आकांक्षा के चूतड़ों पर अपना वीर्य गिराया


Antarvasna, hindi sex story: एक रात मुझे ऑफिस से घर लौटने में बहुत ज्यादा देर हो गई थी मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही थी। वह मुझे बार बार फोन किए जा रही थी लेकिन मैं उसका फोन नहीं उठा पाया था क्योंकि मेरी जेब में फोन साइलेंट था। मैं जब घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मुझ पर नाराज होकर कहने लगी आप मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे थे। मैंने आकांक्षा को बताया मेरा फोन साइलेंट मोड में था शायद इस वजह से मैं तुम्हारा फोन नहीं उठा पाया था। आकांक्षा बहुत ही ज्यादा घबराई हुई थी मैंने उसे कहा तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। आकांक्षा मुझे कहने लगी मैं आपका इंतजार कब से कर रही थी आप ना जाने आज ऑफिस से क्यों इतना लेट आ रहे हैं। मैंने आकांक्षा को कहा आज ऑफिस में काफी ज्यादा काम था इस वजह से मुझे ऑफिस से घर लौटने में देरी हो गई। मैं और आकांक्षा एक दूसरे के साथ बैठकर बातें कर रहे थे और थोड़ी देर बाद मैंने आकांक्षा को कहा हम लोगों को डिनर कर लेना चाहिए हम दोनों ने डिनर किया।

मेरी शादी को 2 वर्ष बीत चुके हैं हम दोनों की शादीशुदा जिंदगी बड़े अच्छे तरीके से चल रही है मैं और आकांक्षा एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश हैं। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ में होते हैं तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है। आकांक्षा से मेरी मुलाकात पहली बार मेरी मेरे कॉलेज के दिनों में हुई थी आकांक्षा मेरी जूनियर हुआ करती थी लेकिन मैं आकांक्षा को पसंद करने लगा था। जब आकांक्षा का रिश्ता मेरे लिया आया तो मैंने आकांक्षा के साथ शादी करने का पूरा फैसला कर लिया था। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश है। मुझे आकांक्षा के साथ बहुत ही अच्छा लगता है जब भी हम दोनों साथ में होते हैं तो हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया करते हैं। काफी समय हो गया था मैं आकांक्षा के साथ घूमने के लिए नहीं गया था। मैं पिछले 5 वर्षों से मुंबई में रहता हूं और मै मुंबई में नौकरी कर रहा हूं। आकांक्षा उस दिन मुझे बोली क्या तुम मेरे लिए कुछ समय नहीं निकाल सकते हो। मैंने आकांक्षा को कहा क्यों नहीं मैंने आकांक्षा के लिए उस दिन समय निकाल लिया था हम दोनों ने घूमने का फैसला किया। मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी।

मैं अपने ऑफिस से छुट्टी लेने के बाद आकांक्षा को अपने साथ कहीं घुमाने के लिए लेकर जाना चाहता था और मैंने आकांक्षा को अपने साथ ले जाने का फैसला किया। हम दोनो एक दूसरे के साथ में बड़े खुश थे हम दोनों एक दूसरे के साथ में थे हम दोनों को बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था उस दिन आकांक्षा और मैंने काफी समय बाद साथ में मूवी देखी थी और साथ में बहुत ही अच्छा टाइम बिताया था आकांक्षा ने थोड़ी बहुत शॉपिंग भी की थी और उसके चेहरे की खुशी देखकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। मै बहुत ज्यादा खुश था जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ में टाइम स्पेंड किया था हम दोनों घर लौट आए थे। मेरे माता-पिता जो कि जयपुर में ही रहते हैं वह लोग कभी कभार हमारे पास आ जाते हैं पापा अभी भी जॉब कर रहे हैं वह कुछ समय के बाद अपनी जॉब से रिटायर होने वाले हैं। मेरी और आकांक्षा की बात हर रोज घर पर हो जाती है। एक दिन मै ऑफिस के लिए निकला ही था उस दिन आकांक्षा ने मुझे फोन किया और कहा आपका बटुवा घर पर रह गया है। मैंने आकांक्षा को कहा मैं भी घर वापस आ रहा हूं और मैं जब घर वापस लौटा तो आकांक्षा ने मुझे बटुवा दिया।

मैंने आकांक्षा को कहा मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही है। आकांक्षा कहने लगी सुरेश आज ऑफिस से जल्दी आ जाना। मैंने आकांक्षा को कहा ठीक है मैं कोशिश करूंगा लेकिन अभी मैं चलता हूं और मैं जल्दी ऑफिस के लिए चला गया। मैं जब ऑफिस पहुंचा तो उस दिन ऑफिस में मुझे काफी काम था मुझे घर पहुंचने में देरी हो गई थी जिस वजह से आकांक्षा मुझ पर काफी गुस्सा भी हो गई थी। वह कहने लगी मैंने आपसे कहा था आप घर जल्दी आ जाना मैंने आकांक्षा को समझाया और उसे कहा ऑफिस में आज कुछ ज्यादा काम था इस वजह से मुझे घर आने में देरी हो गई थी। आकांक्षा मुझे कहने लगी मैं आपका इंतजार कब से किए जा रही थी लेकिन आप है की आपको जैसे मेरी कोई फिक्र ही नहीं है। मैंने आकांक्षा को कहा ऐसी कोई भी बात नहीं है उस दिन आकांक्षा मुझ पर कुछ ज्यादा ही गुस्सा थी। मैं सोच रहा था क्यों ना कुछ दिनों के लिए हम लोग जयपुर चले जाए। मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी मैं कुछ दिनों के लिए जयपुर जाना चाहता था और जब मैं और आकांक्षा कुछ दिनों के लिए जयपुर चले गए तो हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था। काफी समय के बाद मैं जयपुर गया था और आकांक्षा भी इस बात से खुश थी वह अपने पापा मम्मी से मिल पाई है।

आकांक्षा अपने पापा मम्मी से मिलने के लिए चली गई थी। जब वह अपने पापा मम्मी को मिलने के लिए गई थी वह दो दिनों तक वहा रही और उसके बाद मुझे आकांक्षा को लेने के लिए जाना पड़ा था।जब मै उसे लेने के लिए गया तो उस रात मे भी वहीं रुक गया था। अगले दिन हम दोनों अपने घर लौट आए थे। आकांक्षा और मैं घर लौट आए थे। हम दोनो एक दूसरे से बातें कर रहे थे उस दिन काफी ठंड हो रही थी जिस वजह से मैं और आकांक्षा एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे। कहीं ना कहीं मेरी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने जब आंकाक्षा के होंठों को चूमना शुरू किया तो उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी अब मैंने आकांक्षा से कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे को होंठों को चूम रहे थे उस से हम दोनों ही खुश थे। आकांक्षा बड़ी खुश थी मैंने और आंकाक्षा ने एक दूसरे के साथ सेक्स करने का फैसला कर लिया था और मैं आकांक्षा के कपडो को उतारकर उसकी गर्मी को पूरी तरीके से बढा चुका था।

जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डालने का फैसला किया तो उसने अपने पैरों को खोल दिया था। वह भी चाहती थी वह मेरे साथ सेक्स का मजा ले। हम दोनो ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी। मैं और आकांक्षा बहुत ही ज्यादा गरम हो चुके थे। मेरे लंड मे आग लग गई थी। मैने जैसे ही उसकी चूत मे लंड को तेजी से किया तो उसे मजा आ रहा था। हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी हमारी गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी। मेरा लंड आकांक्षा की चूत के अंदर बाहर हो रहा था आकांक्षा को भी बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा था जिस तरीके से मैं और आकांक्षा एक दूसरे का साथ दे रहे थे। अब हम दोनों ने एक दूसरे का साथ काफी अच्छे से दिया जब मुझे लगने लगा मेरा वीर्य बाहर की तरफ को आने वाला है तो मैंने आकांक्षा को कहा मेरा माल गिरने वाला है। आकांक्षा ने कहा कोई बात नहीं तुम मेरी चूत मे माल गिरा दो और मैंने अपने वीर्य को आकांक्षा की चूत में गिरा दिया था।

मेरा माल आकांक्षा की चूत में गिर गया था मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था और आकांक्षा को भी बड़ा मजा आ रहा था जिस तरीके से उसकी चूत मे मेरा माल गिरा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। मैंने अब आकांक्षा की चूतडो को अपनी तरफ किया। उसके बाद मैंने आकांक्षा की चूत में अपने लंड को प्रवेश करवा दिया था मेरा लंड उसकी योनि में जाते ही अब उसे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ में सेक्स संबंध बना रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ही ज्यादा बढ़ा कर रख दिया था। मेरी और आकांक्षा की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी जब मुझे लगने लगा मैं और आकांक्षा एक दूसरे की गर्मी को झेल नहीं पाएंगे तो मैने उसे तेजी से चोदना शुरू कर दिया था। मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर आसानी से जा रहा था मैं उसे चोद रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था जिस तरीके से मैं उसे धक्के मार रहा था।

उससे वह बहुत ही ज्यादा खुशी हो रही थी। वह मुझे कहती मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मैने और आकांक्षा ने एक दूसरे के साथ में जमकर सेक्स के मजे लिए थे। मैं और आकांक्षा एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से संबंध बना रहे थे मेरा मान हम बाहर की सेक्स संबध बना रहे थे। मेरा माल बाहर आने के लिए तैयार हो चुका था। जैसे ही मैंने अपने वीर्य की पिचकारी आकांक्षा की चूतडो पर गिराया तो वह खुश हो गई और मुझे बोली मुझे आज मजा आ गया है। हम दोनो को बहुत ही ज्यादा मजा आया था जिस तरीके से मैंने उसकी चूत का मजा लिया था। आकांक्षा ने मेरा साथ अच्छे से दिया था आकांक्षा की चूत आज भी उतनी ही कमाल की है जितनी पहले थी। उसकी चूत मुझे बहुत ही ज्यादा टाइट महसूस होती है मैं ज्यादा देर तक उसकी चूत की गरमी का मजा नहीं ले पाता हूं इसलिए मेरा माल जल्दी ही आकांक्षा की चूत में गिर जाता है।