मेरी भी परेशानी दूर करो


Antarvasna, kamukta: पापा रिटायर हो चुके थे और वह अब घर पर ही रहते थे हमारा परिवार अभी एक साथ ही रहता है और जब पापा ने मुझे कहा कि राघव बेटा तुम बैंक में जाकर पैसे ले आना तो मैंने उन्हें कहा लेकिन पापा आपको पैसे की क्या जरूरत है। वह कहने लगे कि बेटा मेरे खाते में से तुम पैसे निकाल लेना क्योंकि मैं उन पैसों का करूंगा भी क्या तुम उसे ले आना और मैं सोच रहा हूं कि तुम लोग उसे आपस में बांट लो। घर में मैं हीं सबसे बड़ा हूं इसलिए घर की सारी जिम्मेदारी और पिता का प्यार भी मुझे ही मिला और पापा मुझ पर बहुत भरोसा भी करते हैं। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा आप मुझे चेक दे दीजिए मैं आते वक्त पैसे ले आऊंगा तो वह कहने लगे कि ठीक है मैं तुम्हें चेक दे देता हूं। उन्होंने मुझे चेक दे दिया और उसके बाद मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो मैंने दोपहर में ही अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और उसके बाद मैं सीधा वहां से बैंक के लिए निकल चुका था।

मैं जब बैंक में पहुंचा तो मैंने पिताजी के दिए हुए चेक से पैसे निकाल लिए और उसके बाद मैं घर लौट आया। मैंने पिताजी को सूटकेस पकडाया और कहा कि पिताजी इसमें मैंने पैसे रखे हैं वह कहने लगे कि बेटा यह पैसे तुम अलमारी में ही रख दो और शाम को जब तुम तीनो भाई साथ में रहो तो मैं तुमसे बात करना चाहता हूं। मैंने अपने पिताजी से कहा मैं तो अब घर पर ही हूं मोहन और सुरेश बस आते ही होंगे। वह लोग जब शाम के वक्त अपने दफ्तर से घर लौटे तो पिताजी ने हम तीनों को कमरे में बैठाया और कहा कि देखो बेटा तुम तीनों ही मेरे जीवन की जमा पूंजी हो मेरे लिए इन पैसों का कोई मोल नहीं है क्योंकि मैं अब बुजुर्ग हो चुका हूं और मैं इन पैसों का बंटवारा करूंगा। पिताजी ने हम तीनों के हिस्से में पैसे दे दिए थे मैंने वह पैसे अपनी पत्नी को देते हुए कहा कि तुम इन्हें संभाल कर रख देना और उसने वह पैसे संभाल लिए थे क्योंकि मैं चाहता था कि वह पैसे संभाल कर रखे जाए और कभी मुसीबत के समय में वह पैसे जरूर काम आएंगे।

मेरे दोनों भाइयों ने उन पैसों को फिजूलखर्ची में खर्च कर दिया और उसके बाद एक दिन कुछ पैसों की जरूरत पड़ी घर में शायद उस वक्त किसी के पास भी पैसे नहीं थे और मैंने जब उन पैसों से घर की मरम्मत का काम करवाया तो पिताजी ने मुझे कहा कि बेटा तुमने यह क्यों करवाया मैंने तुम्हें वह पैसे तुम्हारे लिए दिए थे लेकिन तुमने तो वह पैसे घर के मरम्मत में लगवा दिए है। मैंने पिता जी से कहा पिता जी हमें ही तो यहां रहना है पिताजी मुझे कहने लगे कि देखो राघव बेटा जैसा तुम सोचते हो जरूरी नहीं कि वैसा तुम्हारे भाई भी सोचे या उनकी पत्नियां भी वैसे ही सोचें। पिताजी को शायद इस बात का ज्यादा अनुभव था क्योंकि पिताजी के साथ भी चाचा और मेरे ताऊ जी ने बहुत गलत किया था उन्होंने उनका अधिकार उनसे छीन लिया था और पिताजी ने इतनी मेहनत की कि उसके बाद वह एक अच्छा मुकाम हासिल कर पाए। उन्होंने अपनी मेहनत से ही सब कुछ तैयार किया और एक अच्छा घर भी बनाया इस बात पर पिताजी ने मुझे समझाया लेकिन मुझे इस बात का कभी भी कोई दुख नहीं था। मैंने कभी भी पिता जी से इस बारे में बात नहीं की लेकिन धीरे धीरे घर का माहौल बदलने लगा और मेरे दोनों भाइयों की पत्नियों के व्यवहार में बदलाव आने लगा था क्योंकि वह लोग सिर्फ पैसे के लिए ही पिताजी की देखभाल किया करती थी। पिताजी अब बूढ़े होने लगे थे और एक दिन पिताजी की तबीयत खराब होने लगी तो उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि मेरे दोनों भाइयों की पत्नियां कितनी ज्यादा मतलबी है उन्होंने पिताजी की बिल्कुल भी देखभाल नहीं की जिससे कि पिताजी की तबीयत और भी खराब होने लगी। मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में आगरा गया हुआ था जब मैं आगरा से लौटा तो उस वक्त मुझे यह बात मेरी पत्नी ने बताई मैं पिताजी को अस्पताल लेकर गया तो डॉक्टरों ने कहा कि उनकी तबीयत बहुत खराब है और पिताजी को कुछ दिनों के लिए अस्पताल में ही भर्ती करवाना पड़ा। पिताजी की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार आने लगा था लेकिन मुझे अपने दोनों भाइयों से यह शिकायत थी कि उन्होंने भी पिताजी की देखभाल में इतनी आनाकानी की जिससे कि पिताजी की तबीयत बिगड़ती चली गई जिस वजह से मैं बहुत गुस्सा भी था।

जब मैंने उन्हें यह बात कही तो वह दोनों ही मुझे कहने लगे कि यदि आपको पिताजी से इतना प्यार है तो आप ही पिताजी के साथ रहिए। मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई मुझे तो कभी इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि मेरे दोनों भाई मेरे साथ इस प्रकार से करेंगे और उन्होंने पिताजी के साथ भी कुछ ठीक नहीं किया था मुझे इस बात का बहुत ही ज्यादा दुख था। मैं बहुत परेशान भी था क्योंकि हमारा घर अब टूटने के कगार पर था सबके बीच दीवार पड़ने लगी थी और मेरे दोनों भाई अब अलग रहने के लिए चले गए। मैंने कभी भी यह बात नहीं सोची थी लेकिन उन दोनों की पत्नियों की वजह से ही यह सब हुआ था और पिताजी हमारे साथ ही रहते थे लेकिन उन्हें इस बात का बहुत ज्यादा दुख था और उन्हें यह यह बात अंदर ही अंदर खाए जा रही थी कि मेरे दोनों भाई हमसे अलग रहते हैं। पिताजी ने कई बार उन दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन वह लोग घर वापस नहीं आए और वह अपनी पत्नियों के साथ अब अलग ही रहते थे मैं और मेरी पत्नी भी बहुत दुखी थे क्योंकि घर में अब वह माहौल था ही नहीं जो पहले था। पिताजी की तबीयत तो ठीक हो चुकी थी लेकिन वह ज्यादातर सदमे में ही रहते थे और वह मुझसे भी कम ही बात किया करते थे।

दोनों भाइयों के घर से चले जाने के बाद मैं बहुत दुखी हो चुका था मेरी पत्नी ने मेरा बहुत साथ दिया और कहा कि आप अन्यथा ही परेशान हो रहे हैं। पिताजी को देखकर भी मुझे चिंता होने लगी थी क्योंकि वह बहुत ही ज्यादा परेशान रहते थे और बिल्कुल भी वह किसी से बात नहीं करते थे मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वह अपने परिवार को ऐसे अपनी आंखों के सामने अलग होते हुए कैसे देख सकते थे। उन्होंने ही तो इतने वर्षों तक मेहनत की थी और उसके बाद वह लोग अच्छे से अच्छा जीवन यापन कर रहे थे लेकिन मेरे दोनों भाइयों की वजह से परिवार टूट चुका था। मैं भी बहुत अकेला हो गया था एक दिन मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मुझे बहुत बुरा लग रहा है तो वह कहने लगी कि आप क्यों चिंता कर रहे हैं सब ठीक हो जाएगा। उस दिन उसका शायद रोमांस करने का मन था तो वह मुझसे लिपटकर कहने लगी कि आप तो अपनी परेशानी में ही लगे रहते हैं मेरे बारे मे कहा सोचते है। मैंने उसे कहा ऐसा कुछ भी नहीं है मैंने तुम्हारे बारे में क्यो नहीं सोचा है। वह मुझसे चुदने के लिए बेताब बैठे हुई थी मैंने उसे कहा देखो आज मेरा बिल्कुल भी मन नहीं है। मेरी पत्नी तो पूरी तैयारी में थी उसने मेरी पैंट की चैन को खोलते हुए अपने हाथों में मेरे लंड को ले लिया वह कहने लगी मुझे अजीब सा महसूस हो रहा था। मैंने अपने लंड को अपनी पत्नी के मुंह के अंदर घुसाया तो उसे वह मुंह के अंदर का लेने लगी और उसे चूसकर उसने मुझे उत्तेजित कर दिया मुझे बहुत खुशी थी काफी देर तक ऐसा चलता रहा। जब मैंने उसे कहा कि तुम्हारी चूत कुछ ज्यादा ही मचल रही है वह कहने लगी कि अब आप मेरी तरफ देखते ही नहीं हैं आप अपनी परेशानी में ही लगे हुए हैं आप ही बताएं मैं क्या करूं।

मैंने भी उसकी पैंटी को उतारकर उसकी चूत को चाटना शुरु किया उसे भी मजा आने लगा मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी योनि से पानी निकाल कर रख दिया तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगा। मैंने अपनी पत्नी से कहा लगता है तुम्हारी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी  बाहर को निकलने लगा है। वह मुझे कहने लगी मुझसे भी अब रहा नहीं जाएगा आप अपने लंड को मेरी योनि में घुसा दीजिए। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारी योनि के अंदर लंड को घुसा देता हूं मैंने अपने लंड को अपनी पत्नी की चूत मे डाल दिया। वह मुझसे चिपकर मुझे कहने लगी कि इतने दिनों बाद मुझे अच्छा लग रहा है मैंने उसे कहा तुम्हें और भी अच्छा लगेगा। मैंने अपनी गति और भी तेज कर ली और जिस गति से मैंने अपनी पत्नी को चोदा वह अपने मुंह से तरह-तरह कि आवाजे निकाल रही थी। मैंने उसको घोडी बनाकर चोदा वह चिल्लाने लगी और जिस प्रकार से वह चिल्ला रही थी। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था तो मुझे मजा आता और काफी देर तक हम लोगों ने ऐसा ही किया। जब उसकी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा और उसकी चूत से ज्यादा ही पानी बाहर निकलना लगा तो वह मुझे कहने लगी कि अब नहीं रह पाऊंगी, यह कहते ही मैंने अपना वीर्य गिरा दिया।

मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम मेरे लंड पर तेल की मालिश करो तो उसने मेरे लंड पर तेल की मालिश की और जब उसने मेरे लंड को चिकना बना दिया। मैंने उसकी गांड में लंग को सटाते हुए अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया तो मेरा लंड अंदर जा चुका था वह चिल्लाने लगी। वह मुझे कहने लगी आज मुझे लग रहा है कि आप भी जोश में आ चुके हैं मैंने उसे कहा तुमने मेरे अंदर के जोश को जगा दिया है उसे कहीं ना कहीं तो निकालना ही पड़ेगा। वह कहने लगी  आप तो सिर्फ पिताजी की परेशानी में ही लगे रहते हैं कभी मेरी परेशानी भी देख लिया कीजिए। मैंने उसे कहा आज तुम्हारी परेशानी का हल में निकाली देता हूं और मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के मारे तो वह चिल्ला रही थी और कहने लगी जब भी आप ऐसा करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है। मैंने उसे कहा मुझे भी बड़ा आनंद आ रहा है और जब मैंने अपने माल को गिराया तो वह कहने लगी आप अपने लंड को मेरी गांड से निकाल दिजिए।


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