चूत उठा उठा कर मारी


Antarvasna, sex stories in hindi: कॉलेज का पहला दिन था और मैं जब कॉलेज में गई तो मैं अपने फोन को ही टटोल रही थी तभी हमारे क्लास में हमारे प्रोफ़ेसर पढ़ाने के लिए आए। जब वह पढ़ाने के लिए आये तो उन्होंने पहले दिन सब का परिचय लिया उस दिन पढ़ाई तो ज्यादा हो नहीं पाई थी और पहला दिन तो सब लोगों का परिचय देने में ही चला गया। अगले दिन से क्लास चलने लगी थी और धीरे-धीरे सब लोगों से मुलाकात भी होने लगी थी। मेरी सहेली नैना जो कि मेरे घर के पास में ही रहती है वह मुझे कॉलेज में ही मिली और अब वह मेरी बहुत अच्छी सहेली बन चुकी है कुछ दिनों में ही हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। नैना और मैं एक साथ ही घर से कॉलेज के लिए जाते हमारी क्लास में काफी लड़के भी थे और जब अमित के साथ मेरी बातचीत होती थी तो मुझे अमित से बात करना अच्छा लगता अमित हम लोगों के साथ ही ज्यादातर रहता।

हम लोगों ने अपने एग्जाम दे दिए थे और हम लोगों का एक वर्ष पूरा हो चुका था उसके बाद हमारा रिजल्ट भी आ चुका था और कुछ दिनों की हमारी छुट्टी थी। काफी दिनों बाद हम लोग एक दूसरे को मिले तो उस दौरान मैंने अमित से कहा कि अमित तुमने अपनी छुट्टियों में क्या किया तो वह मुझे कहने लगा कि मैं तो घर पर ही था उसने मुझसे पूछा तो मैंने भी उससे कहा मैं भी घर पर ही थी। कॉलेज में धीरे-धीरे समय बीतता जा रहा था और अमित ने एक दिन मुझे कहा कि वह मुझे किसी से मिलाना चाहता है मैंने अमित से कहा लेकिन तुम मुझे किस से मिलाना चाहते हो। अमित ने कहा जब हम लोग कॉलेज से फ्री हो जाएंगे तो उसके बाद मैं तुम्हें आज अपनी गर्लफ्रेंड से मिलवाऊंगा। यह बात सुनकर मुझे काफी बुरा लगा लेकिन फिर भी मैं अमित की गर्लफ्रेंड से मिलने गयी अमित की गर्लफ्रेंड से मिलकर मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी। हम लोग काफी समय तक साथ में ही बैठे रहे उसके बाद हम लोग अपने घर चले आए मैंने जब यह बात नैना को बताई तो नैना ने मुझे कहा गरिमा मैं तुम्हें कहती नहीं थी कि तुम अमित से अपने दिल की बात कह दो।

मैंने अमित को कभी अपने दिल की बात कही ही नहीं थी परंतु अब अमित किसी और के साथ ही रिलेशन में था। मुझे काफी बुरा लगने लगा और अमित भी अब मुझसे दूर होता चला गया कुछ समय पहले ही अमित और मानसी की मुलाकात हुई थी जब वह लोग एक दूसरे से मिले तो उसके बाद उन दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई मुझे तो इस बारे में कुछ पता नहीं था लेकिन अमित ने हीं मुझे यह सब बातें बताई। वह मानसी के साथ बहुत खुश था और मानसी के साथ ही वह ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करता मैं अब अमित को फोन भी करती तो अमित मेरा फोन नहीं उठाया करता था हम दोनों एक दूसरे से दूर होते चले गए। अमित मुझसे काफी दूर हो चुका था मैं भी अमित से ज्यादा बात नहीं करती थी इसी दौरान एक दिन मैं एक शादी में गई हुई थी और उस शादी में मेरी मुलाकात पंकज से हुई। जब मैं पंकज से मिली तो पंकज से मिलकर मुझे अच्छा लगा पंकज से मुझे मेरी बहन ने मिलवाया। पंकज मेरी बहन को पहले से ही जानता था इसलिए वह मुझसे काफी खुलकर बातें करने लगा पंकज से भी मैं काफी अच्छे से बात करने लगी सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि हम दोनों को पता ही नहीं चला पंकज के साथ मैं अब रिलेशन में थी। एक दिन पंकज ने मुझसे अपने दिल की बात कह दी और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते थे अमित मेरी जिंदगी से दूर जा चुका था और मैं अब पंकज के साथ खुश थी। मेरा कॉलेज अब खत्म होने वाला था कॉलेज के हम लोग आखिरी वर्ष में थे और हमारा ग्रेजुएशन अब पूरा होने वाला था। मैं अपना ग्रेजुएशन पूरा कर के आगे की पढ़ाई किसी दूसरे कॉलेज से करना चाहती थी इसलिए जब मैंने अपने ग्रेजुएशन के एग्जाम दिए तो उस दौरान मैंने अपने पापा से बात की और कहा कि मुझे किसी और कॉलेज में पढ़ना है। पापा कहने लगे बेटा जिस कॉलेज में तुम पढ़ाई कर रही हो क्या वहां पर अच्छा नहीं है मैंने उन्हें कहा नहीं पापा बस ऐसे ही मैं दूसरे कॉलेज से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करना चाहती हूं पापा ने कहा ठीक है बेटा जैसा तुम्हें ठीक लगता है।

मैं अपने ग्रेजुएशन के पेपर तो दे ही चुकी थी और उसके बाद मैं पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बारे में सोच रही थी तो मैंने अपनी पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दूसरे कॉलेज में एडमिशन ले लिया। मैं दूसरे कॉलेज में पढ़ने लगी थी इसलिए अमित से मेरा मिलना बिल्कुल भी नहीं होता था नैना ने भी मेरे साथ ही एडमिशन ले लिया था नैना और मैं ज्यादातर समय साथ में ही होते थे। कॉलेज खत्म हो जाने के बाद मैं पंकज से मिला करती थी पंकज और मेरे रिलेशन के बारे में मेरी बहन को कोई भी जानकारी नहीं थी और ना ही मैं उसे इस बारे में कुछ बताना चाहती थी। मैं एक दिन अपने कॉलेज से घर लौटी तो उस दिन पंकज से मैं मिल नहीं पाई थी पंकज अपने ऑफिस में बिजी था इसलिए मैं सीधा ही उस दिन घर चली आई जब मैं घर आई तो पापा और मम्मी दीदी की शादी को लेकर बात कर रहे थे उन्होंने दीदी के लिए कोई लड़का देख रखा था। मैंने पापा से कहा पापा क्या आप लोग दीदी के लिए लड़का देख चुके हैं तो वह कहने लगे कि हां पापा के ही दोस्त का बेटा है जिससे कि पापा दीदी की शादी करवाना चाहते थे।

जब मम्मी ने मुझे उसकी फोटो दिखाई तो मैंने मम्मी से कहा मम्मी यह दीदी के लिए बिल्कुल सही लड़का है और अब पापा और मम्मी ने दीदी की शादी करवाने के बारे में सोच लिया था। उन्होंने जब दीदी से इस बारे में पूछा तो दीदी भी शादी के लिए तैयार थी और दीदी ने जब पहली बार महेश को देखा तो दीदी ने महेश को पसंद कर लिया और उन दोनों की सगाई हो गई। पंकज और मेरा मिलना अभी भी जारी था हम दोनों छुप छुप कर ही मिला करते थे। मुझे पंकज से मिलना बहुत अच्छा लगता था एक दिन बारिश काफी तेज हो रही थी उस दिन मैं पंकज का इंतजार कर रही थी। मैं काफी भीग चुकी थी पंकज मुझे लेने के लिए अपनी कार से आए पंकज ने मुझे कहा तुम बहुत भीग चुकी हो। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं मैं कार में बैठी हुई थी पंकज मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाने लगा। मैंने पंकज से कहा आज तुम कुछ ज्यादा रोमांटिक मूड में लग रहे हो? हम लोगों के बीच यह पहला ही मौका था जब पंकज ने मेरे साथ कुछ ऐसा किया था लेकिन मैं भी अपने आपको ना रोक सकी और मैंने पंकज को किस कर लिया। पंकज ने कार को एक किनारे खडा किया क्योंकि बारिश काफी ज्यादा थी इसलिए वहां आसपास कोई भी नहीं दिखाई दे रहा था। हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे मेरे बदन की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही थी। पंकज कहने लगे तुम्हारी चूत के अंदर मुझे अपने लंड को डालना है मैंने अपनी जींस को खोलते हुए अपनी पैंटी को उतार दिया और पंकज ने अपने लंड को बाहर निकाला। जब उसने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया उसके लंड को मैं अच्छे से सकिंग करने लगी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था वह भी बहुत खुश था जिस प्रकार से मैंने उसके लंड को किस किया उससे वह मुझे कहने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैरों को खोलते हुए मेरी चूत के अंदर लंड कं घुसा दिया। पंकज का लंड मेरी चूत के अंदर तक जा चुका था मैं पूरी तरीके से उसका साथ दे रही थी।

उसके साथ सेक्स करने मे बहुत मजा आ रहा था मैंने उसके साथ बहुत देर तक सेक्स किया मैं लगातार अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। मुझे पंकज ने पूरी तरीके से गर्म कर दिया था मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर निकलने लगी थी इसलिए पंकज भी मेर चूत की गर्मी को ना झेल सका और उसने अपने वीर्य को मेरी चूत मे ही गिरा दिया। उसका वीर्य मेरी चूत मे गिर चुका था हम लोग वहां से चले आए। उस दिन मेरी पंकज से फोन पर बात हुई तो मैंने पंकज से कहा आज मुझे बहुत अच्छा लगा। कुछ ही दिनों बाद मे सेक्स के लिए बहुत ज्यादा तड़प रही थी मैंने पंकज को घर पर बुला लिया वह घर पर आ चुका था। जब वह घर पर आया था तो उस दिन उसने मुझे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया वह मुझे चोद रहा था।

जब वह अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करता तो मैं जोर से चिल्लाती और पंकज का साथ बड़े अच्छे से देती। पंकज मुझे कहने लगा आज तुम्हे चोद कर बहुत अच्छा लग रहा है। यह हम दोनो के बीच दूसरी बार सेक्स हो रहा था लेकिन पंकज ने मेरी चूत को पूरी तरीके से छिल कर रख दिया था और उसने मेरी चूत से खून भी बाहर निकाल दिया था। मैंने पंकज से कहा तुम्हारा लंड बहुत ही मोटा है तो पंकज कहने लगा लेकिन तुम भी तो बड़ी कमाल की हो मेरी चूत से वह अपने लंड को टकरा रहा था जब उसने मेरे मुंह के अंदर अपने लंड को डाला तो मैंने उसके लंड को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर सकिंग किया। पंकज का वीर्य बाहर की तरफ आ चुका था और उसके वीर्य को मैने मुंह मे ले लिया। मै पंकज के साथ बहुत खुश थी लेकिन यह बात मेरी बहन को पता चल चुकी थी इसलिए हम दोनों चाहते थे कि अब हम लोग अपने घर में इस बारे में बात कर ले। मैंने अपने परिवार से इस बारे में बात कर ली थी और पंकज ने भी अपने परिवार से बात कर ली थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ अपना जीवन बिताना चाहते थे पंकज और मैं बहुत ही ज्यादा खुश थे और एक दूसरे को हम लोग खुश करने की कोशिश करते रहते। मैं पंकज के साथ बहुत ही खुश थी वह मेरा बहुत ही अच्छे से ध्यान भी रखता है।


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