चोदने में कामयाब रहा


Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपने कमरे में बैठी हुई थी मां मुझे आवाज लगाने लगी और कहने लगी कि आरोही बेटा तुम कहां हो मैंने मां से कहा मां मैं अंदर रूम में ही हूं। मां आवाज देते हुए कहने लगी बेटा जरा बाहर आना, उस वक्त पापा भी ऑफिस नहीं गए थे और मैं जब बाहर बैठक में गई तो मां ने मुझे कहा आरोही बेटा तुम क्या पढ़ाई कर रही थी। मैंने मां से कहा मां मैं पढ़ाई कर रही थी मां मुझे कहने लगी कि बेटा मुझे तुमसे एक काम था मैंने मां से कहा हां मां कहिए ना क्या काम था तो मां मुझे कहने लगी कि तुम वसुधा आंटी को तो जानती हो ना। मैंने मां से कहा हां मां मैं वसुधा आंटी को जानती हूं उनसे आपने ही तो मुझे एक दो बार मिलवाया था मां मुझे कहने लगी बेटा तुमसे मुझे एक काम था तुम क्या कुछ दिनों के लिए वसुधा के साथ चली जाओगी।

मैंने मां से कहा लेकिन मां मैं उनके घर पर क्या करूंगी तो मां मुझे कहने लगी की उनके लड़के की विलायत में एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग गई है तो वह वहीं अपनी पत्नी के साथ रहने लगा है और वसुधा घर पर अकेली है। वसुधा आंटी मम्मी की बचपन की सहेली है और मम्मी के कहने पर मैं भी उनकी बात को टाल ना सकी और मैं मम्मी की बात मान गई। मैंने मम्मी से कहा लेकिन मम्मी मुझे वहां कब जाना है तो मम्मी कहने लगी कि बेटा तुम्हें वहां कल जाना है मैंने मां से कहा ठीक है मां मैं कल चली जाऊंगी। मैं बैठक से उठकर अपने रूम में पढ़ाई करने के लिए चली गई मैं अपनी मेज में लगी घड़ी को बार-बार देख रही थी मेरा ध्यान पता नहीं कहां चला गया। जब मां मेरे कमरे में आई तो वह कहने लगी कि बेटा तुम नाश्ता करने के लिए आ जाओ, उस वक्त 9:00 बज रहे थे मैं नाश्ता करने के लिए चली गई और हम सब लोग साथ में ही बैठे हुए थे। जब हम लोग नाश्ता कर रहे थे उस वक्त मैंने मां से कहा कि मां मैं अभी अपनी सहेली गुनगुन के घर जा रही हूं मां कहने लगी ठीक है लेकिन तुम वहां से कब तक लौटोगी।

मैंने मां से कहा मां मुझे आने में थोड़ा समय लग जाएगा मुझे उससे कुछ जरूरी नोट्स लेने हैं तो मां कहने लगी ठीक है बेटा उसके बाद मैं अपनी सहेली गुनगुन के घर चली गई। जब मैं गुनगुन के घर गई तो वह भी पढ़ाई कर रही थी मैंने गुनगुन से पूछा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है तो वह कहने लगी कि पढ़ाई तो अच्छी चल रही है लेकिन तुम बताओ तुम्हें क्या कोई काम था। मैंने गुनगुन से कहा हां गुनगुन मुझे काम था गुनगुन कहने लगी कि क्या काम था। मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ नोट्स चाहिए थे क्या तुम्हारे पास होंगे तो वह कहने लगी हां मेरे पास तो पूरे नोट्स है मैंने कल ही आकाश से सारे नोट्स ले लिए थे। गुनगुन और मैं साथ में बैठे हुए थे और हम लोग आपस में बात कर रहे थे तभी वह मुझे कहने लगी कि क्या तुम कॉलेज के फंक्शन में आ रही हो। मैंने गुनगुन से कहा देखती हूं क्योंकि कल मैं मम्मी की सहेली वसुधा आंटी के घर जा रही हूं और वहां जाकर ही पता चलेगा कि कितने दिन मुझे वहां रहना है क्योंकि मम्मी कह रही थी कि वसुधा आंटी की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मुझे उनके साथ कुछ दिनों के लिए उनके घर पर रहने के लिए जाना है। गुनगुन मुझे कहने लगी कि कोई बात नहीं मुझे फोन कर देना यदि तुम कॉलेज के फंक्शन में आओगी तो मैं भी जाऊंगी नहीं तो तुम्हारे बिना मैं नहीं जाऊंगी। गुनगुन मेरी बहुत अच्छी सहेली है और हम दोनों जहां भी जाते हैं तो साथ में ही जाते हैं गुनगुन और मैं अब अपनी पढ़ाई को लेकर कुछ बातें कर रहे थे तब तक गुनगुन की मां भी आ गई और वह कहने लगी कि बेटा आरोही तुम्हारे घर पर सब कुछ ठीक तो है ना। मैंने आंटी से कहा आंटी जी घर पर तो सब कुछ ठीक है आप ऐसा क्यों पूछ रही है वह मुझे कहने लगे कि बस ऐसे ही सोचा तुम से पूछ लूँ। मैं गुनगुन के घर से अब अपने घर लौट चुकी थी और अगले दिन मैं वसुधा आंटी के घर चली गई जब मैं वसुधा आंटी के घर गई तो उन्होंने मुझे कहा कि बेटा इसे अपना ही घर समझना और मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है। मैंने आंटी से कहा नहीं आंटी मैं शरमाउंगी नहीं बस मुझे आप एक रूम दे दीजिए जहां बैठकर मैं अपनी पढ़ाई कर सकूं तो आंटी कहने लगी हां ठीक है बेटा मैं तुम्हें तुम्हारा रूम दिखा देती हूं।

आंटी ने मुझे रूम दिखाया और कहा कि बेटा तुम यहीं पर अपना काम और अपनी पढ़ाई करते रहना मैंने आंटी से कहा ठीक है आंटी मैं यहां पर अपनी पढ़ाई कर लूंगी। आंटी अपने रूम में जा चुके थे और मैं पढ़ने लगी थी तभी आंटी बहुत जोर जोर से खांसने लगी तो मैं दौड़ती हुई उनके पास गई और उन्हें मैंने पानी दिया वह कहने लगी बेटा कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही तबीयत खराब लग रही है। मैंने आंटी से कहा आप दवाई ले लीजिए तो वह कहने लगी कि हां मैंने दवाई तो ली थी लेकिन उससे फिलहाल तो कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं आंटी के साथ ही बैठ गई और कुछ देर उनके साथ ही बात करने लगी आंटी मुझसे पूछने लगी कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है। मैंने उन्हें बताया कि मेरी पढ़ाई तो अच्छी चल रही है बस कुछ दिनों बाद एग्जाम होने वाले हैं। आंटी कहने लगी हां तुम्हारी मम्मी हमेशा ही तुम्हारी बड़ी तारीफ करती है और कहती है कि वह पढ़ने में बहुत अच्छी है मैंने आंटी से कहा आंटी पढ़ने में तो मैं ठीक हूं। हम लोग आपस में बात कर रहे थे तभी दरवाजे की डोर बेल बजी और मैं दरवाजा खोलने के लिए गई तो सामने एक व्यक्ति खड़े थे उन्होंने मुझसे कहा कि वसुधा जी घर पर हैं।

मैंने उन्हें कहा हां वह घर पर ही है, आंटी ने उन्हें अंदर आने के लिए कह दिया वह आंटी की कोई परिचित थे। वह सोफे पर बैठे हुए थे वह आंटी से पूछने लगे कि यह लड़की कौन है तो आंटी की जवाब देते हुए कहा कि यह मेरी सहेली की बेटी है और कुछ दिनों के लिए यहां रहने के लिए आई हैं। आंटी ने अपने बारे में बताया कि उनकी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं है इसलिए उन्होंने मुझे यहां बुला लिया है। वह व्यक्ति दो तीन घंटे तक घर में रहे और उसके बाद वह चले गए अब वह जा चुके थे। मैं रूम में चली गई रूम के अंदर खिडकी थी वहां से बाहर साफ दिखाई देता था वहां से बाहर एक नौजवान लड़का लड़की के होठों को चूम रहा था। मैं यह सब देखे जा रही थी लेकिन कुछ दिन बाद वह लड़का मुझे दिखाई दिया तो वह मुझ पर डोरे डालने लगा था मुझे वसुधा आंटी के घर पर रहते हुए काफी समय हो गया था। जब मुझे अंकित के बारे में पता चला तो वह मेरे पीछे मौका ताड़ कर आने लगा लेकिन मैं उसे बिल्कुल भी भाव नहीं दिया करती थी एक दिन मैंने उसे कहा तुम मेरा पीछा क्यों करते हो? वह कहने लगा जब तक तुम यहां रहोगी तब तक मैं तुम्हारा पीछा करता रहूंगा। उसके कुछ दिनों के बाद वह वसुधा आंटी के घर पर आ गया जब वह आंटी के घर पर आया तो वह मुझसे भी बात कर रहा था हालांकि मैं उससे बचने की कोशिश में थी लेकिन अंकित मुझसे बात कर रहा था तो मुझे भी उससे बात करनी पड़ रही थी। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच बातें होने लगी और अंकित मुझसे मिलने के लिए आंटी के घर पर आता था। एक दिन अंकित ने मेरा हाथ पकड़ते हुए अपनी और खींचा और मुझे अपनी बाहों में लिया तो मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी थी और मुझे भी लगने लगा मैं शायद अपने आपको नहीं रोक पाऊंगी।

उस दिन तो मैं उसकी बाहों से छूट कर चली गई लेकिन उसके बाद जब अंकित ने मौका देखकर आंटी के घर पर आने की सोची तो वह अपने मकसद में कामयाब रहा वसुधा आंटी डॉक्टर के पास गई हुई थी और घर पर कोई भी नहीं था। अंकित को बड़ा ही अच्छा मौका मिल चुका था अंकित जब मुझे अपनी बाहों में लेने लगा तो मुझे भी अच्छा लग रहा था और अंकित को भी बढ़ा अच्छा लग रहा था वह मेरे होठों को चूमने लगा वह मेरे होठों को चूमता रहा। जब  अंकित ने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे अंदर बाहर करने लगी। मुझे अच्छा लग रहा था और काफी देर तक मैं ऐसा करती रही अंकित के अंदर अब गर्मी बढ़ने लगी थी और वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगा था। अंकित ने मेरी बदन से कपड़े उतार दिए और मेरी योनि को बहुत देर तक चाटा जिस प्रकार से वह मेरी चूत को सहला रहा था उससे मै बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। वह मेरी योनि के अंदर अपनी जीभ को घुसाता तो उस से मेरी चूत  अंदर तक गिली हो गई मुझे बहुत अच्छा लगा।

अंकित ने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाल दिया और उसका मोटा लंड मेरी योनि के अंदर जाते ही मैं चिल्लाने लगी और मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी। अंकित ने मेरे दोनों पैरों को खोला और वह बड़ी तेज गति से मुझे धक्के दे रहा था अंकित ने जिस प्रकार से मुझे धक्के दिए। उससे मैं पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी अंकित अपने धक्को में तेजी लाने लगा था काफी देर तक उसने मुझे अपने नीचे लेटा कर चोदा। जब उसने मेरी चूतडो को पकडकर अपने लंड को लगाया तो मैंने अंकित से कहा कि तुम  मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया। अंकित ने अपने मोटे लंड को मेरी चूत में घुसाया वह मुझे तेजी से पेलने लगा उसकी गति अब और भी  बढने लगी थी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था काफी देर तक उसने मेरी चूत को ऐसे ही पेला। जब मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही खून बाहर निकलने लगा तो अंकित का लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था। अंकित ने जब अपने वीर्य को मेरी योनि में गिराया तो मैं खुश हो गई और फिर वह घर से चला गया।


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