पति की आंखो में धूल झोंककर चुदाई


Antarvasna, hindi sex kahani: ऑफिस जाते वक्त मेरी सासू मां का मुझे फोन आया और वह मुझसे कहने लगी कि संगीता कल रात को मैंने तुम्हें फोन किया था लेकिन तुमने फोन नहीं उठाया सब ठीक तो है ना। मैंने अपनी सासू मां से कहा हां मां जी सब कुछ ठीक है वह कहने लगे संगीता बेटा यदि कोई समस्या है तो तुम हम लोगों को बता सकती हो। मैंने कहा नहीं मांजी कोई भी समस्या की बात नहीं है, मैंने उन्हें कहा मुझे अभी ऑफिस के लिए देर हो रही है मैं आपसे शाम के वक्त बात करती हूं। वह कहने लगी कि ठीक है बेटा तुम शाम को फोन करना मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगी और यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया। राकेश मुझे कहने लगे संगीता किसका फोन था तो मैंने उन्हें बताया कि मम्मी का फोन था वह कहने लगे कि मम्मी क्या कुछ कह रही थी। मैंने उन्हें कहा नहीं कुछ भी तो नहीं बस वह बात करना चाह रही थी मैंने उन्हें कहा कि मैं शाम को आपको फोन करती हूं। वह कहने लगे कि चलो भी ऑफिस के लिए देर हो रही है जल्दी से हम लोग चलते हैं। मैं और राकेश अपने ऑफिस के लिए निकल पड़े राकेश और मैं एक ही ऑफिस में काम करते हैं हम लोग नागपुर के रहने वाले हैं।

नागपुर में कॉलेज के दौरान मेरी और राकेश की मुलाकात हुई हम दोनों की मुलाकात आगे बढ़ती चली गई और हम दोनों की नजदीकियां इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने राकेश को जब अपने पापा मम्मी से मिलवाया तो वह लोग राकेश से मिलकर बहुत खुश हुए। उस वक्त राकेश भी जॉब नहीं कर रहे थे लेकिन हम दोनों ने फैसला किया कि हम दोनों अपनी नई जिंदगी शुरु करेंगे। राकेश की जॉब थोड़े ही समय बाद मुंबई में लग गई और मैं भी शादी के बाद राकेश के साथ ही रहने लगी। राकेश और मैं दोनों एक ही कंपनी में जॉब करते हैं कभी-कभार हम लोग नागपुर चले जाया करते हैं लेकिन काफी समय से हम लोग नागपुर नहीं गए थे तो मम्मी चाहती थी कि हम लोग नागपुर कुछ दिनों के लिए आ जाएं। जब राकेश और मैं शाम के वक्त ऑफिस से घर लौटे तो मुझे राकेश ने कहा कि तुम मम्मी को फोन कर दो। मैंने भी मम्मी को फोन किया और जब मैंने मम्मी को फोन किया तो उनसे मेरी बात काफी देर तक हुई उन्होंने मुझे बताया कि पड़ोस में रहने वाली सरला दीदी के लड़के का रिश्ता भी हो चुका है। मैंने मां जी से कहा मांजी रोहन का भी रिश्ता हो चुका है तो वह कहने लगे कि हां उसने भी अब शादी करने का फैसला कर लिया है।

मेरी बात उनसे करीबन 45 मिनट तक हुई और उसके बाद मैंने फोन रखा तो राकेश मुझसे पूछने लगे कि मम्मी क्या कह रही थी। मैंने राकेश को कहा पड़ोस में रहने वाले रोहन की सगाई हो चुकी है और थोड़े समय बाद उसकी शादी होने वाली है। रोहन और राकेश के बीच अच्छी दोस्ती थी लेकिन काफी समय से रोहन राकेश की मुलाकात नहीं हुई थी। एक दिन हम लोग ऑफिस से घर लौट रहे थे तो राकेश मुझे कहने लगे कि संगीता कुछ दिनों के लिए हम लोग नागपुर हो आते हैं। मैंने राकेश को कहा हां वैसे तो मैं भी सोच रही थी कि हम लोगों को कुछ दिनों के लिए नागपुर चले जाना चाहिए और हम लोग कुछ दिनों के लिए नागपुर जाने के लिए तैयार हो गए। जब हम लोग नागपुर के लिए निकले तो उस वक्त ट्रेन में हमें रिजर्वेशन नहीं मिल पा रहा था राकेश मुझसे कहने लगे कि हम लोग बस से ही नागपुर चलते हैं। मैंने राकेश को कहा ठीक है हम लोग बस से ही नागपुर चलते हैं और हम लोग जब नागपुर पहुंचे तो पापा मम्मी से मिलकर राकेश बहुत खुश थे और मुझे भी अच्छा लगा कि कुछ दिनों तक मैं भी अपने ससुराल में रहूंगी। हम लोगों ने 10 दिनों की छुट्टी ली थी और कुछ दिन तो मैं अपने ससुराल में रही और फिर मैं अपने मायके चली गई। जब मैं अपने मायके गई तो मेरी मम्मी कहने लगी की बेटी तुम बहुत दुबली पतली हो गई हो मैंने मम्मी को कहा मम्मी आपको तो हमेशा ऐसा ही लगता है। मम्मी मुझसे कहने लगी कि क्या तुम लोग अपने खाने पर ध्यान नहीं देते हो मैंने मम्मी को कहा नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन मम्मी इस बात से बड़ी चिंतित थी और वह मुझे कहने लगी कि बेटा तुम खुद ही खाना बनाया करो। मैंने मम्मी को कहा मम्मी हम लोगो ने अपने घर में काम करने वाली बाई को रखा हुआ है वह सुबह आकर नाश्ता बना दिया करती है लेकिन मम्मी तो जैसे मेरे पीछे ही पड़ गई थी।

मैंने मम्मी को कहा कि हां मम्मी मैं अपना ध्यान रखूंगी कुछ दिनों तक तो मैं घर पर ही रही और उसके बाद मैं अपने ससुराल लौट गई हमें पता ही नहीं चला कि कब 10 दिन बीत गये। राकेश कहने लगे कि कुछ पता ही नहीं चला कि कब छुट्टियां खत्म होने वाली हैं अब हम दोनों मुंबई लौट चुके थे जब हम लोग मुंबई लौटे तो उस दिन राकेश के एक दोस्त का फोन आया और उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे का बर्थडे है। राकेश के दोस्त नागपुर में राकेश के साथ स्कूल में पढ़ा करते थे इसलिए वह मुझे भी पहचानते हैं राकेश ने मुझे कहा कि संजीव के बच्चे का बर्थडे है और वह हमें आज घर पर इनवाइट कर रहा है। मैंने राकेश को कहा हमें उनके घर जाना चाहिए तो राकेश कहने लगा कि हम लोग वहां जाएंगे और हम लोग जब संजीव के घर गए तो संजीव की पत्नी लता से मिलकर मुझे अच्छा लगा। राकेश और संजीव साथ में बैठ कर बात कर रहे थे संजीव ने मुझसे कहा कि भाभी जी राकेश आपका ध्यान तो रखता है। मैंने संजीव को कहा हां राकेश मेरा ध्यान रखते है और वह मुझसे राकेश बहुत प्यार करते है इस पर राकेश बोल उठे क्या तुम भी लता भाभी का ध्यान रखते हो। वह मुझे कहने लगा कि हां मैं लता का पूरा ध्यान रखता हूं मुझे भी इस बात की खुशी थी कि हम लोग साथ में एक अच्छा समय बिता पाए। जब हम लोग घर लौटे तो मैंने राकेश को कहा संजीव दिल के बहुत ही अच्छे हैं।

राकेश कहने लगे हां संजीव दिल का बहुत ही अच्छा है जब भी मुझे संजीव की मदद की जरूरत पड़ी है तो संजीव हमेशा ही मेरे साथ खड़ा हुआ है और मुझे इस बात की खुशी है कि संजीव जैसा दोस्त मुझे मिल पाया। हम लोग घर लौट आए थे कुछ दिनों के लिए राकेश को आपसे किसी काम के सिलसिले में जाना था और राकेश चले गए। मैं हर रोज की तरह ऑफिस के लिए निकलती और शाम को घर लौट आती मेरे जीवन में कुछ नया नहीं था जिंदगी बिल्कुल ठहर सी गई थी। एक दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौट रही थी मुझे उस दिन एक जोड़ा दिखाई दिया वह दोनों एक दूसरे को कैसे प्यार कर रहे थे यह सब देखकर मुझे भी अपने पुराने दिन याद आने लगे कैसे मैं और राकेश एक दूसरे के साथ प्यार किया करते लेकिन शादी को समय बीत जाने के बाद हम दोनों जैसे अपनी जिंदगी में बिजी हो गए थे हालांकि हम दोनों एक साथ ही ज्यादातर रहते लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों के बीच में प्यार नहीं होता था मैं उसी प्यार की तलाश में थी। मुझे लगा कि शायद वह प्यार मुझे मिल जाएगा ऐसा नहीं हुआ हमारे पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति जिनका नाम कौशल है कौशल अक्सर मुझे देखा करते थे। मैं उनसे बड़े अच्छे से बात किया करती राकेश अभी तक अपना काम से लौटे नहीं थे मैं घर पर अकेली ही थी। कौशल को मैंने जब घर पर बुलाया वह आ गए मुझसे वह बात कर रहे थे मैं उनकी बातों बडी खुश हो जाती। कौशल ने जब मेरी जांघ पर अपने हाथ को रखा मैं उनके इरादे समझ गई लेकिन मैंने कोई आपत्ति नहीं जताई क्योंकि मैं भी अपने जीवन में कुछ नया चाहती थी जब कौशल ने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया तो मैं भी उनकी बाहों में जाने लगी उन्होंने मुझे अपनी बाहों में समा लिया। जब उन्होंने अपनी बाहों मे लिया तो मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सकी मेरी चूत से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था उन्होंने मेरे कपड़ों को उतारा और मेरे स्तनों को चूसने लगे।

जब उन्होंने मेरे स्तनों का रसपान किया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा जैसे ही उन्होंने मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसाना शुरू किया तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाई मेरी चूत से पानी निकलने लगा मैंने कौशल को कहा आप मेरी चूत को भी चाटिए। उन्होंने मेरी चूत को बहुत देर तक चाटा मै पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी उन्होंने जैसे ही मेरी चिकनी और मुलायम चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी वह मुझे बड़ी तेजी से धक्के मार रहे थे और जिस प्रकार से उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर मेरी चूत मारनी जारी रखी उससे मुझे यही लग रहा था वह मेरी चूत का भोसड़ा बना कर ही मानेंगे। थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और कहा मेरा वीर्य गिरने वाला है मैंने जल्दी से उनके लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे बहुत देर तक चूसती रही उनके लंड से निकलता हुआ वीर्य मेरे मुंह के अंदर जा चुका था कुछ ही देर बाद उनका लंड वैसे ही तन कर खड़ा हो गया।

उन्होंने भी अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाला और मेरी चूतड़ों को कस कर पकड़ा वह मेरी चूतड़ों पर प्रहार करते तो मेरी चूतड़ों का रंग लाल हो जाता वह बड़ी तेजी से मुझे धक्के मारते जिससे कि मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था मै पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी थोड़ी देर बाद उन्होने मेरी चूत मे वीर्य गिराया मुझे बहुत खुशी हुई वह भी बहुत खुशी थे। राकेश अपने काम से लौट चुके थे जब भी मुझे कौशल की जरूरत पड़ती तो वह हमेशा ही मुझसे मिलने के लिए घर पर आ जाया करते थे हालांकि हम दोनों को कम मौके मिल पाते थे लेकिन मैं भी राकेश की आंखों में धूल झोंककर कौशल के साथ रंगरलिया मना ही लेती थी।


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