पेल पेल कर छील डाला


Antarvasna, kamukta: मेरी शादी शुदा जिंदगी बिल्कुल भी ठीक नहीं चल रही थी मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं इन 5 वर्षों में मेरे और मेरी पत्नी के बीच में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। मैं अपनी ही कॉलोनी में रहने वाली महिमा को प्यार किया करता था लेकिन महिमा की शादी हो जाने के बाद मैंने भी शादी करने का फैसला किया। मेरे परिवार वालों ने जब मुझसे मेरी शादी की बात की तो मैं भी मान गया और मेरी शादी संजना के साथ हो गई। संजना से जब मेरी शादी हुई तो उस वक्त तो सब कुछ ठीक चल रहा था हम दोनों के बीच काफी अच्छा रिलेशन चल रहा था लेकिन समय के साथ साथ हम दोनों के बीच झगड़े भी बढ़ने लगे और एक समय ऐसा आया जब हम दोनों के बीच काफी ज्यादा झगड़े होने लगे थे मैं अब संजना के साथ बिल्कुल भी नहीं रहना चाहता था। एक दिन संजना ने कहा कि मैं अपने घर जा रही हूं और वह अपने मायके चली गई मैंने संजना से करने की सोची और जब मैंने संजना से बात की तो संजना  मुझे कहने लगी कि रजत मुझे मालूम है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ बिल्कुल भी नहीं रह सकते। संजना ने भी पूरा फैसला कर लिया था और उसने मुझे कहा कि हम दोनों को अलग हो जाना चाहिए उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे से डिवोर्स ले लिया।

जब मैंने संजना से डिवोर्स लिया तो उसके बाद मेरी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था मेरा बिजनेस में भी नुकसान होने लगा और मेरी जिंदगी में सब कुछ बदलता जा रहा था मैं बिल्कुल भी खुश नहीं था। कुछ समय के लिए मैं कहीं अकेले में जाना चाहता था मैंने जब अपने दोस्त सुरेश को फोन किया तो उसने मुझे कहा कि हम लोग कुछ दिनों के लिए शिमला हो आते हैं। मैंने सुरेश के साथ जाने का फैसला कर लिया था सुरेश मेरे बचपन का दोस्त है और सुरेश को मेरे डिवोर्स के बारे में पता चल चुका था और उसे यह भी मालूम था कि मेरे बिजनेस में हुए नुकसान से मेरी जिंदगी में काफी कुछ बदलने लगा है। मैंने सुरेश को कहा मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हूं क्योंकि मेरी जिंदगी में अब कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। सुरेश मुझे कहने लगा कि रजत तुम भरोसा रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा। उसने मुझे यह कहा तो मुझे लगा कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा और सुरेश ने मेरी मदद भी की। सुरेश ने मुझे कुछ पैसे भी दिए जिससे कि मैं अपने बिजनेस में हुए नुकसान की भरपाई कर पाया और दोबारा से अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने लगा। मेरा संजना से कोई भी संपर्क नहीं था और ना ही वह मुझसे बात किया करती थी।

मुझे लगने लगा था कि मुझे किसी की जरूरत है जो की मेरा साथ दे पाए लेकिन मुझे अभी तक समझ नहीं आया कि मेरी जिंदगी में संजना के दूर जाने की वजह क्या है परन्तु मैं इन सब चीजों को भूल कर अब आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था। हमारे पड़ोस में ही एक फैमिली रहने के लिए आई जब वह लोग हमारे पड़ोस में रहने के लिए आये तो उन लोगों से मेरा काफी अच्छा परिचय हो गया था। उनसे मेरी काफी अच्छी दोस्ती होने लगी लेकिन जब उन्हें मेरे डिवोर्स के बारे में मालूम पड़ा तो उन्होंने मुझसे कहा कि हमारी नजर में एक लड़की है अगर तुम कहो तो हम उससे तुम्हारी शादी की बात कर सकते हैं। मुझे नहीं मालूम था कि वह लड़की कैसी होगी लेकिन मैं उससे मिलना चाहता था और मैं जब आशा को मिला तो मुझे आशा से मिलकर अच्छा लगा। आशा और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे और हम दोनों एक दूसरे को जानने की कोशिश करने लगे। आशा की जिंदगी में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था क्योंकि उसका भी डिवोर्स हो जाने के बाद उसकी जिंदगी भी काफी बदल चुकी थी।

आशा को भी किसी के साथ की जरूरत थी आशा और मैं एक ही नाव में सवार थे और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा था जब मैं आशा के साथ समय बिताया करता। आशा और मैं एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश भी रहते। हम दोनों के बीच प्यार कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था और हम दोनों चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ शादी कर ले। मैंने आशा से इस बारे में कहा तो आशा को भी मेरी इस बात से कोई एतराज नहीं था क्योंकि आशा को मुझ पर पूरा भरोसा हो चुका था और हम दोनों की फैमिली भी हम दोनों की शादी के लिए मान चुके थे। मैंने आशा के साथ कोर्ट मैरिज कर ली उसके बाद आशा मेरी पत्नी बन चुकी थी। मैं बहुत ज्यादा खुश था कि आशा मेरे जीवन में आ चुकी है और हम दोनों एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा खुश रखने की कोशिश करते हैं और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय भी बिताते। मैं नहीं चाहता था कि मेरी जिंदगी अब पहले की तरह ही हो जाए इसलिए मैंने आशा को कभी भी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। आशा मेरे साथ काफी ज्यादा खुश थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था कि आशा मेरे जीवन में आ चुकी है। हम दोनों की जिंदगी अच्छे से चल रही थी आशा और मैं जब भी साथ होते तो मुझे काफी अच्छा महसूस होता।

आशा और मै साथ में थे उस दिन हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। आशा को देखकर उस दिन मेरा मन आशा के साथ सेक्स करने का हो रहा था आशा मेरा सेक्स में भरपूर साथ दिया करती। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स किया करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो आशा ने उसे देखते ही अपने हाथों में लिया और उसे हिलाते हुए कहने लगी आज आपका मन मेरे साथ सेक्स करने का है। मैंने आशा को कहां क्या तुम्हें बताने की जरूरत है। आशा इस बात से बहुत ज्यादा खुश थी और उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया तो मुझे अच्छा लगने लगा। आशा मेरे मोटे लंड को अच्छे से अपने मुंह के अंदर ले रही थी वह उसे बहुत ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर लेकर चूस रही थी मुझे बहुत ही अच्छा लगता। आशा को भी बड़ा मजा आता हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स का जमकर मजा लेना चाहते थे। मैंने आशा को कहा तुम अपने कपड़े उतारो आशा ने अपने कपड़े उतार दिए। जब आशा ने अपने कपड़े उतारे तो उसके बाद मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ने लगी और मैंने आशा के स्तनों को चूसना शुरू किया।

मै कुछ देर तक उसके स्तनों को चूसता रहा फिर मैंने आशा को कहा मैं अब तुम्हारी चूत को चाटना चाहता हूं। मैंने आशा की पैंटी को नीचे उतारकर उसकी योनि को चाटना शुरू किया। जब मैंने ऐसा करना शुरू किया तो उसे मज़ा आने लगा और वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। हम दोनों के अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी मैंने आशा को कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना चाहता हूं। आशा ने कहा मेरी चूत भी तुम्हारे लंड को अपनी योनि में लेने के लिए तैयार है। मैंने भी धीरे से अपने लंड को आशा की योनि के अंदर घुसाना शुरू किया जैसे जैसे मेरा लंड आशा की चूत के अंदर की तरफ जाने लगा तो आशा मुझे कहने लगी तुम मुझे और भी तेजी से धक्के मारते रहो। मैंने आशा को बहुत ज्यादा तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे। आशा की चूत के अंदर बाहर मेरा मोटा लंड आसानी से हो रहा था जिससे कि मुझे मज़ा आ रहा था और मैं उसे लगातार तीव्र गति से धक्के मार रहा था मैंने आशा को तब तक चोदा जब तक की आशा की चूत के अंदर की गर्मी नहीं बढ़ गई। आशा मुझे कहने लगी मुझे अब तुम घोड़ी बनाकर चोदा।

मैंने अपने लंड को बाहर निकाल और अपने लंड पर तेल लगाया। मैंने आशा से कहा मैं अब तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा रहा हूं। मैंने आशा की चूत में अपने लंड को घुसा दिया। मेरा लंड आशा की योनि में घुस चुका था जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मेरा मोटा लंड आशा की चूत के अंदर बहार बड़ी आसानी से हो रहा था। जब मैं आशा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और आशा को भी मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। अब आशा मेरे अंदर की गर्मी को काफी ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं आशा को लगातार तेज गति से धक्के मारता जिससे कि मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और हम दोनों को मजा आ रहा था। वह अपनी सिसकारियो से मेरी गर्मी को बढ़ा रही थी। उसने मेरी गर्मी को दो गुना बढ़ा दिया था।

मैंने उस से कहां मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर से निकलती हुई गर्मी अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। मुझे भी साफ महसूस होने लगा था कि उसकी योनि के अंदर से पानी बहुत ज्यादा बाहर की तरफ को निकलने लगा है और उसकी चूत के अंदर मुझे अपने माल को गिराना पड़ेगा। मैंने आशा की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया। मेरा माल आशा की चूत मे गिर चुका था। जब मैंने ऐसा किया तो आशा को बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा और वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ लेटे हुए थे आशा मुझे कहने लगी आज मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैंने आशा को कहा मुझे तो हमेशा ही अच्छा लगता है जब भी मैं तुम्हारे साथ चुदाई करता हूं।


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