लंड भी उछलने लगा था


Antarvasna, hindi sex story: भैया और मैं चाचा जी के घर पर गए हुए थे चाचा जी ने कहा कि रोहित बेटा तुम आजकल क्या कर रहे हो तो मैंने चाचा जी से कहा कि मैं आजकल नौकरी की तलाश में हूं। चाचा जी से काफी दिनों बाद हम लोग मिले थे और चाचा जी से मिलकर हमे काफी अच्छा लगा। पापा के देहांत के बाद चाचा ने हीं घर की सारी जिम्मेदारी संभाली थी और उन्होंने ही हम दोनों भाइयों की पढ़ाई में अहम भूमिका निभाई।

अगर वह हम लोगों की मदद नहीं करते तो शायद भैया आज एक अच्छी कंपनी में जॉब पर नहीं होते यह सब चाचा जी की वजह से ही हो पाया है। हम लोगों को बहुत ही खुशी है कि चाचा जी ने हमेशा हमारा साथ दिया है। भैया और मैं चाचा जी के पास ही बैठे हुए थे तो चाची हम लोगों के लिए पानी ले आई। जब वह पानी लेकर आई तो वह हम दोनों से कहने लगे की बेटा आज तुम लोग यहीं से खाना खा कर जाना लेकिन हम लोगों को घर जाना था क्योंकि घर पर मां अकेली थी। हमने चाची से कहा कि चाची हम लोग आज तो नहीं लेकिन फिर कभी आप लोगों के साथ में डिनर कर लेंगे।

चाची ने कहा कि ठीक है बेटा जैसा तुम्हें ठीक लगता है। चाची जी बहुत ही अच्छी हैं और चाचा भी बहुत अच्छे इंसान हैं उन दोनों की एक बेटी है जिसका नाम सुहानी है। सुहानी को लेकर चाचा जी बहुत ही ज्यादा चिंतित रहते हैं क्योंकि सुहानी मॉडर्न ख्यालातों की है जिस वजह से चाचा जी उसको लेकर अक्सर डरे रहते हैं। सुहानी का कॉलेज पूरा हो जाने के बाद वह अब मुंबई नौकरी करने के लिए जाना चाहती थी लेकिन चाचा जी ने उसे मना किया और कहने लगे कि तुम वहां क्या करोगी लेकिन सुहानी कहां किसी की बात मानने वाली थी और वह मुंबई चली गई।

जब वह मुंबई गई तो उसके बाद वह वहां पर जॉब करने लगी उसकी जॉब एक अच्छी कंपनी में लग गई थी और चाचा जी इस वजह से काफी ज्यादा परेशान थे। जब भी हम लोग चाचा जी के पास जाते तो वह अक्सर इस बारे में ही बात किया करते हैं लेकिन सुहानी अपना अच्छा बुरा बहुत ही अच्छे से समझती थी। सुहानी बहुत ही ज्यादा खुश थी कि वह एक बड़ी कंपनी में जॉब कर पा रही है और सब कुछ उसकी जिंदगी में अच्छे से चल रहा था। काफी समय हो गया था सुहानी और हम लोगों की मुलाकात भी नहीं हो पाई थी। एक दिन मैंने सुहानी को फोन किया और उससे कहा कि सुहानी काफी समय हो गया है तुमसे मुलाकात भी नहीं हो पाई है तो वह मुझे कहने लगी कि रोहित भैया आप लोग कुछ दिनों के लिए मुंबई आ जाइए।

मैंने सुहानी को कहा कि नहीं सुहानी हम लोग तो मुम्बई नहीं आ पाएंगे लेकिन तुम कुछ दिनों के लिए लखनऊ आ जाओ तो सुहानी कहने लगी कि ठीक है मैं कुछ दिनों के ऑफिस से छुट्टी ले लेती हूँ। सुहानी कुछ दिनों के लिए लखनऊ आ गई सुहानी जब लखनऊ आई तो उसके बाद उसकी शादी को लेकर चाचा जी ने उससे बात की लेकिन सुहानी ने साफ तौर पर मना कर दिया और वह कहने लगी कि मैं अभी शादी नही करना चाहती हूं। सुहानी अभी शादी नही करना चाहती थी लेकिन चाचा जी के कहने पर सुहानी उनकी बात मान गई और वह शादी करने के लिए तैयार हो चुकी थी।

सुहानी की शादी की तैयारियां चलने लगी थी और जल्द ही सुहानी की शादी हो गई सुहानी की शादी हो जाने के बाद चाचा जी और चाची दोनों ही घर पर अकेले हो गए थे इसलिए कभी मैं उन लोगों से मिलने के लिए चला जाता और कभी भैया उन लोगों से मिलने चले जाते जिससे कि उन लोगों को भी अच्छा लगता। एक दिन मैं चाचा जी को मिलने के लिए गया हुआ था, उस दिन जब मैं उनको मिलने के लिए गया था तो मैं उनके साथ बैठ कर बात कर रहा था तभी दरवाजे की घंटी बजी। जब दरवाजे की घंटी बजी तो मैंने दरवाजा खोला और दरवाजा खोलते ही सामने सुहानी खड़ी थी सुहानी को देखकर चाचा जी बहुत खुश हो गए और मैं भी काफी खुश था। सुहानी ने अपना सामान रूम में रखा और चाचा जी के साथ बैठकर वह बात करने लगी। मुझे भी काफी अच्छा लग रहा था जब मैं सुहानी से बातें कर रहा था सुहानी के साथ मैंने काफी देर तक बातें की और उसके बाद मैं और सुहानी एक दूसरे के साथ कुछ देर तक बैठे रहे फिर मैं घर लौट आया था।

जब मैं घर लौटा तो भैया ने मुझसे कहा कि रोहित तुम मां के लिए दवाई ले आना मैंने भैया से कहा कि भैया आप मुझे बता दीजिए कौन सी दवाई लेकर आनी है। भैया ने मुझे दवाइयों के नाम एक पेपर में लिख कर दे दिए उसके बाद मैं अपने घर के पास ही एक केमिस्ट शॉप में चला गया वहां से मैंने दवाई ले ली और फिर मैं घर लौट आया। मैंने भैया और मां को बताया कि सुहानी घर आई हुई है तो वह लोग अगले दिन सुहानी को मिलने के लिए जाना चाहते थे। अगले दिन वह लोग सुहानी को मिलने के लिए चले गए उस दिन मैं घर पर अकेला ही था और मैं काफी ज्यादा बोर हो रहा था। उस दिन रविवार का दिन था मैं घर पर अकेला ही था जिस वजह से मैं बहुत ज्यादा बोर हो रहा था मैं उस दिन अपने दोस्तों से मिलने के लिए जाना चाहता था। मैंने अपने दोस्तों को फोन किया लेकिन किसी के पास भी उस दिन वक्त नहीं था इसलिए मुझे काफी अकेलापन सा महसूस हो रहा था।

मैं उस दिन अपने घर की छत पर गया और रात के वक्त मैं अपने घर की छत पर टहल रहा था पड़ोस में रहने वाली कविता भाभी भी उस दिन छत में ही टहल रही थी। मैं उन्हें  बार-बार देखे जा रहा था वह मेरे पास आई और मुझसे बातें करने लगी क्योंकि हम लोगों की छत आपस में बिल्कुल मिली हुए थी जिस वजह से हम लोग एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मुझे उनसे बात कर के अच्छा लगता वह भी मुझसे बात कर के बहुत खुश थी। मैंने उनसे काफी देर तक बात की उन्होंने मुझे बताया मेरे पति घर पर नहीं है। यह बात सुनकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया और वह भी घर पर अकेली ही थी। उन्होंने मुझसे पूछा रोहित क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है। मैंने उन्हें बताया नहीं मैं सिंगल हूं।

वह मुझे कहने लगी तुम इतने ज्यादा हैंडसम हो और तुम्हारी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है अगर मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड होती तो तुम मेरे साथ क्या करते? जब वह इस प्रकार की बातें करने लगी तो मैं भी समझ चुका था उनके दिल में कुछ तो चल रहा है मैंने उस दिन कविता भाभी को घर पर ही बुला लिया। वह भी घर पर अकेली थी इसलिए वह घर पर आ गई और मुझसे बातें करने लगी। जब वह मेरे साथ बातें कर रही थी तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था। हम दोनों बहुत ज्यादा गरम हो रहे थे जिस प्रकार से वह मेरे साथ बातें कर रही थी लेकिन अब वह मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है मैंने उनके बदन से कपड़े उतारने शुरू कर दिए थे। वह मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी और उनके नंगे बदन को देख कर मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो चुका था।

मैं उनकी योनि में लंड को घुसाना चाहता था मैंने ऐसा ही किया। मैंने जब अपने लंड को उनकी चूत पर लगाना शुरु किया तो उनकी योनि से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जब मैं उनकी चूत को चाटता जा रहा था उनकी चूत को चाटकर मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुका था। मैंने उनकी योनि में लंड को घुसा दिया था। मेरा लंड कडक हो चुका था उसके बाद वह मेरा साथ बडे ही अच्छे से दे रही थी। उन्होंने मेरा साथ जिस तरीके से दिया उससे मैं काफी खुश हो गया था और मैंने उनकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को बड़े अच्छे से किया। जब मैं उनकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो मुझे मज़ा आ रहा था और उन्हें भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहती तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते जाओ। मैंने उन्हें काफी देर तक ऐसे धक्के मारे वह जोर से सिसकारियां ले रही थी उनकी सिसकारियां मेरे अंदर की गर्मी को और भी ज्यादा बढ़ा रही थी। हम दोनों की उत्तेजना इस कदर बढ़ चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और ना ही वह अपने आपको रोक नहीं पा रही थी।

मैंने उनकी योनि के अंदर अपने माल को गिरा दिया और मेरा माल उनकी चूत में जाते ही वह खुश हो गई और कहने लगी आज तुमने मेरी इच्छा को पूरा कर दिया है। मैंने उनकी इच्छा को पूरा कर दिया था और वह मेरे साथ बहुत ही ज्यादा खुश थी लेकिन वह दोबारा से मेरे साथ सेक्स संबंध बनाना चाहती थी उन्होंने अपनी चूतडो को मेरी तरफ करते हुए मुझे कहा तुम मुझे चोदो। मेरा लंड उनकी चूत मे था वह मुझे बोलती मुझे ऐसे ही धक्के देते जाओ। मैंने उन्हें बहुत तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए थे। मै जिस तरीके से उनको धक्के मार रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा मजे में आ रही थी। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी जब वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाती तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता।

मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था और उन्हें भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से वह मेरे साथ सेक्स संबंध बना रही थी उससे हम दोनों ही गरम हो गए थे। मेरा माल उनकी चूत में गिर चुका था मेरा माल उनकी योनि में जाते ही मेरी इच्छा पूरी हो गई और उस रात हम दोनों साथ में सोए रहे। अगले दिन सुबह कविता भाभी अपने घर चली गई और उसके बाद जब भी मुझे उनकी जरूरत होती तो वह मेरे पास दौड़ी चली आती और मुझसे चूत मरवा लिया करती। जब उनके पति घर पर नहीं होते तो वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए हमेशा तैयार रहती और मैं भी बहुत ज्यादा खुश रहता था जब उनके साथ में सेक्स किया करता।