गांड का सुख भोगता लंड


Antarvasna, kamukta: मैंने मां से कहा मां मेरी मोटरसाइकिल की चाबी मुझे मिल नहीं रही है मां मुझे कहने लगी कल तुमने अपनी अलमारी में तो रखी थी। मैंने मां से कहा लेकिन पता नहीं मां मुझे मिल नहीं रही है आप आकर मेरी मदद कर दो मां कहने लगी हां बेटा मैं अभी आती हूं। जब मां आई तो वह मेरे साथ मेरी मोटरसाइकिल की चाबी ढूंढने लगे चाबी मिल ही नहीं रही थी मुझे ऑफिस के लिए देर भी हो रही थी। मैंने जब अपनी भाभी से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगी हां तुम्हारे भैया कल मोटरसाइकिल लेकर गए थे तो उन्होंने चाबी मुझे दे दी थी। भाभी सब बातें सुन रही थी लेकिन उन्होंने मुझे चाबी नहीं दी क्योंकि वह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती हैं और जब भी कभी ऐसा कुछ होता है तो वह हमेशा ही मुझे परेशान करने के बारे में सोचती रहती है। जब से भैया और भाभी की शादी हुई है तब से ही मैं देख रहा हूं कि वह मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती।

उन्होंने मुझे चाबी दे दी मुझे ऑफिस के लिए तो देर हो ही चुकी थी लेकिन फिर मैं  अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं जब ऑफिस पहुंचा तो मैं इस बारे में सोचने लगा कि भाभी ना जाने मेरे बारे में ऐसा क्यों सोचती हैं उन्हें शायद हमेशा ही मैं अपना दुश्मन नजर आता हूं, वह मुझसे कभी भी अच्छे से बात नहीं किया करते। मैं अपने चेयर पर बैठा हुआ था और मैं यही सोच रहा था कि कैसे मैं भाभी के साथ अपने रिश्तो को सुधारूं और उनके दिल में मेरे लिए जो बैर है उसे मैं कैसे दूर करूं। कुछ ही दिनों बाद भाभी का जन्मदिन आने वाला था तो मैंने उनके जन्मदिन की सारी व्यवस्था करवा दी मुझे लगा कि शायद इससे उनके दिल में मेरे लिए जो बैर है वह दूर हो जाएगा लेकिन ऐसा शायद हुआ नहीं। मैंने भाभी के जन्मदिन की पार्टी के लिए अपने दोस्तों को भी बुलाया और हमारे कुछ रिश्तेदार भी आए हुए थे घर के सारे सदस्य वहां पर थे परंतु भाभी बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आ रही थी। अब मेरी जिंदगी आगे की तरफ बढ़ने लगी और मेरे जीवन में सुरभि आ गई जब सुरभि से मेरी पहली मुलाकात मेरे दोस्त अक्षय ने करवाई तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से अक्सर मिलने लगे। हम लोग एक दूसरे को जब भी मिलते या फिर फोन पर हम लोग बात करते तो मुझे बहुत अच्छा लगता सुरभि के साथ मेरे रिश्ते दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे थे।

यह बात मैंने अपने परिवार को भी बता दी मैंने अपने पापा मम्मी को इस बारे में बता दिया था वह दोनों ही बहुत खुश थे और वह लोग चाहते थे कि एक बार सुरभि से उनकी मुलाकात हो जाए। सुरभि को मैंने जब अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया तो कावेरी भाभी का चेहरा उतरा हुआ था उन्हें शायद इस बात का डर था कि कहीं सुरभि के आ जाने से उनकी महत्वता घर में कम ना हो जाए लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। पापा मम्मी सुरभि से मिलकर बहुत ही खुश हुए और वह कहने लगे कि सुरभि से तुम्हे शादी कर लेनी चाहिए लेकिन मैं फिलहाल इस पक्ष में नहीं था क्योंकि हम दोनों को थोड़ा समय चाहिए था इसलिए हम दोनों ने शादी के बारे में कुछ भी नहीं सोचा था लेकिन जल्द ही हम दोनों ने सगाई करने का फैसला कर लिया। हम दोनों की सगाई को रोकने के लिए भाभी ने ना जाने क्या कुछ नहीं किया उन्होंने सीढ़ियों से गिरने का भी नाटक किया और वह चाहती थी कि हम दोनों की सगाई ना हो लेकिन भाग्य में यही लिखा था और हम दोनों की सगाई हो गई। अब हम दोनों की सगाई हो चुकी थी तो मैं बहुत ज्यादा खुश था और सुरभि भी बहुत खुश थी हम लोग अक्सर एक दूसरे से मुलाकात करते रहते थे। एक दिन सुरभि मुझे कहने लगी कि पापा मम्मी मुझे कह रहे थे कि तुम्हारा पूरा परिवार हमारे घर पर आए मैंने सुरभि से कहा हां तो उसमें क्या परेशानी है मैं आज ही मम्मी से कह दूंगा तो वह लोग आने के लिए तैयार हो जाएंगे। जब मैंने यह बात सुरभि से कहीं तो सुरभि कहने लगी कि हां यदि तुम सब लोगों को ले आओ तो मुझे बहुत खुशी होगी।

सुरभि को अभी तक कावेरी भाभी के बारे में कुछ भी नहीं पता था और ना ही मैं उसे कुछ बताना चाहता था, हमारा पूरा परिवार सुरभि के घर पर गया तो उन्होंने हमारी खूब खातिरदारी की। हम लोगों ने उस दिन साथ में डिनर किया सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था लेकिन भाभी ने कुछ पुरानी बातों को सुरभि के परिवार के सामने रख दिया तो वह लोग थोड़ा घबरा गए थे उसके बाद मुझे यह सब ठीक करने में कुछ समय लगा। सब कुछ ठीक हो चुका था और करीब 8 महीने के बाद सुरभि और मैंने शादी करने का फैसला कर लिया था अब हम दोनों शादी कर चुके थे और सुरभि हमारे घर की बहू बन चुकी थी। पापा और मम्मी तो बहुत खुश थे मुझे भी इस बात की खुशी थी कि सुरभि से मेरी शादी हो चुकी है लेकिन यह बात भाभी को बिल्कुल भी मंजूर नहीं थी कावेरी भाभी को यही डर सता रहा था कि कहीं मुझसे शादी के बाद मां सुरभि को ही पूरा घर का अधिकार ना दे दे। सुरभि ने मां का दिल जीत लिया था क्योंकि वह बड़ी ही अच्छी थी और उसका स्वभाव भी बहुत शांत है मां हमेशा ही सुरभि की तारीफ किया करती थी इस बात से कावेरी भाभी का चेहरा हमेशा ही उतरा हुआ नजर आता था। धीरे-धीरे सुरभि को भी इस बात का अंदाजा होने लगा था कि कावेरी भाभी मुझे और उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती हैं। एक दिन मुझे सुरभि ने यह बात कही तो मैंने सुरभि से कहा देखो सुरभि भाभी का तो स्वभाव ही ऐसा है तुम इस बात को अपने दिल पर ना लो, सुरभि भी मेरी बात मान गई।

कावेरी भाभी का व्यवहार दिन ब दिन खराब होता जा रहा था क्योंकि उनके दिल में अब यह बात घर कर चुकी थी कि मां सुरभि को ज्यादा महत्व देने लगी है। कावेरी भाभी हम लोगों का बुरा करने से बाज नहीं आती थी उन्हें जब भी मौका मिलता तो वह हमेशा ही मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करती और इसी की वजह से एक दिन मुझे सीढियों से गिराने की कोशिश की तो मैंने उन्हें देख लिया था। मैं उस समय तो बच गया लेकिन भाभी के मंसूबे अब मेरे सामने खुल चुके थे। कावेरी भाभी के चेहरे का नकाब मैंने उतार फेंका था। मैंने उन्हें कहा कि भाभी आपने मेरे साथ ऐसा करने के बारे में सोचा भी कैसे मैं भाभी से गुस्से मे बहुत बात करता रहा मुझे उनसे नफरत होने लगी थी। कुछ समय बाद जब मां ने मुझे कहा कि बेटा मेरे अकाउंट से पैसे निकाल कर ले आना मां के खाते में कुछ पैसे जमा थे और वह उस पैसों को मुझे देना चाहती थी। कावेरी भाभी भी लालच में आ गई और वह अपने लालच के चलते मुझसे ऐसे बात कर रही थी जैसे कि कभी भी उनके दिल में मेरे लिए कुछ था ही नहीं। मुझे तो यह बात साफ पता चल गई थी कि वह मुझसे बहुत ही ज्यादा नफरत करती हैं और उनके दिल में मेरे लिए कभी जगह थी ही नहीं। भाभी ने अपनी हदें पार कर दी थी वह मुझे अपने रूप के जाल में फंसाना चाहती थी और उन्होंने ऐसा करने में कामयाबी उस वक्त हासिल कर ली जब मैंने उनके बदन को नंगा देख लिया। मै भी उनके नंगे बदन को देखकर उनके बदन की गर्मी को मैंने महसूस किया वह मुझे कहने लगी देवर जी बेडरूम में चलते हैं। सुरभि भी अपने मायके गई हुई थी कावेरी भाभी मेरे साथ बेडरूम में आ गई भाभी के बदन को मै सहलाने लगा मुझे मजा आ रहा था वह मेरे लिए एक अलग ही अनुभूति थी।

मैंने उनके बदन को बड़े ही अच्छे से सहलाया उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मुठ मारना शुरू किया तो मैं उत्तेजित हो गया। मैंने उन्हें कहा मुझे बढा अच्छा लग रहा है उन्होंने भी थोड़ी देर में मेरे मोटे लंड को मुंह के अंदर समाते हुए उसे सकिंग करना शुरू कर दिया वह बड़े अच्छे तरीके से मरे लंड को चूस रही थी। जब वह लंड चूस रही थी मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था और काफी देर तक उन्होंने ऐसा ही किया। मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गया था जब मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया तो मैंने उनकी योनि से पानी बाहर निकाल दिया और मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए अपने लंड को उनकी योनि के अंदर घुसाया तो वह चिल्लाने लगी थी और मुझे भी बड़ा मजा आने लगा था। मैं काफी तेज गति से उन्हें धक्के देने लगा जिस प्रकार से मैं उन्हें चोद रहा था उस से उनके मुंह से सिसकिया निकल रही थी वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लेती और मुझसे अपनी चूत बड़े ही अच्छे से मरवा रही थी।

जब उन्होंने मेरे लंड की तेल से मालिश की तो मेरी नजरे उनकी गोल और बड़ी गांड पर पड गई मैंने उनकी गांड के छेद के अंदर उंगली को डालकर अंदर बाहर किया तो उनकी गांड का छेद मेरा लंड लेने के लिए तैयार था। मैंने अपने लंड को उनकी गांड के अंदर घुसाया तो उनके मुंह से तेज चीख निकलने लगी मेरा लंड उनकी गांड में प्रवेश हो चुका था। मुझे उन्हें धक्के देने में मजा आता और वह मेरे लंड को चूत में बड़े ही मजे मे लेती काफी देर ऐसा करने के बाद मेरे  लंड का छिलकर बुरा हाल हो गया। मैंने उन्हें कहा भाभी मैं शायद रह नहीं पाऊंगा वह मुझसे अपनी चूतडो को मिला रही थी और मैं उन्हें तेज धक्के दे रहा था। मुझे उन्हे धक्का देने में मजा आता वह मुझे कहती तुम मेरी इच्छा को पूरा कर रहे हो लेकिन जो मां जी पैसे देने वाली है क्या उसमें से मुझे भी कोई हिस्सा मिलेगा। मैंने भी उनका दिल रखने के लिए हां कह दिया लेकिन मुझे मालूम था कि मैं उन्हें कुछ भी नहीं जाने वाला हूं परंतु इसी बहाने कम से कम मुझे उनकी गांड का सुख भोगने का मौका तो मिल गया था। मैंने उनके गांड के मजे काफी समय तक लिए अब उन्हें अंदाजा हो चुका है कि मैं उन्हें कुछ भी नहीं देने वाला हूं इसलिए वह मुझे अपनी गांड भी मरने नहीं देती है।


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