चूत का कमाल हो गया


Antarvasna, desi kahani: मैं पुणे के एक कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई कर रहा था और कुछ समय बाद मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। कॉलेज के कैंपस प्लेसमेंट के दौरान मेरा सिलेक्शन हो गया और मैं नौकरी के लिए चेन्नई चला गया मैं अपने घर से दूर था हालांकि पापा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मैं जॉब करने के लिए चेन्नई जाऊं लेकिन मुझे जॉब करने के लिए चेन्नई जाना पड़ा। मैं अपने परिवार से दूर जरूर था लेकिन मुझे मेरे परिवार की कमी कभी महसूस नहीं हुई क्योकि सुहानी मेरे साथ थी। सुहानी और मैं दोनों ही कॉलेज में साथ पढ़ते थे और हम दोनों कॉलेज के समय से ही एक दूसरे को प्यार करते थे इसलिए मैं चाहता था कि सुहानी और मैं जल्दी एक दूसरे से शादी कर ले। हालांकि सुहानी को अभी समय चाहिए था सुहानी का मानना था कि हम दोनों एक दूसरे को थोड़ा और समय दें उसके बाद हम लोग शादी करें। मैंने सुहानी को कई बार समझाने की कोशिश की परंतु वह मेरी बात नहीं मानती थी और कहती कि हम लोग एक साल बाद शादी कर लेंगे।

मैं और सुहानी अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहे थे एक साल बाद जब मैंने सुहानी इस बारे में पूछा तो सुहानी और मैंने शादी करने का पूरा मन बना लिया और थोड़े समय बाद हम दोनों की शादी हो गई। जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके कुछ समय तक सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन फिर हम दोनों के बीच अचानक से ही झगड़े होने लगे। जब हम दोनों के झगड़े होने लगे तो मुझे लगने लगा कि शायद सुहानी और मैं एक दूसरे को समझ नहीं पा रहे हैं मैं इतना ज्यादा परेशान हो चुका था कि मैं अपनी नौकरी पर भी ध्यान नही दे पा रहा था। उसके बाद मेरे और सुहानी के बीच भी ज्यादा बनी नही, मुझे हमेशा से यही लगता था कि सुहानी और मैं एक दूसरे को समझते हैं लेकिन अब मुझे पता चल चुका था कि सुहानी और मैं एक दूसरे को कभी समझते ही नहीं थे।। शादी से पहले तो सब कुछ ठीक था लेकिन शादी के बाद सुहानी के साथ रह पाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था इस वजह से हम दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। जब यह बात मेरे पापा और मम्मी को पता चली तो उन्होंने सुहानी को समझाया और मुझे भी उन्होंने काफी समझाया लेकिन हम दोनों ने तो अलग रहने का पूरा मन बना लिया था।

हम दोनों एक दूसरे के साथ एडजस्ट नहीं कर सकते थे मैंने भी सुहानी से कहा कि सुहानी अब हम लोगों को डिवोर्स ले ही लेना चाहिए तो सुहानी को भी इस बात से कोई एतराज नहीं था और हम दोनों ने डिवोर्स लेने का फैसला कर लिया था। हालांकि मेरे पापा ने उसके बाद भी हम दोनों को काफी समझाया लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ नहीं रह पा रहे थे और हम दोनों की सहमति से हम दोनों ने डिवोर्स ले लिया। हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके थे और अलग होकर अपनी जिंदगी में खुश थे। मेरी जिंदगी में सुहानी के ना होने से काफी कुछ बदलाव आने लगा था मैं काफी लापरवाह हो गया था। हर चीज को लेकर मैं दिन-ब-दिन लापरवाह होता जा रहा था मैं अपने पापा मम्मी से मिलने के लिए भी काफी कम जाया करता था मैं चेन्नई में ही ज्यादातर रहा करता। मेरे पापा और मम्मी चाहते थे कि अब मैं किसी और से शादी कर लूँ लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहता था सुहानी भी उसके बाद चेन्नई से रिजाइन देकर मुंबई चली गई थी और हम दोनों का कोई संपर्क नहीं था। कभी कभार सुहानी मुझे फोन कर लिया करती थी लेकिन पिछले काफी महीनों से उसका मुझे फोन नहीं आया था और हम दोनों की कोई बात नहीं हो पाई थी। मेरे और सुहानी के अलग हो जाने से मुझे बहुत ज्यादा फर्क पड़ा था। एक दिन मैं अपने ऑफिस में बैठा हुआ था उस दिन मैं अपना काम कर रहा था कि तभी मेरे चाचा जी का फोन मुझे आया और वह मुझे कहने लगे कि मोहन बेटा तुम कैसे हो। मैंने चाचा जी को कहा मैं तो ठीक हूं लेकिन आप बताइए आज आपने मुझे कैसे फोन कर दिया। वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम्हारी बहन रचना के लिए हम लोगों ने एक लड़का देखा है और उसकी सगाई भी तय हो चुकी है जल्द ही हम लोग उसकी शादी के बारे में सोच रहे हैं इसलिए मैंने आज तुम्हें फोन किया था मैंने उन्हें कहा चाचा जी मैं जरूर रचना की शादी में आऊंगा। चाचा जी मुंबई में रहते हैं और उन्होंने मुझे सिर्फ इसीलिए फोन किया था चाचा जी मुझे बहुत अच्छा मानते हैं उनके साथ मेरी काफी अच्छी बनती भी है। मैंने भी अब मुंबई जाने का फैसला कर लिया था और पापा मम्मी भी मुंबई आए हुए थे, उस दौरान मैं जब पापा मम्मी को मिला तो उन लोगों ने मुझसे कहा कि बेटा तुम क्यों दोबारा शादी के बारे में नहीं सोचते।

मैंने उन्हें कहा कि पापा अब आप लोग मुझसे इस बारे में बात ना करें तो ठीक रहेगा मैं अपनी जिंदगी में खुश हूं और अपने तरीके से मैं अपनी जिंदगी को जीना चाहता हूं। हालांकि वह लोग भी अपनी जगह बिल्कुल ठीक थे लेकिन फिर भी मैं शादी करने के बिल्कुल भी मूड में नहीं था। मुझे नहीं मालूम था की शादी में सुहानी से मेरी मुलाकात हो जाएगी रचना की शादी में जब मेरी मुलाकात सुहानी से हुई तो मैं उससे नजरें चुराने की कोशिश करने लगा लेकिन सुहानी ने मुझसे बात की और कहने लगी कि मोहन तुम कैसे हो। मैंने उसे बताया मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम बताओ तुम कैसी हो मुझे नहीं पता था कि चाचा जी ने उसे भी शादी में बुलाया हुआ है और उस दिन हम दोनों ने काफी बातें की। वह कहने लगी मोहन देखो हम दोनों के फैसले से ही हम दोनों अलग हुए थे और मैं नहीं चाहती कि तुम इस तरीके से अपनी जिंदगी बिताओ पापा और मम्मी ने मुझसे बात भी की थी और उन्होंने कहा था कि तुम दोनों दोबारा से एक होने के बारे में सोच लो। मैंने सुहानी को कहा सुहानी क्या यह संभव है?

हम दोनों एक दूसरे के साथ नहीं रह पाएंगे। सुहानी कहने लगी मोहन मुझे भी ऐसा ही लगता है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रह नहीं पाएंगे। उस शादी के दौरान शायद हम दोनों के बीच दोबारा से वही प्यार पैदा हो गया जो पहले था और हम दोनों एक दूसरे के साथ दोबारा से अपने नए जीवन की शुरुआत करना चाहते थे। हम दोनों ने दोबारा से साथ में रहना शुरू कर दिया था।  हम दोनों एक दूसरे के साथ पहले की तरह रहने की कोशिश करने लगे वही प्यार हम दोनों के बीच अब दोबारा से होने लगा था। जब हम दोनों के बीच पहली बार सेक्स हुआ था तो वह बड़ा ही यादगार पल था जब सुहानी उस दिन मेरा इंतजार कर रही थी मैं ऑफिस से लौटा तो सुहानी ने उस दिन वही पिंक कलर की नाइटी पहनी हुई थी जो हम लोगों के बीच पहली बार सेक्स करने के दौरान उसने पहनी थी। मैं उस दिन सुहानी को देखकर शायद अपने अंदर की भावनाओं को रोक नहीं पाया और मैं सुहानी को किस करने लगा। वह बहुत ज्यादा गरम हो गई थी हम दोनों एक दूसरे के साथ बिस्तर पर लेटे हुए थे। मैं बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा था सुहानी अपने आपको रोक नही पा रही थी और मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैने सुहानी की नाइटी को उतारा जब मैंने उसकी पैंटी को उतारा तो मैंने सुहानी की चूत को चाटना शुरू किया आज भी उसकी चूत वैसे ही गुलाबी है। मैंने जैसे ही सुहानी की चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो मुझे अच्छा लगने लगा सुहानी को भी बड़ा मजा आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है अब हम दोनों के अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी हम दोनों बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगे थे। मैने सुहानी की चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने उसे जोर से धक्के देने शुरू कर दिए थे और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी कुछ ज्यादा ही अधिक होने लगा था। सुहानी मुझे कहने लगी मुझे धक्के देते रहो। मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था जब मैं सुहानी की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था।

मैंने उसके दोनों पैरों को आपस में मिलाकर उसे धक्के देना शुरू किया। मेरा माल बाहर आने वाला था मैंने उसे बाहर गिरा दिया अब उसने अपने स्तनों को साफ किया। मैंने उसे अपने लंड को चूसने के लिए कहा तो उसने मेरे लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया। हम दोनों अब एक नई शुरुआत करके बहुत ज्यादा खुश थे। मुझे उसको घोड़ी बनाकर चोदने में बड़ा मजा आता है। सुहानी ने मेरे सामने अपनी चूतड़ों को कर दिया जब उसने अपनी चूतड़ों को मेरे सामने किया तो मुझे अच्छा लगने लगा था और उसे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। जब मैं उसे धक्के मार रहा था तो मुझे मजा आता मैं सुहानी को बड़ी तीव्र गति से चोद रहा था। वह मुझ से अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी उसके अंदर की गर्मी कहीं न कहीं बढ़ती ही जा रही थी और मेरे अंदर की गर्मी भी बहुत ज्यादा अधिक हो चुकी थी।

मैंने सुहानी को कहा मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा है सुहानी मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ चुकी है। अब हम दोनों ही पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे और हमारी गर्मी शांत हो गई। हम दोनों पसीना पसीना होना लगे मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था। सुहानी की चूत मेरे लंड से मेरे वीर्य को बाहर खींचने लगी थी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था। हम दोनो एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया मैंने उसकी चूतड़ों को पूरी तरीके से लाल कर दिया था और उसकी चूतड़ों का रंग इतना ज्यादा लाल हो गया कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और मेरे अंदर की गर्मी बाहर आ गई। मैंने जब अपने वीर्य को उसकी चूत में गिराया तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी मोहन मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। हम दोनो ने दोबारा से अपने रिश्ते की नई शुरुआत कर दी थी।


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