पहला हनीमून टूर


Antarvasna, hindi sex story: मेरे कॉलेज का पहला दिन था और मैं जब कॉलेज में पहले दिन गया तो उस दिन मैंने ज्यादा किसी से भी बात नहीं की बस मेरी सबसे पहली बार बात निखिल के साथ हुई। निखिल और मेरे बीच अच्छी दोस्ती हो गई और यह पहली बार था जब निखिल और मैंने एक दूसरे से बात की थी समय के साथ पता ही नहीं चला कि कब हम लोगों के दो वर्ष पूरे हो गए। अब मेरा ग्रेजुएशन भी पूरा हो चुका था लेकिन निखिल के साथ मेरी दोस्ती अभी भी वैसी ही थी जैसे कि पहले थी हम दोनों एक दूसरे को हमेशा ही मिलते। मैं अपनी पोस्ट ग्रेजुएश की पढ़ाई करने के लिए पुणे चला गया पुणे से ही मैं आगे की पढ़ाई करना लगा और निखिल अभी भी चंडीगढ़ में ही रहता था उससे मेरी बातचीत होती रहती थी। एक दिन निखिल ने मुझे कहा कि तुम्हें मेरी बहन की शादी में आना है तो मैंने निखिल को कहा कि ठीक है निखिल मैं तुम्हारी बहन की शादी में जरूर आऊंगा। निखिल मेरा इतना अच्छा दोस्त है तो मैं उसकी बात को नहीं टाल सकता था और मैं उसकी बहन की शादी में चला गया।

इस बहाने कुछ दिन के लिए ही सही लेकिन मैं अपने घर पर भी अपने मम्मी-पापा के साथ समय बिता पाया। मैं जब निखिल की बहन की शादी में गया तो उस शादी में मैं पहली बार सुहानी को मिला मुझे उसे देखकर ऐसा लगा जैसे सुहानी को मैं कहीं मिल चुका हूं लेकिन मुझे ध्यान नहीं आ रहा था कि सुहानी से इससे पहले मेरी कहीं मुलाकात हुई है। निखिल ने मुझे सुहानी से मिलाया क्योंकि वह निखिल के पड़ोस में रहती है इसलिए मैंने निखिल से कहा तो निखिल ने उस से मेरी मुलाकात करवाई। हम दोनों की बातचीत होने लगी तो एक दिन मैंने सुहानी से इस बारे में पूछ ही लिया तो सुहानी ने मुझे बताया कि हम लोग एक बार पहले भी मिल चुके है। मैंने सुहानी से कहा कि लेकिन हम लोग इसे पहले कब मिले थे सुहानी मुझे कहने लगी कि शायद तुम्हें याद नहीं है लेकिन हम लोग इससे पहले भी एक शादी के दौरान ही मिले थे और तुम उस दिन अपने मामा जी के लड़के के साथ थे उसी ने मुझे तुमसे मिलवाया था लेकिन तुमने शायद इस बात पर गौर नहीं किया। मैंने सुहानी को कहा कि हां सुहानी मुझे अब ध्यान आ गया हम लोग पहले भी मिल चुके है।

सुहानी और मैं अब एक दूसरे के साथ फोन पर ही बातें करते थे क्योंकि मैं पुणे अपनी पढ़ाई के लिए वापस आ चुका था। पुणे में जब मेरी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद पुणे में ही एक कंपनी में मैं जॉब करने लगा, सुहानी और मैं हर रोज एक दूसरे से बातें किया करते हैं। एक दिन सुहानी ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर पुणे आ रही है मुझे यह बात नहीं पता थी कि सुहानी की मौसी पुणे में रहती है। मैंने भी सोच लिया था कि मैं अब सुहानी से अपने प्यार का इजहार मिलकर ही करूंगा और मैंने उसके लिए एक रिंग भी खरीद ली। मैं सुहानी का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था कि सुहानी कब आएगी लेकिन वह काफी समय तक पुणे नहीं आई और हम दोनों अभी तक मिल नहीं पाए थे। जब सुहानी ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों में पुणे आने वाली है तो मैं इस बात से बड़ा खुश हो गया। सुहानी जब पुणे आई तो उस दिन हम दोनों मिले और मैंने उसे रिंग पहना कर अपने प्यार का इजहार कर दिया। उसने भी मेरे प्रपोजल को स्वीकार कर लिया और मैं इस बात से बड़ा खुश था कि सुहानी से मैं अपने दिल की बात कह पाया। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सुहानी जैसी लड़की से कभी मैं अपने दिल की बात कह भी पाऊंगा या नहीं। अब सुहानी और मैं एक दूसरे के साथ रिलेशन में थे सुहानी जितने दिन पुणे में रही उतने मेरे दिनों तक हम लोगों की मुलाकात हुई। हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता सुहानी और मेरे बीच प्यार बढ़ता ही जा रहा था मैंने इस बारे में अपने परिवार वालों को भी बता दिया था और वह लोग चाहते थे कि मैं सुहानी से शादी करूं लेकिन सुहानी अभी शादी के लिए तैयार नहीं थी। हालांकि सुहानी की मम्मी को भी इस बारे में पता चल चुका था और वह मेरे और सुहानी के रिश्ते से खुश थी उन्हें मुझसे कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि मैं एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखता हूं और मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब भी करता था इसलिए सुहानी की मां को कोई आपत्ति नहीं थी। सुहानी और मैं एक दूसरे से सिर्फ फोन पर ही बात कर पाते थे हम लोगों का मिलना तो हो ही नहीं पाता था लेकिन सुहानी जॉब करने के बारे में सोच रही थी।

मैंने सुहानी को कहा कि लेकिन तुम जॉब क्यों करना चाहती हो तो सुहानी कहने लगी की तुम तो जानते ही हो कि मैं पहले से ही चाहती थी कि मैं जॉब करूं और अब मेरे कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी है तो मैं अब जॉब करना चाहती हूं। मैंने सुहानी से कहा कि ठीक है और सुहानी ने भी अब चंडीगढ़ में ही किसी कंपनी के लिए अप्लाई कर दिया और उसका वहां पर सिलेक्शन भी हो गया। जब उसका वहां सिलेक्शन हो गया तो उसके बाद सुहानी और मेरी थोड़ी कम बातें होने लगी क्योंकि वह ज्यादातर अपने ऑफिस के काम के चलते बिजी रहती। मैंने सुहानी को कई बार कहा कि तुम जॉब छोड़ दो लेकिन वह मेरी बात नहीं मानी और इस बात को लेकर कई बार हम दोनों के बीच झगड़े भी हो जाया करते थे। समय बीता जा रहा था और अब पापा मम्मी भी मुझे कहने लगे कि तुम्हे सुहानी से शादी कर लेनी चाहिए। मैं जब भी अपने घर चंडीगढ़ जाता तो सुहानी से जरूर मिला करता था और मुझे उससे मिलकर बड़ा अच्छा लगता। मैंने अपने पापा और मम्मी के कहने पर सुहानी से बात की तो वह भी शादी के लिए मान गई और हम दोनों की शादी तय हो गई और कुछ समय बाद हम दोनों की शादी हो गई।

सुहानी और मेरी शादी हो जाने के बाद हम लोग हनीमून के लिए गोवा जाना चाहते थे क्योंकि सुहानी चाहती थी कि हम लोग शादी के बाद हनीमून पर गोवा जाए। मैंने गोवो जाने का मन बना लिया था हम लोग जब गोवा गए तो वहां पर मेरे लिए बड़ा ही अच्छा रहा। सुहानी और मैं जब कमरे में थे तो हम दोनों एक दूसरे की बाहों मे थे और हम लोग एक दूसरे की गर्मी को महसूस कर रहे थे। हम दोनों अब एक दूसरे को किस करने लगे मैं जब सुहानी को किस कर रहा था तो मुझे कोई अच्छा लग रहा था और उसे भी मजा आ रहा था। सुहानी मुझे कहने लगी बस ऐसे ही तुम मेरे होंठों को चूमते जाओ मैंने सुहानी को कहा मुझे तुम्हारी चूत को चूसने में बड़ा मजा आ रहा है तो सुहानी मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कुछ देर तक हम दोनों ने ऐसे ही एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाया। मुझे एहसास होने लगा हम दोनों उत्तेजित हो चुके थे मैंने अपने अपने मोटे लंड को बाहर निकाल लिया जब सुहानी ने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर उसे चूसना शुरु किया तो मुझे मजा आने लगा और सुहानी को भी बड़ा अच्छा लगने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी और सुहानी के भी अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा मजे करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करने लगे सुहानी ने करीब 10 मिनट तक मेरे लंड को चूसा। जब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा ही अधिक हो चुका था। मैंने उसे कहा तुम्हारी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है तो वह मुझे कहने लगी हां उसकी चूत से निकलता हुआ पानी ज्यादा ही अधिक हो चुका था।

मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाकर अंदर बाहर करना शुरू किया तो उसे मज़ा आने लगा। वह अपने पैरों को खोलने लगी और मुझे कहने लगी कि गौरव मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है वह मुझे कहने लगी मजा तो मुझे भी बढ़ा रहा है ऐसा लग रहा है जैसे कि मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही है। मैंने सुहानी को कहा तुम अपने पैरो को खोलो मुझे उसे चोदने मे मजा आने लगा था। मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया जब मैंने उसके पैरों को अपने कंधे पर रखा तो मैंने सुहानी की चूत का भोसड़ा बना दिया। सुहानी को बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बडा मजा आ रहा था। मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था मैं उसे जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उस से मेरी गर्मी मे बढ़ोतरी हो रही थी। वह मुझसे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैंने उसे कहा अब तो मुझे भी मज़ा आने लगा है और मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी।

मेरे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने उसकी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था। सुहानी ने अपनी चूत से मेरे लंड को निकाल लिया और सुहानी ने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया वह अब मेरे लंड को चूसने लगी। कुछ देर तक उसने मेरे लंड को चूसा जैसे ही मेरे माल बाहर की तरफ गिरा तो मैंने सुहानी को कहा मुझे अच्छा लगने लगा है। मैंने उसके पैरों को खोल लिया था जब मैंने सुहानी के पैरो को खोला तो मैं उसे बडी ही तीव्र गति से धक्के देने लगा। मैं उसे जिस तरह से धक्के दे रहा था उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और उसे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया मैंने अपने माल को सुहानी की चूत मे गिराया। हम लोगों ने गोवा मे बड़े ही अच्छे से इंजॉय किया और अब हम लोग हनीमून से वापस लौट आए थे।


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