पहली चुदाई बनी यादगार


Antarvasna, kamukta: मेरे और आकाश की दोस्ती बहुत ही ज्यादा पुरानी है। हम दोनों स्कूल से साथ में पढ़ा करते थे लेकिन अब आकाश और मेरे बीच बिल्कुल भी नहीं बनती क्योंकि यह सब महिमा की वजह से हुआ है। महिमा आकाश की बहन है मुझे भी नहीं मालूम था कि मुझे महिमा से प्यार हो जाएगा और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगेंगे। जब यह बात आकाश को पता चली तो हम दोनों के बीच बहुत ही गहरी दरार आ गई। हम दोनों की दोस्ती अब बिल्कुल भी अच्छी नहीं चल रही थी क्योंकि आकाश मुझसे बात ही नहीं करता है था। मैंने आकाश को इस बारे में समझाया भी था लेकिन आकाश ने मेरी एक बात न सुनी और कहने लगा तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। आकाश महिमा और मेरे प्यार के बीच मे खड़ा था क्योंकि आकाश की वजह से उसके पापा मम्मी भी हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे थे और हम दोनों का मिलना भी मुश्किल हो गया था। महिमा को उसके माता-पिता ने उसके मामा जी के पास भेज दिया था। महिमा अपने मामा जी के पास चली गई थी और मेरी उससे मुलाकात भी नहीं हो पाती थी वह चंडीगढ़ में रहती थी। मेरी ना ही महिमा से फोन पर बात होती थी और ना ही वह मुझसे बात कर पाती थी कभी कभार वह बहुत चोरी छुपे मुझे फोन कर दिया करती थी लेकिन मैं नहीं चाहता था कि अब ज्यादा समय तक ऐसा चले और ना ही महिमा चाहती थी।

महिमा मुझसे हमेशा कहती गौतम मुझे अपने साथ लेकर चलो लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था आखिर मुझे क्या करना चाहिए। इस बारे में जब मैंने अपने पापा मम्मी से बात की तो उन्होंने मुझे समझाया और कहा देखो गौतम बेटा तुम महिमा को भूल जाओ और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था मैं महिमा को भूल नहीं सकता था। मैं नहीं चाहता था महिमा मुझसे दूर हो इसलिए तो मैंने पापा मम्मी से कहा मैं महिमा को भूल नहीं सकता हूं लेकिन वह लोग तो चाहते थे मै महिमा को भूल कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाऊं लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि मैं महिमा को बहुत ज्यादा प्यार करता हूं। मैं महिमा के बिना एक पल भी रह नहीं सकता हूं मेरे पास और कोई भी रास्ता नहीं था मैंने महिमा को कहा महिमा तुम्हें कुछ समय का इंतजार करना पड़ेगा और मैं भी अब अपनी नौकरी पर पूरी तरीके से ध्यान देने लगा था।

मैं पहले जिस कंपनी में जॉब करता था वहां से मैंने जॉब से रिजाइन दे दिया था मैंने अपनी जॉब से रिजाइन देने के बाद महिमा से कुछ समय तक तो बात नहीं की थी लेकिन अब महिमा ने अपने परिवार वालों को हमारे रिश्ते के लिए मना लिया था वह लोग भी मान चुके थे और वह चाहते थे कि मैं महिमा से शादी कर ले। हम दोनो की शादी हो पाना भी इतना आसान नहीं था क्योंकि महिमा ने आकाश से अभी तक इस बारे में कोई बात नहीं की थी हालांकि महिमा के पापा मम्मी तो हम दोनों की शादी के लिए तैयार हो चुके थे लेकिन आकाश को अभी भी महिमा और मेरे रिश्ते से ऐतराज था। मैंने एक दिन आकाश को फोन किया और आकाश को कहा मैं तुमसे मिलना चाहता हूं। जब उस दिन में आकाश को मिला तो आकाश काफी ज्यादा गुस्से में नजर आ रहा था आकाश ने मुझे कहा गौतम तुमने हमेशा ही मेरे साथ गलत किया है। मैंने आकाश को कहा ऐसा कुछ भी नहीं है तुम गलत समझ रहे हो। जब मैंने आकाश उस दिन कहा आकाश अब सब लोग हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार कर चुके हैं लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम भी बात मान जाओ। मैंने आकाश को काफी समझाया और कहा अब तुम यह सब भूल जाओ लेकिन आकाश मेरी बात नहीं माना और उस दिन मैं अपने घर लौट आया था। मैंने महिमा से बात की, मेरी और महिमा की फोन पर बात होने लगी थी। मैने महिमा को कहा आकाश हम दोनो के रिश्ते के लिए अब भी तैयार नही है। महिमा बोली कोई बात नहीं मै भैय्या को भी मना लूंगी। महिमा अब दिल्ली लौट आई थी महिमा के पापा मम्मी तो हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे और उन लोगों को मेरे और महिमा के रिश्ते से कोई भी ऐतराज नहीं था। सब कुछ हम दोनों की जिंदगी में अच्छे से चल रहा था लेकिन आकाश को हम दोनों के रिश्ते से ऐतराज था परंतु समय के साथ-साथ आकाश ने भी हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार कर लिया। सब कुछ हम दोनो की जिंदगी मे सामान्य हो गया था। अब हमारी शादी हो गई महिमा मेरी पत्नी बन गई। मै महिमा को पत्नी के रूप मे पाकर बहुत खुश हो गया था और महिमा भी बहुत ही खुश थी। शादी की पहली रात महिमा और मै साथ मे थे। मैंने महिमा के बदन को छुआ तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैं उसके गोरे बदन को महसूस कर रहा था। हम दोनो ही अब एक दूसरे के लिए तडप रहे थे। मेरे अंदर की आग अब बढ़ती जा रही थी मैंने उसके बदन को अच्छे से सहलाना शुरु कर दिया था। जब मैं ऐसा कर रहा था तो वह पूरी तरीके से गरम हो गई थी। मैंने उसके गुलाबी होठों को चूमना शुरू कर दिया था। महिमा के होठों से मैने खून निकाल दिया था। मुझे मजा आने लगा था। मेरे लंड से भी पानी निकलने को तैयार था। मैने महिमा की ब्रा को उतारा तो मै उसके स्तनो को देखता रहा। जब मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरु किया तो मुझे मजा आने लगा था। मैं उसके स्तनों को दबाता जा रहा था और मुझे बहुत ही मजा आता। महिमा पूरी तरीके से मचलने लगी थी वह मुझे कहने लगी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं। वह अपने पैरो को आपस मे मिलाने लगी थी मै भी उसकी आग पूरी तरीके से बढा चुका था। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो महिमा मेरे लंड को देख बोली कितना मोटा लंड है। मैने उसे कहा तुम इसे अपने मुंह में लेकर चूसा। वह बोली नहीं मै तुम्हारे लंड को मुंह मे नहीं ले सकती। मैने उसे कहा तुम एक बार तो मेरे लंड को मुंह मे लो। उसने लंड को मुंह मे ले लिया और वह मेरे लंड को चूसने लगी। वह जिस तरह से मेरे लंड को चूस रही थी उस से मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था।

उसने मेरे लंड को गले तक ले लिया था वह खुश हो गई थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूस रही थी वह मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ाती जाती। मैने महिमा की पैंटी को खोल दिया और मैं अब उसकी चूत को चाटने लगा था। मै जब उसकी चूत को चाट रहा था तो उसे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे उसकी चूत को चाटने में इतना मजा आने लगा कि उसकी चूत से निकलता हुआ पानी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था। मैंने काफी देर तक महिमा की चूत का रसपान किया और उसे गरम कर दिया था। जब मैंने अपने मोटे लंड को महिमा की चूत के अंदर डालाने की कोशिश की तो मेरा लंड अंदर नहीं गया। अब मैने लंड पर तेल लगाया और महिमा की चूत को मेरा लंड फाडता हुआ अंदर चला गया वह जोर से चिल्लाई और बोली मेरी चूत मे दर्द हो रहा है। मै उसे तेजी से चोदता रहा और मैने उसे बोला कुछ देर रूक जाओ तुम्हे भी मजा आएगा। कुछ देर बाद वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा था। मैं महिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बडी आसानी से कर रहा था। उसकी चूत से खून बाहर निकल रहा था इस बात से मै बहुत ही ज्यादा खुश हो था। महिमा मुझे कहने लगी मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही अधिक मात्रा में खून निकलने लगा है। मै खुश था महिमा की सील पैक चूत मारकर मैंने उसे कहा मैं बिल्कुल भी नहीं रह पा रहा हूं। अब मुझे बहुत मजा आ रहा था मै महिमा को तेजी से चोद रहा था। वह मुझे अपने दोनों पैरों के बीच मे मुझे जकडने लगी। जब उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ना शुरू किया तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा था और महिमा की चूत मुझे टाइट महसूस हो रही थी।

मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो चुका था। मैने अपने माल को महिमा की चूत मे गिरा दिया और मै उसके ऊपर से लेटा हुआ था मेरा लंड अभी भी महिमा की चूत मे था। मैने अपने लंड को बाहर निकाला और महिमा को कहा मुझे तुम्हे चोदना है वह बोली मार लो मेरी चूत। मैंने दोबारा महिमा की चूत मे लंड लगाया उसकी चूत से अभी भी वीर्य बाहर की तरफ निकल रहा था। उसकी चूत से निकलता हुआ वीर्य बहुत अधिक था। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़ लिया और मैने  उसकी मोटी जांघ को कसकर पकड़ा हुआ था। मैने अपने लंड को महिमा की चूत मे डाला अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरा लंड महिमा की चूत मे जा चुका था। उसकी चूत और मेरे लंड की टक्कर से जो गर्मी पैदा होती वह मेरे शरीर मे गर्मी पैदा कर रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। जब मैंने महिमा को घोडी बनाया और उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा तो उसकी चूत के अंदर बाहर मेरे अपने लंड हो रहा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था। वह मेरा साथ बड़े ही अच्छे से दे रही थी। मै उसकी चूतड़ों पर जिस प्रकार से प्रहार करता उससे एक अलग ही आवाज पैदा होती जा रही थी। महिमा की चूतडे लाल हो गई थी। मैंने उसे बहुत देर तक ऐसे ही चोदा जब मुझे एहसास होने लगा मैं ज्यादा समय तक अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा तो मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत में वीर्य गिराने जा रहा हूं। वह बोली मेरी चूत मे माल गिरा दो। महिमा की चूत के अंदर मैंने अपने वीर्य को गिराकर अपनी पहली रात को सफल बना दिया। मै और महिमा एक दूसरे की बांहो मे थे।


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