भाभी को चोदने का जुनून


Antarvasna, kamukta: उस रात मैं अपने ऑफिस से देर से लौटा मैं जब अपने ऑफिस से लौटा तो उस वक्त 10:00 बज रहे थे मुझे ऑफिस से आने में काफी देर हो गई थी। जब मैं घर पहुंचा तो नैना मेरा इंतजार कर रही थी मैंने घर की डोर बेल बजाई नैना ने कुछ देर में दरवाजा खोला और दरवाज़ा खुलते ही वह मुझे पूछने लगी कि रोहन आज आप इतनी देर से आ रहे हैं। मैंने उससे कहा कि आज मुझे आने में देर हो गई रास्ते में काफी ज्यादा जाम भी लगा हुआ था काफी ट्रैफिक होने की वजह से मुझे आने में देर हो गई। वह कहने लगी कि मैं आपका कब से इंतजार कर रही थी और आपको फोन भी कर रही थी मैंने नैना को कहा मुझे अंदर तो आने दो तो वह कहने लगी चलिये आप अंदर आइए। अब मैं अंदर आ गया और नैना के सवालों का मैंने जवाब दिया नैना ने मुझे कहा हम लोग खाना खा लेते हैं काफी देर भी हो चुकी है।

हम दोनों ने रात का डिनर किया और उसके बाद में और नैना कुछ देर तक साथ में बैठे रहे करीब 12:00 बजे हम दोनों सो गए अगले दिन सुबह मैं उठा तो मैं अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार होने लगा। नैना ने मुझे कहा कि रोहन आज मैं अपनी सहेली मीनाक्षी के घर जा रही हूं मैंने नैना को कहा हां नैना ठीक है। मैंने नाश्ता किया और उसके बाद मैं भी ऑफिस के लिए चला गया मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो कमल ने मुझे कहा कि मेरे बेटे का जन्मदिन है तो तुम्हें कल मेरे घर पर भाभी को लेकर आना है। मैंने कमल को कहा ठीक है कमल मैं कल नैना को तुम्हारे घर पर शाम के वक्त ले आऊंगा कमल ने मुझे बताया कि उसने एक होटल में पार्टी का अरेंजमेंट किया है लेकिन उसने पहले मुझे घर पर आने के लिए कहा था। वह चाहता था कि मैं उसकी पत्नी और बच्चों से मुलाकात कर लूं इससे पहले कमल के बच्चों से और उसकी पत्नी से मैं कभी मिला नहीं था कमल मेरे साथ पिछले एक वर्ष से ऑफिस में काम कर रहा था। मुझे ऑफिस में काफी समय हो चुका है मैं तीन वर्षों से काम कर रहा हूं कमल और मेरे बीच काफी अच्छी दोस्ती है। जब उस दिन मैं घर पहुंचा तो नैना मेरा इंतजार कर रही थी मैंने नैना से कहा कि नैना तुम मीनाक्षी के घर से वापस कब लौटी तो उसने मुझे बताया कि वह मीनाक्षी के घर से दोपहर में ही लौट आई थी मैंने नैना को कहा चलो यह तो अच्छी बात है कि तुम आज मीनाक्षी से मिलने के लिए चली गई।

नैना और मेरे जीवन में सब कुछ इतना आसान नहीं था मैं और नैना एक दूसरे को चाहते थे लेकिन हम दोनों के परिवार वाले हम दोनों के रिश्ते से कभी खुश नहीं थे इसलिए वह लोग हम दोनों की शादी नहीं करवाना चाहते थे नैना हमारे पड़ोस में ही रहती थी। जब उस दिन मैं और नैना साथ में बैठे हुए थे तो हम अपनी कुछ पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे नैना ने मुझे कहा कि तुम्हें याद है तुम कैसे मुझे छत से देखा करते थे। मैंने नैना को कहा नैना मुझे सब याद है जब तुम और मैं पहली बार एक दूसरे को मिले थे और तुम कितना सादा शरमा रही थी नैना इस बात पर मुझे कहने लगी कि रोहन तुम्हें तो पता ही है कि मैं काफी कम बात किया करती थी। नैना और मेरी शादी इतनी आसानी से नहीं हो पाई हम दोनों को कोर्ट मैरिज करनी पड़ी उसके बाद ही नैना के पापा इस रिश्ते के लिए माने और फिर मैं कानपुर से मुंबई चला आया क्योंकि मेरे भी कुछ सपने थे जिन्हें मैं साकार करना चाहता था इसलिए मुझे लगा कि मुझे मुंबई चले जाना चाहिए और नैना भी मेरे साथ मुंबई आ गई। शुरुआत में मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा काफी समय तक तो मेरे पास नौकरी नहीं थी और उसके बाद जब मुझे नौकरी मिली तो तब जाकर मैं नैना की जरूरतों को पूरा कर पाया लेकिन नैना ने भी मेरा साथ हमेशा ही दिया। हम दोनों बात कर रहे थे तो नैना ने मुझे बताया कि मैं कुछ दिनों के लिए कानपुर जाना चाहती हूं मैंने नैना को कहा लेकिन मुझे तो छुट्टी मिलना शायद मुश्किल होगा तो फिर तुम्हें ही कानपुर जाना पड़ेगा। नैना कहने लगी कि मुझे अपने पापा मम्मी से मिले काफी समय हो गया है मैं अपने पापा मम्मी से नहीं मिली लेकिन मैं छुट्टी नहीं ले सकता था इसलिए मैंने नैना को कहा कि मेरा छुट्टी लेना तो मुश्किल हो जाएगा परन्तु मैं तुम्हारी टिकट करवा देता हूं तुम कानपुर चली जाना। नैना कहने लगी ठीक है आप मेरी टिकट करवा दीजिएगा मैंने उस दिन नैना को कहा कि कल तुम तैयार हो जाना क्योंकि हमें मेरे दोस्त कमल के घर जाना है। नैना कहने लगी लेकिन रोहन क्या हमें उनके घर में कोई जरूरी काम है तो मैंने उसे बताया कि कमल के बेटे का जन्मदिन है तो उसने हमें अपने घर पर इनवाइट किया है। मैंने नैना को कहा तो नैना कहने लगी कि ठीक है कल जब तक आप ऑफिस से लौटेंगे तो मैं तैयार हो जाऊंगी उसके बाद हम लोग आपके दोस्त के घर चल पड़ेंगे।

अगले दिन सुबह मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था और शाम के वक्त जब मैं घर लौटा तो नैना उस वक्त तैयार हो चुकी थी मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े चेंज किए और मैं और नैना कमल के घर चले गए। जब हम लोग कमल के घर गए तो कमल हमारा इंतजार कर रहा था मैंने नैना को कमल से मिलवाया नैना पहली बार ही कमल से मिल रही थी नैना ने भी अपनी पत्नी का परिचय मुझसे और नैना से करवाया। कमल की पत्नी का नाम आकांक्षा है कमल कहने लगा कि चलो हम लोग होटल में चलते हैं कमल के घर के पास ही उसने सारा अरेंजमेंट किया था तो हम लोग वहां से होटल में चले गए। जब हम लोग होटल में गए तो वहां पर कमल के कुछ पुराने दोस्त और उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे और अब कमल ने मुझे उन लोगों से भी मिलवाया कमल काफी खुश था और उस दिन कमल के बेटे की बर्थडे पार्टी काफी अच्छी रही हम लोग उस दिन वहां से देर रात घर लौटे। कुछ दिनों बाद मैंने नैना के जाने की टिकट करवा दी और नैना कानपुर चली गई थी मैं घर पर कुछ दिनों के लिए अकेला ही था इसलिए मुझे थोड़ी बहुत परेशानी हो रही थी।

मैं एक दिन अपने ऑफिस से घर लौटा तो उस दिन मैने देखा मेरे नंबर पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया हुआ था मैंने उस नंबर पर रिप्लाई किया। दो दिनों तक मुझे तो पता ही नहीं चल पाया कि यह नंबर किसका है लेकिन मैंने एक दिन उस नंबर पर फोन किया तब मुझे पता चला कि यह तो कमल की पत्नी आकांक्षा का नंबर है और वह मुझ पर ना जाने कबसे डोरे डाल रही है। एक दिन उसने मुझे फोन पर कहा मुझे तुम्हारे साथ एक रात बितानी है आकांक्षा दिखने में बहुत ही सुंदर है और उसकी सुंदरता का मैं दीवाना तो था ही नैना भी घर पर नहीं थी इसलिए मुझे लगा आकांक्षा को एक दिन घर पर बुला ही लेता हूं। मैंने आकांक्षा को घर पर बुला लिया जब वह घर पर आई तो आकांक्षा के बदन को मैं बड़े अच्छे तरीके से महसूस करना चाहता था मेरे लिए यह काफी अच्छा मौका भी था। मैंने उस दिन आकांक्षा के होंठों को चूमना शुरू कर दिया था जब हम दोनों मेरे बेडरूम में चले आए तो मैंने आकांक्षा से कहा तुम अपने कपड़े उतारो। आंकाक्षा ने मेरे सामने अपने कपड़े उतारे, मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए थे मेरा लंड आकांक्षा की बड़ी गांड से टकरा रहा था। मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था मेरा लंड पूरे तरीके से खडा हो चुका था।

जब मैंने कहा तुम अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को समा लो उसने भी मेरे लंड को देखा और कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ही मोटा है मैं तुमसे अपनी चूत मरवाना चाहती थी। मैंने आकांक्षा को कहा क्या कमल तुम्हारी इच्छा को पूरा नहीं कर पाता? वह कहने लगी नहीं ऐसी बात नहीं है लेकिन फिर भी मुझे लगा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहिए इसलिए मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए तड़प रही थी और आज मुझे मौका मिला तो मैं इस मौके को पूरी तरीके से भुनाना चाहती हूं। आकांक्षा ने यह कहते हुए मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया उसने जब मेरे मोटे लंड को अपने हाथों में लिया हुआ तो मैंने उसे कहा तुम इसे अपने मुंह के अंदर ले लो। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और बडे ही अच्छी तरीके से सकिंग करने लगी उसे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे भी काफी मजा आ रहा था। मैं इस बात से बहुत खुश था मैं आकांक्षा की चूत को अच्छे से मार पाऊंगा मैं पूरी तरीके से खुश हो गया था मैंने जब उसके पैरो को चौड़ा किया तो उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला वह मचलने लगी वह कहने लगी तुमने तो मेरी चूत के अंदर तक अपनी उंगली को घुसा दिया है।

मैंने उसे कहा अब मैं अपने लंड को भी तुम्हारी चूत में घुसाना चाहता हूं वह बहुत तड़प रही थी। मैं भी बहुत ज्यादा तड़प रहा था मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाला। मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर गया तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी और चिल्लाई तुम्हारा लंड तो मेरी चूत को फाडता हुआ अंदर तक चला गया है। उसने अपने पैरों को खोल लिया अब वह अपनी सिसकियो से मुझे गर्म करने की कोशिश कर रही थी। जब वह मुझे गर्म करने की कोशिश करती तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़ी तेजी से करना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरा साथ देती रहो लेकिन जब मेरा वीर्य गिरा तो वह खुश हो गई।


error: