चोदकर बुखार हवा हो गया


Antarvasna, kamkta: अपने दोस्त की शादी में मैं अहमदाबाद गया जब मैं शादी में अहमदाबाद गया तो वहां पर मैं मनीषा से मिला। मनीषा से मेरी मुलाकात मेरे दोस्त ने हीं करवाई, वह मेरे दोस्त के किसी परिचित की बेटी थी। मनीषा के साथ बातें कर के मुझे अच्छा लगता है जब मैं वापस मुंबई लौट आया तो उसके बाद भी मनीषा और मैं एक दूसरे से बातें करते रहे। मैंने मनीषा का फोन नंबर ले लिया था मनीषा अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है और यह उसके कॉलेज का आखिरी वर्ष था। मनीषा का हाल चाल मैं फोन पर पूछ लिया करता था मुझे मनीषा से बातें करना अच्छा लगता और उसको भी मुझसे बातें करना अच्छा लगने लगा था। एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन मुझे मनीषा का फोन आया तो मैं मनीषा से बातें करने लगा, मनीषा ने मुझे कहा कि रोहित मैं मुंबई आना चाहती हूँ। मैंने मनीषा को कहा कि तुम मुंबई में आकर क्या करना चाहती हो तो मनीषा ने मुझे कहा कि मैं जॉब करना चाहती हूं। मैंने मनीषा को कहा कि तुम मुझे अपना रिज्यूम मेल कर देना मैं कहीं ना कहीं तुम्हारे लिए जॉब देख लूंगा, मनीषा कहने लगी कि ठीक है आज शाम को ही मैं तुम्हें अपना रिज्यूम भेज देती हूं।

उस दिन मनीषा से मेरी काफी देर तक फोन पर बातें हुई हम लोगों ने करीब एक दूसरे से एक घंटे तक फोन पर बातें की। मनीषा से बात करना तो मुझे हमेशा ही अच्छा लगता है इसीलिए तो हम दोनों देर तक फोन पर बातें किया करते थे। मैं और मनीषा एक दूसरे से फोन पर बातें कर रहे थे लेकिन तभी मेरी मां ने मुझे आवाज दी और कहा कि रोहित बेटा तुम मुझे तुम्हारी मौसी के घर छोड़ दो। मैंने मनीषा को कहा कि मैं तुमसे बाद में बात करता हूं उसके बाद मैंने फोन रख दिया और मैं मां के साथ मौसी के घर चला गया। उस दिन हम लोग मौसी के घर पर ही रहे पापा भी उस दिन घर देर से आने वाले थे तो हम लोगों ने मौसी के घर पर ही डिनर कर लिया था। हम लोग जब घर पहुंचे तो उस वक्त काफी देर हो चुकी थी, रात भी काफी हो चुकी थी इसलिए मैंने भी मनीषा को फोन करना ठीक नहीं समझा। जब मैंने अपने लैपटॉप को देखा तो उसमें मनीषा ने मुझे अपना रिज्यूम भेज दिया था मैंने भी अगले दिन अपने दोस्त को मनीषा का रिज्यूम भेज दिया। मेरे दोस्त का भाई कंपनी में मैनेजर है मैंने उसे पूरी बात बता दी तो वह मुझे कहने लगा कि रोहित मनीषा का मैं अपनी कंपनी में ही करवा दूंगा तुम चिंता मत करो।

कुछ दिनों बाद उसने मुझे फोन किया और कहा कि रोहित मनीषा को इंटरव्यू के लिए हमारे ऑफिस में भेजना होगा मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं अभी मनीषा से बात कर लेता हूं। मैंने मनीषा को फोन किया और कहा कि तुम्हें इंटरव्यू के लिए मुंबई आना पड़ेगा तो मनीषा कहने लगी कि ठीक है मैं मुंबई आ जाऊंगी। मनीषा दो दिन बाद मुंबई आ गई मनीषा अपने ही किसी रिश्तेदार के घर पर रुकी हुई थी और अगले दिन वह इंटरव्यू देने के लिए चली गयी। उसने इंटरव्यू दिया और उसके बाद वहां पर उसका सलेक्शन हो गया, मनीषा का सिलेक्शन हो चुका था और वह इस बात से काफी खुश थी। शाम के वक्त मैं मनीषा को मिला तो वह मुझे कहने लगी कि रोहित यह सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है अगर तुम मेरी मदद नहीं करते तो शायद मुझे जॉब नहीं मिल पाती मैंने मनीषा को कहा ऐसा कुछ भी नहीं है। मनीषा का सिलेक्शन हो चुका था इसलिए वह मुंबई में ही रहना चाहती थी मनीषा की रहने की व्यवस्था भी मैंने ही की, मैंने अपने ही ऑफिस में काम करने वाली एक लड़की से मनीषा की बात की तो वह दोनों साथ में रहने लगे थे। मनीषा मेरे ऑफिस में काम करने वाली सुनीता के साथ रहने लगी थी। मनीषा और मेरा हर रोज मिलना होने लगा था हम दोनों एक दूसरे को हर रोज मिलते तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगता। मैं जब भी मनीषा को मिलता तो मुझे बहुत अच्छा लगता और हम दोनों साथ में काफी समय बिताया करते। हम दोनों साथ में ही समय बिताया करते थे इसलिए हम दोनों की नजदीकियां और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी। मनीषा कुछ दिनों के लिए अपने घर अहमदाबाद जाने वाली थी उसने यह बात मुझे बताई तो मैंने मनीषा को कहा कि तुम अहमदाबाद से कब वापस लौटोगी उसने मुझे कहा कि मैं वहां से जल्द ही वापस आ जाऊंगी। मनीषा कुछ दिनों के लिए अपने घर जाने वाली थी और मैं उस दिन मनीषा को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन भी गया। मनीषा अहमदाबाद जा चुकी थी मनीषा से मेरी फोन पर ही बातें हो रही थी मनीषा अहमदाबाद से करीब 5 दिन बाद वापस लौट आई थी। जब वह वापस लौटी तो मैंने और मनीषा ने उस दिन साथ में डिनर पर जाने का प्लान बनाया और उस दिन हम दोनों साथ में डिनर पर गए। मनीषा भी काफी खुश थी कि हम दोनों एक दूसरे के साथ टाइम स्पेंड कर पा रहे हैं और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था कि मैं मनीषा के साथ टाइम स्पेंड कर पा रहा हूं।

उस दिन हम लोगों ने काफी अच्छा समय बिताया और उसके बाद मैंने मनीषा को उसके घर तक छोड़ा और फिर मैं अपने घर लौट आया। मैं जब अपने घर लौटा तो देर रात तक हम दोनों ने एक दूसरे से फोन पर बात की, फोन पर बाते करते करते हमे पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों को नींद आ गई। कुछ दिनों के लिए सुनीता अपने घर गई हुई थी और उस दिन मनीषा की तबीयत ठीक नहीं थी। मैं उसको मिलने के लिए मनीषा के फ्लैट पर गया मनीषा ने मुझे बताया उसकी तबीयत ठीक नहीं है। मैंने उसे कहा क्या तुमने दवा नहीं ली। वह कहने लगी मैंने दवा तो ले ली थी लेकिन मुझे फिलहाल असर नहीं पड़ रहा है। मैंने जब मनीषा के हाथों को पकडा तो उसके हाथ काफी ज्यादा गर्म थे मैं अब मनीषा की तरफ झुका तो मैंने मनीषख के होंठो को किस कर लिया था जैसे ही मेरे होंठ मनीषा के होंठ से आपस में टकराने लगे तो मनीषा बिल्कुल भी रह नहीं पाई और वह मुझसे चिपक कर कहने लगी रोहित तुमने आज मुझे अंदर की तडप को बढ़ा दिया है। मनीषा के अंदर एक अलग फीलिंग जाग चुकी थी वह चाहती थी हम दोनों सेक्स करे। वह बिल्कुल भी रह नहीं पाई मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए तो मुझे ऐसा लगने लगा जैसे कि उसका बुखार एकदम से उतर चुका है।

उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया वह मेरे लंड को हिलाने लगी। जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मज़ा आ रहा था  मनीषा को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। वह मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाए जा रही थी उसने जब मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर उसे चूसना शुरू किया तो उसको मजा आने लगा और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मैं मनीषा के साथ सेक्स करने वाला था मैंने उसके गोरे बदन को काफी देर तक सहलाया। जब मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो उसके निप्पल अब खड़े होने लगे थे। मेरे अंदर की आग भी अब बढ़ने लगी थी मेरे अंदर की आग अब इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैंने मनीषा से कहा मैं बिल्कुल रह नहीं पाऊंगा। मनीषा ने मुझे कहा तुम मेरी चूत को चाट लो मैंने जब उसकी योनि की तरफ देखा तो उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था। मुझे मनीषा की योनि को चाटने में एक अलग ही आनंद पैदा हो रहा था मनीषा की योनि को चाटकर मेरे अंदर की गर्मी तो बढ ही चुकी थी। मनीषा की चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। मैंने अपने लंड पर थूक लगाते हुए मनीषा की योनि पर अपने लंड को लगाया जैसे ही मैंने अपने लंड को मनीषा की योनि पर लगाया तो वह मुझे कहने लगी तुम अपने लंड को चूत में घुसा दो। मैंने मनीषा की चूत के अंदर धीरे-धीरे अब अपने लंड को घुसाना शुरू किया और जैसे ही मैंने मनीषा की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मुझे मजा आ गया। मनीषा की योनि के अंदर तक मेरा लंड घुस चुका था और मनीषा की चूत से खून बाहर निकल चुका था। मनीषा की योनि से निकलता हुआ खून बढने लगा। मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढने लगी। मुझे उसे चोदने मे मजा आ रहा था। मैं जब मनीषा को चोद रहा था तो मेरे अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी। मैंने मनीषा के दोनों पैरों को खोल लिया जिससे कि मेरा लंड आसानी से मनीषा की चूत के अंदर बाहर हो रहा था मनीषा को भी मज़ा आने लगा था। मेरे अंदर की आग बढ गई थी और अब भी तड़प उठी थी। मनीषा को चोदने में मुझे मजा आ रहा था लेकिन जैसे ही मैंने अपने वीर्य की पिचकारी को मनीषा की योनि के अंदर गिराया तो वह मुझसे चिपक कर कहने लगी मुझे मजा आ गया।

मनीषा की चूत से पानी निकल रहा था मनीषा का बुखार ठीक हो चुका था और मेरे अंदर की गर्मी उसने दोबारा से बढ़ा दी इसलिए मैंने दोबारा से उसके साथ सेक्स का मन बना लिया। मैने उसे घोड़ी बना कर मैंने तब तक चोदा जब तक कि उसकी चूत के अंदर से गर्मी बाहर नहीं निकल गई और उसकी चूत के अंदर से मैंने इतनी गर्मी बाहर निकाल दी कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पाई। वह मुझे कहने लगी मेरी चूत मे अपने माल को गिरा दो। मैंने उसकी चूत मे अपने माल को गिरा दिया था मनीषा की टाइट चूत मार कर मुझे बड़ा ही मजा आया और उसकी चूत का मजा लेकर मैं बड़ा खुश हो गया था। उसके बाद मनीषा और मैं एक दूसरे के साथ कुछ देर तक बातें करते रहे। मनीषा मुझे कहने लगी अब मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मेरा बुखार भी अब ठीक हो चुका है। मनीषा बहुत ही ज्यादा खुश थी कि हम दोनों एक दूसरे के साथ मजे ले पाए।


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