चुदाई पलंगतोड कर डाली


Antarvasna, hindi sex kahani: भैया और भाभी के रिश्ते बिल्कुल भी ठीक नहीं थे जिस वजह से घर में आए दिन झगड़े होते थे भाभी चाहती थी कि वह भैया से अलग हो जाएं और भैया ने भी भाभी को डिवोर्स देने का फैसला कर लिया था। भैया ने भाभी को डिवोर्स दे दिया था और वह लोग एक दूसरे से अलग हो चुके थे। भाभी घर से तो जा चुकी थी लेकिन भैया के जीवन में उसके बाद काफी ज्यादा परेशानियों ने कब्जा कर लिया था। भैया मानसिक रूप से भी बहुत ज्यादा परेशान होने लगे थे और उनकी जॉब भी छूट चुकी थी। उनकी जॉब छूट जाने के बाद वह शराब के आदी हो चुके थे और वह बहुत ही ज्यादा शराब पीने लगे थे जिससे कि घर का माहौल भी अब खराब होने लगा था। भैया को कई बार पापा ने इस बारे में समझाया लेकिन भैया पर कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। मुझे भी कई बार इस बात को लेकर बहुत ही बुरा लगता और मैं भैया को हमेशा ही कहता कि भैया आप शराब छोड़ दे लेकिन भैया को शराब की लत ने जकड़ लिया था और अब वह शराब नहीं छोड़ पा रहे थे। घर का माहौल काफी खराब हो चुका था मैं नहीं चाहता था कि अब मैं घर पर रहूं इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना मैं किसी दूसरे शहर में अपनी नौकरी के लिए अप्लाई करूं। मैं अंबाला का रहने वाला हूं और मैं अब जयपुर चला गया जयपुर में मेरी नौकरी लग चुकी थी।

जब मैं जयपुर गया तो मैं जयपुर में जॉब करने लगा वहां पर मुझे दो महीने हो चुके थे और इन दो महीनों में मेरी काफी अच्छी दोस्त हो चुकी थी। मेरी दोस्ती काफी लोगों से होने लगी थी जो कि मेरी काफी मदद भी किया करते थे। हमारे पड़ोस में ही मेरा दोस्त संतोष रहा करता है संतोष के साथ मेरी काफी अच्छी दोस्ती है और संतोष हमेशा ही मेरी मदद करता। एक दिन मैं और संतोष कॉलोनी के गेट पर खड़े थे जब हम लोग वहां पर खड़े थे तो मैंने एक लड़की को वहां से आते हुए देखा, मैंने संतोष से जब इस बारे में पूछा तो संतोष ने मुझे बताया कि उसका नाम सुनीता है। सुनीता संतोष के बिल्कुल पड़ोस वाले घर में रहती है और मैं चाहता था कि संतोष मेरी सुनीता से बात करवाएं। संतोष ने मेरी सुनीता से बात करवा दी थी उसके बाद मेरी बात सुनीता से होने लगी थी और मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा खुश था कि मेरी बात संतोष ने सुनीता से करवाई। सुनीता और मैं एक दूसरे के काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे इसलिए सुनीता को जब भी मेरी जरूरत होती या उसे कोई भी काम होता तो वह मुझसे कह दिया करती। हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से टाइम स्पेंड करने लगे थे और हम दोनों एक दूसरे को प्यार भी करने लगे। मैंने ही सुनीता के सामने अपनी प्यार की पहल की और सुनीता को मैंने अपने दिल की बात कह दी। मैंने सुनीता को अपने दिल की बात कह दी थी जिसके बाद मैं और सुनीता एक दूसरे के बहुत ज्यादा करीब आ चुके थे और हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस प्रकार से हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताया करते। अब समय बीतता जा रहा था सुनीता के परिवार वालों को भी इस बारे में पता चल चुका था तो सुनीता चाहती थी कि मैं उसके परिवार वालों से मिलूं। मैं जब सुनीता की फैमिली से मिला तो मुझे उन लोगों से मिलकर अच्छा लगा सुनीता की फैमिली भी मेरे परिवार से मिलना चाहती थी।

वह लोग जब मेरी फैमिली से मिले तो उस दिन भैया शराब के नशे में थे और यह बात उन लोगों को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी और भैया की वजह से सुनीता से मेरा रिश्ता हो नहीं पाया। सुनीता की फैमिली उसे मुझसे दूर रखने की कोशिश करती लेकिन हम दोनों एक दूसरे से चोरी छुपे मिला करते थे। भैया की वजह से यह सब हुआ था और मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा जिस प्रकार से भैया का व्यवहार बदलता जा रहा था। मैंने घर आना पूरी तरीके से छोड़ दिया था। सुनीता मेरा हमेशा ही साथ दिया करती सुनीता और मेरे रिश्ते को सब लोगों की रजामंदी मिल चुकी थी लेकिन भैया की वजह से यह सब हुआ। सुनीता मुझे हमेशा ही समझाती कि देखो ललित मैं तुम्हारे साथ हमेशा ही हूं और जब भी तुम्हें मेरी जरूरत होगी तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ी रहूंगी। मुझे जब भी सुनीता की जरूरत होती तो सुनीता हमेशा ही मेरे साथ होती और मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी कि सुनीता मेरे साथ हमेशा ही खड़ी है और वह मेरा साथ हमेशा देती। शराब की वजह से भैया की तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहने लगी थी और भैया को डॉक्टरों ने शराब पीने से दूर रहने के लिए कह दिया था लेकिन उसके बावजूद भी भैया की आदत नही सुधरी और उनकी तबीयत खराब होने लगी थी। धीरे धीरे भैया भी सुधरने लगे और उन्होंने शराब पीनी बंद कर दी सब कुछ ठीक होने लगा था मैं इस बात से काफी खुश होने लगा था। सुनीता को मैंने जब इस बारे में बताया तो सुनीता मुझे कहने लगी कि ललित यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि तुम्हारे भैया ने अब शराब छोड़ दी है मुझे लगता है कि अब पापा और मम्मी से मुझे बात करनी चाहिए।

सुनीता ने मेरा हमेशा ही साथ दिया और उसने अपनी फैमिली से दोबारा मेरे और अपने रिश्ते की बात की हालांकि वह लोग तैयार नहीं थे लेकिन सुनीता ने किसी प्रकार से उन लोगों को मना लिया और उसके बाद वह लोग अब हम दोनों की बात को मान चुके थे। हम दोनों का रिश्ता अब किसी प्रकार से उन लोगों ने स्वीकार कर लिया था उसके बाद सुनीता और मेरी इंगेजमेंट हो गयी। हम दोनों की इंगेजमेंट हो जाने के बाद मैं बहुत ही ज्यादा खुश था कि सुनीता के साथ मेरी अब इंगेजमेंट हो चुकी है। मेरी जिंदगी में सुनीता का बहुत ही अहम योगदान रहा। सुनीता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश भी थे। मेरे और सुनीता के बीच कभी भी शारीरिक संबंध बने नहीं थे लेकिन हम दोनों की इस बारे मे बात होने लगी थी। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से गरमा गरमा बाते फोन पर करने लगे थे। मुझे सुनीता के साथ सेक्स करना था वह मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार थी। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब भी सुनीता मेरे साथ होती। एक दिन सुनीता मेरे साथ बैठी हुई थी उस दिन मैंने सुनीता के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था। उसके होठों को मैं चूमने लगा था। सुनीता की गर्मी बढ़ती जा रही थी मैंने उसकी जांघों को सहलाना शुरू किया। जिस तरह मै उसकी जांघों को सहला रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है हम दोनों ही बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगे थे। हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी। अब मेरे अंदर की गर्मी इतनी अधिक हो चुकी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था वह भी बिल्कुल रह नहीं पा रही थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो सुनीता ने उसे देखते हुए अपने हाथों में ले लिया और कहने लगी मुझे मजा आ रहा है।

सुनीता मेरे मोटे लंड को हिलाए जा रही थी वह जिस तरीके से अपने लंड को हिलाती उस से मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और सुनीता को भी काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे के प्रति पूरी तरीके से आकर्षित हो चुके थे। सुनीता ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी। वह जिस तरीके से मेरे लंड को चूस रही थी उससे मुझे मजा आने लगा था और उसे भी बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगा था। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ अच्छे से सेक्स करना चाहते थे मैंने सुनीता के बदन को पूरी तरीके से महसूस किया और उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मुझे सुनीता की योनि को चाटने में मजा आ रहा था और उसे भी बड़ा मजा आ रहा था जब मैं उसकी चूत का रसपान कर रहा था। वह मुझे कहने लगी तुमने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है। मैंने सुनीता की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा कर रख दिया था और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी अब इतना ज्यादा बढ़ चुका था मैंने उसकी योनि में लंड को घुसा दिया। मैंने अपने लंड को उसकी चूत में घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्ला रही थी। सुनीता की चूत से बहुत ज्यादा गर्मी बाहर निकलने लगी थी और उसकी चूत से बहुत ही ज्यादा खून भी निकलने लगा था। वह मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में कसकर जकडने की कोशिश करने लगी। वहां ऐसा कर रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था और सुनीता को भी बड़ा मजा आता जब मैं उसे धक्के देता। सुनीता मुझे कहती मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जिस तरीके से तुम मुझे धक्के मार रहे हो। सुनीता और मैं एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा पागल हो चुके थे। अब मैंने उसकी चूत में अपने माल को गिरा दिया था मेरा माल सुनीता की चूत मे समा चुका था।

उसके बाद मैंने और सुनीता ने एक दूसरे के साथ दोबारा से सेक्स करना शुरू कर दिया। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था। जब मैं उसे चोद रहा था उसकी योनि से खून बाहर निकल रहा था मुझे मज़ा आ रहा था। मुझे उसे चोदने में बड़ा ही आनंद आता उसको भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी देर तक सेक्स किया मुझे बड़ा मजा आया जब हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को पूरी तरीके से शांत कर दिया था। हम दोनों एक दूसरे के साथ नंगे लेटे हुए थे सुनीता मुझे कहने लगी मेरी चूत से खून निकल रहा है। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं थोड़ी देर बाद तुम्हारी योनि का खून बंद हो जाएगा। वह मेरे लंड को अपने हाथों में लिए हुए थी और हिला रही थी मुझे अच्छा लग रहा था जब वह ऐसा कर रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स के मजे लिए। मेरे और सुनीता की इच्छा पूरी हो चुकी थी हम दोनों ने एक दूसरे को संतुष्ट कर दिया था।


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