ऑफिस में काम करने वाली महिमा


Antarvasba, kamukta: मेरा नाम गौरव है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं मैं पिछले दो वर्षों से दिल्ली में रहता हूं। मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं उसी कॉलोनी में राधिका भी रहा करती थी। राधिका और मैं एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे और हम दोनों एक दूसरे के साथ बातें भी किया करते थे लेकिन जब राधिका ने मुझे बताया कि उसकी शादी तय हो गई है तो मैंने भी राधिका से मिलना कम कर दिया था जिस वजह से हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके थे। राधिका के परिवार वालों में उसकी शादी तय कर दी थी राधिका की शादी हो जाने के बाद मैं अपनी जॉब पर पूरी तरीके से फोकस कर रहा था और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था। मैं अपनी जिंदगी में अब आगे तो बढ़ ही चुका था लेकिन जब एक दिन मैं राधिका से मिला तो कहीं ना कहीं मुझे राधिका और मेरे बीत हुए वह पल याद आने लगे जब हम दोनों साथ में समय बिताया करते थे।

हम दोनों जब भी साथ में होते थे तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता था लेकिन उस दिन राधिका से मेरी ज्यादा बात नहीं हुई और मैं घर लौट आया था। मैं जब घर लौटा तो उस दिन मैंने अपने पापा मम्मी से फोन पर बातें की और वह लोग कहने लगे कि गौरव बेटा तुम काफी दिनों से लखनऊ भी नहीं आए हो कुछ दिनों के लिए तुम लखनऊ आ जाओ। मैंने भी उनकी बात मान ली और कुछ दिनों के लिए मैं लखनऊ जाना चाहता था। मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और कुछ दिनों के लिए मैं लखनऊ चला गया। लखनऊ जाने के बाद जब मैं अपने घर पहुंचा तो मुझे अपनी फैमिली के साथ काफी अच्छा लग रहा था और काफी लंबे समय के बाद मैं अपनी फैमिली के साथ में अच्छा समय बिता पाया था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था एक लंबे समय के बाद मैं अपने परिवार के साथ में अच्छा समय बिता पाया था और पापा मम्मी भी बहुत ज्यादा खुश थे।

मैं जितने दिन भी घर पर रहा उतने दिन तक मुझे घर पर काफी अच्छा लगा लेकिन मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी छुट्टियां खत्म हो गई और मुझे अब दिल्ली वापस लौटना था। मैं लखनऊ से दिल्ली के लिए आ रहा था तो मुझे ट्रेन में उस दिन मेरे पड़ोस में रहने वाले राजेश जी मिले। राजेश जी हमारे पड़ोस में ही रहते हैं मैंने जब उनसे पूछा कि आप क्या कुछ दिनों के लिए दिल्ली जा रहे हैं तो उन्होंने मुझे बताया कि हां मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली जा रहा हूं। उनका कोई जरूरी काम था जिस वजह से वह जल्दी जा रहे थे। सफर का पता ही नहीं चला कि कब सफर कट गया और हम दिल्ली पहुंच गए थे। जब हम लोग दिल्ली पहुंचे तो मैंने राजेश जी को कहा आप मेरे साथ चले लेकिन उन्होंने कहा कि नहीं, वह अपने किसी रिश्तेदार के घर जा रहे हैं और वह वहां से टैक्सी लेकर चले गए थे।

मैं भी रेलवे स्टेशन से टैक्सी लेकर अपने घर पर पहुंच रहा था और जब मैं घर पर पहुंचा तो मुझे काफी देर हो चुकी थी इसलिए उस दिन मैंने बाहर से ही खाना ऑर्डर करवा लिया था। जब खाना आया तो खाना खाने के बाद मैं सो चुका था मुझे काफी गहरी नींद आ गई थी। मुझे अगले दिन से अपने ऑफिस जाना था अगले दिन मैं जब अपने ऑफिस के लिए घर से निकला तो मुझे उस दिन अपने ऑफिस पहुंचने में थोड़ा देरी हो गई थी। उस दिन ऑफिस में काफी ज्यादा काम था इसलिए मैं घर देरी से लौटा। मैं जब घर पहुंचा तो उस दिन मैंने पापा मम्मी से फोन पर बात की। मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा है और मैं काफी ज्यादा खुश हूं जिस तरीके से मेरी जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा है। एक दिन मैं अपने दोस्त से मिलने के लिए गया अपने दोस्त से काफी लंबे समय बाद मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा था। अपने दोस्त से मिलने के बाद जब मैं वापस घर लौटा तो उस दिन मेरी मुलाकात रास्ते में महिमा से हुई।

महिमा जो कि हमारे ऑफिस में ही जॉब करती है लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि महिमा भी अब हमारे पड़ोस में ही शिफ्ट हो चुकी है और वह मेरे पड़ोस में ही रहने लगी थी। मुझे जब महिमा ने यह बात बताई तो मैंने महिमा को कहा चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है। मेरी महिमा से काफी देर तक बात हुई फिर मैं घर लौट आया था। अगले दिन से मैं जब भी ऑफिस जाता तो महिमा भी मेरे साथ ही ऑफिस जाने लगी थी हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों साथ में ऑफिस जाया करते थे। कहीं ना कहीं महिमा और मैं अब एक दूसरे के काफी ज्यादा नजदीक आने लगे थे और हम दोनों एक दूसरे से अपने दिल की बातें भी शेयर करने लगे थे। मैं भी अकेला दिल्ली में रहा करता था और महिमा भी अकेली ही दिल्ली में रहती थी इस वजह से हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा था। यह बहुत ही अच्छा था जिस तरीके से हम दोनों की जिंदगी अब आगे बढ़ती जा रही थी और हम दोनों बड़े ही खुश थे। मैं भी बहुत ज्यादा खुश था और महिमा भी बड़ी खुश थी वह मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने लगी थी। जब भी मैं अकेला होता तो मैं महिमा के साथ समय बिता लिया करता था महिमा और मैं एक दूसरे के साथ जब भी होते तो हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते।

एक दिन मैं और महिमा शॉपिंग करने के लिए साथ में गये। उस दिन हम दोनों जब शॉपिंग करने के बाद वापस घर लौट आए तो मैं महिमा के साथ में काफी खुश था और मैंने महिमा से उस दिन अपने प्यार का इजहार भी कर दिया। मैं महिमा को प्यार करने लगा था इसलिए मैंने महिमा से अपने प्यार का इजहार कर दिया था और महिमा भी बहुत ज्यादा खुश थी। महिमा भी मुझे मना ना कर सकी क्योंकि महिमा के दिल में भी मेरे लिए प्यार था और महिमा और मैं एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ जब भी होते तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता। महिमा भी बड़ी खुश होती जब भी वह मेरे साथ होती थी। मैं और महिमा एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी नहीं रह पाते थे। मैं कुछ दिनों के लिए लखनऊ गया हुआ था क्योंकि काफी समय हो गया था मैं अपने घर भी नहीं गया था।

जब मैं लखनऊ में था तो उस दौरान महिमा और मेरी सिर्फ फोन पर ही बातें हो पाती थी लेकिन मैं महिमा को बहुत ज्यादा मिस कर रहा था और कहीं ना कहीं महिमा भी मुझे बहुत ज्यादा मिस कर रही थी। यही वजह थी कि हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें किया करते थे लेकिन अब जब महिमा और मैं एक दूसरे को मिल नहीं पाए थे तो महिमा ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं और मैं चाहती हूं कि तुम दिल्ली वापस लौट आओ। मैं अब दिल्ली वापस लौट आया था महिमा के मेरे जीवन में आने से मेरी जिंदगी में बहुत सी खुशियां वापस लौट आई और मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। महिमा और मेरी मुलाकात अक्सर होती रहती थी लेकिन हम दोनों एक दूसरे को काफी ज्यादा प्यार करते हैं इसीलिए हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाते थे। जब भी हम दोनों फोन पर एक दूसरे से बातें करते हमें बहुत ही अच्छा लगता। एक दिन महिमा और मैं फोन पर बातें कर रहे थे उस दिन हम दोनों की बातें कुछ ज्यादा ही अश्लील होने लगी थी जिससे कि मैं बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे।

मैंने उस दिन महिमा के साथ फोन सेक्स किया जिससे की महिमा भी है तड़पने लगी थी वह चाहती थी वह मेरे साथ सेक्स करें। हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तड़पने लगे थे जब हम दोनों के बीच में सेक्स हुआ तो हम दोनों बड़े ही खुश थे। यह पहली बार था जब मैंने उसके  होठों को चूमा था मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और महिमा भी बड़ी खुश थी। अब हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे मैंने महिमा को कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने महिमा के बदन से कपड़े उतार दिए थे जब मैंने उसके नंगे बदन को देखा तो मैं अब रह नहीं पा रहा था मैंने महिमा के स्तनों को दबाना शुरू किया। मैंने महिमा के स्तनों के बीच में जब अपने लंड को रगडना शुरू किया तो महिमा तड़पने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं मुझे यह बात अच्छे से मालूम थी महिमा बिल्कुल भी रह नहीं पा रही है शायद यही वजह थी महिमा और मैं अब एक दूसरे के लिए बहुत ही ज्यादा तड़पने लगे थे।

मैंने महिमा के मुंह के सामने अपने लंड को किया महिमा ने उसे तुरंत ही अपने मुंह में समा लिया था। जब वह मेरे लंड को चूसने लगी तो मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा था और मेरे लंड से पानी निकलने लगा था। महिमा ने करीब 2 मिनट तक लंड को चूसा उसके बाद मैं महिमा की चूत में लंड को घुसाने की तडपने लगा था। मैंने जैसे ही महिमा के दोनों पैरों को खोलकर उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया तो महिमा की योनि से निकलता हुआ पानी देखकर मैं महिमा की चूत को चाटने लगा था। मैं महिमा की चूत को बड़े अच्छे से चाट रहा था जिस तरीके से मैं महिमा की चूत को चाट रहा था उससे वह तड़पने लगी थी उसकी चूत गर्म होने लगी थी। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था महिमा जोर से चिल्लाई उसकी योनि से खून की पिचकारी बाहर आ गई थी। महिमा मुझे कहने लगी मुझे मजा आने लगा है महिमा बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी।

वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकडने लगी थी। मैं महिमा को तेजी से धक्के मारने लगा था मेरे धक्के और भी तेज होते जा रहे थे जिससे कि मैं और महिमा एक दूसरे का साथ अच्छे से दिए जा रहे थे। मुझे अब एहसास होने लगा था मैं ज्यादा देर तक महिमा की चूत की गर्मी झेल नहीं पाऊंगा। महिमा की टाइट चूत की गर्मी को झेल पाना शायद मुश्किल ही था इसलिए मैंने महिमा की योनि में अपने माल  को गिरा दिया था। मेरी माल महिमा की चूत गिरते ही मैं बहुत ज्यादा खुश था और महिमा भी बड़ी खुश थी। मैंने अपने लंड को महिमा की योनि से बाहर निकाला महिमा ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया था वह उसे अच्छे से चूसने लगी जिससे कि मेरे लंड पर लगा वीर्य महिमा की मुंह के अंदर चला गया था। महिमा ने उसे अपने अंदर ही ले लिया था मैं बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से महिमा और मैंने एक दूसरे का साथ सेक्स किया था।