चुदने मे रुचि जागने लगी


Antarvasna, hindi sex kahani: पापा मुझे कहते हैं कि अंजली बेटा आज तुम घर पर ही हो क्या आज तुम ऑफिस नहीं जा रही हो मैंने पापा को कहा नहीं पापा आज मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली है। मैं उस वक्त सोकर ही उठी थी क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी इसलिए मेरा ऑफिस जाने का मन नहीं था। मैंने जब यह बात पापा को बताई तो पापा चिंतित हो गए और मम्मी भी बहुत परेशान हो गई वह दोनों ही मुझसे पूछने लगे कि अंजली बेटा ऐसा क्या हुआ तुम्हारी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब लग रही है। मैंने पापा मम्मी को बताया कि पता नहीं कल रात से ही मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था और लग रहा था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। जब मैंने मम्मी को यह बात बताई तो मम्मी कहने लगी कि चलो अभी तुम डॉक्टर के पास चलो। मैंने मम्मी को कहा नहीं मम्मी रहने दीजिए लेकिन मम्मी मुझे जिद करते हुए डॉक्टर के पास ले गई, वह चिंतित हो गई थी घर में मैं इकलौती हूं और बचपन से ही मुझे हमेशा उन दोनों ने बहुत प्यार दिया है।

जब मम्मी और मैं डॉक्टर के पास गए तो वह मुझे कहने लगे कि तुम्हें बुखार है बुखार की वजह से यह सब हुआ होगा। उन्होंने मुझे आराम करने के लिए कहा और कुछ दवाइयां भी लिख कर दे दी मैं और मम्मी घर चले आए। मम्मी कहने लगी कि बेटा तुम दवाई ले लो मैंने दवाई ले ली थी और उसके बाद मैं सो गई दोपहर के वक्त मम्मी ने मुझे कहा कि अंजली बेटा कुछ खा लो। मैं मुंह हाथ धोकर डाइनिंग टेबल पर बैठी लेकिन मुझसे ज्यादा खाना तो नहीं खाया गया परन्तु मैंने थोड़ा बहुत खाना खाया और उसके बाद दवाई लेकर मैं दोबारा से लेट गई। मेरी तबीयत अब पहले से थोड़ा ठीक नजर आ रही थी मैंने मम्मी को कहा मम्मी अब मेरी तबीयत मुझे पहले से अच्छी लग रही है तो मम्मी कहने लगी कि चलो यह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी तबीयत पहले से ठीक है। मैं और मम्मी आपस में बात कर रहे थे तभी हमारे पड़ोस में रहने वाली मीनाक्षी दीदी घर आ गई जब मीनाक्षी दीदी घर पर आई तो वह मुझसे कहने लगी की अंजली आज तुम ऑफिस नहीं गई। मैंने दीदी को कहा नहीं दीदी आज मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए आज मैं घर पर ही थी और मम्मी मुझे डॉक्टर के पास ले गई आपको तो पता ही है कि मम्मी मेरी कितनी चिंता करती हैं।

मेरी मम्मी कहने लगी कि मीनाक्षी अब तुम मुझे एक बात बताओ अंजली अपना ध्यान ही नहीं रखती है तो क्या मुझे अंजली की चिंता नहीं होगी। मीनाक्षी दीदी मुझे कहने लगी अंजली, आंटी बिल्कुल सही कह रही हैं तुम अपना ध्यान भी तो नहीं रखती हो और तुम बहुत लापरवाह हो। दीदी भी मुझे ही कहने लगी तभी मम्मी ने मीनाक्षी दीदी से कहा मीनाक्षी मैंने सुना है कि तुम्हें लड़के वाले देखने के लिए आए थे। मीनाक्षी दीदी ने मम्मी को कहा आंटी लड़के वाले तो देखने के लिए आए थे लेकिन मुझे लड़का पसंद नहीं आया और उसके घर वाले भी मुझे पसंद नहीं आए। मम्मी ने मीनाक्षी दीदी से जब इसका कारण पूछा तो वह कहने लगी कि उनके परिवार वाले हमसे दहेज की मांग कर रहे थे इसलिए मैंने तो साफ तौर पर मना कर दिया। मैंने मीनाक्षी दीदी को कहा दीदी आपने बिल्कुल सही किया आपको ऐसा ही करना चाहिए था मेरी मम्मी भी कहने लगी कि बेटा आजकल लोग दहेज के पीछे कितने ज्यादा पागल हैं आज 21वीं सदी में भी दहेज का भूत लोगों के सर से उतरा नहीं है। मीनाक्षी दीदी कहने लगी कि आंटी मैं तो ऐसे लड़के से शादी करूंगी जो दहेज के बिलकुल खिलाफ हो, उसी के साथ मीनाक्षी दीदी ने यह भी कहा कि वैसे तो यह मुश्किल होने वाला है लेकिन इतना भी मुश्किल नहीं है कि कोई लड़का मुझसे शादी करेगी ही नहीं। मीनाक्षी दीदी का स्वभाव बहुत अच्छा है और वह काफी पढ़ी-लिखी भी है मीनाक्षी दीदी ने अपनी पीएचडी की पढ़ाई इसी वर्ष पूरी की है वह हमारे साथ काफी देर तक बैठी रही और उन्होंने जाते वक्त मुझे कहा कि अंजली तुम अपना ध्यान रखना। मैंने दीदी से कहा हां दीदी मैं अपना ध्यान रखूंगी अब मीनाक्षी दीदी भी जा चुकी थी और मम्मी ने मुझे कहा बेटा तुम कुछ देर आराम कर लो जैसे ही मैं लेटी तो मुझे बहुत गहरी नींद आ गई शायद दवाइयों का ही असर था कि मुझे इतनी गहरी नींद आ गई।

कुछ समय बाद मैं उठी तो मैंने मम्मी को कहा मम्मी अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं तो मम्मी मुझे कहने लगी कि बेटा फिर भी तुम आराम कर लो। मम्मी ने मुझे आराम करने के लिए कहा और मैं आराम कर रही थी कुछ दिनों बाद मैं ठीक होकर अपने ऑफिस जाने लगी। जब सुबह के वक्त मैं अपने ऑफिस जा रही थी तो मीनाक्षी दीदी मुझे मिली और वह मुझसे पूछने लगी कि अंजली तुम्हारी तबीयत कैसी है। मैंने मीनाक्षी दीदी को बताया कि दीदी मेरी तबीयत तो अच्छी है दीदी कहने लगी कि तुम काफी दिनों से मेरे साथ घर पर भी नहीं आई हो। मैंने दीदी को कहा दीदी आप तो जानती ही हैं ना कि समय कहां मिल पाता है अपनी नौकरी के चलते मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता। मीनाक्षी दीदी कहने लगी कि कोई बात नहीं जब तुम्हें समय मिलेगा तो तुम घर पर जरूर आना मैंने दीदी को कहा दीदी जरूर मैं आपसे मिलने के लिए घर पर आऊंगी। कुछ दिनों बाद मेरी ऑफिस की छुट्टी थी तो मैंने सोचा कि मीनाक्षी दीदी को उनके घर पर मिल आती हूं और मैं जब दीदी को मिलने के लिए उनके घर पर गई तो उस वक्त मैंने देखा एक लड़का और उसके माता-पिता मीनाक्षी दीदी को देखने के लिए आए हुए थे। मुझे यह सब कुछ ठीक नहीं लगा मैं जैसे ही दरवाजे से बाहर निकलकर जाने ही वाली थी तो मीनाक्षी दीदी ने मुझे आवाज देते हुए कहा अंजली तुम कहां जा रही थी।

मैंने झट से पीछे मुड़कर देखा तो पीछे मीनाक्षी दीदी ने मुझे कहा कि आओ तुम भी बैठो ना, मैं दीदी के साथ कमरे में बैठ गई। मैंने दीदी को कहा दीदी लड़का तो देखने में अच्छा है तो दीदी मुझे कहने लगी कि लड़का तो दिखने में अच्छा है लेकिन मैं चाहती हूं कि उससे मैं दहेज की बात पहले ही कर लूं ताकि आगे चलकर कोई परेशानी ना हो। मैंने दीदी को कहा हां दीदी आपको यह बात पहले ही कर लेनी चाहिए दीदी कहने लगी हां अंजली मैं भी यही चाहती हूं। दीदी ने मुझे रुकने के लिए कहा और मैं उनके घर पर ही रुक गई मैं दीदी के साथ ही बैठी हुई थी थोड़ी ही देर बाद दीदी पानी लेकर बाहर गई तो दीदी कुछ देर सोफे पर बैठ गयी और उन लोगों से बात कर रही थी। वह भी दीदी के बारे में पूछ रहे थे और दीदी बड़ी बेबाक तरीके से उनका जवाब दे रही थी। मैं यह सब कमरे से देख रही थी लेकिन मुझे नहीं पता था कि दीदी को लड़का पसंद आ जाएगा और उन दोनों की सगाई तय हो जाएगी। मैंने दीदी से कहा कि दीदी अब मैं घर चलती हूं तो दीदी कहने लगी कि अंजली मैं शाम के वक्त तुमसे मिलने के लिए आउंगी तो मैंने दीदी को कहा ठीक है दीदी आप जब आएंगे तो मुझे बता दीजिएगा। मैं अब घर चली आई। मैं अपने घर पर चली आई थी और जब मैं घर पर लौटी मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था कि जब मीनाक्षी दीदी की शादी हो जाएगी तो उसके बाद वह कैसे अपने ससुराल में मैनेज कर पाएंगे। कुछ दिनों बाद मीनाक्षी दीदी मुझे मिली और उन्होंने अपने और अपने होने वाले पति के बीच में हुए चुंबन के किस्से को मुझे सुनाया तो मेरे अंदर भी अब सेक्स को लेकर रुचि जागने लगी थी और उसी के चलते हमारे पड़ोस में रहने वाला एक लड़का जो अक्सर मुझे बहुत देखा करता था उसे मैंने घर पर बुलाया।

जब वह घर पर आया तो मैं खुश हो गई उसने मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट करने के बारे में सोच लिया था, मेरे बदन को जब उसने अपने हाथों से सहलाना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा। काफी देर तक वह मेरे बदन के अंगों को सहलाता रहा लेकिन जब उसने अपने लंड को बाहर निकाल कर मेरे मुंह के अंदर डाला तो मैंने उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। उसका मोटे लंड को मैं जिस प्रकार से चूस रही थी मुझे अच्छा लग रहा था और मेरे अंदर एक अलग ही उत्तेजना जाग रही थी। मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी मै लगातार उसके लंड को चूस रही थी उसने मुझे कहा कि मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है यह कहते ही जब मैंने अपनी चूत को उसके सामने किया तो उसने भी मेरी चिकनी चूत को अपने मुंह में लेकर चाटना शुरू किया।

वह मेरी चूत को चाट रहा था उसे बड़ा ही मजा आ रहा था और मुझे भी आनंद आता वह बहुत देर तक ऐसा ही करता रहा मेरी योनि से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। उसने जब मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्ला उठी पहली बार किसी का लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ था मैं बहुत तेजी से चिल्ला रही थी लेकिन मैं उसका पूरा साथ दे रही थी और वह मुझे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था। जिस प्रकार से उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा तो मेरी चूत और भी ज्यादा टाइट हो गई उसने मुझे अपनी पूरी ताकत से चोदना शुरू किया मेरी योनि से खून बहुत तेजी से बाहर निकलने लगा। जिस प्रकार से मेरी चूत से खून बाहर निकल रहा था उस से मै बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी और काफी देर तक उसने मेरे साथ ऐसा नहीं किया। हम दोनों पूरी तरीके से चरम सीमा पर पहुंच चुके थे अब ना तो मैं अपने आपको रोक पाई और ना ही वह अपने आपको रोक पाया उसने जब अपने लंड को मेरी योनि से बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया और बहुत देर तक मैंने उसके लंड का रसपान किया उसके लंड से पानी बाहर निकलने लगा तो मैंने उसके वीर्य को अपने अंदर ही समा लिया मुझे बहुत अच्छा लगा जब मैने उसके वीर्य को अंदर लिया।


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