भाभी चूतड़ खोल बिस्तर पर लेटी थी


Antarvasna, kamukta: मैं और शांति एक दूसरे के साथ पिछले 5 वर्षों से रह रहे हैं लेकिन आज भी हम दोनों एक दूसरे को समझ नहीं पाए। शांति और मैं अपनी जॉब के चलते एक दूसरे को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हैं हम दोनों की मुलाकात कॉलेज के दौरान हुई थी। जब शांति मुझे कॉलेज के दौरान पहली बार मिली थी तो शांति को देखते ही मैंने यह फैसला कर लिया था कि उससे मैं शादी करूंगा, मैंने यह बात अपने घर में अपने माता पिता को भी बता दी थी मेरे माता-पिता को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि शांति के परिवार को वह लोग जानते थे। मेरे पिताजी ने शांति के पापा से जब इस बारे में बात की तो वह लोग भी हम लोगों की शादी के लिए तैयार हो गए उस वक्त मेरी जॉब को लगे हुए दो महीने ही हुये थे और हम दोनों की सगाई हो गई। हम दोनों की सगाई होने के बाद हम दोनों की जब शादी हो गई तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैं बहुत ही खुश था और मैं शांति को हर वह खुशी देने की कोशिश कर रहा था जो कि वह चाहती थी। मैंने कभी भी उसे कोई दुख तकलीफ पहुंचाने की कोशिश नहीं की सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था इसी बीच शांति ने एक दिन मुझे कहा कि मुझे अपने मायके जाना है।

जब शांति अपने मायके से लौटी तो सब कुछ बदला हुआ था शांति चाहती थी कि वह भी अब नौकरी करें उसने मुझसे जब यह बात कही तो मैंने उसे कहा देखो शांति मैं नहीं चाहता कि तुम जॉब करो। मैंने शांति को जॉब करने से मना कर दिया उसके बाद शांति ने मुझ से जिद करके जॉब करने की बात कही तो मैं भी मना ना कर सका और फिर शांति जॉब करने लगी। मेरे माता-पिता को भी यह बात पसंद नहीं थी मैं चाहता था कि शांति मेरे माता-पिता की देखभाल करे लेकिन शांति अब जॉब करने लगी थी। उसी बीच शांति प्रेग्नेंट हो गई और हमें एक बच्चा हुआ लेकिन जब वह दो वर्ष का हो गया तो शांति ने दोबारा से जॉब करनी शुरू कर दी। अभी तक कुछ भी नहीं बदला था और शांति ने दोबारा से जॉब करनी शुरू कर दी और वह बच्चे का ध्यान नहीं दे पा रही थी जिस वजह से मेरे और शांति के बीच कई बार इस बात को लेकर झगड़े भी होते थे। मेरी बूढ़ी मां बच्चे की देखभाल करती थी लेकिन शांति अपने कैरियर को आगे बढ़ाना चाहती थी इसी वजह से उसने मुझे कहा कि वह जॉब करना चाहती है।

हम दोनों के बीच अक्सर इस बात को लेकर झगड़े होते रहते थे शादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद अब जाकर मुझे एहसास हुआ कि शायद शांति और मेरे बीच कभी प्यार था ही नहीं हम दोनों एक दूसरे से कभी प्यार करते ही नहीं थे इसीलिए तो हम दोनों एक दूसरे से झगड़ा करते रहते हैं। कई बार मैंने शांति को समझाने की कोशिश की लेकिन शांति मेरी बात कहां मानने वाली थी और शांति मेरी बात कभी भी नहीं समझती थी। इस बीच पापा की तबीयत खराब रहने लगी और पापा को मुझे डॉक्टर के पास लेकर जाना पड़ा।  मैं जब उन्हें डॉक्टर के पास ले गया तो डॉक्टर ने बताया कि उन्हें हार्ट की बीमारी है मैं और पिताजी अस्पताल में ही थे मुझे शांति का फोन आया और शांति ने मुझे कहा कि मुकेश क्या तुम अस्पताल में हो। मैंने शांति को बताया हां मैं अस्पताल में ही हूं तो वह कहने लगी मैं थोड़ी देर बाद अस्पताल आ रही हूं। जब वह अपने ऑफिस से अस्पताल आई तो मैंने उसे सारी बात बताई मैं काफी दुखी था तो शांति ने उस वक्त मुझे कहा कि तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। अब पापा का जल्दी ऑपरेशन होने वाला था और जब उनका ऑपरेशन हुआ तो उन्हें आराम की जरूरत थी घर पर मेरी मां इतना काम नहीं कर सकती थी इसलिए मुझे घर पर नौकरानी रखनी पड़ी। मैं चाहता था जो भी घर पर काम करे वह अच्छे से काम करें इसीलिए मैंने घर पर काम करने वाली नौकरानी को रख दिया था और वह अच्छे से घर का काम संभाल रही थी। वह हमारे बच्चे की भी देखभाल करती और वह घर का सारा काम करती, वह सुबह के वक्त आ जाया करती थी और शाम का खाना बनाकर वह अपने घर चली जाती। एक दिन मेरा दोस्त घर पर आने वाला था मैंने यह बात शांति को बता दी थी और शांति को कहा कि तुम ऑफिस से जल्दी घर लौट आना। शांति ने मुझे कहा कि ठीक है मैं ऑफिस से जल्दी घर लौट आऊंगी लेकिन शांति ऑफिस से जल्दी घर लौटी नहीं थी और मैं शांति का घर पर इंतजार कर रहा था। मेरे दोस्त का ट्रांसफर अहमदाबाद में हो चुका था इसलिए मैंने उसे घर पर बुलाया था उसके साथ उसकी पत्नी और छोटा बच्चा भी आने वाला था।

वह लोग घर पहुंच चुके थे लेकिन शांति अभी तक घर पर नहीं आई थी मेरा दोस्त मुझसे करीब दो-तीन साल बाद मिल रहा था पहले उसके पिताजी अहमदाबाद में ही रहा करते थे लेकिन उनका ट्रांसफर हो जाने के बाद वह लोग इंदौर में ही रहने लगे। इंदौर में ही उन्होंने अपना घर बना लिया और जब वह अहमदाबाद आया तो मैंने ही उसके लिए घर देखा था। सब कुछ तो पहले जैसा ही था वह भी नहीं बदला था और ना ही मैं बदला था लेकिन शांति के व्यवहार में पूरी तरीके से परिवर्तन आ चुका था और अब वह बदल चुकी थी मैं और शांति एक दूसरे को अब समय नहीं दिया करते थे। मैंने और शांति ने एक दूसरे के साथ ना जाने कबसे अच्छा समय नहीं बिताया था लेकिन मेरे दोस्त प्रकाश और उसकी पत्नी लता को देख कर मुझे भी यह लग रहा था कि काश कि शांति मेरे साथ अच्छा समय बिता पाती लेकिन शांति तो अभी तक ऑफिस से लौटी ही नहीं थी। जैसे ही वह ऑफिस से लौटी तो वह कहने लगी कि मुकेश आज मुझे ऑफिस में बहुत काम था मैंने शांति को अपने दोस्त प्रकाश से मिलवाया और जब मैंने उसे लता से मिलवाया तो वह लता के व्यवहार से बहुत प्रभावित हुई और कहने लगी कि लता तुम बहुत ही अच्छी हो।

लता घर का काम संभालती है और वह बहुत ही अच्छी है थोड़े ही समय में उसके व्यवहार का पता मुझे चल चुका था। अब इतने सालों बाद प्रकाश और मैं मिल रहे थे तो हम दोनों ने एक दूसरे से पूछा कि तुम्हारी जिंदगी में क्या चल रहा है मेरी लाइफ में तो कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा था और ना ही मेरे जीवन में कुछ नया था परंतु प्रकाश ने मुझे बताया कि उसका ट्रांसफर अहमदाबाद में हो गया है तो वह इस बात से बहुत खुश है। कुछ पुरानी यादें थी जो कि प्रकाश और मेरे बीच आज तक जिंदा है हम दोनों एक दूसरे से उस बारे में बात कर रहे थे। वह हमारे घर पर काफी देर तक रुके और रात को वह लोग चले गए लेकिन रात भर मैं इस बारे में सोचता रहा कि मेरा दोस्त प्रकाश अपनी पत्नी के साथ कितना खुश है। उसने मुझे बताया कि वह हर रोज सेक्स का पूरा मजा लेते हैं लेकिन मेरे जीवन में तो जैसे यह सुख था ही नहीं क्योंकि शांति और मेरे बीच ना जाने कब से सेक्स हुआ ही नहीं था। जब भी हम दोनों के बीच सेक्स होता तो तभ भी हम दोनों एक दूसरे को संतुष्ट नहीं कर पाते थे अब मैंने इसके लिए बाहर का सहारा लेना शुरू किया हमारे पड़ोस में ही भाभी रहती है उन पर मैं डोरे डालने लगा उनकी उम्र यही कोई 40 वर्ष की है लेकिन वह दिखने में बड़ी सेक्सी हैं, उनके बदन के पीछे कई लोग पागल है मैं भी चाहता था कि मैं सुनीता भाभी के साथ सेक्स का मजा लू और मैंने सुनीता भाभी के साथ सेक्स करने के बारे में सोचा तो उन्होंने भी मुझे अपने घर पर बुला लिया। रात के वक्त में उनके घर पर गया उनके घर पर कोई भी नहीं था जब मैं उनके घर पर गया तो वह अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया। मैंने उनकी नाइटी को उतार दिया जब उनके बदन को मैंने देखा तो मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था और मेरा लंड उनकी चूत में जाने के लिए बेताब था मैंने भी अपने लंड को हिलाना शुरू किया, उन्होंने मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक उतार लिया।

जब उन्होंने मेरे लंड को अपने गले के अंदर उतारा तो वह बडे अच्छे तरीके से मेर लंड को सकिंग कर रही थी और मुझे भी बहुत मजा रहा था बहुत देर तक उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा। अब उन्होंने मेरे सामने अपनी चूतडो को किया तो मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया उनकी चूत के अंदर मैंने जब उंगली को डाला तो वह कहने लगी कि जल्दी से मुझे चोदो, अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दो। मैंने भी अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसा दिया उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था उनकी चूत बड़ी मुलायम थी और मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक जा रहा था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मैं बड़ी तेज गति से उनको धक्के दे रहा था मैंने बहुत तेजी से उनको चोदा मेरा वीर्य बाहर की तरफ आ ही गया और जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मैंने उन्हें कहा मेरा वीर्य गिर चुका है।

उन्होंने मेरे लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया और उन्होंने मुझे कहा कि मेज पर तेल की शीशी रखी हुई है उसे तुम अपने लंड पर लगा दो मैंने भी उस तेल को लंड पर लगाते हुए पूरे लंड को पूरी तरीके से चिकना बना दिया था। मेरे लंड उनकी गांड में घुसने के लिए तैयार था मैंने जैसे ही अपने लंड को उनकी गांड पर सटाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और धीरे-धीरे में अंदर की तरफ धक्का मारने लगा अब मेरा लंड उनकी गांड के अंदर जा चुका था। जब मेरा लंड उनकी गांड के अंदर तक चला गया था तो मुझे बहुत ही मजा आया और मैं उनकी गांड के मजे बड़े अच्छे से ले रहा था मेरा लंड उनकी गांड के अंदर बाहर हो रहा था और उनकी गांड से निकलती हुई गर्मी से मेरा शरीर भी गरम हो रहा था। वह बिस्तर पर अपने पैर खोल कर लेट चुकी थी मैं उनके ऊपर से लेटा हुआ था उनकी चूतडे मेरे लंड से टकरा रही थी जब उनकी चूतडे मेरे लंड से टकराती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता मैंने उन्हें बहुत देर तक धक्के दिए। जब वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई तो वह मुझसे कहने लगी मैं अब तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगी लेकिन मैंने भी उनकी गांड मे अपने माल को गिराकर उनकी गर्मी को बुझा दिया और वह बड़ी खुश हुई उसके बाद तो मै भाभी के पास जाया करता और अपनी गर्मी को मिटाया करता।


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