अपने पैर खोले बैठी थी


Antarvasna, hindi sex story: मैं अपने मामा के घर से वापस लौट रहा था मेरे साथ मेरी मम्मी भी कार में बैठी हुई थी मम्मी मुझसे बात कर रही थी और कहने लगी कि गौतम बेटा तुम घर कितने दिनों तक रुकने वाले हो। मैंने अपनी मां से कहा मम्मी अभी तो मैं कुछ दिनों पहले ही आया हूं और आपको मैंने बताया तो था कि मैं इस हफ्ते तक घर पर रुकूंगा। मां कहने लगी कि बेटा तुम जब भी आते हो तो हमेशा ऐसा ही कहते हो लेकिन फिर तुम जल्दी चले जाते हो मैंने मां से कहा नहीं मां मैं इस हफ्ते घर पर ही आप लोगों के साथ रुकूंगा। मेरे मामा जी की लड़की की सगाई थी जिस वजह से हम लोग उनके घर पर उन्हें बधाई देने के लिए गए हुए थे हम लोग अब अपने घर आ चुके थे। मैं एक सरकारी विभाग में अधिकारी के पद पर पिछले 10 वर्षों से काम कर रहा हूं और मैं कोलकाता में रह रहा हूँ लेकिन कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर लखनऊ आया हुआ था। पापा भी अभी अपनी जॉब से रिटायर नहीं हुए हैं पापा बैंक में मैनेजर हैं पापा उस दिन अपने बैंक से घर लौटे तो पापा काफी परेशान दिखाई दे रहे थे मैंने पापा से कहा कि आज आप काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं।

पापा कहने लगे बेटा पूछो मत काम का इतना दबाव बढ़ने लगा है कि कई बार तो लगता है कि बस रिटायरमेंट लेकर घर पर ही बैठ जाऊं लेकिन अभी रिटायरमेंट में भी दो वर्ष बचे हैं। पापा ने मुझसे कहा कि बेटा तुम लोग अपने मामा जी के घर से कब लौटे मैंने पापा को बताया कि हम लोग तो दोपहर में ही वहां से वापस आ गए थे। पापा के साथ मैं काफी देर तक बात करता रहा और उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया मैं अपने रूम में था मेरी मां मेरे लिए चाय बना कर ले आई मां कहने लगी कि तुम्हारे पापा के लिए मैंने चाय बनाई थी तो सोचा तुम्हें भी चाय दे दूं, मैंने भी चाय पी ली थी। अगले दिन पापा अपने ऑफिस के लिए सुबह ही निकल चुके थे और मैं घर पर ही था घर पर मैं अकेले काफी बोर हो रहा था तो सोचा कि क्यों ना कहीं घूमने के लिए चला जाऊं। मैंने अपनी मां से कहा मां मैं शाम तक लौट आऊंगा तो मां कहने लगी ठीक है बेटा और फिर मैं कार लेकर घर से बाहर निकल पड़ा लेकिन बाहर काफी गर्मी हो रही थी। मैं जब अपने दोस्त के घर जा रहा था तो उस वक्त रास्ते में मुझे राधिका दिखाई दी राधिका पैदल ही आ रही थी मैंने राधिका को देखा और उसे देखते ही मैंने कार रोक ली।

मैंने जब राधिका को आवाज दी तो उसने मेरी आवाज नहीं सुनी फिर मैंने कार को घुमा कर दूसरी साइड से राधिका को रोका राधिका ने मुझे पहले तो काफी देर तक देखा फिर वह मुझे कहने लगी कि क्या तुम गौतम हो? मैंने उससे कहा हां मैं गौतम हूं लेकिन तुम अभी कहां से आ रही हो। उसने मुझे कहा मैं अपने ऑफिस से वापस आ रही थी मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मैं अपने ऑफिस से घर जा रही थी। मैंने राधिका को कहा सब कुछ ठीक तो है ना तो राधिका मुझे कहने लगी कि हां गौतम सब कुछ ठीक है मैंने उसे कहा आओ तुम कार में बैठ जाओ मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं। पहले वह मुझे मना कर रही थी और कहने लगी कि नहीं मैं घर चली जाऊंगी लेकिन फिर मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं। मैंने उसे कार में बैठा लिया और मैं राधिका की तरफ देख रहा था तो मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था मुझे पता नहीं था कि राधिका क्यों इतना परेशान है उसने मुझसे कुछ बात भी नहीं की। मैंने उसे उसके घर तक छोड़ दिया फिर मैं अपने दोस्त के घर पहुंचा जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने उससे कहा कि आज मुझे राधिका मिली थी तो वह मुझे कहने लगा कि तुम्हें राधिका कब मिली थी? उसने मुझे बताया कि राधिका के पति और उसके बीच बिल्कुल भी अच्छे रिलेशन नहीं है जिस वजह से वह काफी ज्यादा परेशान रहने लगी है और उसका मानसिक संतुलन भी कुछ बिगड़ने लगा है और वह बहुत ही कम बात किया करती है। जब मेरे दोस्त ने मुझे राधिका के बारे में बताया तो मैंने उससे कहा लेकिन उन दोनों के झगड़े की वजह क्या होगी मैं चाहता था कि राधिका से मैं इस बारे में पूछूं। राधिका हमारे क्लास में सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट लड़की थी और वह बहुत ही अच्छी थी लेकिन समय के साथ वह बहुत बदल चुकी थी। मैं एक दिन राधिका के घर के बाहर खड़ा था और मैंने देखा कि वह अपने ऑफिस के लिए जा रही थी मैंने राधिका को देखा तो मैंने उसे देखते ही आवाज लगाई और उसने पीछे पड़ पलट कर देखा तो राधिका मुझे कहने लगी कि गौतम तुम यहां क्या कर रहे हो।

मैंने उससे कहा मैं यहां किसी से मिलने आया था लेकिन वह लोग घर पर नहीं है मैंने राधिका को कहा मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस तक छोड़ देता हूं। राधिका कहने लगी कि नहीं गौतम रहने दो मैं चली जाऊंगी लेकिन मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें छोड़ देता हूं और मैंने उसे कार में बैठने के लिए कहा तो वह कार में बैठ गई और मैं उसे उसके ऑफिस छोड़ने जा रहा था। मैंने राधिका से पूछा राधिका सब कुछ ठीक तो है ना तो वह मुझे कहने लगी कि हां गौतम सब कुछ तो ठीक है मैंने जब राधिका को कहा कि राधिका मुझे मोहन ने बताया कि तुम्हारे और तुम्हारे पति के बीच में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। राधिका मुझे कहने लगी कि नहीं ऐसा तो कुछ भी नहीं है राधिका मुझसे छुपा रही थी उसकी आंखों में उसका झूठ साफ नजर आ रहा था। मैंने उससे कहा देखो राधिका तुम मुझसे कुछ मत छुपाओ मुझे पता है कि तुम्हारे और तुम्हारे पति के बीच में कुछ भी ठीक नहीं है तो तुम उसके बारे में मुझे बता सकती हो। राधिका ने मुझे कहा गौतम रहने दो लेकिन जब उसने मुझे अपने पति के बारे में बताया तो मुझे बहुत ही बुरा लगा उसके पति उसे दहेज के लिए बहुत ज्यादा परेशान करते हैं।

उसके पिताजी से जितना बन सकता था उसके पिताजी ने उन लोगों को उतना दहेज दिया लेकिन उसके बावजूद भी उन लोगों की नियत जैसे भर ही नहीं रही थी और राधिका इस बात से बहुत तनाव में आ चुकी थी। राधिका को अपनी गलती का एहसास हो चुका था कि उसे शादी नहीं करनी चाहिए थी लेकिन अब राधिका की मजबूरी बन चुकी थी और वह किसी तरीके से अपनी जिंदगी अपने पति के साथ बस काट रही थी। मैंने राधिका को उसके ऑफिस छोड़ा और मैं वहां से घर लौट आया लेकिन मैं यही सोचता रहा कि राधिका के साथ बहुत गलत हुआ। मैं यही सोच रहा था कि राधिका के साथ वाकई में बहुत ज्यादा गलत हुआ लेकिन उसके बाद मैं कोलकाता चला गया था। मैंने एक दिन राधिका को फोन किया और उससे उसके हालचाल पूछे वह बहुत ज्यादा परेशान लग रही थी। मैंने उसके बाद राधिका की काफी मदद की राधिका की मदद कर के मुझे बहुत अच्छा लगता और मैं जब लखनऊ वापस आया तो राधिका से मिला। राधिका मुझे कहने लगी गौतम तुम बहुत ही अच्छे हो और राधिका कहीं ना कहीं मुझसे बहुत ज्यादा प्रभावित हो गई थी। वह मेरे साथ समय बिता कर बहुत खुश होती वह शायद अपने दिल पर काबू नहीं कर पाई और मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी। हम दोनों उस दिन कार मे साथ में बैठे हुए थे वह अपने होठों को मेरे होठों से टकराने लगी मैं भी अब अपने आप पर बिल्कुल काबू ना कर पाया और राधिका के होठों को चूमने लगा। मैं जब उसके होठों को चूम रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था उसके होठों से मैंने खून भी निकाल दिया था। मैंने उसके बाद राधिका उसे कहा यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं है मैंने उसे उसके घर छोड़ दिया लेकिन उसके अगले दिन जब हम लोग मिले तो दोबारा से हम दोनों के बीच किस हो गया। मैं अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सका मैं उसे अपने घर ले आया मेरी मां मेरे मामा जी के घर गई थी और पापा भी ऑफिसर मे थे इसलिए मै राधिका को घर पर ले आया। राधिका मेरे बेडरूम में थी मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो राधिका ने अपने मुंह के अंदर तक ले लिया वह उसे बड़े अच्छे से चूस रही थी।

वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उस से मेरी गर्मी बढ़ती जा रही थी और मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने राधिका से कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है वह मुझे कहने लगी मैं अपने आपको नहीं रोक पा रही हूं। राधिका मेरे लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती थी वह बिस्तर पर लेट चुकी थी उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था। उसके दोनों पैरों को जब उसने चौड़ा किया तो मैंने उसे धक्के देने शुरू कर दिया मैं अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था। मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है राधिका बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने उसकी चूत के मजे लिए तो वह कहने लगी तुम ऐसे ही धक्के देते रहो। कुछ देर तक मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर चोदा लेकिन फिर उसकी गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी जिसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाल दिया।

मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक जा चुका था मैंने उसकी बड़ी चूतडो को पकड़ा हुआ था मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था तो वह बड़ी तेज आवाज में सिसकियां ले रही थी। उसकी गर्म सिसकिया से मैं और भी ज्यादा गर्म होता और उसे इतनी तेज गति से मै धक्के मारता की वह खुश हो जाती। वह मुझे कहती तुम मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो मैंने उसे बहुत देर तक धक्के मारे मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था तो उसकी चूत की चिकनाई मे बढ़ोतरी हो रही थी। उसकी चूतडो से आवाज निकलती तो उसे बहुत ही अच्छा लगता और मैं उसके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकलने वाला था राधिका भी झड चुकी थी उसने अपने पैरों को आपस में मिलाना शुरू कर दिया जिससे कि मुझे उसकी चूत कुछ ज्यादा ही टाइट महसूस होने लगी। मेरे अंडकोषो से मेरा वीर्य बाहर आ चुका था वह जैसे ही बाहर निकला तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मैंने उसके बाद राधिका को गले लगा लिया राधिका के साथ उसके बाद मेरे नाजायज संबंध बन चुके थे।


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