मेरे सवाल का जवाब चूत मे छुपा था


Antarvasna, kamukta: मां घर की साफ सफाई का काम कर रही थी पापा कमरे से आए और वह मां पर ना जाने किस बात पर चिल्लाने लगे। बचपन से ही मैं उन दोनों के झगड़े देखता आया हूं इसलिए मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था कि वह दोनों आपस में झगड़ते रहते हैं। ना जाने उन दोनों के बीच में क्यों नहीं बनती थी मुझे लगता था कि शायद पापा और मम्मी ने एक दूसरे को कभी समझा ही नहीं है। मां गुस्से में अपने कमरे में चली गई और पापा अब भी ना जाने अपने मुंह के अंदर क्या कह रहे थे मैं अपने दोस्त के घर चला गया। मैं जब उसके घर पर गया तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था यह सब देख कर मुझे लगने लगा था कि मुझे कहीं दूर चले जाना चाहिए। घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी लेकिन उसके बावजूद कमी थी तो सिर्फ प्यार की, घर में प्यार की बहुत कमी थी और उसी की तलाश में मैं इधर-उधर भटकता रहा लेकिन मुझे कभी प्यार मिला ही नहीं। ना तो मुझे मां का प्यार मिला और ना हीं पापा मुझे कभी समझ पाये क्योंकि पापा अपने काम में बिजी रहते थे और मां भी ना जाने कौन से ख्यालों में डूबी रहती थी।

मुझे बचपन से लेकर आज तक कोई समझ नहीं पाया था इसलिए मैं अकेले और तनहा था। मेरा दोस्त मुझे कहने लगा कि क्या तुम मेरे साथ ट्रैकिंग पर चलोगे तो मैंने उसे कहा लेकिन तुम कब जा रहे हो वह मुझे कहने लगा कि हम लोग अगले हफ्ते ट्रैकिंग पर जा रहे हैं यदि तुम्हें भी चलना है तो तुम भी चल सकते हो। मैंने उसे कहा लेकिन हम लोग कहां जाएंगे तो वह मुझे कहने लगा कि हम लोग हिमाचल के एक छोटे से कस्बे में जाने वाले हैं और वहीं पर हम लोग रुकेंगे यदि तुम्हें चलना हो तो तुम बता देना। मैंने अपने दोस्त सुनील से कहा ठीक है मैं तुम्हें बता दूंगा और मैं जब घर लौटा तो उसके बाद भी पापा मम्मी के झगड़ों से मैं परेशान ही था मैं सोचने लगा कि क्यों ना मैं कुछ दिनों के लिए सुनील के साथ ट्रैकिंग पर चला जाऊं। हम लोग मोटरसाइकिल से ही हिमाचल जाने वाले थे और सुनील ने सारी व्यवस्था करवा रखी थी। हम लोग हिमाचल के उस छोटे से कस्बे में पहुंचे वहां का नजारा बहुत ही अच्छा था और वहां पर ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी इसलिए मुझे भी अच्छा लग रहा था। मैं भी काफी दिनों से सोच ही रहा था कि किसी ऐसी जगह जाऊं जहां पर मुझे अच्छा लगे।

मुझे वहां जाकर बहुत अच्छा लगा और जब हम लोग वहां के एक छोटे से होटल में रुके तो मैंने सुनील से कहा यार मुझे चाय पीनी थी। हम लोगों ने चाय का आर्डर दिया तो वह कहने लगा सर हमे चाय बाहर से लानी पड़ेगी यहां पर खाने की व्यवस्था नहीं है। मैंने सुनील से कहा क्या तुम मेरे साथ बाहर चल रहे हो तो सुनील कहने लगा चलो हम लोग बाहर से ही चाय पी आते हैं। हम दोनों वहां से बाहर निकले क्योंकि ठंड काफी ज्यादा हो रही थी इसलिए मेरा चाय पीने का काफी मन हो रहा था और हम दोनों चाय की टफरी के पास खड़े हो गए और वहां पर हम लोग चाय पीने लगे। हम दोनों चाय पी रहे थे उसके कुछ ही देर बाद मेरी नजर एक बच्चे पर पड़ी वह सड़क के किनारे बड़ी तेजी से दौड़ रहा था मैं दौड़ता हुआ उस बच्चे की तरफ गया और उसे मैंने अपनी गोद में ले लिया। मैंने जब उसे अपनी गोद में लिया तो सामने से एक महिला दौड़ी हुई आई और वह कहने लगी कि आपका बहुत शुक्रिया जो आपने मेरे बच्चे की जान बचाई। मैंने उन्हें कहा कि यह यहां पर कैसे आ गया तो वह मुझे कहने लगे कि मैं कुछ सामान खरीद रही थी तब यह रोड की तरफ चला आया मैंने इधर-उधर देखने की कोशिश की लेकिन मुझे कहीं दिखाई नहीं दिया। कुछ देर बाद उनके पति भी आ गये और वह मुझे कहने लगे कि आपका बहुत शुक्रिया कि आपने मेरे बच्चे की जान बचाई। वह मुझसे पूछने लगे कि आप क्या यहां घूमने के लिए आए हैं तो मैंने उन्हें बताया हां हम लोग यहां घूमने के लिए आए हैं। वह कहने लगे कि हम लोग यहीं पर अपना एक होटल चलाते हैं आप हमारे होटल पर जरूर आइएगा। उनकी यह बात सुनकर मैंने उन्हें कहा हां सर हम लोग कोशिश करेंगे आपके होटल में जरूर आए। मैं और सुनील अपने होटल में चले गए हम लोग वहां पर कुछ देर आराम करने लगे और उसके बाद अगले दिन जब हम लोग वहां से ट्रेकिंग के लिए गए तो मैं काफी ज्यादा थक गया था।

सुनील मुझे कहने लगा कि तुम तो बहुत जल्दी थक गए हो लेकिन जैसे तैसे हम लोगों ने ट्रैकिंग कर ही ली और शाम के वक्त हम लोग होटल में लौटे तो मेरे पैरों में काफी दर्द हो रहा था मैंने सुनील से कहा मेरे पैरों में बहुत दर्द हो रहा है मैं आराम कर रहा हूं। सुनील कहने लगा ठीक है तुम आराम कर लो और मैं रूम में आराम करने के लिए चला गया। अगले दिन हम लोग चाय पीने के लिए उसी टफरी के पास खड़े थे तो मुझे वह व्यक्ति दिखे जिनके बच्चे की मैंने जान बचाई थी वह मुझे कहने लगे कि आप हमारे होटल में नहीं आए। वह मुझसे जिद करने लगे और मुझे अपने होटल में वह लेकर चले गए। मैं जब उनके होटल में गया तो वहां पर मैंने देखा उनका होटल काफी बड़ा था और वहां पर काफी लोग आए हुए थे उन्होंने मुझे कहा आज आप हमारे साथ ही लंच करेंगे। मैंने उन्हें कहा सर रहने दीजिए लेकिन उन्होंने जिद की तो मैं भी कुछ मना ना कर सका और मैंने सुनील से कहा हम लोग आज यहीं लंच कर लेते हैं। सुनील कहने लगा ठीक है और हम लोगों ने उन्हीं के साथ लंच किया वह मेरे बारे में पूछने लगे तो मैंने उन्हें अपने बारे में बताया मेरी उनसे काफी अच्छी बातचीत हो गई थी। वह मुझे कहने लगे कि आप जब भी यहां आए तो मुझे जरूर फोन करिएगा।

उनकी पत्नी भी हमारे साथ बैठी हुई थी मैंने उन्हें पूछा आप लोग यहां कितने वर्षों से होटल चला रहे हैं तो वह कहने लगे कि हमें यहां काफी वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने मुझे बताया कि उनके पिताजी ने यह होटल शुरू किया था और उसके बाद वही उस काम को आगे बढ़ा रहे हैं मैं और सुनील अपने होटल वापिस लौटे तो सुनील उनकी तारीफ करने लगा और कहने लगा कि वह लोग बहुत ही अच्छे हैं। मैंने सुनील से कहा वह लोग बहुत अच्छे हैं उन्होंने हमारी बहुत ही अच्छे से खातिरदारी की उसके बाद हम लोग दिल्ली लौटने की तैयारी करने लगे। अब हम लोग दिल्ली पहुंच चुके थे और जब हम लोग दिल्ली लौटे तो घर पर आकर वही मम्मी पापा का झगड़ा दोबारा से होने लगा मैं तो इस बात से बहुत तंग आ चुका था। मुझे कई बार लगता कि मुझे अब अलग ही रहना चाहिए क्योंकि मैं मम्मी पापा के झगड़े को बिल्कुल भी देख नहीं सकता था वह लोग आए दिन झगड़ा करते रहते थे मुझे यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था। मैं सुनील के पास चला गया था सुनील मुझे कहने लगा यार तुम अपने पापा मम्मी के झगड़े से कितना परेशान रहते हो। मैंने उसे कहा यार मुझे क्या करना चाहिए मैं बहुत ही ज्यादा परेशान हो चुका हूं मैंने उन्हें कई बार इस बारे में समझाया लेकिन वह दोनों हमेशा ही एक दूसरे से झगड़ते रहते हैं। सुनील मुझे कहने लगा आज मैं तुम्हें पब मैं ले चलता हूं वहां पर तुम शराब पीना। मैंने आज तक कभी भी शराब को हाथ नहीं लगाया था लेकिन जब पहली बार मैंने शराब पी तो मुझे अच्छा लगा और उसी दिन मेरी मुलाकात माया भाभी से हो गई। माया भाभी रूप की बेहद ही सुंदर थी वह अपने जीवन में तन्हाई में जी रही थी उनके जीवन में सब कुछ होते हुए भी वह अधूरा महसूस करती थी। उन्होंने मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और कई बार में उनसे मिलने के लिए उनके घर पर चला जाया करता था अब यह सिलसिला कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था।

जब पहली बार मैंने माया भाभी के बदन की तारीफ की तो वह मुझे कहने लगी क्या तुम मेरे बदन को देखना चाहती हो मैंने उन्हें कहा नहीं रहने दीजिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा था। जब उन्होंने मेरे सामने कपड़े उतारे तो मैं उन्हें देखकर मैं रह ना सका मैंने लपकते हुए उनके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसना शुरू किया। काफी देर उनके स्तनों का रसपान करने के बाद जब मेरे अंदर से पूरी गर्मी बाहर निकलने लगी तो वह मुझे कहने लगी मुझसे रहा नहीं जा रहा है। उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे हिलाना शुरू किया कुछ देर के बाद जब उन्होंने मुझे कहा आप मेरे लंड को ऐसे ही चूसते रहिए उन्होंने मेरे लंड को काफी देर तक चूसा मेरे लंड से पानी बाहर निकलने लगा। वह मुझे कहने लगी अब मुझे मजा आ रहा है और जब मैंने उनकी चिकनी चूत पर अपने लंड को लगाया वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी मैं उन्हें लगातार तेजी से धक्के मार रहा था उनकी चूत के मजे लेना मेरे लिए बड़ा ही मजेदार था।

जिस प्रकार से मै उनको चोदता वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी उनकी चूत के अंदर मैंने अपने वीर्य को गिरा दिया था। उसके बाद तो मैंने अपने लंड क उनकी गांड के अंदर डाल दिया। वह मुझे कहने लगी मेरी गांड काफी समय बाद कोई मार रहा है लेकिन तुम्हारा लंड मेरी गांड के अंदर तक चला गया है इस बात की मुझे बहुत खुशी है। मैंने उनकी चूतडो को कसकर पकड़ा था और अपने लंड को अंदर बाहर करता जा रहा था। मुझे काफी ज्यादा मजा आ रहा था और उन्हें भी बहुत मजा आता ऐसा ही हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक करते रहे लेकिन जब उनकी गांड से आग बाहर निकलने लगी तो मैं शायद उसे झेल नहीं पाया। उन्हें मैंने कहा मैं आपकी गांड की आग को नही झेल पाऊंगा वह मुझे कहने लगी मुझसे भी शायद रहा नहीं जाएगा। कुछ ही क्षणो बाद मैंने अपने वीर्य को जब माया भाभी की गांड के ऊपर गिराया तो मुझे बड़ा मजा आ गया। उसके बाद तो उन्होंने मेरी हर समस्या का समाधान ढूंढ लिया और मैं उनके पास दौड़ा चला जाता हूं।


error: