मौका मिल गया आख़िर मुझे


Kamukta, antarvasna मैं एक दिन अपने ऑफिस में बैठा हुआ था उस दिन मेरे पास कोई भी काम नहीं था मैं ऑफिस में बैठ कर यही सोचने लगा की बचपन में मैंने कितने बुरे दिन देखे हैं लेकिन अब जब सब कुछ इतना अच्छा चल रहा है तो उसके बावजूद भी मेरे जीवन में शायद वह खुशियां नहीं है जो होनी चाहिए थी। दरअसल मेरे पिताजी का कारोबार अच्छे से चल नहीं पाया जिस वजह से उन्हें बहुत नुकसान झेलना पड़ा जब उनका नुकसान हुआ तो वह उस नुकसान की भरपाई कर ही नहीं पाए। मेरे मामा जी ने मेरी बहुत अच्छे से देखभाल की और जब उन्होंने मुझे अपने साथ रखा तो उन्होंने मुझे अच्छी तालीम दी जिससे कि मैं अपने पैरों पर खड़ा हो पाया। उस वक्त हमारे पड़ोस में एक कुसुम नाम की लड़की रहती थी मैं उसे हमेशा ही देखा करता था और उससे बात करने के बारे में सोचता वह किसी गर्ल्स कॉलेज में पढ़ती थी लेकिन मैं उससे कभी बात ही नहीं कर पाया मैं बहुत ज्यादा शर्मिला था परंतु जब आज भी मैं कुसुम के बारे में सोचता हूं तो मेरा दिल उसके नाम से धड़क जाता है।

इस बात को काफी वर्ष हो चुके हैं कुसुम का परिवार मेरे मामा जी के घर के पास ही रहा करता था लेकिन अब वह लोग वहां नहीं रहते हैं उन्होंने अपना घर बेच दिया था और उसके बाद ना तो मैं कभी कुसुम से मिला और ना ही कभी उससे मेरी कोई बात हो पाई लेकिन अब भी मेरे दिल में उसकी ही तस्वीर है। उस वक्त कुसुम मेरा बचपन का प्यार था यह प्यार अब भी मेरे दिल में जीवित है और मैं हमेशा सोचता हूं कि कभी मेरी कुसुम से मुलाकात हो जाए लेकिन ऐसा इतने वर्षों में हो ही नहीं पाया। मेरे मामा जी मेरे लिए लड़की देखने लगे थे मेरे लिए कई अच्छे घरों से रिश्ते भी आने लगे थे क्योंकि मेरी अच्छी नौकरी थी जिस वजह से मुझे अच्छे रिश्ते भी आने लगे थे यह सब चलता जा रहा था। मेरे मामा ने मुझे कहा बेटा तुम आज घर पर ही रहना मैं अपने मामा जी के साथ ही रहता हूं मेरी मां मेरे बड़े भैया के पास रहती हैं भैया की शादी हो चुकी है और भैया ही मेरी मां की सारी जिम्मेदारी उठाते हैं मैं भी भैया को पैसे भेज दिया करता हूं ताकि मां को कोई भी दिक्कत ना हो जब भी मेरा मन मेरी मां से मिलने का होता है तो मैं उनसे मिलने के लिए चला जाया करता हूं।

यह सिलसिला काफी समय से चला रहा था मैं उस दिन घर पर ही था मैंने सोचा क्यों ना आज मैं फेसबुक पर अपने दोस्तों से बात करूं मैं फेसबुक पर अपने दोस्तों से बात करने लगा मेरी उनसे काफी देर तक चैटिंग पर बात होती रही जब मेरी उनसे बात हुई तो उसी दौरान मैंने अपने ही एक दोस्त की प्रोफाइल में अपने किसी दोस्त को ढूंढने लगा फिर मैंने देखा की उसकी फ्रेंड लिस्ट में कुसुम भी थी। पहले मुझे लगा शायद वह कोई और कुसुम होगी लेकिन मैंने जब अपने दोस्त को फोन कर के कुसुम के बारे में पूछा तो वह कहने लगा हां मैं कुसुम को जानता हूं कुसुम के पिताजी मेरे पिताजी के ऑफिस में काम किया करते थे इसलिए मेरी भी उन लोगों से मुलाकात होती रहती है कुछ दिन पहले ही मैं कुसुम से मिला था। मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गया मैंने अपने दोस्त से कहा मुझे तुमसे मिलना है मुझे कोई जरूरी काम था वह कहने लगा आखिर बात क्या है तो मैंने अपने दोस्त से कहा मुझे बस तुमसे मिलना है तुम कब फ्री हो रहे हो जब मेरे दोस्त ने मुझे कहा मैं कुछ देर बाद फ्री हो जाऊंगा तो मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए आता हूं मैं तुरंत ही अपने दोस्त के पास चला गया। जब मैं अपने दोस्त से मिला तो वह मुझे कहने लगा आज तुमने मिलने में इतनी ज्यादा हड़बड़ी क्यों की हम लोग कल भी मिल सकते थे मैंने अपने दोस्त से कहा मुझे तुमसे कुसुम के बारे में जानता था वह मुझे कहने लगा लेकिन मैं तुम्हें कुसुम के बारे में क्या बताऊं फिर मैंने उसे सारी बात बताई और कहां तुम मुझे कुसुम के बारे में यह बताओ कि अब वह कहां रहती है और क्या कर रही है। उसने जब मुझे कुसुम के बारे में बताया तो मैं खुश हो गया मुझे लगा था कि कुसुम की शादी अब तक हो चुकी होगी लेकिन कुसुम ने अब तक शादी नहीं की थी मैंने अपने दोस्त को सारी बात बताई और कहा कुसुम के माता पिता मेरे मामाजी के पड़ोस में रहा करते थे जिस वजह से मैं कुसुम को चाहने लगा था लेकिन उस वक्त मैं उसे अपने दिल की बात नहीं कह पाया था परंतु मुझे तुम्हारी मदद चाहिए जिससे कि मैं उसे अपने दिल की बात कह सकूं।

मेरा दोस्त मुझे कहने लगा क्यों नहीं मैं जरूर तुम्हारी मदद करूंगा, मेरे दोस्त ने मेरी बहुत मदद की उसने कुसुम से मेरी बात फोन पर करवा दी जब मैंने कुसुम से फोन पर बात की तो कुसुम ने पहले तक मुझे पहचाना नहीं मैंने कुसुम को सारी बात बताई तो कुसुम कहने लगी क्या तुम तेजस हो। मैं पूरी तरीके से चौक गया मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि कुसुम को मेरा नाम पता होगा मैंने जब कसम से पूछा तुम्हें मेरा नाम कैसे पता चला तो कुसुम मुझे कहने लगी बस ऐसे ही मुझे तुम्हारा नाम पता था मैंने कुसुम का नंबर ले लिया था और मैं कुसुम से फोन पर बात किया करता था उससे फोन पर बात करना मुझे बड़ा अच्छा लगता। मेरे लिए यह एक अलग ही फीलिंग थी जब मैं और कुसुम आपस में बात किया करते तो हम दोनों की बातें अब काफी बढ़ती जा रही थी और हम दोनों जब भी मिलते तो एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश होते हैं। मैंने जब कुसुम से यह बात पूछी कि उसे मेरे बारे में कैसे पता तो कुसुम ने मुझे बताया था कि वह मुझे उस वक्त भी जानती थी लेकिन मैं उससे बात नहीं किया करता था इसलिए उसे लगा कि शायद मेरा नेचर ही ऐसा है कुसुम ने भी उस वक्त बात करने की हिम्मत नहीं की।

मैं पूरी तरीके से परेशान हो गया मुझे लगा मैंने उस वक्त गलती कर दी थी लेकिन मैं वह गलती दोबारा से नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने कुसुम से इस बारे में बात की तो कुसुम कहने लगी मैं तुम्हें क्या बताऊं उस वक्त तुम मुझसे बात ही नहीं किया करते थे मैंने उसे अपने दिल की बात बता दी और कहा कि मुझे तुम्हे देख कर बड़ा डर लगा करता था लेकिन मैं तुम्हें चाहता था और आज भी तुमसे उतना ही प्यार करता हूं। कुसुम खुश हो गई और उसने मुझे गले लगा लिया मुझे पता था कि वह मुझे प्यार करती है लेकिन मैंने कभी उससे बात नहीं की तो उसने भी मुझसे कभी बात नहीं की यह बात सुनकर मैं दंग रह गया मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि कभी हम दोनों के बीच में यह सब हो पाएगा, अब हम दोनों के बीच में प्यार था। मैं अब कुसुम को डेट कर रहा था कुसुम मेरे साथ बहुत खुश थी मैं कुसुम कि छोटी छोटी चीजों का ध्यान रखा करता और वह भी मेरी हर बातों का ध्यान रखा करती। एक दिन उसने मुझे कहा मुझे तुमसे कुछ काम था मैंने कुसुम से कहा बोलो क्या काम था वह मुझे कहने लगी आज मुझे मेरे कॉलेज के सेमिनार में जाना है। कुसुम कॉलेज में पढ़ाती थी और मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें छोड़ देता हूं मैंने उसे उसके कॉलेज में छोड़ दिया वह मुझे कहने लगी तुम्हें लेट हो रही है तो तुम ऑफिस चले जाओ मैंने कहा नहीं कोई बात नहीं मैं उसका इंतजार काफी देर तक करता रहा जब वह आई तो उसने मुझे कहा तुमने मेरा इंतजार इतनी देर तक क्यों किया तुम्हें चले जाना चाहिए था मैंने उसे कहा कोई बात नहीं। उसके बाद हम दोनों वहां से एक साथ अपने घरों के लिए निकले मैंने कुसुम को उसके घर पर छोड़ दिया था। कुसुम और मेरी बातें होती रहती थी हम दोनों के बीच अश्लील बातें भी होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बहुत बेताब रहते।

मैं जब भी कुसुम से मिलता था तो उसकी सुंदरता की तारीफ किया करता, एक दिन मुझे वह मौका मिल गया जब मैं और कुसुम साथ में थे। जब कुसुम मेरे साथ थी उस दिन कुसुम और मेरे बीच में वह सब कुछ हो गया जो मैंने कभी सोचा नहीं था, मैंने कुसुम को अपनी गोद में बैठा लिया जब वह मेरी गोद में बैठी तो मेरा लंड उसकी गांड से टकरा रहा था और उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मैंने भी उसके होठों का रसपान बहुत देर तक किया जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई और पूरे मूड में आ गई तो मैंने उसे कहा क्या तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लोगी। वह मुझे कहने लगी क्यों नहीं उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ, मैं उसके गले तक अपने लंड को डालना जाता जब उसके गले तक मेरा लंड जाता तो मेरे अंदर का जोश और भी दोगुना हो जाता।

मैंने भी कुसुम की योनि को बहुत देर तक चाटा मैंने जब कुसुम की योनि को चाटा तो उसे भी बड़ा मजा आता और वह मेरा पूरा साथ देती, यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। जब मैंने कुसुम की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी चूत फाड़ दी उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को बहुत देर तक किया जब उसकी योनि के अंदर बाहर मेरा लंड होता तो उसे बहुत मजा आता और मुझे भी बड़ा आनंद मिलता यह सब काफी देर तक चलता रहा। जैसे ही मेरा गरमा गरम वीर्य कुसुम की योनि में जा गिरा तो वह मुझे कहने लगी आपके वीर्य में तो बड़ा ही दम है और आपके लंड की तो बात ही कुछ और है। उसकी योनि से अब भी मेरा वीर्य टपक रहा था, उसकी बड़ी गांड देखकर मैं उसकी गांड को दबाने लगा उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर काफी देर तक चूसा, मेरे वीर्य को उसने अपने मुह के अंदर ले लिया था।


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