चुदकर पति की याद आई


Antarvasna, kamukta: शादी के बाद घर को मैं ही अच्छे से सम्भाल रही थी घर की बड़ी बहू होने के नाते मेरा यह फर्ज था कि मैं अपने घर को अच्छे से संभालू। मेरी शादी को चार वर्ष हो चुके है इन चार वर्षों में मैंने अपने घर वालो को कभी कोई परेशानी नही आने दी और ना ही कभी उन्हें मुझसे कोई तखलिफ़ हुई। मेरा नाम अभिलाषा है और मेरी एक बेटी है जिसे की घर मे सब लोग बहुत प्यार देते है। मेरे पति सुबह अपने ऑफिस चले जाते है और शाम को ही उनका लौटना होता है मेरे पति का नाम दीपक है दीपक अपने घर के प्रति बहुत ही जागरूक है। दीपक का एक छोटा भाई है जो कि एक कम्पनी में जॉब करता है उसके लिए भी घर वाले अब लड़की देखना कहते थे घर वाले जल्द ही उसकी शादी करवाना चाहते है उसका नाम नीरज है। हम लोग झारखंड के रहने वाले है लेकिन हम रहते दिल्ली में है दिल्ली में हम काफी वर्षो से रह रहे है मेरा घर भी यहीं दिल्ली में है। मेरे सास ससुर भी अभी कुछ समय से हमारे साथ ही रह रहे है इससे पहले वह झारखंड में ही रहते थे। मेरी शादी के कुछ समय बाद ही वह लोग दिल्ली रहने आये मेरी और दीपक की शादी दिल्ली से ही हुई थी मैं अपनी शादी शुदा जीवन से बहुत खुश हूं।

मेरी और दीपक की लव मैरिज है दीपक मुझे एक शादी के दौरान मिले थे वहीं से हमारी प्रेम कहानी शुरू हुई थी दीपक ने ही मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया था। जब दीपक मुझे शादी के दौरान मिले थे तभी से मुझे दीपक पसन्द आने लगे दीपक ने ही मुझसे बात करने की शुरुआत की थी तब से हमारी मुलाकाल बढ़ती चली गयी। उसके बाद से हम दोनों मिलने लगे थे और फोन पर भी हमारी बातें होने लगी थी। मैंने जब दीपक को अपने मम्मी पापा से मिलवाया तो उन्हें दीपक में कोई कमी नजर नही आई उन्हें तुरन्त ही दीपक से मेरे रिश्ते के लिए हां कर दी थी। दीपक ने भी अपने घर पर बात कर ली थी किसी को भी हमारी शादी से कोई आपत्ति नही थी सब लोग बहुत खुश थे। सगाई हो जाने के कुछ समय बाद ही हम दोनों की शादी हो गयी मैंने ही दीपक से कहा था कि हम लोग शादी दिल्ली से ही करेंगे इससे दीपक और उसके घर वालो को कोई भी ऐतराज नही था वह लोग भी मान चुके थे।

शादी के बाद मैं दीपक के साथ एक दो बार झारखंड भी गयी थी कुछ दिन हम लोग वहीं रुके और फिर थोड़े समय बाद वापस दिल्ली लौट आये थे। अब सब लोग नीरज के लिए भी लड़की देखने लगे थे जब घर वालो ने नीरज के लिए लड़की देखी तो नीरज को भी लड़की काफी पसंद आई उसके बाद सब लोग सगाई की तैयारी करने लगे। सगाई दिल्ली से ही होने वाली थी क्योंकि सब लोग दिल्ली में ही रह रहे थे। उसका नाम कोमल है कोमल झारखंड की ही रहने वाली है। कोमल और नीरज की सगाई हमने बड़े अच्छे से करवाई घर वाले चाहते थे कि उनकी शादी भी जल्दी हो जाये इसलिए उन्होंने शादी का दिन भी तय कर दिया था। नीरज और कोमल का मिलना बहुत ही कम होता था क्योंकि नीरज दिल्ली में जॉब करता था और कोमल झारखंड में रहती थी। धीरे धीरे समय बीतता गया और कुछ ही समय बाद नीरज की शादी का दिन भी नजदीक आ गया। नीरज की शादी के लिए हम लोग शॉपिंग करने लगे थे और उसके कुछ दिन बाद हम लोग घर चले गए घर पर हम लोग शादी की तैयारी करने लगे। शादी का सारा अरेंजमेंट दीपक ने ही करवाया था दीपक घर मे बड़े थे इसलिए उन्ही पर शादी का सारा जिम्मा था। शादी के दिन कोमल बहुत ही सुंदर लग रही थी शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी नही थी सब कुछ बहुत अच्छे तरीके से हुआ। शादी हो जाने के कुछ दिन बाद हम लोग दिल्ली आ गए थे दिल्ली आने के बाद ही कोमल और नीरज घूमने के लिए गए। नीरज और कोमल घूमने के लिए नैनीताल गए वहां उन्होंने खूब एन्जॉय किया वह लोग वहां करीब एक हफ्ते तक रुके उसके बाद वह दिल्ली वापस लौट आये थे। हम लोग सब साथ मे ही रह रहे थे मेरी और कोमल की भी अच्छी बनती थी, कोमल जॉब करना चाहती थी। जब उसने यह बात नीरज से कही तो नीरज ने इस बात से इंकार कर दिया लेकिन कोमल के काफी कहने पर नीरज ने कोमल की जॉब के लिए हामी भर दी और फिर वह जॉब की तलाश करने लगी। नीरज ने ही अपने किसी परिचित से कहकर कोमल की जॉब लगवाई थी कोमल अब जॉब करने लगी थी।

सब लोग सुबह अपने अपने काम पर चले जाते थे बस मैं ही घर अकेले अपनी बेटी के साथ रहती थी। मेरा समय तो मेरी बेटी के साथ ही कट जाया करता था मेरे सास ससुर भी कभी कबार घर चले जाते थे। वह हमारे साथ अब कम ही रहा करते थे उन्हें झारखंड में ही ज्यादा अच्छा लगता था। मैं ज्यादातर घर पर ही रहती थी इस वजह से मेरी सहेली कभी-कभार मुझसे मिलने के लिए आ जाया करती थी वह हमारे पड़ोस में रहती है। एक दिन वह मुझसे मिलने के लिए आई और कहने लगी तुम हमारे घर पर आती ही नहीं हो मैंने उसे कहा मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है इसलिए मैं तुमसे मिलने के लिए नहीं आ पाती। हम लोग उस दिन काफी देर तक साथ में रहे और फिर शाम के वक्त मेरे पति जल्दी घर आ गए थे। जब वह घर आए तो उसके बाद मैं और वह देर रात तक बात करते रहे। अगले दिन उन्हें अपने काम के सिलसिले में जाना था तो वह चले गए हर रोज की तरह मैं घर पर ही थी। मैं कफी अकेला महसूस कर रही थी उस दिन मैंने फेसबुक पर अपने कुछ दोस्तों से फेसबुक चैट के माध्यम से बात की काफी दिनों से उनसे मैं बात करने की सोच रही थी लेकिन मेरी बात हो नहीं पाई थी। मै उनसे बात कर रही थी उस दिन मैंने एक लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली उसका नाम रोहन है।

रोहन से मैं अब बातें करने लगी थी हम दोनों की बातें काफी बढ़ने लगी थी जिससे कि हम दोनों एक दूसरे से मिलना चाहते थे मैंने उसे अपनी शादी के बारे में बता दिया था उसे कोई भी दिक्कत नहीं थी। वह हमेशा ही मुझे कहता मुझे आपकी शादी से कोई परेशानी नहीं है मुझे नहीं पता था कि रोहन और मेरे बीच प्यार हो जाएगा। मै रोहन को पसंद करने लगी थी हालांकि मैं अपने पति को भी धोखे में नहीं रखना चाहती थी मुझे इस बात का अच्छे से पता था कि हम दोनों के रिश्ते की कोई भी नीव नहीं है। मैंने रोहन से कुछ दिनों तक बात नहीं की थी रोहन मुझसे बात करने लगा था एक दिन हम दोनों ने मिलने का फैसला किया यह पहला मौका था जब हम दोनों मुलाकात कर रहे थे। इससे पहले हम लोगों ने सिर्फ फोन पर ही बात की थी मैं जब पहली बार रोहन को मिली तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा। मै रोहन से मिलकर बहुत खुश थी हम दोनों की पहली ही मुलाकात बड़ी अच्छी रही उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को मिलने लगे। एक दिन रोहन ने मुझे कहा मैं आपसे मिलने के लिए आपके घर पर आना चाहता हूं उस दिन मैंने उसे अपने घर पर बुला लिया। रोहन मुझसे मिलने के लिए घर पर आया जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो रोहन ने मेरे होठों को चूम लिया काफी दिनों से मैं तड़प रही थी जब रोहन ने ऐसा किया तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाई मैंने अपने आपको रोहन को सौंप दिया था। मैं बड़ी खुश थी और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था अब हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे। रोहन ने मेरे बदन से मेरे कपड़ों को उतारना शुरू किया रोहन ने मेरे बदन से कपड़ा उतार दिए मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही रोहन अपने आपको रोक पा रहा था। रोहन ने मुझे कहा कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं मैंने भी रोहन के सामने अपने पैरों को खोल दिया। जब मैंने रोहन के सामने अपने पैरों को खोला तो वह मेरी तरफ देखने लगा और मुझसे कहने लगा कि मैं आपकी चूत मारना चाहता हूं।

रोहन मेरी योनि को काफी देर तक चाटता रहा और जब वह ऐसा कर रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उसने मेरी चूत से पानी बाहर निकाल कर रख दिया था। मेरी चूत को गरम करने के बाद रोहन ने मेरे स्तनो को बहुत देर तक चूसा उस से मेरे निप्पल खड़े होने लगे थे  मेरे अंदर की आग बढने लगी थी हम दोनों बहुत ज्यादा गरम हो चुके थे। मैंने रोहन से कहा तुम मेरी चूत मारो रोहन ने मेरी चूत पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ डाला तो मै बहुत जोर से चिल्लाई।

वह अब मेरे पैरों को खोलने लगा मुझे दर्द हो रहा था लेकिन रोहन ने मुझे तेज गति से चोदना शुरु कर दिया मेरे अंदर की आग अधिक होने लगी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे ना तो रोहन रह पा रहा था और ना ही मै रह पा रही थी। जिस गति से वह मुझको चोद रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था उससे मै बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरे अंदर बहुत ज्यादा गर्मी पैदा हो रही थी हम दोनों के लंड और चूत के रगडन से अलग ही गर्मी पैदा हो रही थी। हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे मुझे लगने लगा था मै झड जाउंगी मैंने अपने स्तनों को दबाना शुरु किया। वह कहने लगा आज तुमने मेरे अंदर की गर्मी को बढा दिया। उसने मेरी चूत मे माल गिराया और रोहन खुश हो गया था लेकिन उसके बाद मुझे ठीक नही लगा मैने रोहन से मिलना ठीक नही समझा। मै अपने पति के साथ खुश हूं।


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