मैं दीवाना हो गया चूत का


Antarvasna, kamukta: मेरा ट्रांसफर कुछ समय पहले ही दिल्ली में हुआ। मैं दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार के घर पर कुछ दिनों तक रहा और फिर मैंने अपने लिए घर देख लिया था। मैं जिस किराए के घर में रहता था वहीं पड़ोस में माया रहा करती थी। माया को जब भी मैं देखता तो मुझे अच्छा लगता। माया से काफी समय तक मेरी बात हो नहीं पाई थी लेकिन एक दिन जब मैं घर लौट रहा था तो उस दि  माया के हाथ से उसका पर्स नीचे गिर गया जो मैंने उठाया और मैंने उसे पर्स दिया। माया ने मुझे थैंक्स कहा और उसके बाद वह वहां से चली गई। उस दिन माया ने मुझसे ज्यादा बात नहीं की मैं इस बारे में सोच रहा था माया मुझसे बात करें। मैं चाहता था वह मुझसे बात करें लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था परंतु एक दिन माया ने मुझे देखे तो उसने मुझे कहा आप कैसे हैं? मैने माया से कहा मैं तो अच्छा हूं। यह पहली बार था जब उससे मुझसे बात की और उस दिन मुझे माया से बात कर कै बहुत अच्छा लगा। अब हम दोनों का परिचय हो चुका था। मैं माया के साथ बात करने लगा था। मैं माया के साथ जब भी बाते करता तो मुझे अच्छा लगता और माया को भी बहुत ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ बात किया करते।

मैंने एक दिन माया को कहा आज मेरा जन्मदिन है। माया ने मुझे मेरे जन्मदिन की बधाई दी। मैं चाहता था मैं अपना टाइम माया के साथ में स्पेंड करूं और मैंने उस दिन माया के साथ में अपना टाइम स्पेंड किया। माया के साथ में समय बिताकर मैं काफी ज्यादा खुश था और माया भी बहुत खुश थी। हम लोगों ने उस दिन साथ में अच्छा समय बिताया उस दिन कहीं ना कहीं मैं माया के दिल में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गया था। माया भी यह बात अच्छे से जानती थी। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे हालांकि मैंने माया को पहली बार प्रपोज किया। मैंने माया को अपने दिल की बात कह डाली माया भी मेरे दिल की बात को अनसुना ना कर सकी और उसने भी हां कह दिया। मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी माया और मैं एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं। हम दोनों एक दूसरे के साथ अब काफी समय भी बिताने लगे थे। एक दिन माया ने मुझे बताया उसकी फैमिली अब यहां से शिफ्ट हो रही है। मैंने माया को कहा लेकिन तुम लोग तो यहां काफी समय से रहते हो। उस दिन माया ने मुझे बताया उसके चाचा जी और उसके पापा के बीच प्रॉपर्टी को लेकर झगड़ा चल रहा है यह बात मुझे पहली बार ही पता चली। उस दिन उसने मुझे अपने चाचा जी के बारे में बताया। माया उस दिन मेरे साथ काफी देर तक बैठी रही। माया की फैमिली अब वहां से जा चुकी थी लेकिन उसके बाद भी माया मुझसे मिलती रहती थी। जब भी माया मुझे मिलती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और माया को भी काफी अच्छा लगता जब हम दोनों साथ में होता। एक दिन माया कॉफी शॉप में बैठी हुए थी उस दिन मैंने माया को कहा माया आज मुझे तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लग रहा है।

माया मुझे कहने लगी अजीत कितने दिनों बाद हम लोग साथ में समय बिता रहे हैं क्योंकि माया को अपने ऑफिस के काम के चलते कुछ दिनों के लिए बाहर जाना था इसलिए माया और मेरी मुलाकात हो नहीं पाई थी। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था। उस दिन मैंने और माया ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया उसके बाद माया मुझे कहने लगी अब मैं चलती हूं। माया ने मुझे कहा अजीत तुम मुझे घर तक छोड़ दो। मैंने माया को उस दिन उसके घर तक छोड़ा। मैं जब माया को उसके घर तक छोड़ने के लिए गया तो माया के पापा ने हम दोनों को देख लिया मैं इस बात से घबरा गया था इसलिए मैंने माया को फोन नहीं किया। माया का मुझे फोन आया माया ने मुझे कहा मैंने पापा को हमारे बारे में सब कुछ बता दिया है। मैंने माया को कहा लेकिन तुम्हें इस बारे में बताने की जरूरत नहीं थी लेकिन माया कहां मेरी बात मानने वाली थी। माया ने उस दिन मेरे और अपने बारे में अपनी फैमिली को सब कुछ बता दिया था। माया की फैमिली को इस बात से कोई एतराज नहीं था। उसके बाद भी माया और मैं जब भी एक दूसरे को मिलते तो हम दोनों को काफी अच्छा लगता। एक दिन माया और मैं साथ में थे उसने मुझे कहा मैं तुम्हारे साथ खुश हूं। उस दिन माया और मैंने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। जब भी हम दोनों साथ में होते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता।

माया की फैमिली को भी अब इस बात से कोई एतराज नहीं था उन लोगों ने मुझे अब स्वीकार कर लिया था। मैं जब भी माया के साथ होता तो मुझे अच्छा लगता। मैं माया के घर पर भी जाने लगा था और माया की फैमिली को मेरे और उसके रिलेशन से कोई भी प्रॉब्लम नहीं थी। माया को जब भी मुझसे मिलना होता तो वह मुझे फोन कर लिया करती। एक दिन वह अपने ऑफिस से फ्री हुआ और उसने मुझे फोन किया। उस दिन वह काफी ज्यादा परेशान लग रही थी। मैंने माया को कहा मैं अभी तुमसे मिलने के लिए आता हूं। मैं जब माया को मिलने के लिए गया तो माया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। मैंने माया से पूछा आखिर क्या हुआ मैने माया को सारी बात बताई वह कहने लगी मैंने ऑफिस से रिजाइन दे दिया है। मैंने माया को जब इसका कारण पूछा तो माया ने कहा उसके ऑफिस में उसके सीनियर के साथ आज उसका झगड़ा हो गया था जिस वजह से उसने रिजाइन दे दिया। मैंने माया को समझाया और कहा देखो माया यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है लेकिन मुझे उस वक्त माया का साथ देना था और उसके मुझे उसका मूड ठीक करना था इसलिए मैंने माया को कहा आज हम दोनों कहीं साथ में चलते हैं। उस दिन हम दोनों साथ में डिनर करने के लिए गए। हम दोनों ने काफी अच्छा समय साथ मे बिताया। मैं माया से बात कर रहा था माया को भी अच्छा लग रहा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने माया को कहा क्यों ना तुम और मैं एक दूसरे के साथ आज रुके। माया पहले इस बारे में सोचने लगी लेकिन फिर उसने मुझे कहा ठीक है हम लोग साथ में रुक जाते हैं।

उस दिन हम दोनों साथ में रुके। मुझे माया के साथ काफी अच्छा लग रहा था मै जब माया की जांघों को सहला रहा था तो मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने माया के जांघो को काफी देर तक सहलाया और फिर उसके होठों को मैं चूमने लगा। मैं उसके होठों को जिस प्रकार से चूम रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था और माया को भी अच्छा लग रहा था। मैं पूरी तरीके से गर्म होने लगा था। माया इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी। मैंने माया की चूत के अंदर अपनी उंगली घुसा दी। मैंने माया की चूत में उंगली घुसाई तो मुझे मजा आने लगा। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी। वह जिस तरिके से सिसकारियां लेने लगी उस से मुझे मजा आने लगा। माया ने जब मेरे मोटे लंड को अपने हाथों में लिया तो मुझे अच्छा लगने लगा था और माया को भी बड़ा मजा आने लगा था। वह मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाने लगी और मेरी गर्मी को बढ़ाए जा रही थी। मेरी गर्मी को उसने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था। अब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहे थे मैंने माया की चूत को चाटना शुरु कर दिया था। माया की चूत को चाटने में मुझे मजा आ रहा था। मेरे और माया के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। हम दोनों के अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। हम दोनों बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रहे थे। मैंने माया कि योनि पर अपने लंड को लगाते हुए अंदर की तरफ डाला तो मेरे माया की चूत मे लंड घुसा गया था वह माया की चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया था।

माया की योनि मे मेरा लंड सेट हो चुका था। मैंने जब माया की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू किया तो माया गर्मागर्म सिसकारियां ले रही थी वह जिस प्रकार से गर्म सिसकारियां ले रही थी उस से मुझे मज़ा आ रहा था और माया को भी बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगा था। मैं और माया एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे। मैंने माया के दोनों पैरों को खोल लिया था और माया की चूत मारने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब मैं माया की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो माया ने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ना शुरू किया। जब वह मुझे अपने पैरो के बीच मे जकडने लगी तो मैं समझ गया वह झड़ चुकी है क्योंकि उसकी चूत से काफी पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैंने माया की चूत में अपने माल को गिराया तो माया खुश हो गई और मुझे बोली आज मुझे मजा आ गया। मैं और माया एक दूसरे के साथ में लेटे हुए थे। हम लोगों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया और मैंने माया को पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था। मै बहुत ज्यादा खुश था जिस प्रकार से मैंने उसके साथ शारीरिक सुख के मजे लिए थे।


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