे। ललिता ने मुझे बताया कि वह चाहती है कि कुछ दिनों के लिए वह अपने मम्मी पापा से मिल आए तो मैंने उसे कहा ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए अपने मम्मी पापा से मिल आओ। मुझे भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी मैंने ललिता को कहा कि यदि तुम्हें ऐसा लगता है तो तुम अपने मम्मी पापा से मिल आओ और कुछ दिनों के लिए अब ललिता अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए चली गई।

इस बीच एक दिन मुझे मेरे बड़े भैया का फोन आया और वह मुझे कहने लगे कि राकेश मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता थी मैंने भैया को कहा ठीक है भैया मैं आपको पैसे दे दूंगा। भैया मुझे कहने लगे कि अगर तुम्हें समय हो तो तुम मुझसे मिल लेना मैंने उन्हें कहा ठीक है भैया मैं आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगा। उस दिन मैं अपने ऑफिस से फ्री हुआ तो मैं उनसे मिलने के लिए उनके घर पर चला गया मैं जब उनके घर पर गया तो मैंने देखा भैया काफी ज्यादा परेशान लग रहे थे उनका चेहरा पूरी तरीके से उतरा हुआ था। मैंने भैया से जब इसका कारण पूछा तो वह मुझे कहने लगे कि राकेश अब तुम्हें क्या बताऊं मैं बिजनेस में काफी नुकसान झेल चुका हूं और दोबारा से अब मेरा बिजनेस में नुकसान हुआ है तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया हूं और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मुझे ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। मैंने भैया को कहा कि भैया मैं आपको पैसे दे देता हूं मैंने भैया को कुछ पैसे दे दिए थे। भाभी उस दिन मुझे कहने लगी कि राकेश भैया आप हमारे घर पर ही आज खाना खाकर जाइएगा मैंने उन्हें कहा नहीं मैं घर चला जाता हूं लेकिन उन्होंने मुझे उस दिन अपने घर पर ही रुकने के लिए कहा क्योंकि मैं भी घर पर अकेला था तो मैं भी उस दिन भैया और भाभी के साथ ही रुक गया। भैया उस दिन मेरे साथ बैठे हुए थे तो वह मुझे कहने लगे कि राकेश तुमने मेरी मदद की उसके लिए मैं तुम्हारा धन्यवाद कहना चाहता हूं। मैंने भैया से कहा भैया आप ऐसी बात कर के मुझे शर्मिंदा मत कीजिए भैया कहने लगे कि ठीक है मैं तुमसे अब इस बारे में नहीं कहूंगा। अगले दिन मैं अपने ऑफिस भैया के घर से ही चला गया और उसके थोड़े दिनों बाद मुझे भैया का फोन आया तो भैया मुझे कहने लगे कि राकेश मुझे तुम्हारे पैसे लौटाने थे। मैंने भैया को कहा भैया लेकिन इतनी जल्दी भी क्या है आपको पैसे लौटाने की तो वह कहने लगे कि नहीं राकेश मुझे तुम्हारे पैसे तो देने ही है। भैया ने मेरे पैसे मुझे लौटा दिए हालांकि मैं भैया से पैसे लेना नहीं चाहता था क्योंकि उनका बिजनेस में काफी ज्यादा नुकसान हो चुका था इसलिए मैं उनसे पैसे लेना नहीं चाहता था परंतु उन्होंने मुझे पैसे लौटा दिए थे।

मेरी जिंदगी बड़ी सामान्य तरीके से चल रही थी मेरी जिंदगी में फिलहाल तो कुछ नयापन नहीं था मैं सुबह ऑफिस जाता और शाम को घर लौटता। थोड़ा समय मैं अपने बच्चों और ललिता के साथ बिता लिया करता लेकिन मैं चाहता था कि कुछ दिनों के लिए हम लोग कहीं घूमने के लिए जाएं तो मैंने इस बारे में ललिता से बात की। ललिता मुझे कहने लगी कि राकेश मेरी सहेली भी मुझे कह रही थी कि वह और उसके पति शिमला जाने की प्लानिंग कर रहे हैं अगर तुम कहो तो मैं उन लोगों से बात कर लेती हूं हम लोगों को भी कंपनी मिल जाएगी और उन्हें भी अच्छा लगेगा। मैंने ललिता से कहा ठीक है तुम अपनी सहेली से बात करके मुझे बता देना उस वक्त मैं ऑफिस के लिए निकल रहा था तो मैंने ललिता को कहा कि मैं अभी ऑफिस जा रहा हूं। मैं घर से बाहर ही निकला था कि ललिता ने मुझे आवाज देते हुए कहा कि राकेश आप टिफिन भूल गए हैं मैंने ललिता से कहा हां मैं टिफिन भूल गया थ। मैंने उससे टिफिन लिया और मैं ऑफिस चला गया जब मैं ऑफिस से लौटा तो मुझे ललिता ने बताया कि उसकी सहेली और उसके पति हमारे साथ आने के लिए तैयार है।

मैं उसकी सहेली से कभी मिला नहीं था लेकिन हम लोग जब शिमला गए तो तभी हम लोगों की मुलाकात हुई। ललिता ने मुझे ममता से मिलवाया ममता बहुत ही अच्छी है और उसके पति राजेश का व्यवहार भी बहुत अच्छा था। हम लोगों ने शिमला में साथ में काफी इंजॉय किया और मुझे भी काफी अच्छा लग रहा था, काफी समय बाद मुझे कुछ अच्छा महसूस हो रहा था। हम लोगों घर लौट आए थे घर लौटने के बाद ममता का भी हमारे घर पर अक्सर आना जाना लगा रहता था। वह लोग कुछ समय पहले की नया घर लेकर हमारे पड़ोस में ही शिफ्ट हुए थे अब उन लोगों का हमारे घर पर अक्सर आना जाना लगा रहता था ललिता अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए कुछ दिनों के लिए गई हुई थी और वह बच्चों को भी अपने साथ लेकर गई थी। उस बीच में घर पर अकेला था ममता जब घर पर आई तो ममता मुझसे कहने लगी राकेश क्या आप घर पर अकेले ही हैं तो मैंने ममता को कहा हां वह मुझे कहने लगी मुझे नहीं पता था कि ललिता अपने मायके गई हुई है। मैंने उस दिन ममता को कहा ममता तुम हमारे साथ कुछ देर के लिए बैठ जाओ वह कुछ देर के लिए बैठ गई अब वह मेरे साथ बैठ चुकी थी जब वह मेरे साथ बैठी तो हम दोनों बात करने लगे ममता भी कहीं ना कहीं अपने आपको बहुत अकेला महसूस कर रही थी हम दोनों अब एक दूसरे से बात करने लगे थे उस दिन हम दोनों एक दूसरे को देखकर कुछ ज्यादा ही उत्तेजित होने लगे थे। जब मैंने ममता की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी वह समझ चुकी थी कि उसके अंदर की गर्मी बढ़ चुकी है। अब मैंने उसके स्तनों को भी दबाना शुरू कर दिया था वह और भी ज्यादा खुश होने लगी हम दोनों अब एक दूसरे को चुम्मा चाटी करने लगे उसके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर की आग भी बढ़ चुकी थी मैंने उसे कहा मैं बहुत ही ज्यादा गरम हो चुका हूं मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है अब वह मेरा साथ अच्छे से देने लगी थी।

मेरे अंदर की गर्मी को उसने पूरी तरीके से बढ़ा दिया था कहीं ना कहीं हम दोनों एक दूसरे के बिना अब रह नहीं पा रहे थे मैंने उसके कपड़े उतारकर जब उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा था। उसके स्तनों के बीच में मैंने अपने लंड को रगड़ना शुरू किया तो वह मचलने लगी उसने मुझे कहा मैं तुम्हारे लंड को मुंह में लेना चाहती हूं मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था वह भी पूरी तरीके से गरम हो गई थी। अब हम दोनों बिल्कुल भी रह नही पा रहे थे हम दोनों पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे। उसने मुझे कहा तुम मेरी चूत मार लो मैंने उसकी चूत में अपने लंड को घुसाया और उसकी चूत के अंदर मेरा लंड जाते ही वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे और तेजी से चोदो उसकी चूत बहुत टाइट थी। अब मैंने उसके दोनों पैरों को आपस में मिला लिया और उसे बड़ी ही तीव्र गति से मे चोदने लगा था मुझे बहुत मजा आने लगा था जिस प्रकार से मैं उसे चोद रहा था।

उसकी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर कि आग भी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी मेरे अंदर की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था वह जिस प्रकार से मुझे कहती तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा अब मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदना चाहता हूं मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो मुझे बहुत ही मजा आने लगा मै जिस प्रकार से उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था उससे उसके अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर की आग भी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी मेरे वीर्य की पिचकारी को मैंने उसकी चूत में गिरा कर उसकी चूत की शोभा बना दिया वह खुश हो गई थी हम दोनों ने अपने कपड़े पहने। उसके बाद वह अपने घर चली गई लेकिन जब भी मुझे ऐसा लगता कि मुझे ममता को चोदना है तो मैं उसे चोद लिया करता।


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