मौका मिला चुदाई का


Antarvasna, desi kahani: मैं और काव्या हर रोज पार्क में मॉर्निंग वॉक के लिए जाया करते हैं काव्या से मेरी शादी को हुए 10 वर्ष हो चुके हैं मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी से काफी खुश हूं। एक दिन हम दोनों सुबह पार्क में टहलने के लिए गए हुए थे तो उस दिन हमारे पड़ोस में ही रहने वाले शुक्ला जी भी हमें वहां पर मिले जब वह हमे मिले तो उन्होंने हमें कहा कि अरे रोहित जी आप कैसे हैं? मैंने उन्हें कहा मैं तो ठीक हूं आप सुनाइए शुक्ला जी आप कैसे हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का विदेश में एक अच्छी कंपनी में सिलेक्शन हो चुका है मैंने उन्हें इस बात की बधाई दी और उसके बाद वह कुछ देर तक हम से बात करते रहे फिर वह चले गए अब हम लोग भी पार्क से वापस घर लौट चुके थे।

जब हम लोग घर लौटे तो काव्या ने मुझे कहा कि रोहित क्या मैं आपके लिए नाश्ता तैयार कर दूँ तो मैंने काव्या से कहा नहीं अभी रहने दो मेरा अभी नाश्ता करने का मन नहीं है थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता कर लूंगा। उसके बाद मैं अब अखबार पढ़ने लगा था उस वक्त सुबह के 8:00 बज रहे थे और मैं अभी तक घर पर ही था क्योंकि मुझे उस दिन कहीं जाना नहीं था। काव्या ने थोड़ी देर बाद मुझसे कहा रोहित हम लोग नाश्ता कर लेते हैं, बच्चे भी स्कूल जा चुके थे इसलिए हम दोनों ने साथ में नाश्ता किया काव्या और मैंने साथ में नाश्ता किया। हम लोग घर पर ही थे उस वक्त करीब 11:00 बज रहे थे और काव्या की सहेली मीनाक्षी घर पर आई हुई थी मीनाक्षी के पति का ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है और मीनाक्षी के पति आकाश के साथ मेरी काफी अच्छी दोस्ती है। मैंने मीनाक्षी से पूछा आकाश आजकल कहां है तो मीनाक्षी ने बताया कि वह चंडीगढ़ गए हुए हैं मैंने मीनाक्षी से कहा कि आकाश क्या कोई जरूरी काम से चंडीगढ़ गया हुआ है तो मीनाक्षी ने मुझे बताया कि हां वहां पर आकाश का कोई जरूरी काम था इसलिए वह कुछ दिनों के लिए चंडीगढ गए हुए हैं।

काव्या, मीनाक्षी और मेरे लिए चाय ले आई मेरा चाय पीने का बिल्कुल मन नहीं था लेकिन मीनाक्षी के साथ बात करते करते मैंने भी चाय पी ली हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो मीनाक्षी ने कहा की हर्षित का कल जन्मदिन है तो मैं तुम लोगों को उसके जन्मदिन के लिए इनवाइट करने के लिए आई हुई थी। मैंने मीनाक्षी से कहा लेकिन आकाश तो यहां पर नहीं है तो तुमने क्या सारा अरेंजमेंट कर दिया है मीनाक्षी ने कहा कि आकाश के एक पुराने दोस्त हैं उन्होंने ही सारा अरेंजमेंट करवा दिया है। मीनाक्षी काफी देर तक हमारे साथ बैठी रही और वह उसके बाद घर चली गई जब मीनाक्षी घर गई तो काव्या और मैं घर पर ही थे। शाम हो चुकी थी शाम के करीब 5:00 बज रहे थे हम लोग शाम के वक्त बच्चों को लेकर कॉलोनी में ही टहलने लगे मैंने काव्या से कहा कि काव्या मैं आज गौतम से मिल आता हूं। गौतम मेरी बहन के पति हैं और उस दिन मैं गौतम से मिलने के लिए चला गया। मेरी बहन जो कि बेंगलुरु में बैंक में नौकरी करती है और गौतम दिल्ली में ही नौकरी करते हैं मैं काफी समय से गौतम से नहीं मिला था तो मैं गौतम से मिलने के लिए उस दिन उनके घर पर चला गया। मेरे घर से गौतम के घर की दूरी ज्यादा नहीं थी इसलिए मैं जल्दी ही उनके घर पहुंच गया जब मैं गौतम से मिला तो गौतम उस वक्त मुझे कहने लगे कि मैं अभी ऑफिस से थोड़ी देर पहले ही लौटा हूं। मैंने गौतम से कहा क्या तुम्हारी सविता से कोई बात हुई थी तो वह तो मुझे कहने लगा कि सविता से तो मेरी हर रोज बात होती है और शायद वह कुछ दिनों के लिए घर आने वाली है। मैंने गौतम से कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छा है कि कुछ दिनों के लिए सविता घर आ जाएगी। मैं गौतम के साथ काफी देर तक रुका और फिर मैं अपने घर वापस लौट आया जब मैं घर वापस लौटा तो काव्या ने कहा कि रोहित आप डिनर कर लीजिए मैंने कहा तुम भी मेरे साथ आ जाओ हम साथ में ही डर कर लेते हैं। हम लोगों ने साथ में डिनर किया पापा और मम्मी भी काफी समय से गांव नहीं गए थे इसलिए वह लोग भी गांव गए थे पापा अपने रिटायरमेंट के बाद ज्यादा समय गांव में ही बिताया करते है।

अगले दिन हम लोगों को मीनाक्षी ने बर्थडे में आने के लिए इनवाइट किया था तो हम लोग उस दिन होटल में चले गए मीनाक्षी ने हर्षित का बर्थडे काफी अच्छे से सेलिब्रेट किया और हम सब लोग भी वहां पर थे तो मीनाक्षी काफी खुश थी लेकिन आकाश की कमी सबको खल रही थी। आकाश अभी भी चंडीगढ़ में ही था और वह वापस नहीं लौटा था हम लोग भी उस दिन देर रात से घर लौटे थे। काफी दिनों बाद मीनाक्षी घर पर आई उस वक्त काव्या घर पर नहीं थी और मैं ही घर पर अकेला था। मैंने मीनाक्षी से कहा तुम कुछ देर बैठ जाओ बस काव्या आती ही होगी। मीनाक्षी मेरे साथ बैठी हुई थी मैंने मीनाक्षी को कहा क्या मैं तुम्हारे लिए चाय बना दूं। वह कहने लगी नहीं रोहित रहने दीजिए मैंने आकाश के बारे में मीनाक्षी से पूछा तो मीनाक्षी ने बताया कि वह घर पर ही हैं। मैंने मीनाक्षी से कहा मुझे आकाश को मिलने के लिए आना ही पड़ेगा। मीनाक्षी ने मुझे बताया कि आजकल वह घर पर किसी से भी अच्छे से बात नहीं कर रहे हैं उनका कोई बड़ा नुकसान हुआ है जिसकी वजह से वह काफी ज्यादा परेशान है शायद इसी वजह से मीनाक्षी भी बहुत परेशान थी।

मैंने मीनाक्षी का हाथ पकड़ते हुए कहा तुम बेवजह परेशान हो रही हो तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है लेकिन मुझे क्या पता था कि मीनाक्षी मेरी गोद में ही बैठ जाएगी। जब वह मेरी गोद में बैठेगी तो मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए वह इतनी ज्यादा उत्तेजीत हो जाएगी कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पाएगी। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुके थे। हम दोनो बेडरूम मे आ गए, मैने उसके होठो को चूमा और उसके होठो से खून निकल दिया फिर तो वह तडप ऊठी और अपनी चूत मे उंगली डालने लगी। मीनाक्षी ने अपने कपडे उतारे उसने अपनी काली ब्रा को उतारा मै उसके स्तनो को मसलने लगा वह उत्तेजित हो रही थी मै उसके स्तनो को मसलता तो उसके मुँह से सिसकिया निकलने लगी। वह पूरे जोश मे थी काफी देर तक उसके स्तनो का रसपान करने के बाद मैंने उसकी उत्तेजना बढा दी थी। मैने जब उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाला तो मैने उसकी चूत को बहुत देर तक महसूस किया वह मचल ऊठी उसकी चूत मे उंगली डाली तो वह जोर से चिल्लाई। मेरा लंड भी तन कर खडा होने लगा था जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराता तो वह खुश हो रही थी मैने उसकी पैंटी को उतार दिया था। मैं उसके स्तनो को दबाने लगा और जब अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो उसके मुंह से सिसकिया निकलने लागी। मैंने उसकी चूत पर लंड सटाया और अंदर डाला मेरे लंड उसकी चूत मे चला गया वह चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी चूत मे घुस चुका था। मैने उसे धक्के मारने शुरु किए तो मेरा लंड और भी कडक हो जाता मै मीनाक्षी के स्तनो को मसल रहा था मुझे मजा आ रहा था वह जोर से सिसकियां लेकर मेरी आग को और भी बढ़ती जाती। जब मेरा लंड उसकी चूत को चिरता हुआ अंदर जाता तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ज्यादा मोटा है। उसकी चूत की चिकनाई बढ गई जिससे मेरा लंड उसकी चूत के अंदर आसानी से जा रहा था। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था जिससे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने मीनाक्षी को कहा तुम अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ कर लो। मीनाक्षी ने अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ कर लिया जब उसने ऐसा किया तो मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और अपने लंड को मीनाक्षी की चूत पर सटाया।

मैंने उसकी चूत के अंदर अब अपने लंड को धीरे धीरे घुसाना शुरू कर दिया जिससे कि मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला गया। जब मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही धक्के मरो। उसकी योनि की गर्मी को मैं और भी ज्यादा बढ़ा चुका था और अब वह मुझसे अपनी चूतड़ों को टकराने लगी थी मैं समझ चुका था कि उसके अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि वह मुझसे अपनी चूत अच्छे से मरवना चाहती है। मैंने उसकी चूतड़ों को पकड़ लिया जब मैंने उसकी चूतडो को पकड़ो तो मैं अपनी पूरी ताकत के साथ उसे चोदने लगा था।

जब मैं ऐसा कर रहा था तो वह मुझे कहने लगी तुम मुझे अब ऐसे ही धक्के देते रहो मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बहुत देर तक किया जिससे कि मीनाक्षी की चूत से बहुत ही ज्यादा गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगा था और उसकी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा था लेकिन मुझे तो बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मैं उसकी चूतड़ों पर प्रहार करता जा रहा था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं बस मीनाक्षी की चूत मारता ही रहूं। मेरा लंड मीनाक्षी की चूत के अंदर तक चला गया था उसकी चूत की दीवार से मेरा लंड टकराने लगा था जिससे कि वह भी अपने मुंह से सिसकियां लेने लगी थी उसकी सिसकियां मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ाती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो मुझे बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा है। उसने मेरा साथ बडे अच्छे से दिया जैसे ही मेरी वीर्य की पिचकारी मैंने उसके चूतड़ों पर गिराया तो वह खुश हो गई। मैंने उसे कपड़ा दिया तो उसने अपनी चूतड़ों को साफ किया और मुझे कहने लगी आज तुम्हारे साथ संभोग कर के मजा आ गया मैं अपनी परेशानी को भूलकर तुम्हारे साथ सेक्स कर के बहुत ही खुश हूं। हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए थे और फिर कुछ देर बाद काव्या घर पर आ गई मीनाक्षी के चेहरे पर खुशी थी।


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