लंड चूत फाड़ता हुआ अंदर चला गया


Antarvasna, hindi sex stories: मैं अपने दोस्त की बहन की शादी में गया हुआ था मैं अपने दोस्त के साथ बैठा हुआ था कि तभी सामने से एक लड़की मुझे दिखी जिसने की लहंगा पहना हुआ था वह बड़ी सुंदर लग रही थी। मैंने जब अपने दोस्त से पूछा कि वह कौन है तो वह मुझे कहने लगा कि वह मेरे चाचा की लड़की है और उसका नाम मीनाक्षी है। गगन ने मुझे मीनाक्षी के बारे में बताया मैं चाहता था कि किसी प्रकार से मैं मीनाक्षी से बात करूं लेकिन मीनाक्षी से बात कर पाना शायद इतना आसान होने वाला नहीं था। जब मीनाक्षी से मेरी टक्कर हुई तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि क्या आपको दिखाई नहीं देता है मीनाक्षी बहुत गुस्से में नजर आ रही थी। मैंने उससे माफी मांगी और कहा कि मैंने देखा नहीं तो वह कहने लगी कि चलिए कोई बात नहीं रहने दीजिए। मीनाक्षी का गुस्सा शांत हो चुका था मैं मीनाक्षी की तरफ देख रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी मैंने मीनाक्षी से बात करने की सोची कि तभी सामने से गगन आ गया और गगन ने हम दोनों का परिचय करवाया।

गगन ने उसे बताया कि मीनाक्षी यह मेरा दोस्त हर्षित है मीनाक्षी से उस दिन मेरी ज्यादा बात ना हो सकी और उस दिन के बाद मैं कभी गगन के घर भी नहीं गया। करीब दो महीने बाद एक दिन मैं एक कॉफी शॉप में बैठा हुआ था और उस दिन मीनाक्षी भी अपनी किसी सहेली के साथ वहां बैठी हुई थी मैंने मीनाक्षी को देखा तो मैं अपने आप को रोक ना सका और मीनाक्षी से मैं बात करने के लिए चला गया। जैसे ही मीनाक्षी ने मुझे देखा तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि हर्षित तुम यहां क्या कर रहे हो मैंने उसकी तरफ देखा और उससे भी मैंने यही सवाल पूछा कि तुम यहां पर क्या कर रही हो। वह मुझे कहने लगी कि मैं तो अपनी सहेली के साथ यहां बैठी हुई हूं लेकिन तुम अकेले यहां क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कि कभी-कभार मैं अकेले यहां कॉफी पीने के लिए आ जाया करता हूं। मीनाक्षी ने कहा कि तुम हमारे साथ बैठ जाओ और मैं मीनाक्षी के साथ बैठ गया मीनाक्षी ने मेरा परिचय अपनी सहेली से करवाया उस दिन मेरे पास बहुत अच्छा मौका था और मैंने मीनाक्षी से बहुत देर तक बात की।

मैंने उस दिन मीनाक्षी से उसके बारे में काफी कुछ चीजें पूछी मीनाक्षी के बारे में मुझे बहुत कुछ पता चल चुका था और उस दिन मैंने मीनाक्षी का नंबर भी ले लिया उसके बाद हम लोग जब भी मिलते तो एक दूसरे से बात किया करते। मेरे दिल में मीनाक्षी के लिए एक अलग ही जगह थी मैं चाहता था कि मीनाक्षी से मेरा रिश्ता हो जाए लेकिन यह सब इतना आसान तो होने वाला नहीं था परन्तु फिर भी मीनाक्षी और मैं जब भी मिलते तो एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया करते। सब कुछ बड़े अच्छे से चल रहा था और इसी बीच ऑफिस में मेरा प्रमोशन हो गया मैंने अपने प्रमोशन के लिए एक छोटी सी पार्टी देने के बारे में सोचा और उसी पार्टी में मैंने मीनाक्षी को भी बुलवाया। जब मीनाक्षी पार्टी में आई तो उस दिन मैंने अपने दिल की बात मीनाक्षी को कह दी मीनाक्षी भी मेरे दिल की बात को स्वीकार कर चुकी थी। अब हम दोनों एक दूसरे के साथ प्रेम संबंध में थे लेकिन अब मेरे और मीनाक्षी के झगड़े होने लगे थे मीनाक्षी ने मुझे कहा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो हम दोनों का रिश्ता शायद आगे नहीं बढ़ पाएगा मैंने मीनाक्षी को कहा मीनाक्षी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। कुछ गलतफहमी की वजह से हम दोनों के बीच झगड़े जरूर हो जाते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम दोनों एक दूसरे से रिश्ता ही खत्म कर ले। हम दोनों एक दूसरे से मुलाकात कर ही नहीं पा रहे थे जिस वजह से हम लोग आपस में झगड़ने लगे थे और कहीं ना कहीं मेरे ऊपर भी मेरे ऑफिस के काम का कुछ ज्यादा ही दबाव आने लगा था इस वजह से मैं और मीनाक्षी एक-दूसरे को मिल भी नहीं पाते थे। हम दोनों एक दूसरे को कम ही मिला करते थे मीनाक्षी भी जॉब करने लगी थी और जब मीनाक्षी ने मुझसे कहा कि वह जॉब करने के लिए बेंगलुरु जा रही है तो मैंने मीनाक्षी को कहा लेकिन तुम बेंगलुरु जाकर क्या करोगी। मीनाक्षी कहने लगी कि मैं चाहती हूं कि मैं बेंगलुरु चली जाऊं मैं इस बात से खुश नहीं था और मैं नहीं चाहता था कि मीनाक्षी मुझसे दूर चली जाए लेकिन मीनाक्षी ने अपना पूरा मन बना लिया था कि वह बेंगलुरु में ही जॉब करेगी और आखिरकार मीनाक्षी बेंगलुरु चली ही गई। मीनाक्षी मुझसे दूर जा चुकी थी हम दोनों अभी भी फोन पर ही बात करते थे लेकिन मुझे नहीं पता था कि बेंगलुरु जाने के बाद मीनाक्षी के स्वभाव में पूरी तरीके से बदलाव आ जाएगा। मीनाक्षी मुझसे अब हर एक चीज छुपाने लगी थी एक दिन मैंने सोचा कि मीनाक्षी को मैं जाकर सरप्राइज दूंगा और मैं बेंगलुरु मीनाक्षी से मिलने के लिए चला गया।

मैं जब मीनाक्षी से मिलने के लिए बेंगलुरु गया तो मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई थी और ना ही मैंने यह बात मीनाक्षी को बताई थी। मैं मीनाक्षी के ऑफिस के बाहर ही खड़ा था लेकिन जैसे ही मीनाक्षी अपने ऑफिस से बाहर निकली तो उसके साथ एक युवक भी था यह सब देख कर मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गया और वहां से वापस लौट आया। मैंने उसके बाद मीनाक्षी से फोन पर बात नहीं की काफी समय हो गया था जब मेरी और मीनाक्षी की बातें नहीं हुई थी मीनाक्षी ने एक दिन मुझे फोन किया और कहा हर्षित आजकल तुम मुझे फोन नहीं कर रहे हो। मैंने मीनाक्षी को कहा आजकल मैं ऑफिस में कुछ ज्यादा ही बिजी हूं इसलिए मैं फोन नहीं कर पा रहा हूं मैं अब मीनाक्षी से अपनी दूरी बनाने लगा था और मैंने मीनाक्षी से अब फोन पर बात करनी बंद कर दी थी मीनाक्षी भी अपने ऑफिस के चलते बिजी रहती थी इस वजह से वह भी मुझसे कम बात किया करती थी।

एक दिन मैंने मीनाक्षी से इस बारे में पूछ ही लिया तो मीनाक्षी ने मुझे कहा कि हर्षित क्या तुम मुझे ऐसा समझते हो मीनाक्षी इस बात से बहुत दुखी हुई और मुझे कहने लगी कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम मेरे बारे में ऐसा सोचोगे। वह मेरे साथ काम करने वाला लड़का था और जब यह बात मीनाक्षी ने मुझसे कहीं तो मैंने मीनाक्षी को कहा मीनाक्षी मुझे लगा कि तुमने मुझे धोखा दिया है इसलिए मैंने तुमसे बात नहीं की। मीनाक्षी कहने लगी हर्षित ऐसा कभी हो नहीं सकता भला मैं तुम्हें क्यों धोखे में रखूंगी और तुम्हें क्या लगता है कि मैं तुम्हारे साथ कभी ऐसा कर सकती हूं। मीनाक्षी ने मुझे कहा कि हर्षित मैं तुमसे मिलने के लिए आ रही हूं। मैंने मीनाक्षी को कहा नहीं मीनाक्षी तुम रहने दो लेकिन मीनाक्षी ने तो अब अपनी जिद पकड़ ली थी और वह मुझसे मिलने के लिए आना चाहती थी। मैंने मीनाक्षी को मना कर दिया था लेकिन उसके बावजूद भी मीनाक्षी मुझसे मिलने के लिए आ गई और जब वह मुझे मिली तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि हर्षित तुमने मेरे बारे में ऐसा कैसे सोच लिया। मैंने उसे कहा अब इस बात को हम लोग भूल कर अपने रिश्ते को आगे बढ़ाएं तो ज्यादा बेहतर होगा। हम दोनों इस बात को भुलाकर अब आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे मीनाक्षी कुछ दिन अपने घर पर ही रुकने वाली थी और उस दौरान हम दोनों हर रोज मिल रहे थे। मीनाक्षी और मैं अब हर रोज एक दूसरे को मिला करते मैंने एक दिन मीनाक्षी को अपने घर पर बुलाया उस दिन घर पर कोई भी नहीं था। मेरे लिए यह बड़ा ही अच्छा मौका था और मैं इस मौके को अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहता था मैंने मीनाक्षी के बदन को महसूस करना शुरू किया तो मीनाक्षी की गर्मी को मैंने पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था अब मीनाक्षी की चूत के अंदर में अपने लंड को डालने की तैयारी में था लेकिन मैं चाहता था कि वह मेरे लंड का रसपान करे।

मैंने जब अपने लंड को उसके मुंह के अंदर घुसाया तो उसने मेरे लंड को बहुत देर तक चूसा और उसे मेरे लंड को सकिंग करने में बड़ा मजा आ रहा था वह मेरे लंड के मजे बहुत देर तक लेती रही। जब मैंने अपने लंड को मीनाक्षी की चूत के अंदर घुसाया तो वह चिल्ला उठी मैं उसकी चूत के मजे ले रहा था मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था और उसकी चूत की चिकनाई में बढ़ोतरी होती जा रही थी वह बड़ी तेजी से चिल्लाती तुम मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने बहुत देर तक उसे ऐसे ही धक्के दिए और मेरा वीर्य गिर चुका था। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला था मीनाक्षी चिल्लाने लगी और कहने लगी कि तुमने तो मेरी चूत आज फाड कर रख दी है मैंने उसे डॉगी स्टाइल में बनाते हुए चोदना शुरू किया और डॉगी स्टाइल में जब मैं उसकी चूत के मजे ले रहा था तो मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं उसकी चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार कर रहा था वह भी अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाया जा रही थी। मीनाक्षी की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह चाहती थी कि वह मेरे वीर्य को अपने मुंह के अंदर ही समा ले लेकिन मेरा वीर्य इतनी आसानी से गिरने वाला नहीं था।

मीनाक्षी की चूत से मैने खून निकाल कर रख दिया था और मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन उसके बावजूद भी मीनाक्षी को महसूस कर रहा था। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मीनाक्षी ने उसे मुंह में ले लिया और मेरे लंड को चूसने लगी वह मेरे लंड को जिस प्रकार से चूस रही थी उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था मेरा वीर्य मीनाक्षी की चूत के अंदर जा चुका था। मीनाक्षी ने मुझसे कहा कि मुझे अपनी चूत में तुम्हारे लंड को दोबारा से लेना है मीनाक्षी ने मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर घुसा लिया। मीनाक्षी की चूत के अंदर मेरा लंड जाते ही मैंने उसे तेजी से धक्के देने शुरू किए वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी मैं उसे तेज गति से धक्के मार रहा था। मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था और जिस प्रकार से मैं उसकी चूत का मजा ले रहा था उससे वह बड़ी खुश हो रही थी उसके मुंह से सिसकियां निकल रही थी और उसकी सिसकिया मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने मीनाक्षी को कहा लगता है मेरा वीर्य गिरने वाला है? वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम मेरी चूत के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दो मैंने मीनाक्षी की चूत के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया। मीनाक्षी की चूत के अंदर मेरा वीर्य गिरा तो वह खुश हो गई और मुझे गले लगा कर कहने लगी तुम बहुत ही अच्छे हो।


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