लंड लेने के नाम से मुस्कारा ऊठी


Antarvasna, hindi sex stories: मैं दिल्ली मे नौकरी करता हूँ मै मल्टीनेशनल में काम करता हूं। जब मैंने कंपनी जॉइन कर ली तो उसी दिन दो और लड़कियों ने भी जॉइन किया था। उन दोनों में से एक लडकी बहुत आकर्षक थी और मैं उसे अक्सर देखता रहता था, उसका नाम आकांक्षा है। वह 25 साल की है वह लगभग 5,7″ लंबी है। एक दिन वह टाइट शर्ट और पैंट पहने हुई थी मैने उसके स्तनो की तरफ देखा वह उसके कपडे चीर कर बाहर आना चाहते थे। हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, मुझे पता चला कि हम तीनों एक ही टीम में थे इसलिए हमे प्रशिक्षण सत्र एक साथ लेने के लिए कहा गया। हमने  बात करना शुरू कर दिया और अच्छे दोस्त बन गए। हम एक साथ दोपहर के भोजन के लिए जाते थे। कुछ महीने बाद मुझे मुंबई जाने के लिए कहा गया। मै मुंबई चला गया, मैने अपना सामान होटल के कमरे में जाकर बिस्तर पर रख दिया। कुछ समय तक मुंबई मे रहने के बाद मैं दिल्ली वापस लौट आया।

मैं उस दिन देर से कार्यालय गया यह एक व्यस्त दिन था। मैं उस दिन देर तक काम करता रहा, मै आमतौर पर 6.30 बजे घर चला जाता था आंकाक्षा भी ऑफिस में थी। उस दिन मैने आंकाक्षा से बात की वह मेरे सामने खड़ी हुई और धीरे-धीरे मेरे बालों को उँगलियों से सहलाने लगी और मेरे कानों को मलने लगी मेरे शरीर पर एक बिजली का झटका लगा। मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया। मैने उसके पेट को चूमा वह मेरी गोद मे बैठ गई मैने उसके स्तनो को दबा दिया। हम दोनों सेक्स के लिए तडप रहे थे लेकिन मैं सेक्स ऑफिस में नहीं कर सकता था क्योंकि यह ठीक नही था इसलिए मैंने उसे अपनी कार की चाबी दी और उसे गाड़ी में इंतजार करने के लिए कहा क्योंकि मेरा काम अभी खत्म नही हुआ था। वह तुरंत चली गई, उसके बाद मैं अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सका। मैंने आंकाक्षा के साथ सेक्स की कल्पना की तो मेरा लंड कठोर और कडक हो गया। कुछ समय के बाद मैंने अपना काम खत्म कर दिया और कार पार्किंग में चला गया, पार्किंग की जगह बिल्डिंग के कोने मे थी।

जब मैं कार के पास गया तो आंकाक्षा ने ए सी को खोल रखा था। मैंने दरवाजा खोला तो कार से आंकाक्षा के परफ्यूम की सुगंध आ रही थी जो उसने मेरे आने से पहले ही डाला था। उसने अपने होंठो को लिपस्टिक से लाल किया मैं तुरंत कार के अंदर गया और उसे अपनी ओर खींच लिया मैने उसके होंठो को चूम लिया। उसने अपने हाथ को मेरी पैंट मे डालने की कोशिश की लेकिन उसके लिए मेरे लंड तक पहुंचना मुश्किल था। मैंने अपनी बेल्ट को खोलकर उसकी मदद की। उसने मेरे लंड को पकडकर हिलाना शुरू कर दिया वह अपने होंठो से मेरे होंठों को चूम रही थी। मेरा हाथ उसके स्तनो पर था मै उसके स्तनो को दबा रहा था। उसने अपने मुंह मे मेरे लंड लेने के लिए नीचे झुकने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसे रोक दिया और उसके होंठ पर उसे लिपस्टिक लगाने के लिए कहा ऐसा करने के बाद मैने उसे मेरे लंड को चूसने के लिए कहा क्योकि मुझे यह पसंद है। उसने ऐसा किया और मेरे लंड को बहुत धीरे से चूसना शुरू कर दिया यह बहुत आनंददायक था। मैंने अपने दोस्त से कहा मै कुछ देर के लिए उसके घर का इस्तेमाल करना चाहता हूं क्योंकि वह पास के एक घर मे रहता है। मैंने आंकाक्षा को कहा जब तक हम वहां पहुंचे मैं चाहता था कि वह मेरे लंड को चूसती रहे। हम दोनो मेरे दोस्त के घर पहुंच गए। मैने दरवाजा बन्द कर लिया मैंने उसे गले लगाया और उसके स्तनों को दबा दिया। मेरा लंड तन कर खडा होने लगा था वह मुझे चूमने लगी मै उत्तेजित हो गया था। मैंने उसके कपडो को उतार दिया मैंने उसके दोनों स्तनो को दबाया मैंने उसकी ब्रा को खोलकर फेक दिया और उसके स्तनो को चूस लिया। मैंने उसके निपल्स को चूसा और मेरे मुंह मे मैने उसके पूरे स्तनो को समाने की कोशिश की, मैंने उसके चेहरे को देखा वह आनंद ले रही थी। मैंने उसकी चूत को दबा दिया, उसकी जांघें बहुत बड़ी थी मैंने उसकी जांघों को चूम लिया। वह खुशी मे कराह रही थी मुझे उसने चूत चाटने के लिए कहा, मैंने उसकी पैंटी को अपने दांतों से खींच लिया वह मेरे सामने पूरी तरह नग्न थी। मैंने उसकी चूत को देखा मैं तुरंत उसकी चूत मे लंड डालना चाहता था। उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया।  उसने मेरे लंड पर अपनी नंगी चूत रगड़ना शुरू कर दिया, मैंने उससे कहा मै कपड़े निकालना चाहता हू।

उसने मेरी शर्ट पैंट और मेरे अंडरवीयर को उतार दिए वह मेरे लंड को देखकर चकित हो गई। जब उसने मेरे लंड को अपनी चूत पर रगडा तो मै खुश हो गया। हम दोनों ही इतने ज्यादा उत्तेजित हो गए थे हम दोनों ही अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रहे थे। आकांक्षा अपनी चूत पर मेरे लंड को रगड़ रही थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उसकी चूत से गिलापन बाहर की तरफ को आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे तुम्हारे लंड को अपने मुंह के अंदर लेना है? मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लो उसने अपने नरम और गुलाबी होठों से मेरे लंड को अपने मुंह में लेना शुरू कर दिया और उसे बहुत अच्छा लगने लगा था। मै उसकी चूत के बीच मे अपने लंड को रगड़ रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। मैं और आकांक्षा एक दूसरे की बाहों में थे अब आकांक्षा ने अपनी चूत के अंदर उंगली को घुसाना शुरू किया। जब उसने ऐसा किया तो मैं उसकी तरफ देख रहा था वह मेरी तरफ देख रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह कहना चाहती है कि तुम मेरी चूत मे अपने लंड को डाल दो। मैंने उसके दोनों पैरों के बीच मे अपने लंड को उसकी चूत में लगा दिया। वह मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर लेने के लिए तैयार थी मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया तो मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर घुसने लगा।

मेरा लंड जब उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो उसने अपने होठों को अपने दांतों के बीच में दबा लिया। वह मेरी तरफ देख कर कहने लगी क्या तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका है मैंने उसकी तरफ देखा और कहा हां मेरा लंड तुम्हारी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका है। उसने अपने पैरों को खोल लिया, मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था मेरी गर्मी बढ़ती जा रही थी और उसकी चूत की गर्मी में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हारे लंड को अपनी चूत मे लेकर बहुत खुश हूं वह अपने मुंह से मादक आवाज में सिसकियां ले रही थी जिससे कि मेरी गर्मी अब कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी। वह अब अपने दोनों पैरों के बीच में मुझे जकड़ने की कोशिश कर रही थी। मै आकांक्षा की तरफ प्यार भरी नजरों से देख रहा था उसकी आंखों मे मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर लेने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। वह मेरा साथ बखूबी निभा रही थी जब वह अपने पैरों को आपस मे मिलाने लगी तो मुझे उसकी चूत का टाइटपन महसूस होने लगा। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत मार कर आज मुझे बहुत खुशी हो रही है आकांक्षा ने मेरे होठों को चूम लिया हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे और आकांक्षा मेरा साथ बखूबी साथ निभा रही थी। वह चादर को बार-बार अपने हाथों से खींच रही थी मैंने उसके हाथों को अपने हाथों से दबा लिया और उसके मुंह से निकलती हुई सिसकियां अब और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी। उसकी चीख इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि वह मुझे कहने लगी मुझे और भी तेजी से धक्के मारो। मुझे आकांक्षा के साथ सेक्स करते हुए 5 मिनट से ऊपर हो चुका था लेकिन अभी तक हम दोनों के अंदर की गर्मी बुझी नही थी।

आकांक्षा ने मेरा साथ अच्छे से निभाया और वह मुझे कहती कि तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो। कुछ देर बाद मेरे लंड से तरल पदार्थ बाहर की तरफ आने वाला था मैंने आकांक्षा को कहा कि मेरा तरल पदार्थ बाहर की तरफ को आने वाला है। आकांक्षा मेरी तरफ देख कर कहने लगी तुम अपने वीर्य को मेरी योनि मे ही गिरा देना। अब उसकी योनि के अंदर मेरा वीर्य गिराने वाला था मैंने जब उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ कुछ देर तक बैठे रहे। मैंने आकांक्षा को कहा तुम्हें कैसा लगा तो वह मुझे कहने लगी मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से तुमने आज मेरी इच्छा को पूरा किया है उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। यह कहते हुए वह मेरी तरफ देख रही थी। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो मैंने उसे कहा क्या तुम्हारी इच्छा अभी तक पूरी नहीं हुई है।

वह मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया मैंने उसे लेटा दिया।  मैंने उसके पैरों को खोला और उसकी योनि के अंदर से मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने अब उसकी योनि के अंदर अपने लंड को दोबारा से प्रवेश करवा दिया मेरा लंड उसकी चूत मे चला गया। उसकी योनि मुझे अभी भी वैसे ही टाइट महसूस हो रही थी मैं उसे तेजी से धक्के मारने लगा वह मेरी गर्मी को बढ़ा चुकी थी और उसने मेरी गर्मी को इतना बढ़ा दिया था कि मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। उसके बाद तो जैसे हम दोनों ने एक दूसरे के साथ संभोग का जमकर मजा लिया और मैं आकांक्षा को तब तक चोदता रहा जब तक मेरा लंड पूरी तरीके से छिल नहीं चुका था। मेरी इच्छा को उसने पूरा कर दिया था और उसके अंदर की गर्मी को मैं भी बुझा चुका था। उसके बाद जब मैंने उसके मुंह के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी आज तो मजा ही आ गया। मेरा दोस्त ने मुझे यदि अपना घर दिया नहीं होता तो शायद मैं आंकाक्षा के साथ मजे नहीं ले पाता।


error: