नौकरानी बनी चूत की रानी


Antarvasna, hindi sex story: महिमा और मेरी मुलाकात एक शादी के दौरान हुई और हम दोनों कि जब नजदीकियां बढ़ने लगी तो हम दोनों ने एक दूसरे से अपने दिल की बात कह दी। जब मैंने महिमा से अपने दिल की बात कही तो महिमा ने भी मेरे दिल की बात को स्वीकार कर लिया हम दोनों चाहते थे कि हम दोनों जल्दी से शादी कर ले। मैंने महिमा से कहा कि महिमा मुझे थोड़ा वक्त चाहिए मैं चाहता था कि मैं अपनी जिंदगी में पहले एक अच्छी नौकरी पा लूं। मैं एक अच्छी नौकरी के लिए अभी भी दर बदर की ठोकरें खा रहा था लेकिन महिमा ने मेरा बहुत साथ दिया और महिमा की वजह से ही मेरी एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग गई। महिमा ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है मैं अपनी नौकरी के सिलसिले में पुणे चला गया मैं अपने परिवार से दूर पुणे रहने लगा था और महिमा से मेरी फोन पर ही बात होती।

महिमा मुझे कहने लगी कि आकाश तुम्हें अपने पापा मम्मी को अब मेरे बारे में बताना होगा मैंने महिमा को कहा ठीक है महिमा मैं अपने पापा मम्मी से तुम्हारे बारे में बात करता हूं। मैंने जब अपने पापा मम्मी से महिमा के बारे में बात की तो उन्होंने भी महिमा से मिलने की इच्छा जाहिर की और जब मेरे पापा और मम्मी महिमा से मिले तो वह दोनों कहने लगे कि बेटा हमें तुम्हारी पसंद से कोई एतराज नहीं है। उन लोगों को मेरी पसंद से कोई भी ऐतराज नहीं था और उन लोगों ने मेरी शादी महिमा से करवाने का फैसला कर लिया था लेकिन महिमा के पापा को मेरे और महिमा के बीच के रिश्ते कुछ पसंद नहीं थे लेकिन महिमा की मां चाहती थी कि मेरी शादी महिमा के साथ हो जाए। किसी प्रकार से हम दोनों की शादी हो गई मैं चाहता था कि महिमा के पापा के दिल में कभी भी यह बात ना रह जाए की उन्होंने अपनी लड़की का हाथ एक गलत लड़के के हाथ में दिया है इसलिए मैं हमेशा ही अपने आप को साबित करने की कोशिश करता। जब हमारी शादी को थोड़ा समय हो चुका था तो महिमा के पापा भी अब मुझसे अच्छे से बात करने लगे थे मुझे इस बात की खुशी थी कि महिमा के पापा अब मुझे स्वीकार कर चुके हैं।

महिमा और मैं पुणे में ही सेटल हो चुके थे और हम दोनों ने वहां पर अपना एक छोटा सा घर भी खरीद लिया था हम दोनों ही बहुत खुश थे कि हम दोनों ने अपना घर भी खरीद लिया है और यह सब बहुत जल्दी हुआ। मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला कि यह सब 5 वर्ष के दौरान हुआ इन 5 वर्षों में मैं महिमा से मिला और मेरी नौकरी एक अच्छी कंपनी में लगी उसके बाद हम लोगों ने शादी भी कर ली और हम लोगों ने अब घर भी खरीद लिया था। सब कुछ बहुत ही अच्छे से हुआ और मैं महिमा के साथ बहुत खुश था लेकिन एक सुबह जब महिमा और मैं ऑफिस के लिए निकल रहे थे तो महिमा जैसे ही नहा कर बाथरूम से बाहर आई तो उसका पैर फिसल गया जिससे की महिमा को चोट लग गई। मैं महिमा को हॉस्पिटल में ले गया और वहां पर मैंने जब डॉक्टर को कहां की महिमा को क्या हुआ है तो वह कहने लगे कि देखिये सर हमें कुछ एक्सरे करवाने पड़ेंगे उसके बाद ही मैं कुछ कह पाऊंगा। महिमा के पैर में काफी दर्द हो रहा था और महिमा को लग रहा था की उसके पैर की हड्डी शायद टूट चुकी है। जब मैंने महिमा का एक्स-रे करवाया तो उसमें पता चला की महिमा के पैर की हड्डी में काफी चोट आई है जिस वजह से महिमा को डॉक्टर ने कुछ दिनों के लिए आराम करने के लिए कहा। महिमा की देखभाल करने के लिए मुझे किसी को घर पर रखना ही था मैंने महिमा से कहा कि क्या मैं घर पर किसी मेड को रख दूं तो वह कहने लगी कि ठीक है आकाश तुम देख लो। मैंने महिमा को कहा देखो महिमा हमें किसी ना किसी को तो घर पर काम के लिए रखना ही पड़ेगा क्योंकि तुम भी अब काम नहीं कर पाओगी तो महिमा कहने लगी कि ठीक है आकाश मैं भी अपनी सहेली से बात करती हूं। हमारे पड़ोस में रहने वाले रोशन भैया को मैंने कहा कि आपके घर पर जो मेड आती है क्या उससे आप मेरी बात करवा सकते हैं तो वह कहने लगे कि क्यों नही। जब उन्होंने मेरी बात अपनी मेड से करवाई तो मैंने उसे कहा कि यदि तुम्हारे नजर में कोई घर पर काम करने के लिए हो तो तुम मुझे बताना वह कहने लगी ठीक है साहब मैं आपको कल तक ही बता दूंगी। अगले दिन ही उसने मुझे बताया कि उसकी ही कोई परिचित है जो काम ढूंढ रही है मैंने उसे कहा कि तुम उसे घर पर बुला लेना।

दूसरे दिन वह मेड घर पर आई महिमा और मैंने उससे उसके बारे में पूछा हम लोग चाहते थे कि जो भी घर पर काम करें वह अच्छे से करें इसलिए मैंने और महिमा ने उसे घर पर काम पर रख लिया उसका नाम शालू है। शालू घर का काम अच्छे से करने लगी और मैंने उसे साफ तौर पर कह दिया की उसे महिमा का ध्यान रखना होगा तो उसने मुझे कहा कि साहब आप चिंता मत कीजिए मैं महिमा दीदी का ध्यान अच्छे से रखूंगी। वह घर का काम बड़े अच्छे से करती थी महिमा को डॉक्टर ने 3 महीने के लिए आराम करने के लिए कहा था इसलिए महिमा घर पर ही थी और थोड़े समय बाद पापा मम्मी भी महिमा को देखने के लिए आए। जब उन्हें यह बात पता चली तो उन्होंने मुझे कहा कि आकाश तुमने हमें इस बारे में क्यों नहीं बताया मैंने पापा मम्मी को कहा कि बेकार में आपको भी चिंता हो जाती इसलिए मैंने आपको इस बारे में कुछ भी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि बेटा तुम्हें हमें इस बारे में बताना चाहिए था मैंने पापा मम्मी को कहा हां मुझे आप लोगों को बताना चाहिए था। वह लोग भी महिमा की देखभाल करने लगे महिमा जब थोड़ी बहुत ठीक होने लगी तो महिमा अपना काम अब खुद ही करने लगी थी शालू ने घर के काम को अच्छे से संभाला हुआ था।

पापा मम्मी भी अब घर लौट चुके थे और शालू महिमा का ध्यान रखती थी। एक दिन मैं महिमा को हॉस्पिटल लेकर गया तो डॉक्टर से मैंने पूछा कि डॉक्टर साहब कितना समय और लग जाएगा। वह कहने लगे कि बस थोड़ा समय और लगेगा अब महिमा पहले से काफी बेहतर है मैंने कहा हां महिमा अब थोड़ा बहुत चलने भी लगी है तो वह कहने लगे कि बस थोड़े समय बाद ही महिमा ठीक हो जाएगी। मैं और महिमा घर लौट रहे थे कि महिमा मुझसे कहने लगी कि आकाश मुझे अपने पापा मम्मी की बड़ी याद आ रही है सोच रही हूं कि उनके पास कुछ दिनों के लिए चली जाऊं। मैंने महिमा से कहा तुम उन्हें यहां क्यों नहीं बुला लेती महिमा कहने लगी कि नहीं मैं सोच रही हूं की मैं उनके पास मैं चली जाती हूं। महिमा की जिद के आगे मैं भी कुछ कह ना सका और मुझे महिमा को उसके पापा मम्मी के यहां छोड़ना पड़ा। घर पर शालू ही मेरे लिए नाश्ता बनाती शालू ने जब मेरे लिए नाश्ता बनाया तो वह मुझे कहने लगी साहब क्या आज आप ऑफिस नहीं जा रहे है? मैंने उसे कहा नहीं आज मैं ऑफिस नहीं जा रहा हूं। शालू साफ सफाई करने लगी मेरी नजर उसके स्तनों और उसकी गांड पर पड़ी तो मेरे अंदर से सेक्स भावना जागने लगी लेकिन मैं अपने आपको बहुत ज्यादा कंट्रोल करता मुझे लगा मुझे अपने आपको रोकना चाहिए यह सब ठीक नहीं है। वह भी मेरी तरफ जिस प्रकार से देख रही थी मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसे मैंने कहा तुम मेरे लंड पर हाथ लगाओ। उसने मेरे लंड पर हाथ लगाया और कहने लगी साहब आपका लंड तो बड़ा मोटा प्रतीत होता है मैंने उसे कहा तुम्हे इसे अपनी चूत के अंदर लेना है।

वह कहने लगी हां साहब मैंने उसे कहा मैं तुम्हें कुछ पैसे दूंगा तो मेरी बात मान गई और उसने मेरे लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस रही थी उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था। जिस प्रकार से मैंने उसकी चूत के मजे लिए उस से मै बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा मैने उसकी चूत को पूरी तरीके से चिकना बना दिया था जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह चिल्ला उठी। मेरा लंड बड़ी आसानी से उसकी चूत के अंदर बाहर होता जिससे कि वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो जाती है मैं खुश हो जाया करता।

मैं इस बात से बहुत खुश था मैं उसकी चूत के मजे ले पाया मैं अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करता तो वह कहने लगी आपका लंड तो चूत के अंदर तक जा ही नहीं रहा है। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक जाने लगा तो वह मुझे कहने लगी मज आ गया साहब। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें घोडी बना देता हूं जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो वह चिल्ला रही थी थोड़ी देर तक मै उसे घोडी बनाकर चोदता रहा। जब वह मेरे लंड के ऊपर आई तो उसने अपनी चूत में मेरा लंड चला गया मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के मारे जिससे कि मै खुश हो गया था वह भी खुश हो गई। मैं उसे धक्के मार रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं उसकी गांड के अंदर लंड को डालना चाहता था। मैंने अपने लंड को पूरी तरीके से चिकना बनाया और शालू की गांड के अंदर अपने लंड को घुसाया मेरा लंड शालू की गांड के अंदर तक जा चुका था वह मुझे कहती साहब और तेजी से धक्के मारो। मैं उसे तेज गति से धक्के मारने लगा मेरा लंड उसकी गांड की दीवार तक जा रहा था मुझे इतना मजा आ रहा था मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी इस प्रकार से मैं शालू की गांड मार पाऊंगा। उसकी गांड से जिस प्रकार से गर्मी बाहर निकलती उसे मैंने कहा मेरा वीर्य पतन हो गया। हम दोनों ही बहुत खुश थे मैंने उसे कुछ पैसे दिए जब तक महिमा घर नहीं लौटी तब तक हर रोज में शालू की गांड के मजे लिया करता।


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