लंड की वह खुशबू


Antarvasna, kamukta: मेरी उम्र 23 साल मै बिहार के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हूं। मैं अपनी पढाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश शुरू करने लगी और जल्द ही मुझे नौकरी मिल गई। मै नौकरी करने के लिए दिल्ली आ गई मैने अपने लिए एक किराए का घर ले लिया था मै जहां रहती थी वंहा 50 वर्ष के व्यक्ति और उनकी माँ रहती थीं वह ज्यादातर बीमार रहती थी इसलिए मैं कभी कभार उनके घरेलू काम कर दिया करती थी जैसे कभी उन्हें चाय कॉफी बनाकर दे देती और कभी आंटी की देखभाल कर लेती। वैसे तो मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था लेकिन जब भी मुझे समय मिलता तो मैं आंटी की मदद जरूर कर दिया करती थी। आंटी के साथ बैठकर  मुझे अच्छा लगता मुझे अभी तक उनके परिवार के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी लेकिन जब एक दिन आंटी ने मुझे बताया कि उनके बेटे का डिवोर्स हुए काफी समय हो चुका है तो मैंने उनसे इस बारे में ज्यादा नहीं पूछा, घर पर माधव जी और उनकी बूढ़ी मां ही रहती थी।

एक दिन मैं अपने ऑफिस से लौट रही थी जब मैं अपने ऑफिस से लौट रही थी तो उस वक्त मैंने देखा कि उनके घर पर एक महिला आई हुई थी तो मैं सीधे अपने रूम में चली गई। थोड़ी देर बाद उनके घर से काफी शोर शराबे की आवाज आने लगी मैं जब रूम से बाहर आई तो मैंने देखा वह महिला माधव जी पर बहुत चिल्ला रही थी उनकी बातों से यह तो पता चल चुका था कि वह उनकी पत्नी ही होगी। उसके बाद वह चली गई तो सब कुछ सामान्य हो गया उसके अगले दिन मेरी छुट्टी थी मैं घर पर ही रहने वाली थी और जब मैं आंटी के पास गई तो उन्होंने मुझे बताया कि कल उनकी बहू आई हुई थी और वह काफी हंगामा कर के गई। मैंने भी यह सब सुन लिया था लेकिन मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा उन्होंने मुझे बताया कि वह माधव जी से पैसे की मांग कर रही थी। वह अपनी बेटी के साथ अलग रहती हैं माधव जी को किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी लेकिन उनके जीवन में बिल्कुल भी खुशियां नहीं थी उनकी पत्नी उनसे अलग रहती है।

उनका इस जीवन में उनकी मां के अलावा कोई और था ही नहीं मैंने उनके घर पर किसी रिश्तेदार को भी आते जाते कभी नहीं देखा था मुझे वहां रहते हुए करीब 6 माह हो चुके थे और इन 6 महीनों के अंदर मैं उन लोगों से काफी ज्यादा घुलने मिलने लगी थी। अब मेरे दोस्त भी बन चुके थे मेरे ऑफिस में मेरे साथ काम करने वाली संजना ने मेरी मुलाकात जब समीर से करवाई तो समीर का साथ पाकर मैं जैसे खुश हो चुकी थी और मैं समीर के साथ ही समय बिताने लगी थी। समीर और मेरे बीच काफी नजदीकियां बढ़ने लगी थी जिस वजह से हम दोनों एक दूसरे से फोन पर भी बातें करने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे से फोन पर काफी बातें किया करते और अब हम दोनों इतने नजदीक आ गए थे कि एक दिन समीर ने मुझे कहा कि अंकिता मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं। उस दिन समीर ने मुझे प्रपोज किया और अपने दिल की बात मुझे कह दी मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हूं क्योंकि समीर जैसा लड़का मुझे प्यार करता है इससे बढ़कर मेरे लिए कभी कुछ था ही नहीं। मैं एक गरीब परिवार की लड़की और समीर एक अच्छे परिवार का लड़का था समीर के पिताजी का कपड़ों का काफी बड़ा कारोबार है और अब समीर और मैं ज्यादातर समय एक दूसरे के साथ ही बिताते थे। एक दिन मैं अपने ऑफिस से फ्री हुई तो समीर का मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगा कि अंकिता आज मैं तुम्हें अपने पापा और मम्मी से मिलवाना चाहता हूं। मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश थी मैंने समीर को कहा कि लेकिन अभी तो मैं ऑफिस से फ्री हुई हूं वह मुझे कहने लगा कि तुम घर जा कर तैयार हो जाओ मैं तुम्हें लेने के लिए बस थोड़ी देर में आता हूं। मैं अपने ऑफिस से घर चली आई और मैं तैयार होने लगी थी जब मैं तैयार हो गयी तो थोड़ी देर बाद ही समीर मुझे लेने के लिए आ गया और जैसे ही समीर मुझे लेने के लिए आया तो समीर मुझे कहने लगा की आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो। मैंने समीर को कहा मैं तो सुंदर लग रही हूं लेकिन तुम तो मुझे हमेशा ही अच्छे लगते हो उसके बाद समीर मुझे अपने घर ले गया। समीर के मम्मी पापा से मिलकर मुझे कुछ ठीक नहीं लगा उन्हें शायद समीर ने यह बात बता दी थी कि वह मुझसे शादी करना चाहता है लेकिन उसके माता-पिता बिल्कुल भी इस बात से खुश नहीं थे।

मैं ज्यादा देर तक उनके घर पर नहीं रुकी क्योंकि मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था और फिर मैं वापस लौट आई उस दिन मेरा किसी से भी बात करने का कोई मन नहीं था इसलिए मैं अपने रूम में ही थी। मैंने समीर से भी उस दिन बात नहीं की अगले दिन मैं जब समीर को मिली तो वह मुझे कहने लगा कि अंकिता क्या हुआ। मैंने उसे कहा कि समीर तुम्हें पता तो चल ही गया होगा की तुम्हारे मम्मी पापा मुझसे तुम्हारा रिश्ता करना ही नहीं चाहते हैं। समीर मुझे कहने लगा कि अंकिता लेकिन मैं तो तुमसे प्यार करता हूं मैंने समीर को कहा मुझे पता है कि तुम मुझसे प्यार करते हो लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हारे मम्मी पापा हमारे रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए हम दोनों का अलग होना ही बेहतर होगा।

मुझे भी लगने लगा था कि उसके मम्मी पापा कभी भी मुझे स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए मैंने अब समीर से दूरी बनाने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि यह मेरे लिए बहुत तकलीफ दायक था लेकिन उसके बावजूद भी मैंने समीर से दूरी बना ली थी और मैं समीर से किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं रखना चाहती थी मैं उसका फोन भी नहीं उठाती थी और ना ही मैं उससे बात करती थी। एक दिन समीर ने मुझे फोन किया और मुझसे मिलने की बात कही तो मैं समीर से मिलने के लिए चली गई जब मैं समीर से मिलने के लिए गई तो उस दिन समीर ने मुझे बताया कि उसके पापा और मम्मी ने उसकी सगाई उनके दोस्त की बेटी से करवा दी है। यह सुनकर मेरे सामने कुछ देर के लिए जैसा अंधेरा सा छा गया था मुझे लगा मेरी जिंदगी जैसे पल भर में बदल चुकी है। मैं समीर के साथ ज्यादा देर तक नहीं रुकी और फिर मैं घर चली आई। मैं उस दिन काफी ज्यादा उदास थी मेरे पास उस वक्त माधव जी आए उन्होंने मेरे चेहरे को शायद पढ़ लिया था और मुझे कहने लगे अंकिता आज तुम बहुत ज्यादा परेशान लग रही हो। मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया लेकिन एक दिन उन्होने मुझसे इस बारे में पूछा तो मैंने उन्हें समीर के बारे में बताया उस दिन माधव जी ने मुझे अपनी पत्नी के बारे में बताया और कहा उनका रिश्ता खत्म हो जाने के बाद वह कितनी परेशानी है। मेरी और माधव जी की जिंदगी एक ही नाव पर सवार थी मुझे भी उनकी तरफ हो खिंचाव सा होने लगा मैं उनकी तरफ खीची चली गई। एक दिन वह मौका आया जब हम दोनों एक दूसरे के साथ संभोग करने के लिए तैयार थे हम दोनों एक ही बिस्तर पर थे माधव जी ने मेरे होठों को अपने होठों में ले लिया था। अब वह मेरे होठों को चूमने लगे थे मैं उनके साथ बहुत अच्छा महसूस कर रही थी मैंने माधव जी के साथ काफी अच्छे से किस किया। उन्होंने मुझे लेटाकर मेरे पूरे कपड़े उतार दिए मेरा नंगा बदन देख वह अपने लंड को हिलाने लगे मैने उनके मोटे लंड को देखकर उन्हें कहा आपका मोटा लंड तो मेरी चूत के अंदर जाते ही तहलका मचा देगा। वह मुस्कुराने लगे और कहने लगे ऐसा कुछ भी नहीं है तुम्हें बहुत ही अच्छा लगेगा जब मेरे लंड को तुम चूत में लोगी। समीर के साथ मेरा रिश्ता टूट चुका था लेकिन मैं माधव जी के साथ बहुत खुश थी जब उन्होंने मेरे मुंह के सामने अपने लंड को किया तो उससे एक अलग प्रकार की खुशबू आ रही थी और उसे मैंने अपने मुंह में ले लिया।

जब उनका लंड मरा मुंह के अंदर था तो मुझे उसे चूसने में बहुत ही अच्छा लग रहा था और मैं काफी देर तक उनके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती रही। उन्होंने भी मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया मेरे स्तनों को जब वह चूस रहे थे तो एक अलग ही प्रकार की गर्मी पैदा हो रही थी। जब उन्होंने अपने लंड को मेरे स्तनों का रगडना शुरू किया तो मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था यह मेरा पहला ही मौका था जब मैं किसी के साथ संभोग करने जा रही थी समीर के साथ मैंने कभी भी कुछ नहीं किया था। जब उन्होंने मेरी चूत को चाटा तो मुझे उनके तजुर्बे का पता चल चुका था उन्हें कितना तजुर्बा है। अब उन्होंने मेरी चूत को इतना चिकना बना दिया था कि उनका लंड मेरी चूत के अंदर जाने के लिए बड़ा ही बेताब था।

जब उन्होंने अपने गरमा गरम लंड को मेरी योनि पर लगाया तो मैं बहुत ही ज्यादा गर्म होने लगी थी उन्होंने एक ही झटके के साथ मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया जैसे ही उनका मोटा लंड मेरी योनि मे प्रवेश हुआ तो मैं जोर से चिल्लाई। वह कहने लगे क्या हुआ? मैंने उन्हें कहा आपने मेरी चूत फाड़ दी है वह इस बात से बहुत खुश थे उन्होंने मुझे कहा तुम ऐसे ही मेरा साथ देती रहो। मैंने उनका साथ काफी अच्छे से दिया और उन्होंने भी मेरी इच्छा को पूरा कर दिया था जिसके बाद तो जैसे हम दोनों ही पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुके थे मेरी चूत से खून बाहर की तरफ को बह रहा था। माधव जी ने तो मेरी चूत के अंदर तहलका मचा दिया था जब वह मुझे चोद रहे थे तो मैं अपने पैरों को खोलती और उनका साथ बड़े अच्छे से देती। जब उन्होंने अपने माल को मेरी योनि में गिराया तो मैंने उन्हें कस कर पकड़ लिया और उन्हे कहा क्या आप मेरा साथ देंगे? वह कहने लगे मै तुम्हारा साथ हमेशा दूंगा।


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