जब मेरा लंड छिल गया


Antarvasna, kamukta: मैं काफी दिनों से सोच रहा था कि मैं पापा मम्मी को मिलने के लिए कोलकाता जाऊं लेकिन मैं उन लोगों से मिलने के लिए कोलकाता नहीं आ पाया था। पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी पेशा हैं और उन दोनों के पास समय कम ही रह पाता है इस वजह से मैं उन लोगों से मिलने के लिए काफी कम ही कोलकाता आता था। मैं दिल्ली में रहता था और उस दिन जब मेरी पापा और मम्मी दोनों से फोन पर बात हुई तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए कोलकाता आ जाओ। मैंने भी सोचा कि क्यों न मैं कुछ दिनों के लिए उन लोगों से मिलने के लिए चला जाऊं। मैं कुछ दिनों के लिए कोलकाता आना चाहता था तो मैं कुछ दिनों के लिए कोलकाता चला आया। जब मैं कोलकाता पहुंचा तो मुझे काफी अच्छा लगा और मैं कुछ दिनों तक घर पर ही रहा उस दौरान मैं कविता से मिला कविता से मिलकर मुझे अच्छा लगा।

कविता मेरे स्कूल की फ्रेंड है और हम दोनों एक दूसरे से काफी समय बाद मिले थे। कविता ने मुझे बताया कि वह भी कुछ समय बाद दिल्ली आने वाली है। मैंने कविता से पूछा कि क्या उसे कोई जरूरी काम है तो उसने मुझे बताया कि हां उसे कुछ जरूरी काम है इसलिए वह दिल्ली आ रही है। उसकी कोई बिजनेस मीटिंग थी इस वजह से वह दिल्ली जाने वाली थी। जब कविता दिल्ली गई तो उस वक्त मैं भी दिल्ली में ही था। मैं उस दिन अपने ऑफिस से लौट ही रहा था कि मुझे कविता का फोन आया और कविता ने मुझे कहा कि मुझे तुमसे मिलना था। मैंने कविता को कहा कि ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए आता हूं और मैं कविता को मिलने के लिए चला गया। मैं जब कुछ दिन कविता को मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा और कविता भी बड़ी खुश थी जिस तरीके से हम लोगों की मुलाकात हुई।

काफी लंबे अरसे बाद हम दोनों एक दूसरे को मिले थे मैं कविता से मिलकर बहुत ही ज्यादा खुश था और कविता भी मुझसे मिलकर काफी खुश थी। उस दिन कविता और मैंने साथ में काफी अच्छा समय बिताया कविता करीब एक हफ्ते तक दिल्ली में रही और फिर वह वापस कोलकाता चली आई। कविता कोलकाता तो आ चुकी थी लेकिन मेरे दिल में वह अपने लिए प्यार की भावना जगा चुकी थी और फिर मैं भी कोलकाता वापस आना चाहता था। मैं चाहता था कि मैं कविता से मिलूं और कुछ समय बाद मैं कोलकाता चला आया। जब मैं कोलकाता आया तो मैं कविता से मिला और कविता और मैं एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हमें बड़ा ही अच्छा लगता और मुझे भी लगने लगा था कि मुझे कविता से अपने दिल की बात कह देनी चाहिए। मैंने कविता से अपने दिल की बात कहने का फैसला कर लिया था। मैंने जब कविता को अपने प्यार का इजहार किया तो वह भी मना ना कर सकी और मेरे साथ कविता का रिलेशन चलने लगा।

मैं बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में थे लेकिन हम दोनों के रिलेशन में एक परेशानी थी कि कविता कोलकाता में रहती है और मैं दिल्ली में जॉब करता था। कविता और मेरी कई बार इस बात को लेकर बातें होती थी कि मैं अब कोलकाता में ही जॉब करूंगा और मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं कोलकाता में ही अपने लिए कोई नौकरी तलाश कर लूं। मैं चाहता था कि कोलकाता में मैं जॉब करूं जब मैं कोलकाता आया तो मेरी नौकरी कोलकाता में लग चुकी थी। मेरी नौकरी जब कोलकाता में लगी तो मैं कोलकाता में ही रहने लगा और मैं जब कोलकाता आया तो हर रोज मैं कविता से मिला करता। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में है और हमारा रिलेशन बड़ा ही अच्छे से चल रहा है। कविता हमारे घर के पास ही रहती है तो मैं उसे हर रोज ही मिल लेता हूं और मुझे काफी अच्छा लगता है जब कविता और मैं दूसरे से मुलाकात करते हैं। एक दिन कविता और मैं एक दूसरे को मिले उस दिन हम एक दूसरे के साथ समय बिताना चाहते थे। जब मैंने और कविता ने उस दिन साथ में समय बिताया तो हम लोगों को काफी अच्छा लगा और कविता ने मुझे कहा कि मैं चाहती हूं कि मैं अपनी फैमिली से तुम्हारे बारे में बात करूं।

कविता चाहती थी कि वह अपने परिवार से मेरे बारे में बात करें लेकिन मैंने कविता को कहा कि क्या हम लोगों को अपने रिलेशन को थोड़ा समय और देना चाहिए। मुझे लगता था कि हम दोनों को अपने रिलेशन को थोड़ा और समय देना चाहिए इस वजह से मैंने कविता से कहा कि हम दोनों को थोड़ा समय और रुकना चाहिए। मैं चाहता था कि कविता और मैं एक दूसरे से कुछ समय बाद शादी करें इसलिए मैंने कविता से इस बारे में कहा तो कविता भी मेरी बात मान गई। कविता ने मुझे कहा कि तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो और हम दोनों एक दूसरे को हर रोज मिला करता। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हमें अच्छा लगता हम दोनों के रिलेशन को काफी समय हो चुका था तो कविता को भी लगने लगा था कि हम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए इसलिए मैं भी उसे मना ना कर सका। कविता ने अपने परिवार से मेरे बारे में बात की तो कविता की फैमिली मुझसे मिलना चाहती थी। मैं जब कविता के परिवार से पहली बार मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा और उन लोगों को भी बहुत अच्छा लगा था।

हालांकि कविता हमारे घर से थोड़ी ही दूरी पर रहती है लेकिन मैं कविता के परिवार से कभी मिला नहीं था यह पहली बार ही था जब मेरी मुलाकात उन लोगों से हुई थी और मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस तरीके से मैं उनसे पहली बार मिला। सब लोग हमारी शादी के लिए तैयार हो चुके थे और कविता भी चाहती थी कि हम लोग जल्द से जल्द शादी कर ले। मैं भी कविता को मना ना कर सका और कविता और मैं एक दूसरे से शादी करने के लिए तैयार थे। जब हम दोनों की शादी हो गई तो हम दोनों ही बड़े खुश हैं और हम दोनों की शादीशुदा जिंदगी अच्छे से चलने लगी थी। कविता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही अच्छे से समय बिताया करते हैं और एक दूसरे के साथ जब भी हम दोनों होते तो हमें बड़ा ही अच्छा लगता। मैं कोशिश करता की कविता के साथ मैं ज्यादा से ज्यादा टाइम बिताया करूँ। मैं कविता को हमेशा ही ज्यादा समय देने की कोशिश करता जिससे की कविता को भी अच्छा लगता है और मुझे भी बड़ा अच्छा लगता।

जिस तरीके से हम दोनों की जिंदगी चल रही है उससे हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश है। कविता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश है और हमारी शादी शुदा जिंदगी बड़े ही अच्छे से चल रही है। कविता की चूत बहुत ही टाइट है। मैं और कविता एक दूसरे के साथ सेक्स के हर रोज मजे लेते। हम दोनो तडपते थे मै कविता की चूत मारने के लिए हमेशा ही तैयार रहता। एक दिन हम दोनो घर पर थे मैं और कविता एक दूसरे के लिए तडप रहे थे। मैंने कविता की चूत मे अपने लंड को घुसाने का फैसला कर लिया। हम दोनो बेडरूम मे चले गए। मैंने कविता के गुलाबी होंठो को चूसना शुरू किया। उसके रसीले होंठो को चूसने मे मुझे मजा आता और उसे भी बडा मजा आ रहा था जिस तरह से वह मेरा साथ दे रही थी। वह मुझे गरम कर रही थी। मैं कविता के स्तनो को दबा रहा था। मैं जब उसके स्तनो को दबाता तो वह गरम होती जाती। मैंने कविता के कपडो को उतार दिया। जब मैंने कविता की चूत को सहलाया तो वह तडप रही थी उसकी चूत से पानी निकल चुका था। कविता ने मेरे लंड को चूसने की बात कही और उसने मेरे लंड को चूसना शुरू किया।

उसने मेरे लंड को अच्छे से चूसना शुरू किया। वह मेरे लंड से पानी निकाल चुका था। मैंने अब उसके स्तनो को चूसना शुरू किया। मैंने उसके निप्पल को चूसना शुरू किया हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढा रहे थे। मैंने जब उसकी चूत मे अपनी जीभ को लगाकर चाटना शुरू किया तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था। वह अपने पैरो को आपस मे मिला रही थी। कविता भी अपनी चूत मे उंगली लगाकर अपनी चूत से पानी निकाल रही थी। जब उसने मेरे लंड को पकडकर अपनी चूत पर रगडना शुरू किया तो मुझे मजा आ रहा था। हम दोनों गरम होने लगे थे। कविता ने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया था मैंने अब कविता की चूत पर लंड को रगडना शुरू कर दिया था मेरे लंड पर कविता की चूत का पानी लग गया था। मैंने कविता की चूत के अंदर लंड को घुसा दिया था। कविता की चिकनी चूत मे मेरा लंड जाते ही वह जोर से चिल्ला कर मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आने लगा था। मैंने कविता की योनि की चूत के अंदर तक अपने लंड को सेट कर दिया और उसकी चूत मे मेरा लंड आसानी से जा रहा था। कविता की चूत से गर्मी निकल रही थी उसकी चूत से पानी निकल रहा था।

मेरा लंड अब पूरी तरह से छिल चुका था लेकिन मेरा माल अभी भी निकला नहीं था और मैं तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था। मैंने अब कविता को घोडी बना दिया था और जब उसकी चूत मे लंड को डाल रहा था तो मुझे मजा आ रहा था और वह भी मुझसे अपनी चूतडो को मिलाता जा रहा था। जब मैं उस से अपनी चूतडो को मिलाता तो मुझे मजा आता और मै तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था। वह मचल रही थी और मैं उसे तेजी से चोदे जा रहा था। जब मैं उसे चोद रहा था तो मुझे मजा आ रहा था और मैंने अब अपने माल को कविता की चूत मे गिरा दिया था। जैसे ही मेरा माल कविता की चूत मे गया तो वह बोली आपने तो मेरी चूत से आज पसीना ही निकाल दिया है।