कोमल की चिकनी चूत का मजा


Antarvasna, hindi sex kahani: मुझे दिल्ली आए हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ था मुझे सिर्फ 15 दिन ही हुए थे। मैं एक दिन बस में अपने ऑफिस जा रहा था बस में काफी ज्यादा भीड़ थी इसलिए मुझे बैठने के लिए जगह नहीं मिल पाई थी। सुबह का वक्त था इसलिए काफी ज्यादा भीड़ थी सब लोग ऑफिस के लिए जा रहे थे। मैं जैसे ही अपने ऑफिस के पास पहुंचा तो वहां पर मुझे संजय मिला संजय मेरे ऑफिस में ही काम करता है संजय और मैं अपने ऑफिस में चले गए। जब हम लोग ऑफिस में गए तो वहां पर हम दोनों काम करने लगे और लंच टाइम हुआ तो संजय ने मुझे कहा कि आओ राजेश तुम भी लंच कर लो। संजय अपने घर से टिफिन लेकर आया हुआ था तो उसने मुझे कहा कि तुम मेरे टिफिन में से ही खाना शेयर कर लो। हम दोनों साथ में लंच करने लगे हम दोनों बातें भी कर रहे थे कुछ ही दिनों में मेरी संजय से काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। संजय से मेरी काफी अच्छी बातचीत थी जिस वजह से हम दोनों एक दूसरे से अपनी बातों को भी शेयर करने लगे थे।

संजय ने मुझे एक दिन अपने घर पर भी बुलाया था उस दिन जब उसने मुझे अपने घर पर बुलाया तो उसने मुझे अपनी फैमिली से मिलवाया। मुझे काफी अच्छा लगा जब मैं संजय के घर पर गया था। मेरी कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद ही मेरी नौकरी लग गई थी और मैं काफी ज्यादा खुश भी हूं कि मेरी नौकरी मेरी पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद ही लग गई। मेरी जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा है और मैं बहुत ज्यादा खुश भी हूं कि मेरी लाइफ में सब कुछ अच्छे से चल रहा है। एक दिन मुझे मां ने फोन किया मां का फोन मुझे काफी दिनों बाद आया था मैंने मां से उस दिन बहुत देर तक फोन पर बात है की। मां मुझे कहने लगी सुभाष बेटा कुछ दिनों के लिए तुम घर आ जाओ मैंने मां से कहा कि हां मां मैं कोशिश करूंगा कि मैं कुछ दिनों के लिए घर आ जाऊं। मैं चाहता था कि मैं भी कुछ दिनों के लिए अपने घर चंडीगढ़ चला जाऊं और जब मां ने मुझे कहा तो मुझे भी लगने लगा कि मुझे कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ चले जाना चाहिए। मैं चाहता था कि मैं जल्दी घर चला जाऊं मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर चंडीगढ़ चला गया।

कुछ दिनों तक मैं अपने घर पर ही रहा लेकिन अब मैं अपने दोस्तों को मिलना चाहता था मैं अपने कॉलेज के दोस्तों से मुलाकात करना चाहता था इसलिए मैंने उन लोगों को फोन किया तो हम लोगों ने साथ में मिलने का फैसला किया। कॉलेज में मेरी काफी अच्छी दोस्ती थी और मैं उस दिन जब अपने सारे दोस्तों को अपने कॉलेज के बाहर कैंटीन में मिला तो वहां पर हम लोगों ने काफी देर तक एक दूसरे से बात की। सब लोगों ने एक दूसरे का हालचाल पूछा और उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा मैं काफी समय बाद कॉलेज के दोस्तों को मिल पाया था। मैं जब अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहा था तो मुझे रास्ते में कोमल दिखी कोमल मेरे कॉलेज में ही पड़ती थी और मैंने कोमल को देखकर अपनी मोटरसाइकिल रोक ली। कोमल ने मुझे देखा नहीं था मैंने कोमल को आवाज दी तो कोमल ने मेरी तरफ देखा और वह खुश हो गई वह कहने लगी कि सुभाष तुम दिल्ली से कब आए। कोमल को यह बात पता है कि मेरी नौकरी अब दिल्ली में लग चुकी है। मैंने उसे कहा कि मैं तो कुछ दिनों पहले ही घर पर आया था तो सोचा कि आज सारे दोस्तों को मिल लेता हूं इसलिए अपने दोस्तों से मिलकर बस अभी वापस लौट रहा था। कोमल मुझे कहने लगी यह तो तुमने बहुत ही अच्छा किया, मैंने कोमल से कहा कि चलो कहीं बैठ जाते हैं कोमल कहने लगी कि ठीक है। कोमल मेरे साथ पास के ही कॉफी शॉप में बैठ गई और वहां पर हम दोनों बातें करने लगे।

कोमल के साथ मैं बातें कर रहा था तो मुझे अच्छा लगा मैंने कोमल से पूछा कि तुम्हारी लाइफ में क्या चल रहा है। कोमल ने मुझे बताया कि कुछ नहीं बस मैं भी नौकरी की तलाश में थी लेकिन अभी तक मुझे जॉब नहीं मिल पाई मैंने कोमल को कहा कि जल्द ही तुम्हें जॉब मिल जाएगी। कोमल के साथ मैं बातें कर रहा था तो मुझे उस दिन अच्छा लग रहा था कोमल बहुत ही अच्छी लड़की है और उसके साथ जब भी मैं बातें करता हूं तो मुझे अच्छा लगता। कॉलेज में भी मैं कोमल से बातें किया करता था लेकिन उस वक्त हम दोनों की इतनी बातें नहीं हुआ करती थी। उस दिन मेरी कोमल से काफी देर तक बातें हुई और फिर कोमल ने मुझे कहा कि सुभाष मुझे देर हो रही है क्या तुम मुझे मेरे घर तक छोड़ दोगे मैंने कोमल को कहा क्यों नहीं। मैंने कोमल को उस दिन उसके घर तक छोड़ दिया था। कोमल को मैंने जब घर पर छोड़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और कोमल को भी काफी अच्छा लगा था जिस तरीके से हम लोगों ने साथ में टाइम स्पेंड किया था।

कोमल को छोड़ने के बाद मैं अपने घर लौट आया था। कुछ दिनों तक मैं चंडीगढ़ में रहा और फिर मैं दिल्ली वापस आ गया था मैं जब दिल्ली वापस आया तो मुझे कुछ दिन तक तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन फिर मैं अपनी जॉब के चलते बहुत बिजी हो गया था इसलिए मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पा रहा था। मैं अपनी नौकरी से काफी ज्यादा खुश हूं कोमल से भी कभी कबार मेरी फेसबुक चैट के माध्यम से बात हो जाती थी। जब भी उससे मेरी बात होती तो उसे बहुत अच्छा लगता है मुझे भी बड़ा अच्छा लगता था जब भी हम लोग एक दूसरे से बातें किया करते थे। अब मैं कोमल से कुछ ज्यादा ही बातें करने लगा था और समय के साथ साथ शायद मुझे लगने लगा था कि कोमल और मैं एक दूसरे को प्यार भी करने लगे हैं। मैंने कोमल को अपने प्यार का इजहार कर दिया था। हम दोनों एक दूसरे से रिलेशन में थे मैं चाहता था मैं कोमल को मिलने के लिए चंडीगढ़ जाऊं। मै काफी दिनों से चंडीगढ़ भी नहीं गया था जब मैं चंडीगढ़ गया तो मै कोमल से मिला।

कोमल से मिलकर मुझे बड़ा अच्छा लगा। मै कोमल के साथ में अच्छा समय बता रहा था। एक दिन हम दोनों साथ में पार्क में बैठे हुए थे। मैंने कोमल से कहा कोमल आज मैं तुम्हारे साथ अकेले में समय बिताना चाहता हूं। पहले तो कोमल ने मुझे मना कर दिया और कहने लगी यह हब शादी से पहले ठीक नहीं है लेकिन फिर मैंने कोमल को किस प्रकार से मनाया। वह मेरी बात मान गई उसके बाद मैं और कोमल साथ में रुकने वाले थे। हम दोनो होटल में  चले गए जब हम लोग होटल मे गए तो वहां पर हम दोनों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया मैं कोमल के साथ बड़ा खुश था जिस तरीके से मै और कोमल एक दूसरे के साथ में टाइम स्पेंड कर रहे थे। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे मैंने कोमल को कहा मैं तुम्हारे साथ आज सेक्स करना चाहता हूं। मैंने कोमल की जांघ को सहलाना शुरु किया वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। कोयल पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी वह बहुत ही ज्यादा गर्म होती चली गई थी। मैं भी बहुत ज्यादा गर्म होता चला गया था मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो कोमल ने उसे अपने मुंह में ले लिया। जब कोमल ने उसे अपने मुंह में लिया तो मुझे अच्छा लग रहा था।

वह मेरे लंड को तब तक सकिंग करती रही जब तक उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया था वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी। मै कोमल की चूत मारने के लिए तैयार था। मैंने कोमल के बदन से कपड़े उतार दिए थे वह मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी उसका गोरा बदन देख मैं अपने आप पर काबू नही कर पा रहा था। जब मैं उसे किस करने लगा तो मुझे मजा आ रहा था। कोमल को भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी अब हम दोनों बहुत ज्यादा गर्म होते जा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और कोमल और मेरी गर्मी बढ़ती जा रही थी।

मैंने जैसे ही कोमल की चूत पर अपनी उंगली को लगाया तो उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा था। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डालने का फैसला कर लिया था। मैंने कोमल की चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया उसकी चूत में मेरा लंड जाते ही वह जोर से चिल्लाई कोमल की चूत से खून की पिचकारी बाहर की तरफ आ गई मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जिस तरीके से कोमल और मैं साथ में सेक्स कर रहे थे। कोमल और मै एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे।

मै कोमल को बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहा था वह बहुत ज्यादा खुश थी जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे के साथ में सेक्स कर रहे थे। कोमल के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी मैं भी बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से मैं उसे धक्के दे रहा था वह मेरा साथ दे रही थी। कोमल की सिसकारियां लगातार बढ़ती जा रही थी और उसकी गर्म सिसकारियां मुझे भी गर्म करती जा रही थी हम दोनों बहुत ज्यादा गरम हो चुके थे।

कोमल मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही धक्के देते जाओ। मैं उसे बड़ी तेज गति से चोदता जा रहा था उसका शरीर पूरी तरीके से हिलता जा रहा था। मैंने कोमल के शरीर को पूरी तरीके से गर्म कर दिया था। जब मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकलने वाला था मैंने कोमल से कहा मेरा माल गिरने वाला है। कोमल ने कहा तुम मेरी चूत मे माल गिरा दो। मैने कोमल की तरफ देखा उसकी झील सी आंखों में मैं खो गया था। अब मेरा माल बाहर की तरफ आ गया मैने उसे कोमल की चूत में गिरा दिया था। कोमल बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी जिस तरीके से मैंने उसके साथ में सेक्स संबंध बनाए थे और उसकी गर्मी को शांत किया था।


error: