दोस्त की ठरकी पत्नी की ठरक


Antarvasna, hindi sex story: मेरे दोस्त ने मुझे डिनर पर इनवाइट किया था मैं अपनी पत्नी को लेकर अपने दोस्त के घर गया जब मैं अमित के घर पहुंचा तो मेरी पत्नी कहने लगी कि अमित का घर तो बहुत ही अच्छा है। मेरी पत्नी अमित से एक दो बार पहले भी मिल चुकी थी लेकिन मैं अमित की पत्नी से पहली बार ही मिलने वाला था। अमित और मेरी दोस्ती काफी पुरानी है लेकिन अमित का परिवार इंदौर रहने के लिए चला गया था काफी वर्ष वह लोग इंदौर में रहे और जब अमित की शादी हो गई तो उसके बाद अमित की नौकरी बेंगलुरु में लग गई। जब हम लोग अमित के घर पर गए तो अमित की पत्नी और अमित ने हम लोगों का बड़ा ही अच्छे से स्वागत किया। अमित ने अपनी पत्नी से हम लोगों का परिचय करवाया अमित ने मुझसे कहा कि यह मेरी पत्नी आकांक्षा है अमित की पत्नी आकांक्षा भी हम लोगों से मिलकर बड़ी खुश थी। अमित ने मेरे और मेरी पत्नी का परिचय भी आकांक्षा से करवाया अमित की शादी को अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। हम लोग अमित के घर देरी से पहुंचे थे तो मैंने अमित से कहा कि अमित हम लोगों को जल्दी घर निकलना होगा। अमित कहने लगा कि अभी तो तुम लोग आए हो हम लोगों ने जल्दी से डिनर किया और उसके बाद हम लोग अपने घर वापस लौट आए।

जब हम लोग घर वापस लौटे तो मैंने देखा घर की लाइट अभी तक खुली हुई थी जैसे ही हम लोगों ने दरवाजे की डोर बेल को बजाया तो मम्मी ने तुरंत दरवाजा खोल लिया और मम्मी कहने लगी कि बेटा तुम लोग बड़ी जल्दी आ गए। मैंने मम्मी से कहा मम्मी आप अभी तक सोए क्यों नहीं हैं मम्मी कहने लगी कि बेटा मुझे नींद नहीं आ रही थी और ना जाने मुझे क्यों अजीब सी बेचैनी हो रही है। मैंने मम्मी को कहा मम्मी आप सो जाती मम्मी कहने लगी कि बेटा मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही है और मुझे ऐसा लग रहा है कि शायद मेरी तबीयत भी ठीक नहीं है। मैंने मम्मी को कहा कि आप को डॉक्टर के पास ले कर चलना है वह कहने लगी कि नहीं बेटा मुझे डॉक्टर के पास तो नहीं जाना लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी ना जाने मुझे एक बुरा स्वप्न हुआ जिसकी वजह से मेरी नींद खुल गई और उसके बाद मुझे नींद ही नहीं आई।

काफी देर तक हम लोग मम्मी के साथ बैठे रहे जब मम्मी को नींद आने लगी तो मम्मी रूम में चली गई और वह सो चुकी थी मैं और कविता अपने कमरे में आकर सो चुके थे क्योंकि हम लोगों को भी नींद आ रही थी। अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो मैंने कविता को कहा क्या आज अखबार वाला नहीं आया तो कविता कहने लगी कि नहीं राजेश आज अखबार वाला नहीं आया। मैंने कविता से कहा ना जाने आज वह क्यों नहीं आया तो कविता कहने लगी कि बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है शायद इसी वजह से वह नहीं आया होगा। मैंने जब घर के बाहर देखो तो बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी कविता मुझे कहने लगी कि आज तो बहुत तेज बारिश हो रही है। मुझे ऑफिस भी जाना बहुत जरूरी था और मैं अब ऑफिस के तैयार होने लगा। मैं ऑफिस के लिए तैयार हो चुका था और मैं नाश्ता कर ही रहा था कि अमित का फोन मुझे आया और वह कहने लगा कि राजेश क्या तुम मुझे लेने के लिए घर पर आ जा सकते हो। मैंने उसे कहा अमित लेकिन घर पर सब ठीक तो है ना अमित कहने लगा हां राजेश सब कुछ ठीक है लेकिन मेरी कार आज स्टार्ट ही नहीं हो रही है तो मैं सोच रहा हूं कि यदि तुम मुझे मेरे ऑफिस तक छोड़ देते तो अच्छा रहता। मैंने अमित को कहा ठीक है मैं अभी थोड़ी देर बाद घर से निकलता हूं अभी मैं नाश्ता कर रहा हूं, जैसे ही मैंने नाश्ता खत्म किया तो मैं अमित को लेने के लिए उसके घर चला गया। मैं अमित के घर पहुंचा तो अमित तैयार हो चुका था लेकिन बारिश काफी तेज हो रही थी तो अमित ने कहा थोड़ी देर हम लोग रुक जाते हैं। थोड़ी देर के लिए हम लोग अमित के घर पर ही रुक गए लेकिन बारिश अभी तक रुकी नहीं थी मुझे भी अपने ऑफिस के लिए देर हो रही थी इसलिए अमित ने मुझे कहा कि चलो राजेश हम लोग अब ऑफिस निकलते हैं। मैंने अमित को उसके ऑफिस छोड़ा और वहां से मैं अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो सब लोग सिर्फ बारिश के बारे में ही चर्चा कर रहे थे क्योंकि बारिश रुक ही नहीं रही थी और सड़कों पर बहुत ज्यादा जाम लगने लगा था जिसकी वजह से कई लोग अभी तक ऑफिस नहीं पहुंचे थे। हमारे बॉस भी ऑफिस नहीं पहुंचे थे लेकिन हम लोगो का काम शुरू हो चुका था दोपहर के वक्त भी बारिश नहीं रुकी थी उस दिन समय ऐसा लग रहा था जैसे कि बड़ी धीमी गति से चल रहा है।

शाम के 5:00 बजे थे तो अमित का मुझे फोन आया और अमित कहने लगा कि राजेश तुम मुझे लेने के लिए ऑफिस में आ जाओगे मैंने अमित को कहा ठीक है अमित मैं तुम्हारे ऑफिस में तुम्हें लेने के लिए आ जाऊंगा। मैं अपने ऑफिस से 6:30 बजे निकल चुका था और अमित के ऑफिस पहुंचने में मुझे करीब आधा घंटा लग गया। मैं अमित के ऑफिस पहुंचा अमित अपने ऑफिस के बाहर ही मेरा इंतजार कर रहा था अमित जल्दी से मेरी कार में बैठा और हम दोनों घर की तरफ निकल पड़े लेकिन रास्ते में अचानक कार बंद हो गई। बारिश रुकी नहीं थी मैंने अमित से कहा अमित अभी हमें क्या करना चाहिए तो अमित कहने लगा थोड़ी देर हम लोग यही इंतजार करते हैं क्योंकि बाहर तो काफी तेज बारिश हो रही है। करीब 15 मिनट तक हम दोनों बारिश रुकने का इंतजार करते रहे लेकिन अभी तक बारिश रुकी नहीं थी आखिरकार मुझे देखना ही पड़ा कि कार में क्या दिक्कत आई है परंतु मुझे कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था और मैं पूरी तरीके से भीग चुका था।

अमित मुझसे कहने लगा कि मुझे लगता है कि हमें किसी को यहां बुलाना चाहिए मैंने अमित से कहा लेकिन इस वक्त कौन मकैनिक हमारे पास आएगा बारिश काफी तेज हो रही है। हम लोगों ने एक व्यक्ति से लिफ्ट मांगी और हम लोग आगे तक गए थोड़ी ही दूरी पर एक सर्विस सेंटर था वहां पर जब हम लोगों ने दुकान के मालिक से बात की तो वह हमारे साथ आने के लिए तैयार हो गए। जब वह हमारे साथ आए तो उन्होंने हमारी कार थोड़ी देर में ही ठीक कर दी हम लोग अब घर के लिए निकल चुके थे क्योंकि काफी देर हो चुकी थी इसलिए कविता का फोन मुझे बार-बार आ रहा था। जब हम लोग अमित के घर पहुंचे तो आकांक्षा कहने लगी कि आप अपने कपड़े बदल लीजिए अमित ने भी कहा कि हां आकांक्षा ठीक कह रही है। मैंने भी सोचा कि मुझे अपने कपड़े वाकई में बदल लेना चाहिए क्योंकि मुझे यज डर था कि कहीं मेरी तबीयत खराब ना हो जाए। अमित ने मुझे कपड़े दिये मैंने कपड़े चेंज कर लिए आकांक्षा ने मेरे लिए और अमित के लिए गरमा गरम चाय बनाई। अमित और मैंने चाय पी उसके बाद हम दोनों साथ में बैठकर बात करने लगे बारिश होने लगी थी लेकिन आकांक्षा कहने लगी कि आज आप यही खाना खा लीजिए। आकांक्षा ने मेरे और अमित के लिए खाना बना दिया हम दोनों ने खाना खाया। जब मैं बाथरूम में गया तो उस वक्त बाथरूम का दरवाजा खुला ही था मैं बाथरूम में गया तो मैंने देखा आकांक्षा बाथरूम में थी। जब वह बाथरूम में थी तो वह मेरी तरफ देखने लगी मैं भी उसके गोल और सुडौल स्तनों को देखकर अपनी नजर उसके स्तनों से हटा ना सका और उसके स्तनों को मैंने दबा दिया वह भी उत्तेजित हो गई थी। मैंने उसको होठों को चूम लिया उसके होठों का रसपान करने में मुझे बड़ा आनंद आ रहा था बहुत देर तक मैं उसके होठों को चूमता रहा लेकिन वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी।

मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला जब मैंने उसकी चूत के अंदर उंगली को डाला तो उसे भी मजा आने लगा और तभी अमित की आवाज हम दोनों को सुनाई दी हम दोनों जल्दी से बाथरूम से बाहर निकले। मेरा लंड एकदम खड़ा हो चुका था मैंने अपने लंड को अपने अंडरवियर के अंदर डालने की कोशिश की लेकिन वह अंडरवियर से बाहर आने की कोशिश कर रहा था थोड़ी देर बाद मेरा लंड अपने आप ही सो गया। जब मैं अपने घर गया तो आकांक्षा का फोन मेरे नंबर पर आया आकांक्षा ने मुझे कहा कि आज तुमने मेरे बदन की गर्मी को बढ़ा दिया है। अगले दिन मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली अमित अपने ऑफिस जा चुका था मेरे पास बहुत ही समय था। मैं जब आकांक्षा के पास गया तो आकांक्षा मुझे देखकर खुश हो गई मैंने जब आकांक्षा को अपनी बांहों में लिया तो मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू किया और उसके होठों को चूम कर मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था बहुत देर तक मैं उसके होंठों का रसपान करता रहा उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेने की बात कही मैंने उसके मुंह के अंदर अपने लंड को घुसा दिया।

मेरा लंड आकांक्षा के मुंह के अंदर जा चुका था जिस प्रकार से वह मेरे लंड का रसपान कर रही थी मुझे बड़ा आनंद आ रहा था थोड़ी देर बाद मैंने आकंक्षा की चूत मे अपनी उंगली को डालकर अंदर बाहर करना शुरू किया आकांक्षा की चूत से पानी निकलने लगा था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे गर्मी का एहसास होने लगा। आकांक्षा को मैंने घोड़ी बनाया हुआ था जब उसकी चूत के अंद मेरा लंड चला गया तो मैं उसे बडी तेजी से धक्के मारने लगा मैं उसे बहुत ही तेजी से धक्के मार रहा था मुझे उसे चोदने में बड़ा आनंद आता उसकी चूतडे मेरे लंड से टकरा रही थी। जिस प्रकार से उसकी चूतडो का रंग लाल होने लगा था उससे मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था काफी देर तक मैं ऐसा ही करता रहा लेकिन जब मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर गिराया तो वह बड़ी खुश हो गई और कहने लगी आज तो तुमने मेरी गर्मी को मिटा दिया आगे भी तुम ऐसे ही मेरी गर्मी को मिटाते रहना। उसे मेरे लंड को अपनी चूत मे लेने में बड़ा मजा आया था वह आगे भी इसी उम्मीद में थी कि मैं उसको चोदता रहूंगा। मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं आकांक्षा के पास चला जाया करता।


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