मै बांहो में महफूज थी


Antarvasna, hindi chudai ki kahani: कॉलेज के बाहर खड़ी होकर मैं ऑटो का वेट कर रही थी तभी राहुल ने मुझे देखा और कहने लगा कि माधुरी मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं। मैंने राहुल को कहा नहीं राहुल मैं घर चली जाऊंगी लेकिन राहुल ने मुझसे जिद की तो मैंने उसे कहा ठीक है तुम मुझे घर छोड़ दो। राहुल हमारे साथ हमारी क्लास में ही पड़ता है राहुल ने जब मुझे घर छोड़ा तो मैंने राहुल को कहा कि आओ मैं तुम्हें अपने मम्मी पापा से मिलवाती हूं। राहुल कहने लगा कि कभी और आ जाऊंगा और फिर राहुल चला गया अगले दिन जब मैं क्लास में बैठी हुई थी तो अंशिका मेरे पास आई और कहने लगी कि आजकल तुम राहुल के साथ बड़े गुल खिला रही हो। मैंने अंशिका को कहा अंशिका लगता है तुम्हें कुछ गलतफहमी हुई है परंतु अंशिका कहां अपनी गलती मानने वाली थी वह तो मुझसे तू तू मैं मैं में उतर चुकी थी और मैं भी गुस्से में आग बबूला हो चुकी थी।

मैंने उससे कहा तुम अपने दिमाग का जाकर इलाज करवा लो तभी राहुल भी आया राहुल ने अंशिका को कहा अंशिका क्या बात हुई है तुम बेवजह ही माधुरी के ऊपर क्यों इतना चिल्ला रही हो। अंशिका ने उससे कहा तुम भी चुप रहो क्योंकि मुझे मालूम है कि तुम दोनों के बीच में क्या चल रहा है राहुल उसे कहने लगा लगता है अंशिका तुम आज बहुत गुस्से में हो अंशिका कहने लगी गुस्सा तो मैं होंगी ही ना जब तुम माधुरी के साथ में होंगे। राहुल उसे समझाने की बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन अंशिका किसी भी बात को समझने को तैयार ना थी वह सिर्फ राहुल पर ही दोष मरे जा रही थी लेकिन राहुल भी उसकी बात को ज्यादा देर तक नहीं सुन पाया और कहने लगा कि अंशिका हम लोग इस बारे में बाद में बात करेंगे तुम बेवजह ही माधुरी को बीच में मत घसीटो लेकिन अंशिका कहां किसी की बात सुनने वाली थी वह तो गुस्से में आग बबूला हो चुकी थी और बड़ बडाते हुए क्लास से ही बाहर चली गई। राहुल ने मुझे कहा कि माधुरी मैं तुमसे अंशिका के बर्ताव के लिए माफी मांगता हूं मैंने राहुल को कहा राहुल कोई बात नहीं शायद अंशिका को कोई गलतफहमी हो गई थी जिसकी वजह से वह मुझ पर इतना ज्यादा भड़क रही थी। मैंने भी आंशिक से इस बारे में बात करने की कोशिश की लेकिन अंशिका तो मुझसे बात करने को ही तैयार नहीं थी वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे कोई बात ही नहीं करनी है।

उस दिन के बाद से अंशिका का रवैया मेरे प्रति पूरी तरीके से बदल गया हमारी क्लास में कोई भी ऐसा नहीं था जिससे कि मैं अच्छे से बात नहीं करती थी मेरा व्यवहार सब लोगों के साथ समान था परंतु अंशिका ने मुझसे जिस प्रकार का व्यवहार किया उसके बावजूद भी मैंने अंशिका को माफ कर दिया था परंतु अंशिका तो एक ही बात को अपने दिमाग में लेकर घूम रही थी कि मेरे और राहुल के बीच कुछ चल रहा है। मैंने राहुल के बारे में कभी ऐसा कुछ सोचा ही नहीं था राहुल हमारे क्लास में पढ़ता है और सिर्फ हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती ही थी इससे अधिक हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं था लेकिन अंशिका को कौन यह बात समझाता। राहुल को भी अंशिका की बात बहुत बुरी लगी और राहुल ने अंशिका से अपना रिलेशन ही खत्म कर लिया राहुल और अंशिका के रिलेशन के खत्म होने के बाद अंशिका मुझे ही अपने और राहुल के बीच हुए झगड़े का जिम्मेदार ठहराने लगी लेकिन उसके बाद मैंने अंशिका को कई बार इस बारे में समझाया लेकिन वह मुझसे बात ही नहीं करती थी। मैंने भी अंशिका से अब बात करना ही बंद कर दिया था हम लोग कभी भी आपस में बात नहीं करते थे राहुल मुझसे अभी भी वैसे ही बात करता था जैसे कि पहले बात किया करता था। राहुल को जब भी कुछ मदद की आवश्यकता होती तो मैं उसकी जरूर मदद कर दिया करती थी वहीं अंशिका तो मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं करती थी। मैंने अंशिका को कई बार समझाने की भी कोशिश की लेकिन अब समझाने का कोई फायदा ही नहीं रह गया था अंशिका मेरी किसी भी बात को सुनने और समझने के लिए तैयार ही नहीं थी। मुझे इस बात का बहुत ही गुस्सा था कि मेरी वजह से राहुल और अंशिका के बीच में दरार पैदा हुई। एक दिन राहुल मुझे कहने लगा कि माधुरी मुझे कुछ नोट्स की जरूरत थी क्या तुम मेरी मदद कर दोगी तो मैंने राहुल को कहा हां राहुल मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगी।

मैंने राहुल की मदद की मैंने राहुल की मदद की तो राहुल मुझे कहने लगा माधुरी कहीं तुम्हें अंशिका की बात का बुरा तो नहीं लगा। मैंने राहुल को कहा राहुल अंशिका और मेरे बीच हुए झगड़े को काफी समय हो चुका है अब इस बारे में बात हम लोग ना ही करें तो ज्यादा बेहतर होगा। राहुल मुझे कहने लगा मैंने अंशिका को उसके बाद भी काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात समझने को तैयार ही नहीं है और हमेशा ही मुझसे बहुत लड़ती रहती थी इसलिए मैंने उससे अलग होने का फैसला कर लिया। राहुल और अंशिका का प्यार कॉलेज में ही पनपना शुरू हुआ था उन दोनों का प्यार ज्यादा समय तक नहीं चल सका राहुल अभी मेरा अच्छा दोस्त है और अंशिका से भी मुझे कोई बैर नहीं है लेकिन अंशिका के दिल में ही ना जाने किस बात को लेकर गुस्सा है मैं यह समझ ही नहीं पाई। वह हमेशा ही मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करती रहती एक दिन तो उसने मुझे गिराने की भी कोशिश की वह तो अच्छा हुआ कि राहुल आगे से खड़ा था तो मैं गिरते-गिरते बची राहुल ने मुझे अपना सहारा दिया। अंशिका को यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आती थी जब भी मैं राहुल के साथ या उसके करीब होती तो वह हमेशा ही मेरी तरफ बड़े ही घूरकर देखती थी।

वह चाहती थी कि हमेशा मेरे साथ कुछ ना कुछ गलत ही होता रहे लेकिन हर बार उसी के साथ कुछ ना कुछ गलत हो जाया करता था। कुछ समय से अंशिका मुझसे बड़े अच्छे से बात कर रही थी मुझे जरूर इसमें कुछ ना कुछ गड़बड़ लग रही थी। मैंने अंशिका को कहा कि तुम मुझसे कुछ दिनों से बड़े अच्छे से बात कर रही हो और मुझसे दोस्ती करने की भी कोशिश कर रही हो। अंशिका के पास मेरी बात का जवाब नहीं था वह मुझे कहने लगी कि बस ऐसे ही मैं तुमसे बात कर रही हूं क्या हम लोग एक साथ नहीं पढ़ते हैं। मैंने अंशिका को कहा मुझे मालूम है कि हम लोग एक ही क्लास में हैं और एक साथ हम लोग पढ़ते हैं परंतु तुम्हारा रवैया मुझे लेकर कभी ठीक ही नहीं रहा है तुम हमेशा ही मुझे राहुल और अपने बीच की दीवार मानती हो और तुम्हें यह लगता है कि मेरी वजह से ही राहुल ने तुम्हें छोड़ा है लेकिन उसमें मेरी कुछ भी गलती नहीं है यदि तुम्हें हमेशा ही ऐसा लगता रहेगा तो मुझे नहीं लगता कि हम लोग एक अच्छे दोस्त बन सकते हैं। मैं अंशिका से दूरी ही बना कर रखती थी लेकिन अंशिका के मन में कुछ ना कुछ तो चल रहा था वह चाहती थी कि मेरे साथ जरूर कुछ ना कुछ गलत हो परंतु हर बार उसके मंसूबे नाकामयाब हो जाया करते थे। राहुल हमेशा ही मुझसे कहता रहता कि तुम अंशिका की बातों को दिल पर मत लिया करो एक दिन अंशिका ने मुझे क्लास रूम में ही बंद कर दिया। उस वक्त क्लास खत्म हो चुकी थी और क्लास में कोई भी नहीं था यह तो अच्छा हुआ कि यह बात राहुल को पता चल गई और राहुल ने जब दरवाजा खोला तो मैंने राहुल को गले लगा लिया। राहुल ने भी मुझे गले लगा लिया था वह कहने लगा क्या हुआ तो मैंने राहुल को कहा मैं बहुत ज्यादा डर गई थी और यह सब अंशिका ने जानबूझकर किया है।

राहुल बहुत ही ज्यादा गुस्सा हो गया था वह कहने लगा कि अंशिका को मैं कभी भी माफ नहीं कर सकता। मैंने राहुल को कहा फिलहाल तो तुम इस बारे में छोड़ दो राहुल और मैं अब भी एक दूसरे के गले मिल रहे थे लेकिन जब मैं राहुल की बाहों में थी तो मेरे शरीर से एक अलग ही करंट सा दौड़ने लगा था। जब राहुल ने मेरे होठों को चूम लिया तो मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सका मुझे ऐसा लगा जैसे राहुल ने मेरे बदन को अपना बना लिया हो। राहुल ने जब मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया और उसने मेरे कपड़े उतारकर मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मैं रह नहीं पाई। राहुल ने मुझे बेंच पर लेटाते हुए मेरे सलवार और मेरी पैंटी को उतार दिया उसने जब मेरी चूत को चाटा तो मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगे थे मैं इतनी ज्यादा गरम हो गई कि मैंने राहुल के लंड को अपनी चूत के अंदर ले लिया जैसे ही राहुल का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्लाने लगी। वह मुझे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था जिस प्रकार से वह मुझे धक्के मारता उससे मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी।

कुछ देर बाद उसने मेरी चूतड़ों को अपनी तरफ किया और मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मुझे और भी मजा आने लगा मैं राहुल का के धक्को को बिल्कुल भी झेल नहीं पा रही थी क्योंकि मेरे दिल में भी उस वक्त राहुल के साथ सेक्स करने के बारे में ही चल रहा था। राहुल मेरे चूतड़ों पर बहुत तेजी से प्रहार कर रहा था मेरी चूतडो का रंग लाल होने लगा था मेरी योनि से भी खून लगातार तेजी से बह रहा था। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से राहुल ने मुझे धक्के दिए उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। राहुल ने मुझे कहा माधुरी आज तुम्हारे साथ संभोग कर के मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है यह कहते ही राहुल कहने लगा कि मेरा वीर्य गिरने वाला है। मैंने उसे कहा तुम अपने वीर्य को मेरे मुंह के अंदर ही गिरा दो मैंने अपने मुंह को खोल लिया हो। राहुल ने जब अपने वीर्य को मेरे मुंह के अंदर गिराया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा मैंने राहुल के वीर्य को अपने अंदर ही समा लिया था और उसके लंड को मैं तब तक चूसती रही जब तक उसका लंड पूरी तरीके से मैने चूस नहीं लिया। मैंने और राहुल ने अपने कपड़े पहने और हम दोनों अपने अपने घर चले गए।


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